असल सुंदरता तो मन की है | Hindi Story Written | Best Story In Hindi | Hindi Story

Hindi Story Written :  मैं इस वक्त परेशान होकर अपने कमरे में बैठी हुई थी मेरा दिमाग अभी तक अपनी सहेली की बातों में उलझा हुआ था एक तरफ मेरी मां थी और दूसरी तरफ मेरी मोहब्बत थी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपनी मां को बचाओ या अपने प्यार को उन दोनों में से किसी एक को ही मैं बचा सकती थी मेरा मोबाइल मेरे हाथ में था और दूसरी तरफ मेरी सहेली मेरे जवाब का इंतजार कर रही थी

 आधी रात तक मैं इसी बारे में सोच रही और फिर मैं एक फैसले पर पहुंच गई कि अगर मैंने अपनी मां को खो दिया तो मैं कभी भी खुद को शायद माफ नहीं कर पाऊंगी फिर मैंने अपनी सहेली का नंबर मिला लिया था उससे मैंने अपना फैसला सुना दिया मेरी बात सुनकर वह बहुत खुश हुई और मुझे कहने लगी कि मुझे तुमसे इसी समझदारी की उम्मीद थी 

उसने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें सोते नहीं अपनी बहन बनाकर लेकर जाऊंगी तुम्हारा बहुत ख्याल रखूंगी और मुझे यकीन था कि जो वह कह रही है वह सच है क्योंकि वह मेरी सहेली से ज्यादा मेरी दीदी की तरह थी और मेरा हमेशा ही बहुत ज्यादा ख्याल करती थी वह मुझसे बहुत ही ज्यादा प्यार करती थी फोन बंद करने के बाद मैं रो पड़ी थी प्यार की कुर्बानी देना अपने प्यार से दूर रहना आसान काम नहीं था

 मगर अपनी मां की वजह से मुझे यह कुर्बानी देनी ही पड़ी थी क्योंकि मेरे पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था मैं जानती थी कि जब अजय को यह सब पता चलेगा तो वह मेरे बारे में क्या सोचेगा उसे लगे कि मैंने उसे धोखा दिया है जानबूझकर किसी और के साथ विवाह किया है मगर हकीकत क्या थी यह तो मां ही जानती थी या फिर मेरा भगवान जानता था वह रात मैंने कंटो के ऊपर बसर की थी

 मैं जानती थी कि अब आने वाली हर रात ही मेरे लिए ऐसी ही तकलीफ का बहि बनने लगी अपनी मां और सहेली को खुशी देने के लिए मुझे यह कुर्बानी देनी ही पड़ी अजय को तो कोई भी लड़की मिल सकती थी किसी भी अच्छी लड़की के साथ वह अपनी जिंदगी शुरू कर सकता था मगर मेरी मां को कुछ हो जाता मैं उन्हें खो देती तो मैं कभी भी खुद को माफ नहीं कर सकती थी उनके बगैर मैं कैसे जी पाती यही सोचते सोचते मैं भी सो गई थी और फिर अगले दिन अपनी मां के बुलाने पर ही मेरी आंख खुली थी

 आज भी उनकी तबीयत खराब थी मैं उन्हें अस्पताल लेकर आ गई थी डॉक्टर ने चेक करके कहा कि उनकी सेहत तो रोज बरोज खराब हो रही है मैं जब उन्हें लेकर वापस घर आई तो मेरी सहेली अपने पति के साथ घर में मौजूद थे और उन दोनों ने मेरे फैसले को पसंद किया था मेरी सहेली के पति जल्द ही मुझसे शादी करना चाहते थे और फिर मैंने दिल पर पत्थर रखकर उनके साथ विवाह के लिए हां कर दी थी

 जब मेरी मां को यह बात पता चली तो उन्होंने मुझे इस बात से दूर रहने को कहा क्योंकि उन्हें पता था कि मैं और अजय एक दूसरे को पसंद करते थे तभी वह मेरे इस फैसले पर हैरान थी मगर कोई भी मेरा यह फैसला बदल नहीं सका था मुझे इस बात पर कोई पछतावा नहीं था कि मेरी मां की जिंदगी सबसे बढ़कर अजीज थी मुझे इस जियासी कितने प्रेम को छोड़कर अपनी मां पर वार सकती थी अजय मुझसे नाराज होकर वहां से चला गया था उसका कहना था कि मैं उसके बिना खुश नहीं रह सकती

