हमारे समाज में सच बोलना भी गुनाह है। Emotional Family Hindi story | Best Hindi story

Emotional Family Hindi story : मेरा नाम प्रीति है मैं एक न्यूज़ रिपोर्टर थी बचपन से ही मुझे न्यूज़ रिपोर्टर बनने का बहुत शौक था जब मैं टीवी में न्यूज़ रिपोर्टर्स को देखती तो बहुत खुश होती थी क्योंकि मीडिया में काम करने वाले लोगों को समाज की अच्छी जानकारी होती है बंगाल की जेल में 22 साल कैद की सजा पाने वाली औरत ने अपनी सजा के समय जब वह कैद थी तो उसने 12 साल बाद दो बच्चों को जन्म दिया बच्चों के पिता का पता लगाने के लिए जब उनके डीएनए टेस्ट करवाए गए

 

 तो सबके होश उड़ गए थे इन दोनों बच्चों का पिता कोई एक नहीं बल्कि दो लोग थे और ना ही ये दोनों बच्चे जुड़वा थे दोनों ही अलग शक्ल के और दोनों के डीएनए भी अलग-अलग थे जज साहब की आवाज अदालत के कमरे में गूंज रही थी वो नी तो गुप्ता से कह रहे थे कि आपने अपना जुर्म कबूल कर लिया है क्या आप इस बात को एक्सेप्ट करती हो कि यह मर्डर आपने ही किया है 

 

उसने धीरे से हमें सिर हिला दिया था जज साहब की आवाज दोबारा से गूंजी थी उन्होंने कहा कि आपको यह शब्द अपने मुंह से निकालने होंगे आपको अपना जुर्म अपने मुंह से कबूल करना होगा उसने एक नजर अदालत के कमरे में बैठे हुए लोगों पर डाली थी जिसमें बहुत से चेहरे जाने पहचाने थे जो इस समय उसे नफरत और दुश्मन की नजरों से देख रहे थे वहां पर कुछ ऐसे भी लोग थे 

 

जो उसे मासूम समझ रहे थे उस पर तरस खा रहे थे मगर कोई भी उसके दिल का हाल नहीं जानता था वहां पर बैठा हुआ कोई भी इंसान ऐसा नहीं था जो उसकी तरफदारी में बोल सक सके फिर उसने धीरे से अपनी नजर जज साहब पर डाली और धीरे से कहा कि जी हां मैंने अपना जुर्म कबूल कर लिया है यह मर्डर मैंने ही किया है सामने बैठे हुए वकील के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई थी जैसे वह कोई बहुत बड़ी जंग जीत गया हो वह जंग ही तो जीत गया था उसने नीत गुप्ता को आरोपी साबित कर दिया था

 

 वह अपना केस जीत गया था बहुत आसानी से य केस निपट गया नीतू गुप्ता के सामने माइक लगा हुआ था जिसकी वजह से उसकी य धीमी आवाज भी अदालत में सब तरफ गूंज रही थी और वहां पर बैठे हुए लोगों ने साफ सुना था कि नीतू गुप्ता ने खुद अपने मुंह से अपना जुर्म कबूल कर लिया है और वहां पर बैठे हुए बहुत से लोगों ने अपने कानों को हाथ लगा लिया था हर कोई उस औरत की हिम्मत पर हैरान हो रहा था

 

 क्योंकि ना सिर्फ वो मर्डर करके यहां तक पहुंची थी बल्कि बड़े आराम से अपने जुर्म को उसने भरी अदालत के सामने एक्सेप्ट भी कर लिया था जज साहब ने कुछ देर अपना कलम कागज पर चलाया और फिर अपना फैसला सुना दिया यह अदालत नीतू गुप्ता को आरोपी साबित करने पर 22 साल की कैद ब मुशक्कल सजा सुनाती है ए आसू नीतू गुप्ता के चेहरे पर टपका था और उसके चेहरे में ही जमकर रह गया था कुछ पुलिस कांस्टेबल उसे खींचकर वहां से अपने साथ ले गई थी

 

 और उसके मुंह पर काले रंग का कपड़ा डाल दिया गया था बाहर ढेरों मीडिया रिपोर्टर्स मौजूद थे बहुत सारी पब्लिक भी थी क्योंकि ये केस बंगाल का सबसे बड़ा और फेमस केस था क्योंकि वह जिस इंसान की पत्नी थी वह इंसान कोई मामूली इंसान नहीं था वह एक बहुत बड़ा पॉलिटिकल नेता था और हजारों लोग उसके आगे पीछे घूमते थे पूरा शहर उसको अच्छी तरह से जानता था वह काफी अमीर था मगर जब उसकी ही पत्नी ने उसका कत्ल कर दिया यह बात जब पब्लिक के सामने आई तो पब्लिक के होश उड़ गए थे 

 

यह केस मीडिया वालों के लिए बहुत खास था पुलिस वालों ने नीतू गुप्ता को कहीं पर भी रुकने नहीं दिया था बल्कि सीधा कैदियों वाली गाड़ी में बिठा दिया था उसके मुंह से कपड़ा हटाया गया तो उसने एक गहरी सांस ली थी 20 साल की उम्र में वह 22 साल कैद की सजा पाकर जेल की सलाखों के पीछे जाने वाली थी उसके चेहरे पर ना तो कोई पछतावा था और ना ही कोई उम्मीद इतने कड़े समय में उसकी आंखों में आंसू भी नहीं दिख रहे थे ना ही भागने का कोई इरादा था और ना ही जिंदगी की कोई जुस्तजू ऐसा इसलिए था 

 

क्योंकि उसके लिए तो सब कुछ खत्म हो चुका था अब बस उसे वह सांसें गिनने थी जो भगवान ने उसके लिए लिख दी थी अपनी जिंदगी को गुजारने के लिए जैसे ही वह जेल के द दरवाजे पर पहुंची तो एक रिपोर्टर उसकी तरफ तेजी से बढ़ी थी और उसे रोक लिया था वह रिपोर्टर कोई और नहीं बल्कि मैं थी मैं काफी देर से नीत गुप्ता के बाहर आने का इंतजार कर रही थी मैंने फौरन ही माइक उसकी तरफ बढ़ाया और उससे बात करनी चाही थी लेकिन पुलिस वालों को सख्त मना किया गया था कि नीतू गुप्ता का कोई भी इंटरव्यू मीडिया पर नहीं आना चाहिए 

 

हर कोई जानना चाहता था लेकिन यह मैटर खत्म हो गया और नीतू गुप्ता ज्यादा दिन सुर्खियों में ना रह सकी क्योंकि उसने जल्दी ही अपने आरोप को एक्सेप्ट कर लिया था अगर वह कुछ दिन झूठ बोलती या उसके खिलाफ कुछ और चश्मदीद गवाह खड़े होते तो यह केस कुछ दिन बढ़ सकता था पब्लिक को नई-नई न्यूज़ उसके थ्रू मिल सकती थी मगर यह केस बहुत ही जल्द खत्म हो गया तो पब्लिक भी शांत बैठ गई थी 

