माँ का किरदार। Emotional Kahaniyan | Desi Story In Hindi | Best Hindi Story

Emotional Kahaniyan :

मेरी नौकरानी रोज मुझे कहती डॉक्टर साहिबा आप नाइट शिफ्ट मत किया करें आपके हिस्से की सजा मुझे भुगतनी पड़ती है मुझे उसकी बाते समझ ना आई एक दिन मेरी तबीयत खराब थी तो अपनी जगह किसी और को ड्यूटी देकर मैं अचानक जल्दी घर आ गई तो मेरे कमरे से चीख की आवाज ही आ रही थी, पति तो घर पर नहीं था मगर जब कमरे का दरवाजा खोला तो सामने का मंजर देखकर मेरी रूह कांप गई

 क्योंकि कमरे में मेरी  बेटी जीया और वह नौकरानी……मैं कई दिनों से देख रही थी कि नौकरानी बार-बार मेरे पास आती थी और कुछ कहे बगैर ही पलट जाती थी शायद वह मुझे कोई बात बताना चाहती थी जब मैंने उसे तीन चार बार यही करते देखा तो एक दिन मैंने उससे पूछ ही लिया कि माला सब ठीक तो है ना तुम्हें कोई बात करनी है मुझसे मुझे लगा था शायद उसे पैसों की जरूरत होगी

 क्योंकि अक्सर गरीब लोगों का यही तो समस्या रहती है कि उन्हें हर वक्त बस पैसों की जरूरत होती है तो मैंने इसीलिए उससे पूछ लिया कि पैसों की जरूरत तो नहीं तो माला कहने लगी नहीं नहीं मैडम जी मुझे पैसों की जरूरत नहीं है बल्कि मैं तो आपसे कोई और बात करना चाहती थी मुझे उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी

 मैंने उससे कहा कि माला जल्दी बताओ मुझे हॉस्पिटल के लिए देर हो रही है तो  माला कहने लगी कि मैं बस आपसे यही कहना चाहती हूं कि आप नाइट शिफ्ट ना किया करें मैं चौक कर और थोड़ा गुस्से से उसे देखा कि उसकी यह बात कहने का क्या मतलब है कि मैं नाइट ड्यूटी ना करूं आखिर वह होती कौन थी मुझे यह सलाह देने वाली मुझे गुस्से में देखकर वह बगैर कुछ कहे जल्दी से वहां से चली गई थी

 मैंने सोचा कि शायद मेरे जाने के बाद उसे घर के ज्यादा काम करने पड़ते होंगे इसीलिए वह ऐसा कह रही है मुझे वैसे भी काफी दिनों से उसका व्यवहार  कुछ बदला बदला सा लग रहा था इसलिए मैंने सोचा कि मुझे उस पर नजर रखनी चाहिए और आखिर पता तो चलना चाहिए कि उसके दिमाग में चल क्या रहा है खैर उस दिन मैं अस्पताल चली आई वैसे तो मैं दिन की ड्यूटी ही किया करती थी लेकिन पिछले चार साल से मैं नाइट शिफ्ट कर रही थी

 और मुझे इसमें इसलिए भी कोई समस्या नहीं होती थी कि अब तो बच्चे बड़े हो गए थे और वैसे भी मैंने माला को फुल टाइम के लिए रखा हुआ था कि वह दिन रात हमारे ही घर में रहे और शाम को तो मेरा पति भी घर से चला जाता था तो इसलिए मुझे कोई चिंता नहीं रहती थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से माला के बारे में मुझे अजीबो गरीब से ख्याल आने लगे थे कि कहीं वह मेरी पीठ पीछे कुछ गलत ना कर रही हो 

अक्सर मैं अपने साथ वाली औरतों से बातें सुनती थी कि ऐसे ही कोई औरत अपने घर को अपनी नौकरानी के हवाले छोड़कर नौकरी करती थी तो उसके पति ने उसकी नौकरानी से ही अफेयर चला लिया और चुप कर उससे शादी भी कर ली जब से मैंने यह खबर सुनी थी मुझे तो किसी भी पल चैन नहीं मिल रहा था एक तरफ तो मुझे अपने पति पर पूरा विश्वास था कि मेरा पति ऐसा कुछ भी मेरे साथ नहीं कर सकता और मुझे उस नौकरानी पर भी विश्वास था क्योंकि वह एक बहुत ही शरीफ औरत है 