 यह बात तो मैं भी जानती थी कि मैं उसके बिना खुश नहीं रह सकती मैं उससे दूर रहकर भी उसे याद करने वाली थी मैं इस वक्त अपने पति के कमरे में उनका इंतजार कर रही थी मैं रूपा के बारे में सोच रही थी कि उसके लिए यह कितना मुश्किल होगा अपने पति को खुद ही किसी और लड़की के हवाले करना तभी कमरे में आकर उन्होंने लाइट ऑफ कर दी थी मुझे कहने लगे कि मैं अपनी पत्नी की जगह किसी और को देना मेरे लिए आसान नहीं है तुम भी इस बात को समझ जाओ और कपड़े बदलकर इधर आओ 

फिर जब मैंने वापस आई तो हम दोनों के दरमियान सब कुछ हो गया था जो आज की रात का और इस रिश्ते का तकाजा था अब मैं पूरी तरह से उनकी हो गई थी अब तो मेरे दिल में उनके लिए जगह भी बनने लगी थी अगले दिन जब मैं उठी तो मैं रूपा से नजरें चुरा रही थी मुझे उसको देखकर दुख का एहसास हो रहा था कि ऐसे लग रहा था जैसे मैंने उससे उसके पति को छीना है मगर फिर मैंने यह सोचकर अपने ख्याल को झटक देती कि उसने खुद ही अपने पति से मेरा विवाह करवाया है 

सुबह उठने के बाद मुझे पता चला कि मेरे पति ऑन फिस में जा चुके हैं और इस वक्त घर में मेरे जीठ और रूपा मौजूद है मैं रूपा के साथ ही अपनी मां से मिलने के लिए आ गई थी मेरी मां मुझसे नाराज थी वह अभी तक यह बात नहीं जानती थी कि मैंने आखिर यह विवाह करने का फैसला क्यों किया था उन्हें अजय ने बहुत कहा था कि वह मुझे इस काम से दूर रखें मगर जब मैंने उनकी भी यह बात नहीं मानी तो वह मुझसे नाराज हो गए थे 

अगर उन्हें पता चल जाता कि मैंने यह फैसला क्यों किया है तो शायद उनकी नाराजगी खत्म हो जाती मगर मैं उन्हें किसी किस्म के भी एहसास जुर्म में नहीं रखना चाहती थी जब हम वापस आए तो सामने मेरा जीट बैठा हुआ था वह मुझे गहरी नजर से देख रहा था उसकी आंखों में एक अजीब सा प्रेम मेरे लिए नजर आ रहा था यह देखकर मैं घबरा गई थी कि मुझे अपने जीट से डर लगता था क्योंकि उसका चेहरा बुरी तरह से जल चुका था अभी तक उसका इसी वजह से विवाह नहीं हो पाया था उसको देखकर लड़कियां डर जाते थे

 उसका रुपया पैसा भी उसके किसी काम नहीं आया था क्योंकि ना उसका चेहरा ठीक हुआ था और ना ही कोई लड़की उसके पैसे की वजह से उससे विवाह करने के लिए थी वह अकेले ही जिंदगी गुजार रहा था उसे हमेशा देखकर मुझे उसे पर तरस आता था मगर इस वक्त वह मुझे जिन नजरों से देख रहा था उन्हें दे मैं डर गई थी रूपा काफी देर से मेरे चेहरे को देखती रही फिर मुझे कहने लगी कि तुम रवि को देखकर दर्द क्यों जाती हो वह बहुत अच्छा है पता नहीं क्यों उसे देखकर मुझे डर लग जाता है 

इसका चेहरा क्या सारी जिंदगी ऐसे ही रहेगा या ठीक नहीं हो सकता रूपा उदास हो गई तब कहने लगे कि इन लोगों ने बहुत कोशिश की है मगर इसका इलाज मुमकिन नहीं हो सका बात तब खत्म हो गई थी मैं सोचती थी कि रूपा का दिल कितना बड़ा था कि उसने अपना पति मेरे हवाले कर दिया था क्या उसे औलाद की इस कदर दिल में चाहत थी कि वह इतनी बड़ी कुर्बानी भी दे सकती थी मेरे पति रोजाना कमरे में आने के बाद लाइट ऑन ऑफ कर दिया करते थे उनका कहना था कि मैं रूपा की जगह किसी और को कभी भी नहीं दे सकता