 

वैसे तो पब्लिक यह भी चाहती थी कि नीतू गुप्ता का नाम ज्यादा नहीं उछलना चाहिए और यह केस जल्दी ही खत्म हो जाए इसलिए नीतू गुप्ता का इंटरव्यू नहीं लेने दिया गया था लेकिन मैं थी कि नीतू ता के पीछे चलते-चलते सिर्फ एक ही सवाल कर रही थी कि क्या आपने किसी दबाव में आकर अपना जुर्म कबूल किया है या फिर आपको किसी ने मजबूर किया है नीत गुप्ता की आंखों से मेरे सवालों पर लगातार आंसू बह रहे थे 

 

लेकिन मैं थी कि इस केस की तह तक जाना चाहती थी नीत गुप्ता ने मुझे कोई भी जवाब नहीं दिया था और फिर पुलिस वाले मुझसे झगड़ने लगे थे यहां तक कि नीत गुप्ता मेरी नजरों से दूर हो गई थी मैं नीत गुप्ता के बारे में सब कुछ जानना चाहती थी मगर कुछ नहीं जान सकी और अपना माइक पकड़कर अपनी जगह पर खड़ी रह गई थी ना जाने क्यों मुझे इस केस में बहुत ही इंटरेस्ट आ रहा था मैं सब कुछ भी करके नीतू गुप्ता के असली बयान लेना चाहती थी 

 

ना जाने क्यों मेरा मन ही नहीं मान रहा था कि वह आरोपी है क्योंकि उसकी नजरों में कहानी थी जो मुझे साफ नजर आ रही थी मगर दुनिया वालों से अनजान थी जो कहानी में जानना चाहती थी वह मुझे जानने का मौका ही नहीं मिल रहा था मैं एक बहुत छोटे सी चैनल की मामूली सी एक रिपोर्टर थी लेकिन इसके जिसकी वजह से मैं अपना नाम आगे बड़ा करना चाहती थी अपने आप को फेमस करना चाहती थी 

 

मगर मुझे मौका ही नहीं मिल सका था इसीलिए थक हार कर मैं वापस अपनी गाड़ी तक पहुंची थी जहां पर कैमरामैन भी नाकाम सा खड़ा हुआ था क्योंकि आज हम लोगों का कोई भी फायदा नहीं हुआ कहने लगा मैडम ये सारी कोशिशें आपके लिए बेकार हैं क्योंकि अब फैसला हो चुका है और नीतू गुप्ता को सजा भी दे दी गई है इस केस में कुछ भी करने से आपको कोई फायदा नहीं होगा ना ही आपकी तरक्की होगी और ना ही हमारा चैनल उपर जाएगा हमें किसी और जगह नौकरी के लिए अप्लाई करना चाहिए 

 

यह सुनकर मैंने एक हल्की सी मुस्कुराहट कैमरामैन को दी थी फिर वह कहने लगा कि हमारा चैनल भी ऊपर जाएगा और हम तरक्की भी जरूर करेंगे बस कोई अच्छी सी स्टोरी हाथ आ जाए वैसे नीतू गुप्ता की स्टोरी में तो दम बहुत था लेकिन ना तो कोई उससे हमें बात करने दे रहा था और ना ही वह हमें खुद भी कुछ बताने के लिए तैयार थी बड़ी ही अजीब लड़की है खुद अपने मुंह से अपना जुर्म कबूल करके बैठ गई अगर यह खुद अपना जुर्म कबूल ना करती तो अभी यह केस सालों तक चलना था 

 

और फिर हमें भी कोई ना कोई मौका मिल ही जाता और हमारे भी मजे हो जाते उसकी बातें सुनकर मैं मुंह बनाती हुई गाड़ी में बैठ गई थी क्योंकि मेरी भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं मैं वापस अपने ऑफिस जाने के लिए गाड़ी चलाने लगी थी लेकिन ऑफिस पहुंचते ही बॉस ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और बहुत ज्यादा मेरी बेइज्जती की थी दरअसल बॉस ने हमें किसी और न्यूज़ को कवर करने के लिए भेजा था 

 

लेकिन मेरा सारा ध्यान तो नीत गुप्ता की तरफ था मेरा मन नहीं मान रहा था नीत गुप्ता को सजा आखिर कैसे हो सकती है मुझे लगता था कि इस केस में कोई ना कोई ऐसी बात जरूर है जिसका दुनिया के सामने आने पर धूम मच सकती है और मैं यह धूम अपने चैनल के जरिए मचाना चाहती थी लेकिन बॉस ने मेरी एक भी नहीं सुनी मैंने कितनी ही उनसे रिक्वेस्ट की मगर उन्होंने मेरी एक ना सुनी और मुझे सख्त शब्दों में साफ-साफ कह दिया था कि अगर आइंदा तुमने मेरा कहना नहीं माना तो तुम्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा 

 

अपने बॉस पर मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था जैसा मैं चाहती थी ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा था अपने बॉस से इतनी इंसल्ट करवाने के बाद मैं थक हार कर अपने केबिन में आकर बैठ गई थी मेरे सामने नीतू गुप्ता के केस की डिटेल्स रखी हुई थी क्योंकि किसी वकील की तरह मैंने नीतू गुप्ता की छोटी से छोटी बात भी संभालकर नोट्स के तौर पर अपने पास लिखी हुई थी मुझे इस केस में ना जाने क्यों इतनी ज्यादा दिलचस्पी थी यह तो मैं खुद भी नहीं जानती थी ना जाने क्यों नीतू गुप्ता मु मुझे कुछ अजीब सी लग रही थी 

 

उसने जो कुछ भी कहा था वह सच नहीं था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी कहानी के पीछे एक बहुत बड़ी गहराई और सच्चाई छुपी हुई है मेरा उसके अलावा किसी और तरफ ध्यान ही नहीं जा रहा था मैंने दोबारा से वह डिटेल्स उठाई और उन्हें फिर से देखना शुरू किया नीतू गुप्ता एक 20 साल की जवान लड़की थी जिस पर मर्डर का केस चल रहा था उसके खिलाफ कोई खास सबूत नहीं था और ना ही कोई गवाह था उसकी तरफ से कोई वकील भी खड़ा नहीं कि किया गया था वह मौके पर पकड़ी गई थी

 

 इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया था और फिर उसने अपने मुंह से अपना जुर्म कबूल कर लिया बस उसने अपने मुंह से सब कुछ एक्सेप्ट करने के बाद इस केस को बहुत ज्यादा आसान बना दिया था बस यही बात तो मुझे बहुत ज्यादा खटक रही थी कि कोई भी औरत अपने मुंह से इतनी आसानी से अपना जुर्म कैसे कबूल कर सकती है वह थोड़ा तो पुलिस को भी परेशान करना चाहेगी अपनी तरफ से थोड़ा तो कुछ बोलेगी मगर नीतू गुप्ता ने तो अपने खिलाफ ही सब कुछ बोला था 