 लेकिन फिर मैंने सोचा कि किसी को बदलते हुए देर ही लगती है मैंने अपने पति और नौकरानी पर नजर रखने का फैसला कर लिया मैं सुबह देर तक सोई रहती थी इसलिए मेरे पति माला के हाथ का ही नाश्ता करके चले जाते थे मैंने सोचा कि मुझे खुद उठकर उनको नाश्ता बनाकर देना चाहिए लेकिन सारी रात ड्यूटी करने के बाद में इतनी थक जाती थी कि जब मैं 6:00 बजे लौटकर घर आई तो गहरी नींद सो जाती थी 

और फिर उठने का मन ही नहीं करता था 6:00 बजे की सोई में दोपहर दो बजे उठा करती थी लंच करने के बाद मैं अपने प्राइवेट क्लिनिक पर बैठ जाया करती थी क्योंकि अस्पताल की नौकरी के अलावा मैंने एक प्राइवेट क्लीनिक भी बना रखा था जिसमें मैं गरीब लोगों का मुफ्त में इलाज किया करती थी क्लीनिक से आने के बाद शाम की चाय पीने के बाद में अस्पताल चली जाया करती थी

 कभी-कभी मेरे पति मुझसे शिकायत भी करते कि रीना तुमने तो अपनी जिंदगी को इतना बिजी कर लिया है कि उसमें मेरे लिए टाइम ही नहीं है आखिर मुझे भी तुम्हारी जरूरत महसूस होती है लेकिन मेरे पति बहुत अच्छे थे मैं उन्हें बहुत जल्दी माना लिया करती थी और वह भी मेरी बात को समझ जाया करते थे जिंदगी की यही रूटीन चल रही थी कुछ दिन तो यूं ही सुकून से गुजर गए मुझे ऐसी कोई भी बात नजर नहीं आई 

तो मैं भी कुछ सुकून से हो गई थी लेकिन माला एक दिन फिर मेरे पास आई और कहने लगी मैडम जी अगर आप मेरी बात माने तो आप अपनी ड्यूटी दिन की समय में करवा लो आपके जाने के बाद आपके किए की सजा मुझे भुगतनी पड़ती है इस बार वह बहुत गुस्से से कह रही थी और अपनी बात खत्म करके वहां से जा चुकी थी उसकी बात सुनकर मैं तो हैरान रह गई थी कि मेरे हिस्से की सजा का क्या मतलब था 

कहीं वह मेरे हिस्से का समय मेरे पति के साथ तो नहीं गुजर रही थी यह सोचते ही मेरे कदमों तले से जमीन जैसे सरकने लगी थी मेरा विश्वास था जो मेरे पति के ऊपर वह डगमगाने लगा था लेकिन फिर मैंने सोचा कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता वह बस ऐसे ही कह रही होगी लेकिन फिर भी मुझे जानना तो चाहिए कि आखिर उसकी इस बारबार की जिद के पीछे मकसद क्या था कि मैं नाइट शिफ्ट ना करूं दिन की ड्यूटी कर लूं 

मैं एक डॉक्टर थी और मैंने सारी जिंदगी ईमानदारी से काम किया था और कभी किसी का एहसान नहीं लिया था अस्पताल वाले जो भी ड्यूटी लगाते हैं मैं खुशी से उसे स्वीकार करती थी और पूरी लगन से उसको निभाती थी अभी भी नाइट शिफ्ट के लिए बात कर रखी थी कि मैं नाइट ड्यूटी कर लूंगी मुझे कोई दिक्कत नहीं है और अब इसे मैं अचानक से छोड़ नहीं सकती थी मेरी बात खराब हो जाती इतने सालों से मैं मेहनत से कम कर रही थी और कभी मैं अपनी बात से नहीं मुकरी थी पूरे स्टाफ को मेरे ऊपर बहुत ज्यादा भरोसा था

 लेकिन मैं इस तरह अपने घर को तोड़ना भी नहीं चाहती थी मैंने सोचा कि कुछ ना कुछ तो करना ही होगा माला मेरे घर पर पिछले एक साल से नौकरी कर रही थी और एक अरसे के दौरान ना तो उसे मुझसे कोई शिकायत हुई थी और ना ही मुझे उससे वह एक विधवा औरत थी जिसके दो बच्चे थे जिनको पालने की खातिर वह मेरे घर पर नौकरी करती थी मैंने उसे नौकरी के पहले दिन ही कह दिया था कि तुम्हें 24 घंटे के लिए यहीं पर रहना होगा