 इसलिए जब तक ऐसा चलता है चलने दो जब तक मैं नॉर्मल नहीं हो जाता तुम यह सब बर्दाश्त करो मुझे भी इस बात पर कोई आति राज नहीं था रूपा की तबीयत भी कई दिनों से खराब थी मैंने उसे बहुत कहा कि मैं तुम्हें डॉक्टर के पास लेकर जाती हूं मगर उसने मेरी बात नहीं मानी और फिर शाम को जब मेरे पति घर आए तो वह उनके साथ डॉक्टर के पास गई यह देखकर मुझे बहुत अजीब सा एहसास हुआ था आज रात को मैं उसको देखने के लिए उसके कमरे में आ गई कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था मगर अंदर से किसी के बातें करने की आवाज सुनाई दे रही थी 

मैं हैरान रह के रूपा के कमरे में यह मर्द कौन था मेरे पांव के नीचे से जमीन निकल गई थी क्या रूपा का किसी से चक्कर चल रहा था रूपा क्या किसी और मर्द को पसंद करने लगी थी जब भी उसने अपने पति की दूसरा विवाह करवा दिया था तभी उसने अपने पति को मेरे हवाले किया वरना वह क्यों ऐसा कर सकते थे मैंने कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की मगर कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था फिर मैं सोचते हुए अपने कमरे में वापस आ गई थी रूपा ऐसे कैसे कर सकते थे वह तो अपने पति से बहुत मोहब्बत करती थी 

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था यह सब क्या है अब हर दूसरे तीसरे दिन मैं जब भी अपने कमरे से बाहर निकलती तो रूपा के कमरे से आवाज सुनाई दे रही होती थी मुझे अंदाजा हो गया था कि उसका सच में ही किसी के साथ चक्कर चल रहा था और फिर मैं अपने पति को यह बात बताना चाहती थी मगर रूपा मेरी सहेली थी मैं उसके साथ ऐसा कैसे कर सकती थी मैंने सोचा कि मुझे रूपा को समझाना चाहिए कि अपने पति को धोखा मत दो उसकी तबीयत ठीक होने के बजाय खराब हो रही थी और उसे इस बात की कोई फिक्र भी नहीं थी

 वह बहुत कुछ खाती थी जो कुछ भी हो उल्टी हो जाती थी मगर वह इस बात को नॉर्मल अंदाज में ले रही थी जैसे यह कोई फिक्र की बात ही ना हो मुझे बहुत परेशानी थी मेरे पति हर रात मुझसे ऐसे प्रेम जता था जैसे वह कभी रूपा से कोई ताल्लुक ही ना हो मैं अपने पति को कहती थी कि आपको रूपा को भी टाइम देना चाहिए आपको उसके कमरे में भी जाना चाहिए

 

मगर वह कहते कि इतने साल से मैं उसी को ही तो वक्त दे रहा हूं हमारी नई नई शादी हुई है और हमें एक साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारना चाहिए उनकी बात सुनकर मैं खामोश हो जाती थी और फिर मैंने रूपा से पूछा कि रात को तुम्हारे कमरे में कौन था 

तुम किससे बात कर रही थी जानती हो अगर पति को पता चल गया तो क्या होगा रूपा के चेहरे का रंग बदल गया वह मुझे कहने लगी यह बात किसी को भी मत बताना यह सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया मैं उसे कहने लगी कि मैं तो किसी को भी नहीं बताऊंगी लेकिन अगर खुद से तुम्हारे पति को पता चल गया तो जानती हो क्या होगा वह तुम्हें अपनी जिंदगी से निकाल देगा रात को सोते हुए मैंने अजीब सा ख्वाब देखा था जिसे देखकर मैं डर गई थी मैंने अपने पति की तरफ देखा वह सो रहा था मुझे अंधेरे में बहुत डर लग रहा था