 

कोई भी लड़की अपना जुर्म इतनी आसानी से कैसे एक्सेप्ट कर सकती है खासकर उस समय जब उसकी उम्र सिर्फ और सिर्फ 20 साल हो उसके लिए तो अभी जिंदगी गुजारने के लिए पहाड़ जैसी जिंदगी पड़ी हुई है और वह 20 साल की उम्र में ही जेल चली जाए मेरा इरादा इस केस के अलावा किसी और केस पर काम करने का बिल्कुल भी नहीं था मैं बार-बार इसी केस के बारे में सोच रही थी इसलिए जैसे ही मेरी ऑफिस से छुट्टी हुई तो मैं नीत गुप्ता के एड्रेस पर पहुंच गई थी मैंने अपना आईडी कार्ड अपने गले में डाल लिया था

 

 नीत गुप्ता के घर के दरवाजे के बाहर खड़े होकर मैंने दरवाजा बजाया कुछ ही देर बाद दरवाजा खुला तो एक सख्त चेहरे वाली औरत दरवाजा खोलने के लिए आई थी और घूर कर मुझे देखने लगी जैसे ही उस औरत की नजर मेरे आईडी कार्ड पर पड़ी तो उसने मेरे सामने हाथ जोड़ लिया और कहने लगी कि नीतू को सजा हो चुकी है वह जेल चली गई है आप लोग भगवान के लिए हमारा पीछा छोड़ दो हमारी जिंदगी को ज्यादा मुश्किल मत करो इससे पहले कि वह औरत दरवाजा बंद करती

 

 मैंने जल्दी से दरवाजे पर अपना हाथ रख दिया और मैंने उस औरत से कहा कि मुझे लगता है कि नीतू बेकसूर है उसका कोई जुर्म नहीं है मैं उसके केस के सिलसिले में आपसे कुछ बात करना चाहती हूं आपकी बड़ी मेहरबानी होगी अगर आप मुझे नीतू गुप्ता के बारे में कुछ इंफॉर्मेशन दे दे तो आपकी भी फोटो चैनल पर आएगी आप भी फेमस हो सकती हैं वो औरत जिसमें मुझे कोई भी इंटरेस्ट नहीं था वोह एकदम से चौक गई और कहने लगी कि सच बताओ मैं टीवी में आऊंगी मैंने हां में सर हिलाया तो उसने दरवाजा खोल दिया

 

 और मुझे अंदर जाने दिया और फिर जल्दी-जल्दी वह खुद तैयार होने लगी जैसे किसी प्राइम टाइम के शो की एंकर हो मैंने अपने मोबाइल का कैमरा ऑन किया और रिकॉर्डिंग शुरू कर दी और सवाल-जवाब का सिलसिला भी क्योंकि नीतू गुप्ता के बारे में हर छोटी से छोटी बात मैं जानना चाहती थी और जिस औरत के दरवाजे पर मैं आई थी वह नीतू गुप्ता की भाभी थी यह नीतू का मायका था जहां उसके भाई और भाभी के अलावा कोई भी नहीं रहता था उसकी भाभी सज धज कर मेरे सामने आकर बैठ गई

 

 और हाथ चला चला कर नीतू की बुराइयां करने लगी नीतू की भाभी कहने लगी कि नीतू तो शुरू से ही एक अवारा और बिगड़ी हुई लड़की रही है उसके माता-पिता तो बचपन में ही इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे और उसके भाई को नौकरी से ही फुर्सत नहीं थी जैसे ही उसका भाई घर से निकलता नीतू आवारा गर्दी शुरू कर देती थी उस पर नजर रखने की खातिर उसके भाई ने जल्दबाजी में मुझसे शादी कर ली थी लेकिन नीतू किसी की कहां सुनती थी उस पर तो किसी का बस ही नहीं चलता था 

 

मैं उसे जितना घर में में बिठाना चाहती उसके कदम उतना ही दरवाजे के बाहर पड़ते थे और उसकी आवारा गर्दी के नतीजे में ही उसे मोहब्बत हो गई थी और जिस इंसान से उसे मोहब्बत हुई थी उसके साथ ही उसने हमारी मर्जी के बिना शादी कर ली थी नीतू के कैरेक्टर के बारे में तो यह मोहल्ला भी अच्छी तरह से जानता है कि कैसे वह बार-बार बहाने बहाने से घर से बाहर निकलती थी 

 

अब अगर औरत पहले से ही इतनी आवारा होती है तो शादीशुदा जिंदगी में कहां उसकी निप सकेगी उसका पति ऐसी बातों को कहां बर्दाश्त करता शायद इसी वजह से उन दोनों के बीच कोई बात हुई थी और फिर वह हो गया इसके बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा अपने कानों को हाथ लगाती हुई नीतू की भाभी कहने लगी कि मेरी नंतु बहुत हिम्मत वाली औरत निकली हर कोई उसे मासूम समझता था लेकिन देखो कैसे अपने ही पति का उसने कत्ल कर दिया और अदालत में उसने खुद अपने मुंह से अपना गुनाह एक्सेप्ट भी किया है 

 

तो अब इससे ज्यादा हम क्या कह सकते हैं नीतू की भाभी ने हाथ झाड़ करर इंटरव्यू पूरा किया था और मैंने कैमरे को बंद कर दिया था यह सारी बातें तो मुझे पहले से ही पता थी नीतू की भाभी ने मुझे कोई भी नई बात नहीं बताई थी फिर नीतू की भाभी मुझसे पूछने लगी कि मुझे शो का टाइम तो बताती जाओ ताकि मैं मोहल्ले वालों को बता सकूं कि मैं टीवी पर आने वाली हूं मैंने नीतू की भाभी से कहा कि मैं आपको कॉल करके बता दूंगी और फिर मैं वहां से निकल आई अपना मोबाइल मैंने कार की सीट पर पटका था 

 

और गुस्से में ड्राइविंग करनी शुरू कर दी मैं जितना इस मामले को जानने की कोशिश कर रही थी इतना ही घूम फिर करर वापस उसी मकाम पर आ जाती थी जहां से मैंने इस केस की शुरुआत की थी यह सब वही बातें थी जो पिछले दो महीने में मैंने कई लोगों के मुंह से सुन ली थी जो मैं सुनना चाहती थी वह कोई भी मुझे बताना ही नहीं चाहता था अगले दिन मैं ऑफिस गई तो मुझे पता चला कि मेरी नौकरी खत्म हो गई है यह खबर सुनकर तो मुझे एक जोरदार झटका लगा था

 

 मेरी जिंदगी में एक से एक मुझे बुरी खबर मिल रही थी दरअसल जिस न्यूज़ को कवर करने के लिए मुझे भेजा गया था दूस दूसरे चैनल ने उसी न्यूज़ को बड़े अच्छे तरीके से ब्रेक किया था और उस चैनल को रेटिंग भी बहुत अच्छी मिली थी यही वजह थी कि बॉस ने गुस्से में मुझे नौकरी से निकाल दिया था वैसे भी मुझे इस नौकरी में कोई इंटरेस्ट नहीं था और ना ही कुछ ऐसा था जो मुझे इंटरेस्टिंग करने को मिल रहा था