 उसके बच्चों की टेंशन नहीं थी क्योंकि उसके बच्चों की देखभाल करने के लिए उसके मां-बाप थे और वह गांव में रहते थे वह अकेले ही हमारे घर पर रहती थी जो भी तनख्वाह उससे मिलती वह अपने गांव अपने बच्चों की देखभाल के लिए भेज दिया करती थी हालांकि मैंने उसे कई बार कहा भी था कि अगर तुम चाहो तो अपने बच्चों को भी यहां पर बुला सकती हो जहां तुम रहती हो वहां पर तुम्हारे बच्चे भी रह लेंगे मगर ना जाने क्या बात थी कि वह मना कर देती थी उसके साथ समय बहुत अच्छा गुजर रहा था

 आज तक उसने कभी किसी की शिकायत नहीं की थी लेकिन अब पिछले कुछ दिनों से मैं देख रही थी कि उसका व्यवहार   अजीब सा हो गया है वह बस हर बार मुझे एक ही बात कहती रहती कि मैडम जी अपनी ड्यूटी दिन के समय करवा लो रात को घर पर रहा करो मुझे कुछ समझ नहीं आती थी आखिर रात को ऐसा घर पर क्या होता है जिसकी वजह से वह इतना घबराकर मुझे यह बात कहती है एक दिन ऐसा हुआ कि मैं ड्यूटी पर थी कि अचानक एक नर्स मुझे आकर कहने लगी कि कोई औरत है बड़ी दूर से आपसे मिलने आई है

 मैंने पूछा क्या वह कोई मरीज है क्योंकि इस वक्त मेरी ड्यूटी इमरजेंसी में थी तो वह कहने लगी नहीं वह आपकी कोई रिश्तेदार है मैं हैरान होते हुए बाहर आई कि मेरी कौन सी रिश्तेदार इस वक्त मुझसे मिलने अस्पताल आ सकती है मैं बाहर गई तो एक अनजान औरत को सामने खड़ा पाया मैं हैरत के मारे उसे देखकर पूछा आप कौन हो और मुझसे क्यों मिलना चाहती हो तो वह कहने लगी क्या आप ही डॉक्टर रीना है मैंने कहा जी हां मैं ही डॉक्टर रीना हूं मेरी बात सुनकर उसने एकदम से मोबाइल का कैमरा निकाला 

और मेरी तस्वीर खींचकर अचानक से भाग गई मुझे तो कुछ सेकंड के लिए समझ नहीं आया कि मेरे साथ हुआ क्या और जब तक मैं समझती वह मुझसे दूर भाग चुकी थी मैं जल्दी से उसके पीछे भागी कि उससे पूछ सकूं कि उसने मेरी तस्वीर क्यों बनाई है और आखिर वह है कौन लेकिन वह बहुत तेजी से भागती हुई मुझसे बहुत दूर जा चुकी थी मैं परेशान होती हुई वापस आ गई और सोचने लगी है भगवान यह मेरे साथ क्या चल रहा है कौन थी वह औरत और यहां क्यों आई थी पता नहीं क्यों मुझे बहुत बड़ी गड़बड़ का एहसास हो रहा था 

जैसे कुछ बरा होने वाला है मेरी छठी इंद्री बार-बार मुझे इशारे दे रही थी कि शायद मेरी जिंदगी में कुछ तो बहुत गलत होने वाला है मैं यह बात जानती थी कि मैं अपने घर वालों और अपने पति को बहुत ज्यादा नजरअंदाज कर रही हूं क्योंकि रात को ड्यूटी बहुत थका देने वाली होती है और सुबह तक मैं लेट से उठती थी जब मैं सोकर उठी तब तक मेरे पति ऑफिस के लिए निकल चुके होते थे और जब रात को ड्यूटी पर जाना होता था तब तक वह ऑफिस से आते ही नहीं थे अजीब सी जिंदगी हो गई थी

 काफी दिनों से मेरे पति से तो मेरी बातचीत ही नहीं हो पा रही थी मुझे इस बात का एहसास हुआ तो मैंने फौरन से अपना मोबाइल निकाला और अपने पति को कॉल करने लगी मैंने सोचा कम से कम फोन पर ही बात कर लूं लेकिन मेरे पति मेरा फोन नहीं उठा रहे थे फिर मैंने उनके ऑफिस के नंबर पर कॉल की तो उनकी सेक्रेटरी ने बताया कि वह तो पिछले कई दिनों से दफ्तर ही नहीं आ रहे सेक्रेटरी की बात सुनकर  मै तो हैरान रह गई थी