 इसीलिए मैंने कमरे की लाइट ऑनन कर दी लाइट का ऑनन करना ही था कि मेरे पति हर भरा कर उठ बैठे अब जब मेरे उनके चेहरे पर नजर पड़ी तो मैं बुरी तरह से चीख पड़ी थी क्योंकि मेरे सामने मेरे पति का मैं छोटी सी थी जब मेरे पिताजी का इंतकाल हो गया था मेरी मां ने ही मुझे पाला था उन्होंने मेरा बहुत ख्याल रखा था उनके लिए मैं ही सबसे बढ़कर थी मेरी खुशी से ज्यादा तो उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं था और मैं भी उन्हें कुछ करने के लिए हर वह काम करती थी जो वह मुझे कहती थी अपने स्कूल में मैं सबसे अच्छे नंबर लेती थी

 मोहल्ले में भी किसी बच्चे से लड़ाई नहीं करती थी किसी से झगड़ा नहीं करती थी और ना ही कभी मेरी मां जी को शिकायत मिली थी दिल यूं ही दिन बिताते जा रहे थे अब मैं कॉलेज की तालीम मुकम्मल कर चुकी थी और अब मैं एक कंपनी में नौकरी कर रही थी मेरी मां अब बूढ़ी हो गई थी अब वह बहुत ही ज्यादा बीमार रहने लगी थी मैं जब भी उन्हें डॉक्टर के पास लेकर जाने की बात करती तो मुझे यह कहकर टाल देती मैं बिल्कुल ठीक हूं दवा लेने से मैं ठीक हो जाऊंगी यह सुनकर मैं कफी मुब्तला हो जाती थी 

उन्हें कहती कि जब तक वह डॉक्टर के पास नहीं जाएंगी तब तक ठीक कैसे होंगी मगर मां जी को यह बात समझ में नहीं आती थी इन्हीं दिनों मेरी अजय के साथ मुलाकात हुई थी वह भी मेरी ही कंपनी में नौकरी करता था वह एक गरीब लड़का था मगर वह मेरे साथ बहुत अच्छा था मेरा बहुत ख्याल रखता था जिसकी वजह से मैं उसके प्रेम में मुब्तला हो गई थी

 

हम दोनों का ही विवाह करने का इरादा था वह भी आज कल के लड़कों की तरह टाइम पास नहीं था वह भी मेरे साथ बहुत ही ज्यादा मुखलिस था हम दोनों का एक साथ वक्त अच्छा गुजरता था हम दोनों ने सात जन्म एक साथ गुजारने के वादे किए थे 

और मुझे यकीन था कि हम दोनों हमेशा एक साथ ही रहेंगे मैंने अपनी मां जी को भी अजय से मिलवाया था उन्हें भी अजय बहुत पसंद था और वह मुझे कहती थी कि तुम दोनों जल्दी से विवाह कर लो मैं भी जल्द ही फैसला करना चाहती थी इन्हीं दिनों मेरी सहेली रूपा जब भी यहां आती थी वह बहुत ही ज्यादा उदास रहती थी उसकी शादी को फाइव साल गुजर चुके थे और जब मैं उससे उसकी उदासी का सबब पूछ तो वह रोते हुए कहती कि अभी तक मेरे बच्चे नहीं हैं जिसकी वजह से मुझे लोगों से बहुत बातें सुनने को मिलती हैं

 तब मैं उसे तसल्ली देती कि सब कुछ ठीक हो जाएगा भगवान तुम्हें सब कुछ आदा करेगा जो तुम चाहती हो एक दिन जब माता जी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई और वह खून की उल्टियां कर रही थी तो यह सब देखकर मैं बुरी तरह से डर गई थी तभी मैंने अजय को कॉल करके घर पर बुलाया और उसके साथ मिलकर अपनी माताजी को मैं अस्पताल में लेकर गई फिर डॉक्टर भी यह सब देखकर घबरा गए थे उन्होंने मेरी माता जी को अस्पताल में ही दाखिल कर लिया

 मैं बुरी तरह से परेशान थी कि ना जाने मेरी माता जी को क्या हो गया है वह कब तक ठीक होंगी अगले ही दिन जब रिपोर्ट्स आई उन्हें देखकर मैं फूट फूट कर रो पड़ी थी क्योंकि माता जी को कैंसर था और अभी उनका इलाज मुमकिन था मगर यह इलाज बहुत ही ज्यादा महंगा था इसके लिए बहुत से पैसे चाहिए थे जो कि मेरे पास नहीं थे मैं बहुत परेशान थी मैं क्या करूं आज रूपा मेरे पास आई तो वह बहुत खुश लग रही थी मगर जब उसने मेरे चेहरे पर नजर डाली तो वह परेशान हो गई