 

 इसलिए मैंने भी वहां से नौकरी छोड़ दी थी और दूसरा चैनल जवाइन कर लिया था दूसरे चैनल वालों ने मुझे बाहर की कंट्री में भेज दिया था और मैं वहां जाकर काम करने लगी थी वैसे भी मेरा इस दुनिया में मेरी दो बहनों के अलावा कोई भी नहीं था दोनों बहनें शादीशुदा थी और अपनी जिंदगी में बहुत खुश थी मैं अकेली ही थी इसलिए अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जीती थी मैंने दूसरी कंट्री जाने के बाद वहां पर अपना काम शुरू कर दिया था 

 

और फिर धीरे-धीरे मेरे दिमाग से नीतू गुप्ता पूरी तरह से गायब हो गई थी लेकिन किस्मत इंसान को घुमा फिराक फिर उसी जगह पर ले आती है जहां से वह चलना शुरू करता है पूरे 10 साल गुजारने के बाद मैं वापस अपनी कंट्री लौट आई थी क्योंकि अब मेरा ट्रांसफर इंडिया में हो गया था यहां ते ही मुझे एक स्पेशल केस के लिए जेल भेजा गया था ताकि मैं रिपोर्ट कर सकूं मैं अपनी टीम के साथ जेल पहुंची थी 

 

और अपना काम पूरा करने के बाद मैंने जेलर से कहा था कि मुझे कैदी औरतों से बातचीत करनी है आप मुझे उनसे मिलवा दो मैं हमेशा अपने काम से फ्री होने के बाद भी कुछ इंफॉर्मेशन जमा कर लिया करती थी यही वजह थी कि इन 10 सालों में मैं ना सिर्फ बहुत कामयाब हो चुकी थी बल्कि अब अपने एक प्राइम टाइम शो कर रही थी और हर कोई मेरे काम से बहुत ज्यादा इंप्रेस था मेरे कहने पर जेलर मुझे लेकर जेल में घूमने लगा मैं रुक-रुक कर हर औरत से थोड़ी थोड़ी बातचीत कर रही थी

 

 फिर मेरी नजर अचानक एक ऐसी औरत पर पड़ी थी जो एक कोने में बिल्कुल खामोश सी बैठी हुई थी उसे देखकर मुझे याद आया था कि वह कौन है क्योंकि 10 साल बाद भी इस औरत को मैं भूल नहीं पाई थी उसके बिखरे बिखरे बाल कंधों तक आ रहे थे चेहरे पर जमाने भर की थकन थी बेबसी की तस्वीर बनी हुई वह और औरत मुझे पूरी तरह से हिलाकर रह गई थी 

 

मैंने ऐसा कभी भी नहीं सोचा था कि पूरे 10 साल बाद भी यह औरत दोबारा मुझे मिल सकती है व नीतू गुप्ता थी जो एक कोने में गुमसुम स बैठी हुई थी उसकी कंडीशन बहुत ज्यादा खराब थी मुझे उसे देखकर बहुत तरस आ रहा था मैंने जेलर से फौरन ही पूछा कि यह नीतू गुप्ता ही है ना जो पॉलिटिकल नेता राजीव गुप्ता के कत्ल के इल्जाम में यहां आई थी जेलर कहने लगा हां यह वही है अब तो यह दो बच्चों की मां भी है 9 साल पहले इस जेल में ही इसने दो बच्चों को जन्म दिया था अगर आज भी इससे कोई पूछता है

 

 तो यह बड़ी सच्चाई से कहती है कि इसने ही अपने पति को मारा था मैंने जेलर साहब से कुछ समय मांगा था ताकि मैं अकेले में नीतू से कुछ बातचीत कर सकूं आज पूरे 10 साल बाद मेरे पास नीतू से बात करने का एक अच्छा मौका था जेलर उसके सेल का ताला खोलकर वहां से चला गया था और मैं नीतू के सेल में जाकर उसके सामने बैठ गई नीतू ने एक भरपूर नजर मेरी तरफ देखा था और फिर कुछ ही देर के बाद उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक उभर आई थी 

 

आज इतने सालों बाद भी नीतू मुझे पहचान गई थी कि मैं वही रिपोर्टर हूं जिसने 10 साल पहले उसे सवाल जवाब किए थे जो हर हाल में उसे बेगुनाह साबित करने के लिए तैयार थी शायद बहुत सालों बाद नीतू के चेहरे पर एक धीमी सी मुस्कुराहट आई थी नीतू मुझसे कहने लगी आप फिर आ गई हो मुझे उम्मीद भी नहीं थी कि नीतू को हम दोनों के बीच की वह छोटी सी मुलाकात भी याद होगी इसलिए मुझे खुशी हुई फिर मैं उससे कहने लगी उस दिन तो आपने मेरे सवालों का जवाब नहीं दिया था 

 

आज 10 साल गुजर चुके हैं एक बहुत लंबी कैद की सजा जो आपने काट ली है अब तो कम से कम आप मुझे अपनी कहानी का वह सच बता दो जो मैं जानना चाहती हूं नीतू मुस्कुरा करर मुझे देखने लगी और कहने लगी आपने गलत अंदाजा लगाया ना ही मुझे किसी ने मजबूर किया था और ना ही किसी ने मुझ पर दबाव डाला था मैंने अदालत में वही सब कुछ कहा था जो सच है मैंने खुद अपने हाथों से अपने पति का मर्डर किया है और आज मैं उसी की सजा काट रही हूं 

 

तब मैंने हैरान होते हुए नीतू गुप्ता से सवाल किया कि मैंने तो सुना है आपके पास दो बच्चे हैं लेकिन जेल आने से पहले तो आपके पास कोई भी बच्चा नहीं था फिर यह बच्चे कैसे हुए यह सुनकर नीतू ने अपना सर झुका लिया था और कहने लगी कि यह सवाल आप मुझसे ना ही करो तो अच्छा होगा वैसे भी बच्चों के जन्म के बाद उन्हें यहां मेरे साथ नहीं छोड़ा गया बल्कि वह चाइल्ड प्रोटेक्शन ब्यूरो के पास है जब जेल से रिहा हो जाऊंगी तब उन्हें हवाले कर दिया जाएगा तब तक ना जाने वह मुझसे कितनी नफरत करने लगेंगे 

 

शायद वह बच्चे मेरी शक्ल भी देखना पसंद ना करें नीतू की आंखों में नमी उतर आई थी और यही बात मुझे बहुत ज्यादा परेशान कर रही थी कि एक औरत जो खाली दामन इस जेल में आई थी वह दो बच्चों की मां कैसे बन गई थी मैं कहने लगी कि मैं आपसे आपकी कहानी जानना चाहती हूं लेकिन नीतू ने यह कहकर मुझे इंकार कर दिया था कि किसी दूसरे इंसान में सिर्फ उसी समय तक इंटरेस्ट होता है