 मुझे तो कुछ खबर ही नहीं थी कि वह दफ्तर जा भी रहे हैं या नहीं लेकिन परेशानी वाली बात तो यह थी कि रोजाना घर से दफ्तर के लिए निकलते थे फिर ऐसे कैसे वह कहीं जा सकते हैं अगले दिन मैंने सोचा कि मैं छुट्टी कर लेती हूं जब मैं यह बात घर में बताई तो सब बहुत खुश हुए खास तौर पर मेरी नौकरानी माला के चेहरे पर तो खुशी के हाव भाव नजर आ रहे थे रात का खाना खाकर फ्री हुई तो मैं ऐसे ही टहलने के लिए बाहर आ गई

 तो मैंने देखा माला किसी से फोन पर बात कर रही थी और वह किसी को बता रही थी कि मैडम जी आज घर पर ही है शुक्र है कि आज मेरी जान छूट गई वरना तो उनके हिस्से की सजा भुगते भुगते शायद मेरा दम ही निकल जाता जब मैं उसके करीब गई तो उसने जल्दी से घबराकर फोन बंद कर दिया और मैंने उससे पूछा कि किससे बात कर रही हो तो कहने लगी किसी से भी नहीं अम्मा से अपने बच्चों का बस हालचाल पूछ रही थी मुझे अब माला के बारे में शक हो चुका था 

यह कोई तो खिचड़ी जरूर पक रही है या फिर मुझसे कोई ऐसी बड़ी बात छुपा रही है कहीं ऐसा तो नहीं यह किसी गलत काम में पड़ गई हो मैंने सोचा कि आज घर पर रहकर देख लेती हूं कि आखिर यहां पर ऐसा होता क्या है लेकिन मुझे तो कुछ भी ऐसा गलत महसूस नहीं हुआ सब लोग बड़े आराम से सोए रहे मेरा पति मेरी छुट्टी का सुनकर बहुत खुश हुआ था कहने लगा कि कितना समय हो गया है हमें एक साथ समय गुजारने का मौका ही नहीं मिला मैं भी सोचने लगी क्या यह सच में खुश है या खुश रहने का नाटक कर रहे हैं 

मैं उसे खोजती हुई नजरों से देख रही थी कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरे घर से जाने के बाद उसका और मेरी नौकरानी का कुछ चक्कर चलता हो इसलिए वह मुझे कहती है कि आप घर पर ही रहा करें मेरी एक बेटी और एक बेटा था बेटी कॉलेज में पढ़ती थी बेटा छोटा था और वह स्कूल जाता था इस घर में हम बस चार ही लोग थे और मेरा ख्याल था इतने सारे लोगों के लिए सिर्फ एक ही नौकरानी काफी है इसलिए मैंने कभी माला के अलावा किसी और को रखने के बारे में सोचा ही नहीं और अगर एक दो बार मैंने अपने घर वालों से पूछा भी कि कोई और नौकरानी रख लूं 

तो सबने माला की बहुत तारीफ करते हुए कहा था कि उसके होते हुए उन्हें कोई परेशानी नहीं तो फिर क्या जरूरत है कोई दूसरी नौकरानी रखने की तो मैं भी सुकून से हो गई थी लेकिन कुछ दिनों से मैं देख रही थी कि माला और मेरी बेटी जीया आपस में कुछ ज्यादा ही प्यार से रहने लगे थे जीया हर वक्त माला के आसपास रहती कभी उसके कमर में बाहे डाले खड़ी होती कभी उसके गालों पर प्यार कर रही होती 

मुझे यह देखकर बहुत अजीब लगता था आखिर वह माला को इतना प्यार क्यों करने लगी थी मैं यह भी देख रही थी कि जीया तो माला के करीब जाने की कोशिश करती थी उसे प्यार करने की कोशिश करती थी लेकिन माला उससे दूर भागती थी खैर उस दिन मैंने पूरा दिन और पूरी रात घर पर रहकर देख लिया था मैं अस्पताल भी नहीं गई थी और क्लीनिक पर भी नहीं बैठी थी मुझे कुछ भी अब दिखाई नहीं दिया था सिवाय इसके कि मेरी बेटी जीया माला के कुछ ज्यादा करीब होने की कोशिश कर रही थी