 और मुझसे जब उसने मेरी उदासी के बारे में पूछा तो मैंने उसे सारी बात बताई मैं अब बुरी तरह से रोना शुरू हो गई थी वह मुझे कहने लगे कि मैं तुम्हारे लिए कुछ करने की कोशिश करते हूं नहीं नहीं तुम अपने पति से या जेठ से पैसे मांगोग तो यह चीज मुझे अच्छी नहीं लगेगी क्योंकि तुम मेरी दीदी जैसी हो और मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से तुम्हारा पति तुम्हें किसी बात पर दानत दे रूपा यहां से वापस चली गई थी 

और फिर अगले दिन जब आई तो उसने एक ऐसी अनोखी बात की जिसे सुनकर मैं बे यकीनी नजरों से उसे देखती रही तब वह मुझसे नजर छुरा करर कहने लगी कि इसमें तुम्हारा भी फायदा है अगर तुम इस बात को मान लो तो तुम भी फायदे में रहोगी और मुझे भी फायदा होगा मुझे भी मेरी ख्वाहिश पूरी हो जाएगी तुम जानती हो कि मैं किस कदर उदास हूं तुम मेरे परी से विवाह कर लो मुझे एक बच्चा दे दो तुम्हारी जब मर्जी होगी तो मेरे पति को छोड़ देना मगर एक बार मेरी यह बात मान लो मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं 

उसके बाद सुनकर मैं रो पड़ी थी मेरी सहेली ने मेरे साथ यह क्या किया था वह मेरी मदद करना चाहती तो कर सकती थी मगर उसने मेरे साथ यह सौदा क्यों किया उसने अपनी दोस्ती को क्यों कर बेच दिया मैं जितना सोचती जा रही थी उतना मेरे दिल में दुख बढ़ता जा रहा था एक तरफ तो मेरी माता जी थी जिनके लिए मैं कुछ भी कर सक थी और दूसरी तरफ अजय की मोहब्बत थी मुझे उन दोनों में से किसी एक ही कुर्बानी देनी थी तब मैंने सोचा कि मुझे अपनी मां की जिंदगी के लिए रजामंदी का इजहार कर दिया चाहिए

 मगर मैं क्या जानती थी कि मेरे साथ यह सब कुछ हो जाएगा आज जब मेरी अपने पति के चेहरे पर नजर पड़ी तो यह देखकर मेरी चीख निकल गई क्योंकि मेरे सामने मेरे पति के रूप में रवि था उसे इस वक्त अपने कमरे में देखकर मैं बुरी तरह से चिल्लाने लगी थी तभी वह अपनी जगह से उठा मेरे मुंह पर हाथ रखकर कहने लगा कि आधी रात को शोर मत मचाओ सब लोग सुनेंगे गर मैं मुलाजिम भी हूं और तुम्हारा आधी रात को यूं शोर मचाना मुनासिब नहीं है उसके बाद मैंने फूटकर रो पड़ी 

और उसे कहने लगी कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे करीब आने की तुम रात के इस वक्त मेरे कमरे में हो तो जानते हो अगर मेरे ओटी को पता चला तो क्या होगा वह खामोशी से मेरे चेहरे की ओर देखता रहा मैं मुसलसल उसे बुरा भला कह रही थी थी तब वह कमरे से बाहर चला गया था उसके बाद में अपने बिस्तर पर गिर करर रोती रही थी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि यह मेरे साथ क्या हुआ है अगर मेरे पति को पता चला तो ना जाने वह मेरे साथ क्या करेंगे और यह बात मैं रूपा को भी नहीं बता सकती थी

 यह मेरा ससुराल का मामला था और रूपा को बताने का मतलब था कि यह बात मेरे पति तक भी पहुंच सकती थी और मैं उनके दिल में अपने लिए किसी कसम का शक पैदा नहीं करना चाहती थी फिर माता जी ने मुझे कॉल की कि आज तबीयत खराब है आज तुम मेरे पास आकर रुक जाओ रूपा ने मुझे वह पैसे दिए जो उसने मेरी मां के इलाज के लिए मुझे देने का वादा किया था मैं वह पैसे लेकर घर आई तो माता जी की तबीयत सख्त खराब थी मैं उसी वक्त उन्हें लेकर बड़े अस्पताल में आ गई थी