 

 जब तक वह पूरी तरह उसकी खोज ना कर ले उसके बारे में हर इंफॉर्मेशन इकट्ठी ना कर ले आप भी जब मेरे बारे में सब कुछ जान जाओगी तो आपका इंटरेस्ट भी खत्म हो जाएगा फिर आप पलट कर कभी मेरी तरफ नहीं देखोगी जबकि मैं चाहती हूं कि आपका और मेरा यह अनजाना सा रिश्ता कायम रहे इसलिए मेरी कहानी को राज ही रहने दो मेरे बहुत पूछने पर भी नीतू मेरे हर सवाल पर खामोश रही थी और फिर मैं निराश होकर वापस आ गई थी लेकिन अब मैं इस बात को राज नहीं छोड़ सकती थी

 

 मुझे जानना था कि आखिर इस औरत के साथ हुआ क्या क्या था क्योंकि इस औरत की आंखों में जो मासूमियत थी वह मुझे बार-बार झंझोट कर रख दिया करती थी मैंने जेलर से कहा कि मुझे नीतू के केस की फाइल चाहिए तो जेलर ने साफ इंकार कर दिया लेकिन फिर मेरे कुछ ताल्लुकात काम आए और मुझे जैसे-तैसे नीतू की फाइल मिल गई थी आखिरकार 10 साल तक मैंने मेहनत की थी 

 

और अपना कैरियर बना लिया था इसके बाद मैंने कई बार नीतू से मुलाकात की और उसे यकीन दिलाया कि अगर वह अपने हिस्से का सच मुझे बता देगी तो मैं उसे यहां से आजादी जरूर दिलवा आंगी लेकिन उसे मेरी बात पर यकीन नहीं आ रहा था मेरे कई बार ऐसा ही कहने पर नीतू मुझ पर हैरान होती थी कि सारी दुनिया उसे गुनाहगार समझती है उसने खुद अपना जुर्म कबूल कर लिया है तो फिर मुझे कैसे यकीन है कि मैं बेकसूर हूं

 

 और फिर पूरे तीन महीने बाद मेरी जिंदगी में वह दिन भी आ गया था जब मुझे यह सच्चाई पता चल गई थी क्योंकि उस दिन नीतू को मैंने उसकी कहानी सुनाने के लिए राजी कर लिया था नीत की फाइल्स में लिखा हुआ था कि जेल में लाते ही उसके सारे रेस्ट किए गए थे और जिसमें पता चला था कि वह प्रेग्नेंट है और फिर पूरे 9 महीने के बाद उसने दो बेटों को जन्म दिया था व दोनों बच्चे चाइल्ड प्रोटेक्शन ब्यूरो के पास हैं 

 

और जब तक नीतू की सजा खत्म नहीं हो जाती तब तक वह वहीं पर ही रहेगी अब इस बात का खुलासा तो नीत ही कर सकती थी कि इस बात में कितना सच ता और कितना झूठ क्योंकि जेल की अंधेरी दुनिया में वह सब कुछ भी मुमकिन था जिसके बारे में सोचना भी मुमकिन नहीं था और वहां इस अंधेरी दुनिया के लगभग हर रा को मैं ही जानती थी जिस केस की वजह से मैं अपना करियर बनाना चाहती थी

 

 इस केस के बारे में मुझे उस समय पता चलना था जब मैं अपने करियर की ऊंचाई पर पहुंच गई थी यह 10 साल मैंने बहुत मेहनत से गुजारे थे लेकिन इन 10 सालों में नीतू पर क्या बीती थी यह तो वही बता सकती थी मेरा क्या था मैं तो दूसरी कंट्री में अपना करियर बना रही थी मगर उस बेचारी पर ना जाने कितने जुल्म हुए थे मुझे नीतू से बहुत हमदर्दी थी और मैं उससे यह हमदर्दी जताना चाहती थी मगर उसने मुझे अपना सच बताने में बहुत समय लगा दिया था हम दोनों आमने-सामने बैठे हुए थे

 

 मैंने जेलर से कुछ घंटों का लंबा समय मांग लिया था ताकि फुर्सत से हम दोनों एक दूसरे से सवाल जवाब कर सकें नीतू अपनी कहानी बताने से पहले कुछ घबरा रही थी मैंने उसे तसल्ली दी कि उसे घबराने की या डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है जो भी सच है वह मुझे बता दे मैं उसका पूरा-पूरा साथ देने के लिए तैयार हूं मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो उसको बदनाम करूं या फिर उसको और ज्यादा किसी मुश्किल में फंसा दूं

 

 बदनाम तो वह पहले ही हो चुकी थी मगर मैं उसका सच दुनिया के सामने लाना चाहती थी मैं जानती थी कि वह बेगुनाह है मैं उसे आजाद करवाना चाहती थी मेरी बातों पर उसे यकीन आ गया था फिर नीत गुप्ता ने मुझे अपनी कहानी सुनानी शुरू की मेरा नाम नीतू गुप्ता है मैं एक गरीब फैमिली से बिलोंग करती थी मैंने अपनी आंख आम नॉर्मल से परिवारों की तरह एक नॉर्मल परिवार में खोली थी आम लोगों के घरों की तरह हमारे घर में भी बेटों को ज्यादा अहमियत दी जाती थी थी 

 

और बेटियों को बोझ समझा जाता था मतलब कि मेरा भाई हमारे माता-पिता की आंखों का तारा था उसकी छोटी-छोटी ख्वाहिशें होती या बड़ी उसे अपनी ख्वाहिशों को मारना नहीं पड़ता था क्योंकि उसकी ख्वाहिश पूरी करने के लिए मेरे पिताजी किसी भी हद तक चले जाते थे और उसकी ख्वाहिशें पूरी करके ही रहते थे हालांकि मैं एक बेटी थी इसलिए हर बार मैंने ही कुर्बानी दी थी

 

 और इस बात पर मुझे कभी कोई ऐतराज भी नहीं हुआ था क्योंकि मुझे भी अपने भाई से बहुत मोहब्बत थी धीरे-धीरे समय गुजरता चला गया और हम बड़े होते चले गए मेरे बड़े भाई अपने दोस्तों के साथ आवारा गर्दी करते रहते थे और मैं घर ग्रहस्ती में लगी रहती थी मैं अपनी मां के जिगर का टुकड़ा बन गई थी हमारी जिंदगी में वह समय आ गया जो भगवान किसी को भी नहीं दिखाए 

 

मेरी मां एक रात खामोशी से हमें इस दुनिया से छोड़कर चली गई उनको आधी रात के समय हार्ट अटैक आया और उनकी अचानक मौत हो गई थी जिसके बारे में हमें पता नहीं चल सका मां का ना होना क्या होता है उस दिन मुझे समझ आया था मेरे घर में सिर्फ दो ही मेंबर रह गए थे मेरे पिताजी और मेरे भाई और उन दोनों के साथ में खुद को बहुत अकेला महसूस करती थी क्योंकि घर में कोई औरत नहीं थी