 लेकिन मैं इस बात को इग्नोर कर दिया कि हो सकता है मैं तो घर पर रहती नहीं हूं सिर्फ माला ही घर पर होती है तो माला से उसका दिल लग  गया होगा या फिर कोई और बात थी मैंने घर पर रहकर देख लिया था लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था मैं अंदर ही अंदर अब चढ़ गई मैंने सोचा पता नहीं माला के ड्रामे कब खत्म होगा मैंने अगले दिन दोबारा से अपनी रूटीन के अनुसार अपनी नाइट ड्यूटी स्टार्ट कर ली दो दिन के बाद ही मैं सुबह जल्दी उठ गई थी क्योंकि शाम में मुझे अपनी एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में जाना था 

तो मैंने सोचा कि उसके लिए कोई गिफ्ट लेकर जाती हूं मैं यही सोचकर बाजार गई वहां मुझे एक जगह पर रुकना पड़ा क्योंकि सामने की मंज़र ने मुझे एकदम पत्थर का बना दिया था क्योंकि मेरा पति एक अस्पताल के अंदर जा रहा था भला उसे अस्पताल जाने की क्या जरूरत थी वह तो एकदम भला चंगा था उसे कोई भी तकलीफ नहीं थी मैं भी उसके पीछे-पीछे अस्पताल चली गई मैंने देखा वह एक कमरे के अंदर चला गया मैंने खिड़की से अंदर छाक कर देखा तो वह एक औरत को कुछ पैसे दे रहा था उस औरत को मैं पहचान नहीं पा रही थी

 क्योंकि उस औरत की मेरी तरफ पीठ थी उस औरत को पैसे देने के बाद और उसे हाथ मिलाकर मेरा पति जल्दी से बाहर चला गया उसके बाद उस औरत ने किसी को फोन किया और थोड़ी देर बाद जो औरत आई उसे देखकर मैं आंखें झपकना भूल गई थी फटी फटी आंखों से उसको देख रही थी वह औरत कोई और नहीं बल्कि माला ही थी उस औरत ने माला को कुछ पैसे दिए माला ने उसका धन्यवाद किया और वहां से चली गई आखिर यह सब क्या था मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था 

मेरे पति ने पहले उस अनजान औरत को पैसे दिए और फिर उस अनजान औरत ने मेरे पति के दिए हुए पैसों में से कुछ पैसे माला को दे दिए आखिरी यह सब चक्कर किया था और जब उस औरत ने मेरी तरफ को चेहरा घुमाया तो मैं दंग रह गई थी मैं से औरत को कैसे भूल सकती थी इतने दिन गुजर जाने के बावजूद उसका चेहरा मेरे दिमाग में फिट हो गया था यह तो वही औरत थी जिसने उस दिन मेरी तस्वीर ली थी और भाग गई थी इसका मेरे पति के साथ-साथ आखिर क्या संबंध है

 मैंने सोचा कि मैं अभी जाकर उसे पूछ लेती हूं लेकिन इससे पहले ही उस औरत के पास कोई और दूसरा आदमी आए एक दूसरे से हाथ मिलाते हुए वहां से चली गई यह सब देखकर अब तो मुझे पक्का विश्वास हो गया था जरूर मेरे खिलाफ कोई गहरी साजिश की जा रही थी और इसमें मेरा पति और मेरी नौकरानी माला भी शामिल थे मैंने फैसला कर लिया था आज मैं इन दोनों को रंगे हाथों पकड़ कर ही रहूंगी रात को जब मैं नाइट ड्यूटी के लिए जाने लगी तो उस समय तक मेरे पति भी घर आ चुके थे

 और मुझे कहने लगे कि मैं भी तुम्हारे साथ ही निकलता हूं मुझे एक जरूरी काम से शहर से बाहर जाना है मैं परेशान हो गई कि अगर यह भी घर से बाहर रहेंगे तो फिर मैं इन्हें रंगे हाथों कैसे पकडू गी लेकिन फिर मैंने सोचा कि चलो कोई नहीं आज नहीं तो फिर किसी और दिन मैं हकीकत मालूम करके ही रहूंगी अस्पताल में भी अपने ख्यालों में ही खाई रही सोच सोच कर मेरा दिमाग फटने लगा मेरे सर में तेज दर्द होने लगा सर्जन डॉक्टर राउंड पर आए तो मेरी खराब तबीयत देखकर कहने लगे मेरा ख्याल है कि आप नाइट ड्यूटी नहीं दे सकेंगे