 और अब चूंकि मेरे पास पैसे थे इसलिए मैं खुले दिल से माता जी का इलाज करवा रही थी रूपा ने मुझे कहा कि तुम जितने दिन उनके पास रहना चाहती हो तुम रह लो हम तुम्हारे साथ हैं हम इस बात पर तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे जब मैंने अपने पति से बात की तो उन्होंने भी मुझे हौसला दिया कहने लगे कि फिक्र मत करो हम सब तुम्हारे साथ हैं जब भी किसी चीज की जरूरत हो मुझे कॉल कर लेना रूपा और मेरे पति दोनों ही माताज को देखने के लिए आए थे मेरा दिल रूपा को देखकर उदास हो गया था

 मैं उसके गले से लगकर रोने लगी मैं बहुत परेशान थी इस वक्त में जिस तरह के हालात से गुजर रही थी उसके बारे में तो ना तो मैं अपनी मान को बता सकती थी और ना ही ूपा को बता सकते थे जब वह सब कुछ मुझे याद आते थे तो मैं खौफ से कांपती रहती थी अगर मेरे पति को पता चलता तो ना जाने वह मुझे अपनी जिंदगी से ही निकाल देते यह सोचना ही मेरे लिए महल था मगर अब मैंने सब कुछ भूलाकर अपनी सारी ध्यान केंद्रित कर दी थी उनका इलाज करवाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही थी 

डॉक्टर को भी मैंने इस बात के बारे में आगाह किया था कि मुझे पैसों की कोई कमी नहीं है मेरी मां जी का इलाज करने में कोई कोटा ही ना करें डॉक्टर्स ने कितने ही टेस्ट कर लिए और फिर मैं इस उम्मीद पर थी कि मेरी मां ठीक हो जाएंगी वह पहले की तरह मेरे साथ हंसी खुशी जिंदगी गुजारने लगेंगी मगर एक दिन डॉक्टर ने मुझे अपने कमरे में बिठाया मुझे पीने के लिए पहले पानी दिया और फिर मुझे कहने लगा कि हम आपसे माजर चाहते हैं

 यह बात बताते हुए मुझे भी तकलीफ हो रही है कि हम अपनी हर मुमकिन कोशिश करने के बावजूद भी आपकी मां जी को नहीं बचा पा रहे उनकी बीमारी अब बहुत आगे बढ़ चुकी है उनका कैंसर आखिरी स्टेज पर है अब उनके साथ इलाज नामुमकिन है अगर वक्त पर उनका इलाज करवा दिया जाता तो आप वह ठीक हो सकती थी उनके चांसेस थे मगर अब हम अपनी कोशिश कर रहे हैं मगर आपको हम झूठी उम्मीद नहीं दिलाना चाहते यह सुनकर मैं बहुत बुरी तरह से रो पड़ी थी खुद को बहुत मुश्किल से संभालकर मैं अपनी मां के सामने ही थी 

उन्हें मैंने किसी बात का एहसास नहीं होने दिया था मगर इसके बावजूद भी मैं अपनी पूरी कोशिश कर रही थी डॉक्टर्स को भी मैंने कहा था था कि आप अपनी हर मुमकिन कोशिश करें और मेरी मां जी को बचा ले दिन इसी तरह से बीतते जा रहे थे रूपा और मेरे पति दोनों ही माता जी को देखने के लिए आते थे रूपा मुझे हौसला देती और उसका साथ पाकर मैं व्यक्तिगत तौर पर बहाल जाती थी फिर दो से तीन बार मेरा जेठ भी मेरी मां जी को देखने के लिए आया था वह जब भी आता था मुझे मोहब्बत बड़ी नजरों से देखता रहता था

 

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 मेरी मां जी को देखने के लिए आने लगा था कितने-कितने देर तक वह उनके पास बैठा बातें करता रहता था मेरी मां जी उसके साथ बहल जाती थी वह उनके साथ इधर-उधर की बातें करता अब मुझे अंदाजा हो गया था कि वह बंदा दिल का बहुत ही अच्छा था वह गरीबों का एहसास करने वाला था और अब मेरे दिल में उसके लिए नरम जज्बात पैदा होने लगे थे मेरी मान भी उसे बहुत पसंद करती थी वह मुझे कहती थी कि अगर इसके साथ यह हादसा पेश ना आया होता तो इस जैसा कोई दूसरा इंसान ही नहीं था