 

 जिसके साथ में अपना सुख दुख बांट सकती और अपनी परेशानी को शेयर कर सकती अगर घर में कोई भी परेशानी होती तो मैं भाग भाग कर पड़ोस में जाती थी मैं उन लोगों से पूछती थी कि मैं अब क्या करूं और कैसे करूं और फिर उन्हीं दिनों पड़ोस वाला लड़का मेरे साथ कुछ अजीबोगरीब हरकतें करने ने लग गया था उस समय मैं सिर्फ 12 साल की लड़की थी जिसके लिए बहुत सारी चीज एक बंद ताले की तरह थी मतलब बहुत सी चीजों के बारे में तो मुझे पता भी नहीं था 

 

उस समय मेरे खेलने कूदने की उम्र थी और मैंने छोटी ही उम्र में घर गृहस्ती को अच्छी तरह से संभाल लिया था इसीलिए घर के कामों में तो मैं परफेक्ट थी लेकिन वह लड़का जो मेरे साथ हरकतें किया करता था बहाने बहाने से मुझसे बातें करता मुझे छूने की कोशिश करता मेरे करीब आता मुझे बुरी तरह से टच करता तो मैं घरा जाती थी मेरे पसीने छूटने लगते थे लेकिन मैं समझ नहीं पाई कि वह यह सब कुछ जानबूझकर करता है

 

 या फिर इस तरह ही बात करते-करते उसका हाथ लग जाता है लेकिन एक दिन जब वह इसी तरह मुझे छूने की कोशिश करने लगा तो उसकी मां ने हम दोनों को देख लिया था उसकी मां ने अपने बेटे को तो कुछ भी नहीं कहा उनको चाहिए था कि उन्हें अपने बेटे को समझाना था उन्होंने तो उल्टा मुझे ही बुरा भला कहना शुरू कर दिया था और अपने घर से धक्के मारकर निकाल दिया था 

 

उन्होंने मुझ पर इल्जाम लगाया था कि मैं उनके बेटे पर डोरे डाल रही हूं मगर मेरी उम्र कम थी मैं इन बातों को जानती भी नहीं थी मुझे सारे मोहल्ले में बदनाम कर दिया गया था मेरे कैरेक्टर पर इल्जाम लगाया गया यह कहा गया कि मैं उनके बेटे को बहका चाहती थी मोहल्ले वालों ने जो सुना उन्होंने भी उसी पर ही यकीन कर लिया यहां तक कि मेरे भैया ने भी लोगों की बातों पर यकीन कर लिया था उस दिन भैया ने मेरे साथ बहुत मारपीट की थी मेरा तो कोई कसूर भी नहीं था लेकिन फिर भी मैं अपने भैया से पिटक सारी रात रोती रही थी 

 

फिर मैंने पड़ोस में जाना छोड़ दिया था जो समझ आता इसी तरह से खाना भी बनाती रही घर के काम भी करती रही और फिर अपने कमरे में बंद हो जाती थी मैंने तो भैया का सामना करना ही छोड़ दिया था लेकिन फिर एक समय आया कि पिताजी भी हमें छोड़कर चले गए थे हम दोनों भाई बहन अब अकेले रह गए फिर तो मैंने पूरी तरह ही अपने आप को घर में कैद कर लिया था सिर्फ जरूरत होती तभी मैं घर से निकलती थी तो उस में भी लोग मुझे आवारा और कैरेक्टर लेस कहते थे मैं घबरा जाती थी 

 

और वापस दौड़कर अपने घर में आ जाती थी भैया के दोस्त ना जाने उनसे मेरे बारे में क्या कुछ कहते कि भैया ने मेरे ऊपर बहुत ज्यादा सख्ती करनी शुरू कर दी थी और फिर एक दिन तो उन्होंने अपनी मर्जी से शादी ही कर ली जबकि वह कुछ कमाते भी नहीं थे सारा दिन अपने दोस्तों के साथ आवारा गर्दी करते फिरते थे मेरे भैया कहने लगे कि तेरी भाभी तुझ पर नजर रखेगी तो तेरे पैरों में लगाम डल जाएगी और तू सु हर जाएगी क्या पता मेरे पीछे तू क्या-क्या करती है इसलिए मैं तेरी भाभी लेकर आया हूं

 

 जो तुझ पर अपनी नजर रखे मैं तो पहले भी बेवजह घर से नहीं निकलती थी भैया की शादी के बाद मैं भैया से बचकर अब भाभी के इशारों पर चलती थी मेरी भाभी तो बहुत ही बुरी औरत थी हमेशा मेरे साथ मारपीट किया करती थी और मुझसे घर के सारे काम करवाती थी इसके बावजूद भी मेरी झूठी सच्ची शिकायतें भैया से लगाया करती थी साथ ही उन्होंने मोहल्ले में भी मुझे और ज्यादा बदनाम करना शुरू कर दिया था

 

 हमेशा वह सबको यही बताती थी कि रात के अंधेरे में मुझसे मिलने के लिए मेरे बॉयफ्रेंड आते हैं धीरे-धीरे मेरी उम्र बढ़ती चली गई और मैं मोहल्ले में इसी तरह से बदनाम होती गई छोटी सी उम्र में ही मैं इज्जत बेइज्जती का फर्क समझ चुकी थी वह हर रोज मुझे भैया से पिटवा या करती थी कि मुझसे घर में मिलने के लिए रात के अंधेरे में मेरे आशिक आते हैं लेकिन यह सब झूठ था 

 

लेकिन मैं खुद को कभी सच्चा साबित नहीं कर सकी मुझे हमेशा से यही पता था कि जिस दिन मैं सच कहूंगी उस दिन मुझे मार पड़ेगी क्योंकि जब-जब मैंने भाभी के खिलाफ अपना सच रखना चाहा तब तब भैया ने मुझे डंडों से मारा था इसीलिए मैंने सच बोलना ही छोड़ दिया था जो झूठ मुझ पर बांधा जाता मैं उस पर खामोश हो जाती थी क्योंकि मेरी खामोशी पर मुझे कम सजा मिलनी थी 

 

जबकि मेरा सच मेरे लिए ही मुसीबत बन जाया करता था और फिर ऐसे ही मेरी जिंदगी में जब मैं 19 साल की थी तब राजीव गुप्ता आ गया वो मेरा कुछ भी नहीं लगता था और ना ही मैं उसे जानती थी बस एक दिन मैं भाभी के किसी काम से मेडिकल स्टोर पर गई थी और वह वहीं पर रास्ते से गुजर रहा था और उसकी गाड़ी मेडिकल स्टोर के सामने ही रुक गई थी तब उसने मुझे देखा था

 