 आपको घर चले जाना चाहिए सर में इतनी तेज दर्द था कि मुझे भी लग रहा था कि मैं यहां अब और ज्यादा नहीं रुक सकती वरना मेरी तबीयत और ज्यादा खराब हो जाएगी मैं अपनी जगह किसी दूसरी डॉक्टर को ड्यूटी दी और बगैर बताए घर चली आई आज से पहले मैं कभी यूं अचानक रात के समय घर पर नहीं आई थी दरवाजा बंद था मैंने सोचा उन लोगों को जगाने से अच्छा है मैं खुद ही अपनी चाबी से दरवाजा खोल लूं 

अंदर दाखिल होते ही मुझे अंदाजा हो गया शायद मेरे पति अभी तक घर वापस नहीं लौटे थे क्योंकि उनकी गाड़ी वहां पर नहीं थी मैं अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगी थी कि अचानक मुझे चीख की आवाज सुनाई दे आवाज ऊपर से आ रही थी मैं भागते हुए ऊपर गई तो चीख की आवाज अभी भी मेरी छोटी बेटी के कमरे से आ रही थी मैंने आगे बढ़कर दरवाजा खोलने लगी एकदम से दरवाजा खोल दिया सामने का मंजिर देखकर तो मेरी खुद की चीखें निकल गई क्योंकि वह मंजिर ही ऐसा था जिसने मेरी रूह हिलाकर रख दिया था 

मैंने देखा कि मेरी बेटी मेरी नौकरानी को बुरी तरह से पीट रही थी और वह वह चीख की आवाज में भी मेरी नौकरानी माला की ही थी मैं जल्दी से आगे बढ़कर उसे हटाया तो वह भी मुझे देखकर परेशान हो गई माला जल्दी से मुझे देखकर मेरे पास आई और मेरे पीछे छुप गई कहने लगी मैं इसीलिए तो आपको कहती थी कि आप नाइट शिफ्ट ना किया करें क्योंकि फिर आपके जाने के बाद मेरे साथ ऐसा ही होता है और यह आज से नहीं बल्कि कई दिनों से हो रहा है 

मैंने अपनी बेटी को गुस्से से देखते हुए पूछा कि आखिर तुम माला को क्यों मार रही हो आखिर उसने ऐसा क्या किया है जो तुम यूं उसकी बुरी तरीके से पीट रही थी तो मेरी बेटी ने आगे बढ़कर मुझे भी एक जोर का धक्का दिया कहने लगी आप हम माँ बेटी के बीच में मत बोले आप जो भी हैं यहां से चले जाएं उसकी हालत अजीब सी हो रही थी मैं फटी फटी आंखों से अपनी बेटी को देख रही थी वह यह क्या बक रही थी

 मैंने कहा यह तुम क्या कह रही हो मैं तुम्हारी मां हूं यह तुम्हारी मां नहीं मुझे लग रहा था जैसे वह अपने होशो हवास में नहीं है दूसरी तरफ माला बहुत बुरी तरह से डरी हुई थी उधर जीया की हालत भी खराब होने लगी थी वह गुस्से के मारे कमरे का सामान इधर-उधर फेंकने लगी थी मुझे लगा कि कहीं वह अपने आप को नुकसान ना पहुंचते मैंने जल्दी से अपने साथ लाए बैग में से नींद का इंजेक्शन निकाला और जीया को लगा दिया वह अब सुकून से बेड पर लेटी हुई सो रही थी

 मैं इस सब सूरत हाल से बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी थी माला अलग डरी डरी सी खड़ी हुई थी मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब हो क्या रहा था मैंने पूछा कि यह सब क्या है और कब से हो रहा है और तुमने मुझे बताया क्यों नहीं तो वह कहने लगी कि आप मेरे साथ आए मैं आपको सब कुछ बताती हूं मैं अपनी बेटी को देख देखकर परेशान हो रही थी कि आखिर उसे क्या हो गया है वह मुझे पहचानने से इंकार क्यों कर रही है 

माला कमरे से निकलकर नीचे की तरह भागी के जैसे एक मिनट भी यहां पर रुकी तो जीया उसे फिर से ना पकड़ ले मैं भी परेशान होती हुई नीचे आ गई तो वह कहने लगी कि यह सब कुछ जो भी आपने देखा है वह आपकी वजह से ही हो रहा है मैंने ना कितनी बार आपको कहा कि आप नाइट शिफ्ट ना किया करें आप रात को घर पर रहा करें मगर आप तो कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थी आप याद करें कि अपने आखिरी बार कब बच्चों के साथ बैठकर उन्हें प्यार किया था या उनके दिल की कोई बात सुनी थी 