 यह तो बहुत ही अच्छा इंसान है लोग तो जाहिरी शक्ल सूरत देखते हैं इस सब में इस बेचारे का तो कोई कसूर नहीं है यह तो इस हादसे के बाद से बदसूरत भी गया है मुझे भी दिल ही दिल में शर्मिंदगी महसूस होने लगी थी मैंने उसे इंसान को समझने की कोशिश ही नहीं की थी उसे देखकर ही यह फैसला कर लिया था कि जितना वह देखने में भयानक है उतना ही वह अंदर से भी बुरा है अब मेरी मां जी की तबीयत पहले से भी ज्यादा खराब रहने लगी थी अब उनके लिए अस्पताल में बहुत ज्यादा भागदौड़ करने पड़ती थी 

और यह सारी भागदौड़ रवि ही करता था मुझे कुछ पता नहीं चलता था कि कौन सा टेस्ट कहां से करवाना है किस डॉक्टर को कब बुलाना है और यह सारा कुछ रवि ही करता था और मैं दिल ही दिल में उसकी एहसान मान थी मगर इस सब से भी कुछ हासिल नहीं हुआ था मेरी मां जी एक दिन मुझे रोते हुए छोड़कर इस दुनिया से चले गए थे मैं अब बिखर के रह गई थी ऐसे वक्त में रूपा ही थी जिसने मुझे सहारा दिया था वह मुझे कहने लगी तुम्हारी मां जी बहुत अच्छी है और ईश्वर उन्हें अपने पास अच्छी जगह पर रखेगा

 तुम उनके लिए परेशान ना हुआ करो तुम्हें पूजा किया करो तुम्हें शांति मिलेगी मैं फिर ज्यादातर वक्त पूजा में गुजारने लगी थी ताकि मेरे दिल को इत्मीनान हो मेरे दिल को भी सुकून हो सके काफी दिन से मैं मां के घर में ही थी उनकी तस्वीरों को देखती रहती कितने-कितने घंटे उनके कमरे में बैठी रहती उनसे अकेले बातें करती रहती मुझे ऐसे लगने लगा था कि मैं पागल हो जागी ऐसे में रूपा और मेरे पति घर में आते वह मुझे हौसला देते साथ चलने के लिए कहते और मैं उन्हें कुछ दिन बाद आने का कहकर ताल दी करती थी

 मेरा जेठ भी रोजाना घर में आने लगा था कितने-कितने घंटे बैठा रहता था मेरे चेहरे की तरफ देखता रहता था मगर मैं उसकी अच्छाई की कयाल होने के बावजूद भी उसके चेहरे की तरफ नहीं देख पाती थी क्योंकि उसे देखकर मुझे खौफ का एहसास होता था वह इस चीज को समझते हुए भी मेरे पास काफी सारा समय गुजार कर वहां से चला जाता था अब मैंने रूपा में एक अजीब सी तब्दीली नोट की थी उसका जिस्म बड़ा बड़ा सा लगने लगा था और वह पहले से खुश रहने लगी थी मेरे पति भी बहुत खुश रहने लगे थे 

मैं जब रूपा से इस बात की वजह पूछती तो वह मुझे ताल दिया करती ना जाने मुझे ऐसा क्यों लगता था जैसे वह मुझसे कुछ छुपा रही थी कोई ऐसी बात थी जो मेरे सामने होते हुए भी मुझे नजर नहीं आ रही थी मगर वह बात किया था मुझे यह समझ ही नहीं आ रहा था अब जब काफी सारे दिन बीत गए तो मैंने वापस जाने के बारे में सोच लिया था फिर फैसला कर लिया था कि अब मुझे अपने घर जाना ही पड़ेगा

 मुझे दिल ही दिल में इस बात का भी दहक था कि मैंने शादी करने में जल्दी कर दी थी यह शादी तो मैंने अपनी मां की वजह से की थी मगर ऐसा करके भी उनकी जान नहीं बचा पाई थी अगर मैं आज रूपा के पति के साथ शादी ना करती तो आज फिर मैं अजय को हासिल कर सकती थी आज हम दोनों एक साथ जिंदगी गुजार सकते थे मगर अब तो ऐसा मुमकिन ही नहीं था और फिर कुछ दिन के बाद जब मैं घर ई तो पूजा ने मुझे कुछ दिल्ली से घर में वेलकम किया था अब फिर से रूटीन की जिंदगी शुरू हो गई थी