 मैं 19 साल की जवान और खूबसूरत लड़की थी वह मुझ पर फिदा हुआ और उसने मेरे लिए रिश्ता भेज दिया उस समय उसका पॉलिटिकल करियर शुरू हुआ था वह बहुत ज्यादा फेमस तो नहीं था लेकिन पैसे वाला बहुत था और उसका पैसा देखते हुए भाभी के कहने पर भैया ने मेरी शादी उसके साथ कर दी सब समझते हैं कि मेरी उसके साथ लव मैरिज हुई थी लेकिन यह लव मैरिज नहीं थी 

 

मेरे साथ क्या हुआ था क्या नहीं यह तो बस मैं ही जानती थी क्योंकि शादी मेरी मर्जी से नहीं बल्कि मेरी भाभी की मर्जी से हुई थी राजीव गुप्ता मेरे बदले मेरी भाभी को मोटी रकम जो दे गया था मैंने अपनी नई जिंदगी यह सोचकर शुरू कर दी कि जो इंसान मुझे इतनी मोहब्बत के साथ विदा करवा कर ले जा रहा है वह मुझे अपने घर में जरूर इज्जत मान सम्मान प्यार सब कुछ देगा लेकिन यह मेरी गलतफहमी थी

 

 राजीव गुप्ता पॉलिटिकल नेता होने के साथ-साथ अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करता था और अपनी इमेज बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था और फिर मेरी जिंदगी में वह खतरनाक दिन आया जब मेरे पति ने अपने पॉलिटिकल रिलेशन कायम करने के लिए मुझे अपने जान पहचान के लोगों के आगे पेश कर दिया वह रात मेरी जिंदगी की सबसे खतरनाक रात थी जब मैं अपने पति की जगह किसी और दूसरे मर्दों की बांहों में थी 

 

और बहुत ज्यादा मजबूर थी क्योंकि मेरे पति ने मुझे धमकी दी थी कि अगर मैंने कुछ भी उल्टा सीधा किया तो वह मेरी जिंदगी बर्बाद कर देगा मेरे भैया भाभी को भी मार देगा मेरे लिए मेरे भैया भाभी सब कुछ थे मेरे माता-पिता के जाने के बाद मैंने उन्हें अपने पिता की जगह दी थी मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से उन्हें कुछ हो इसीलिए मैं खामोश रही थी और वह रात मेरी कांटों पर गुजरी थी 

 

लेकिन इस रात के बाद मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल कर रह गई थी मेरा पति राजीव गुप्ता ने दोबारा मुझे मुंह नहीं लगाया और मेरी जिंदगी इसी तरह से गुजरती रही थी थी मैं किसी और मर्द के साथ रात गुजारती रहती थी इसलिए मैं अब उसके किसी काम की नहीं रही थी लेकिन उसने कभी यह समझने की कोशिश ही नहीं की कि मुझे गैर मर्दों के हवाले भी तो वही करता था मैं अब अपने पति के काबिल नहीं रही थी 

 

मुझे इतने समय में मेरे पति से मोहब्बत हो गई थी मैं उससे हर समय उसका साथ मांगती थी उससे कहती थी कि तुमने खुद तो मुझे दूसरे मर्दों के आगे फेंका था फिर क्यों मुझसे मुंह फेरते हो लेकिन राजीव गुप्ता को अपनी मर्दानगी पर बहुत घमंड था वह कहता था कि मैं किसी और की इस्तेमाल की हुई औरत को देखना भी पसंद नहीं करता और फिर मैं अपनी जिंदगी में बिल्कुल अकेली हो गई 

 

हर समय कमरे में बंद रहती थी और मेरा पति मुझे अपनी जान पहचान वालों के सामने इस्तेमाल करने के लिए छोड़ देता था वह मुझे तैयार करवाकर मुझे लॉन्ग ड्राइव पर ले जाने के बहाने दूसरे आदमियों के हवाले रात गुजारने के लिए छोड़ देता और बस मैं इन सब तकलीफों को बर्दाश्त कर रही थी मेरी जिंदगी किसी तरह से गुजर रही थी और मैं अपनी जिंदगी से बहुत तंग आ गई थीले 

 

लेकिन फिर एक रात मेरे पति ने मेरे साथ दरिंदगी की हद पार कर दी थी उसने एक साथ एक नहीं बल्कि दो अपने दोस्तों के आगे मुझे पेश कर दिया था वो दोनों दोस्त उसे कुछ सीट्स दिलवाने वाले थे और सीटों के चक्कर में मेरे पति ने मेरी इज्जत को इस तरह से नीलाम कर दिया था कि मैं दंग रह गई थी वो दोनों शराब के नशे में धुत थे और सारी रात उन्होंने मेरी इज्जत को तारतार कर दिया मैं अपनी इज्जत तो लुटा ही चुकी थी 

 

मेरा बहुत बुरा हाल था मैं होश और हवास में नहीं थी सुबह का सूरज मेरे लिए बहुत दर्दनाक था रो-रोकर मेरा बुरा हाल हो चुका था और फिर जब मेरा पति मेरे कमरे में आया और उसने मेरी कंडीशन देखी तो अफसोस करते हुए कहने लगा कि अब तुम किसी काम की नहीं रही हो मैं तुम्हारा क्या करूं यह कहते हुए वह सोच में पड़ गया क्योंकि मेरा शरीर जख्मों से चूर हो चुका था और मैं दर्द से बुरी तरह से तड़प-तड़प कर रो रही थी

 

 अब मेरी कोई कीमत नहीं लगाने वाला था इसलिए अब वह मुझे किसी के आगे नहीं फेंक सकता था क्योंकि कुछ जख्म मेरे हहरे पर थे तो कुछ मेरे शरीर पर भी थे और जले हुए निशान भी मेरे शरीर पर थे इसलिए उसने मुझे डिवोर्स देने की बात कही कहने लगा कि मैं तुम्हें आजाद करता हूं मैं तुम्हें कुछ पैसे दे दूंगा तुम जाओ और किसी गांव में जाकर अपनी जिंदगी शुरू करो इस शहर में भी रहने की तुम्हें कोई जरूरत नहीं है वरना तुम्हारी वजह से मीडिया मेरा जीना मुश्किल कर देगी 

 

और तुमसे बातचीत करने की कोशिश करेगी उसे हर हाल में अपनी इज्जत बचानी थी और मैं उसकी बातें सुनकर दंग रह गई थी मुझे यकीन नहीं नहीं आ रहा था कि अपना मकसद पूरा करने के बाद वह मेरे साथ यह सब कुछ करेगा मैं बहुत ज्यादा गुस्से में आ गई थी और उससे झगड़ा करने लगी और मैंने उसे मारना पीटना शुरू कर दिया और बदले में उसने भी मुझे मारना शुरू किया मैंने तो उसे एक धक्का दिया था लेकिन वह मर्द था जब उसने मुझ पर हाथ उठाया तो मैं तड़प उठी और फिर मेरे सबर की हद पार हो गई 

 