उसकी बात सुनकर एक पल को मैं चुप हो गई क्योंकि वह सच कह रही थी मुझे बचपन से ही डॉक्टर बनने का बहुत शौक था इसलिए मैंने बहुत मुश्किलों के बाद अपने इस शौक को पूरा किया था मेरे पति बहुत अच्छे थे और मेरे शौक के बारे में अच्छी तरह जानते थे इसलिए उन्होंने शादी के बाद भी मुझे पढ़ने से नहीं रोका और बच्चे होने के बाद उन्होंने मुझे नौकरी करने की भी अनुमति दे दी और शुरू से ही मेरे बच्चों को नौकरों ने ही पले थे

 मैं भी अपनी पूरी कोशिश करती थी कि अपने बच्चों को समय दे सकूं लेकिन एक डॉक्टर होने के नाते मेरी बहुत ज्यादा जिम्मेदारियां होती थी और मेरा ज्यादातर समय अस्पताल में ही गुजरता था लेकिन उसके बावजूद मैं हमेशा कोशिश की थी कि अपने बच्चों को एक अच्छी परवरिश और उन्हें अच्छी शिक्षा दे सकूं हालांकि मैं उन्हें ज्यादा समय नहीं दे पाती मगर इसका मतलब यह तो नहीं कि मैं उन पर ध्यान नहीं देती थी और उनसे प्यार नहीं करती थी मेरी नौकरानी कहने लगी कि जीया धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार होने लगी थी

 उसे मां-बाप के प्यार की सख्त जरूरत थी जो उसे नहीं मिल पा रहा था क्योंकि उसके मां-बाप के पास उसके लिए समय नहीं है मगर वह छोटी है कॉलेज में गलत संगत में पड़कर गलत आदतों का शिकार हो गई है उसे मां के प्यार की जरूरत होती है जो उसे नहीं मिला तो वह दिमागी मरीज बन गई वह अपने अंदर की भड़ास और गुस्सा मुझे को मारपीट कर निकलती है उस समय उसे लगता है कि मैं उसकी मां हूं और वह क्योंकि आपसे कभी कोई शिकवा नहीं कर पाई 

आपको कुछ नहीं कह पाई इस इसलिए वह मुझे अपनी मां समझते हुए मुझ पर अपना गुस्सा निकलती है और जब सुबह होती है तो वह मुझसे से ना सिर्फ माफी मांगती है बल्कि मुझे बहुत सारे पैसे भी देती है ताकि मैं आपको कुछ ना बताऊं मैडम जी मैं गरीब हूं बच्चों का और बूढ़े मां-बाप का पेट में अकेली पालती हूं रात को जो मारपीट और तकलीफ में सहती थी सुबह जब आपकी बेटी मुझे पैसे देती है तो मैं भूल जाती थी कि रात को मैंने क्या तकलीफ सही थी एक बार दिन में जब जीया मुझसे माफी मांग रही थी

 और मुझे पैसे देने लगी तो मैं जीया से कहा जीया तो मेरे ऊपर बहुत जुल्म करती हो मुझे तुम्हारे पैसे नहीं चाहिए मैं तुम्हारी मां को तुम्हारी सारी बातें बता दूंगी तुम पागल हो तुम्हें तुम्हारी मां पागल खाने में डाल देगी तब तुम्हारी अक्ल ठिकाने आएगी पागल खाने का नाम सुनकर जीया डर गई और उसी दर से उसने मुझे धमकाना शुरू कर दिया कि अगर तुमने मेरी मां को कुछ भी बताया तो मैं तुम्हरी जान भी ले लूंगी 

जीया दिमागी मरीज और धीरे-धीरे उस पर पागलपन के दोहरे भी पड़ने लगे थे इसलिए मैं डर गई और आपको कुछ भी नहीं बता पा रही थी आपको सारी बात तो नहीं बता सकती थी लेकिन आपको यही कहती थी कि अगर आप घर पर रहा करें मैंने माला से पूछा माला यह सब कब से हो रहा है माला ने मुझे बताया कि मैडम जी यह पिछले एक साल से चल रहा है जीया का व्यवहार मेरे प्रति अभी आप तो कभी पानी की तरह होता है