तो मैंने सामने रखी हुई साइड टेबल पर रिवॉल्वर को उठाया मुझे पता भी नहीं था कि रिवॉल्वर कैसे चलती है या उसमें गोलियां है भी या नहीं मैंने तो बस गुस्से में रिवाल्वर ताना था तो वह मुझे देखकर हंसा और कहने लगा तुम जैसी कमजोर औरत मर्द का दिल तो बहला सकती है मगर रिवॉल्वर नहीं चला सकती मुझे उसकी इस बात पर गुस्सा आ गया और मैंने रिवॉल्वर का ट्रिगर दबा दिया

 

 वह गन लोड थी देखते ही देखते मेरा पति खून से भर गया और फिर मेरी आंखों के सामने उसकी मौत हो गई मैं मौका वारदात पर पकड़ी गई थी घर के नौकर ने गोली की आवाज सुनी थी और रिवॉल्वर पर भी मेरी उंगलियों के निशान थे मुझे बहुत आराम से गिरफ्तार कर लिया गया अगर मैं चाहती तो अपने जुर्म पर इंकार कर सकती थी इस केस को लंबा चला सकती थी लेकिन मेरे पास जीने की कोई वजह नहीं बची थी 

 

भैया मुझे अपनाने को तैयार नहीं थे भाभी तो वैसे भी मुझे कैरेक्टर लेस कहती थी और एक पॉलिटिकल नेता का कत्ल करने के बाद तो यह मीडिया मुझे जीने नहीं देता इसलिए मैंने जेल जाना ही ठीक समझा और अपना जुर्म चुपचाप कबूल कर लिया लेकिन जब जेल में आने के बाद मेरे टेस्ट हुए तब मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं और दो बच्चों की मां बनने वाली हूं मेरे पति को तो मुझे हाथ लगाए हुए महीनों गुजर गए थे 

 

इसलिए मुझे यकीन था कि यह बच्चे उन दोनों आदमियों में से किसी एक के हैं जिन्होंने मुझे आखिरी समय में बर्बाद किया था वह दोनों भी कोई छोटे-मोटे नेता ही थे इसलिए मैं उनसे कुछ नहीं कह सकी मेरे बच्चे पैदा हुए तो उन्हें मुझसे दूर कर दिया गया आज इस बात को 10 साल गुजर गए हैं और मैं अपनी जिंदगी से हार चुकी हूं शायद हम जैसी लड़कियों का भाग्य यही होता है जिनके सर पर माता-पिता का साया नहीं होता होता जो अपने भाई भाभी के एहसानों तले दबी हुई होती हैं 

 

जिन्हें जमाना गलत और लावारिस समझता है यह कहकर नीतू गुप्ता फूट-फूट कर रोने लगी उस औरत पर जुल्म के पहाड़ टूटे थे और सजा भी उसे ही सुनाई गई थी मैंने नीतू से कहा कि तुमने अदालत में ये सब कुछ क्यों नहीं बताया वह धीमे से मुस्कुराई और कहने लगी मैंने आपको बताया ना कि जब-जब मैं सच बोला तब तब मैंने सजा पाई जब-जब मैंने अपने भैया के सामने भाभी की सच्चाई रखी

 

 तब तब मेरे भैया ने मुझ पर पहले से ज्यादा अत्याचार किए इसलिए मैं अपने लिए मुसीबत पैदा नहीं करना चाहती थी मुझे सजा होती या नहीं होती लेकिन यह दुनिया मेरे लिए नरक जरूर बन जाती एक ऐसी औरत जो कई मर्दों के साथ समय गुजार चुकी हो यह दुनिया उसे जीने कहां देती है इसलिए मैंने सच्चाई अपने दिल में ही दबा ली मुझे नीतू पर बहुत ज्यादा रहम आ रहा था मैं उसकी सच्चाई को साबित करना चाहती थी

 

 इसलिए केस रिओपन करवाने से पहले मैंने उसके बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाया जिन आदमियों के नाम उसने बताए थे मैंने किसी ना किसी तरह उनके बाल हासिल किए और डीएनए टेस्ट करवाने शुरू किए तो मुझे पता चला कि नीतू के दोनों बच्चे किसी एक मर्द के नहीं बल्कि उन दोनों के ही हैं एक ही रात में उन दोनों ने उसकी इज्जत के साथ खिलवाड़ किया था उन दोनों से ही वह प्रेग्नेंट हुई थी

 

 दोनों बच्चे एक-एक अलग मर्द के थे और यह बात बहुत ही हैरान कर देने वाली थी साथ ही नीतू गुप्ता की सच्चाई का एक बड़ा सबूत भी था केस रिओपन हुआ तो मैंने हर सबूत खुद अदालत में पेश किया था और नीतू से कहा कि अब वह सबके सामने सच बोले मैंने उसे यकीन दिलाया था कि हमेशा सच बोलने पर सजा नहीं होती बल्कि कभी-कभी सच बोलना हमें किसी बड़ी मुसीबत से निकाल देता है

 

 लगभग 6 महीने नीतू का केस चला था मीडिया पर धूम मच गई थी मैंने पूरी तरह से सपोर्ट किया था और फिर वह दिन भी आ गया था जब नीतू को यह कहकर बाइज्जत बरी कर दिया गया था कि उसने अपने पति का मर्डर सेल्फ डिफेंस में किया था अपनी इज्ज़त को बचाने के लिए नीतू जेल की सलाखों से बाहर आई मैंने उसे अपने ही घर में जगह दी हुई है उसके बच्चे उसे वापस मिल गए उन दोनों आदमियों को भी मैंने सजा दिलवाई 

 

जिन्होंने नीतू की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया था लेकिन कब तक यह जमाना इस तरह औरतों पर अत्याचार करता रहेगा कब तक नीतू जैसी औरतें जुल्म की चक्की में पिसती रहेंगी और कब तक यह सियासत वाले लोग अपनी हवस पूरी करने के लिए मासूम औरतों का शिकार करते रहेंगे कोई क्यों इन ताकतवर लोगों को सजा नहीं देता कोई क्यों इनके खिलाफ आवाज नहीं उठाता हमारा कानून इतना कमजोर क्यों है

 

 ऐसे लोगों को सजा देते हुए क्यों डरता है यह सवाल मैं आप लोगों से पूछती हूं कि क्या हमेशा सच बोलने वालों को ही सजा मिलती है क्या हमारे समाज में सच बोलना इतना बड़ा गुनाह है कि नीतू ने कितने सालों तक यह सोचकर सच नहीं कहा कि उसे दुगनी सजा मिलेगी आप लोग भी जुल्म के खिलाफ आवाज उठाइए ताकि उन औरतों को इंसाफ मिल सके जो इस समाज की सताई हुई हैं 

 

Also read – 

पैसो से बढ़कर तुम्हारी इज्जत है। Meri Kahaniyan | Manohar Story In Hindi | Best Hindi Story

सारे मर्द एक जैसे होते है। Moral Kahaniyan | Emotional And Sad Hindi Story | Best Story

Youtube Channel LinkShama Voice

Leave a Comment