कभी-कभी लाड और प्यार से जिद करती है थी कि मेरे बच्चों के साथ यह सब चल रहा होगा लेकिन मेरे पति का उस दिन उस औरत से मिलने का क्या प्लान था जिसने मेरी तस्वीर खींची थी और यह सब माला के अलावा और कोई नहीं बता सकता था 

मैंने फौरन उससे पूछा तो वह कहने लगी मैडम जी आप तो मेरी कोई भी बात सुनने को तैयार ही नहीं थी तो मैं आपकी बेटी की जो भी हालत थी वह आपके पति को बता दिया उन्होंने एक डॉक्टर से बात की और अपनी बेटी की पूरी हालत के बारे में उस डॉक्टर को बताया और डॉक्टर से विनती भी कि किसी तरह मेरी बेटी को ठीक कर दें आपके पति नहीं चाहते थे कि आपको सारे मामले के बारे में पता चले

 और आप गिल्टी फील करें वह औरत वही साइकेट्रिस्ट थी आपके पति ने उसे साइकेट्रिस्ट से हाथ जोड़कर विनती की थी कि मेरी पत्नी को इस बारे में कुछ नहीं पता चलना चाहिए वह भी एक डॉक्टर है और दिन रात लोगों की सेवा करती है आपके पति कह रहे थे मैं चाहता हूं कि मेरी पत्नी यह सब कुछ जानने से पहले ही मेरी बेटी ठीक हो जाए उस डॉक्टर ने आपके हॉस्पिटल का एड्रेस ले लिया था और उस दिन भी आपके पति उस डॉक्टर को उसकी फीस दे रहे थे मैं डॉक्टर की मदद कर रही थी वह जब भी मुझे अपने क्लिनिक बुलाती मैं चली जाती थी 

और वह मुझे आपकी बेटी के बारे में सवाल जवाब करती थी इसलिए उसने उस दिन मुझे भी कु पैसे दिए थे उस दिन आपने हमें देख लिया होगा एक दिन उस डॉक्टर ने मुझे बताया था कि मैं तुम्हारी मालकिन की कुछ तस्वीरें ली है मुझे हैरत हुई मैंने उस डॉक्टर से पूछा कि आपने मेरी मालकिन की तस्वीर क्यों ली है तो वह डॉक्टर कहने लगी इसलिए ताकि मैं तुम्हारी मालकिन को शक में डालना चाहती थी अब वह शक में पड़ गई है तो वह अब अपने घर पर ध्यान देगी

 और अपने ने बच्चों पर भी ध्यान देगी उसे लगेगा कि जरूर कुछ ना कुछ खिचड़ी मेरे घर में पक रही है और वह अपने घर पर ध्यान देने लगेगी मैं तुम्हारी मालकिन को सब कुछ नहीं बता सकती क्योंकि तुम्हारे मालिक ने मुझे कुछ भी बताने से मना कर रखा है लेकिन इस तरह शक में पढकर वह कुछ तो अपने बच्चों पर ध्यान देगी माला की सारी बातें सुनकर मुझे सब कुछ समझ आ गया था मेरा सर शर्मिंदगी से झुक गया था अपने शौक को पूरा करते-करते मैं अपने बच्चों और अपने परिवार को इग्नोर कर बैठी थी

 मेरे दो बच्चे थे और कैसे पले बड़े मुझे कुछ होश नहीं था मेरी बच्ची शुरू से ही अपने आप में मगन रहने वाली थी और मैंने कभी उसे पर ध्यान ही नहीं दिया जिसकी वह हकदार थी लेकिन मैं क्या जानती थी कि उसका यह नतीजा निकल सकता है उस वक्त मुझे समझ आया कि हम मां-बाप को अपने करियर के पीछे इतना भी पागल नहीं होना चाहिए कि अपने बच्चों को ही इग्नोर कर दें मेरे पति को मुझे पर बहुत मोहब्बत थी 

इसलिए वह नहीं चाहते थे कि मैं पछतावे की आग में जलू इसलिए वह खुद सारे मामले को डील करना चाह रहे थे मगर मैं अब समझ गई थी कि शायद उस डॉक्टर के अलावा मुझे भी मां का किरदार निभाना होगा मैंने कुछ समय के लिए छुट्टी ले ली ताकि अपने घर अपने बच्चों को समय दे सकूं और हम सबने मिलकर मेरी बेटी को ठीक कर लिया और मैं भी फिर उस दिन के बाद दिन की ड्यूटी लगवा ली 

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