 अभी भी मेरे पति कमरे में आने के बाद लाइट ऑन ऑफ कर दिया करते थे मगर चूंकि उस दिन का खौफ मुझ में सवार था उसके बाद से मैं डर गई थी इसलिए मैंने अपने पति को साफ तौर पर कह दिया कि आज के बाद मैं कमरे के लाइट ऑन ऑफ नहीं करूंगी यह सुनकर वह हैरान रह गए तब मैंने उन्हें बताया कि मेरे साथ एक ऐसा हादसा गुजर चुका है जो मैं चाहकर भी आपको नहीं बता सकती मगर आपसे यह मेरी दरख्वास्त है कि आप मुझसे कभी पूछेंगे भी नहीं और फिर मेरे पति कमरे से बाहर चले गए थे

 उसके बाद टू दिन गुजर गए थे अभी तक मेरे पति रात को कमरे में नहीं आए इस बात पर मुझे खैरात होती थी कि आखिर उन्हें लाइट ऑन ऑफ करने की बात पर ऐतराज क्यों था मुझे दिल ही दिल में शक होने लगा था कि कहीं कुछ गलत तो नहीं था जो कुछ उस दिन मैंने देखा था वह क्या था मेरा जेठ उस दिन इस कमरे में क्या कर रहा था कहीं ऐसा तो नहीं कि रोजाना मेरा जेठ ही पति के बजाय मेरे कमरे में आ जाता हो यह सोचकर मैं कानों कान रह गई नहीं ऐसा नहीं हो सकता और फिर कुछ दिनों से मेरी तबीयत भी खराब रहने लगी थी 

मैं रूपा के साथ डॉक्टर के पास आई तो वह मुझे चेकअप करने के बाद रूपा से कहने लगी कि भगवान ने चाहा तो वह आप दोनों को बेटा अता करेगा और आपको देखकर साफ अंदाज हो रहा है कि आपका बेटा ही होगा यह सुनकर मेरा मुंह खुले का खुला रह गया था रूपा की तरफ देखा तो उसके चेहरे का रंग बदल गया था रूपा घबरा गई थी मैंने रूपा से पूछा कि डॉक्टर यह सब क्या कह रही है वह मुझे कहने लगी कि तुम घर चलो

 मैं तुम्हें घर जाकर सब बताती हूं जब तक हाम लोग घर आए मैं यही सब कुछ सोचते सोचते परेशान हो गई थी घर आने के बाद रूपा कहने लगी कि डॉक्टर को गलतफहमी हुई होगी वह ना जाने किस वजह से यह बात कह रही थी हालांकि वह जानती है कि मेरी शादी को तो इतने साल गुजर चुके हैं और अभी तक मेरे बच्चे नहीं हैं उसकी बात सुनकर खामोश हो गए थे कुछ दिनों के बाद से रूपा की तबीयत ऐसी हो गई थी जिससे मैं चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर सकती थी उसका पेट बाहर निकलने लगा था 

और उसकी खुशी देखकर अंदाजा होता था कि यकीनन उसकी बड़ी ख्वाहिश पूरी होने वाली थी शायद वह मां बनने वाली थी मगर वह मुझसे यह बात क्यों छुपा रही थी मुझे इस बात की कुछ समझ नहीं आ रही थी एक दिन मैंने उसे अपने पति से बात करते हुए सुन लिया तो मैं सीधा उनके कमरे में गई और उन्हें कहने लगी कि मुझे आखिर सच सच बताओ यह सब क्या ड्रामा है तुमने मुझसे यह बात क्यों छुपाई कि तुम मां बनने वाली हो अगर तुम्हें औलाद की खुशी मिलने वाली थी तो तुमने अपने पति की शादी मुझसे क्यों करवाई 

मेरी बात सुनकर वह दोनों एक दूसरे को देखने लगे तभी रूपा कहने लगी कि हम इससे ज्यादा वक्त तक सच नहीं छुपा सकते एक ना एक दिन तो उसे सच पता चलना ही था तो क्यों ना आज ही हम इसे सारी सच्चाई बता दें उनकी बात सुनकर मैं हैरान रह गई मुझे ऐसे लगने लगा था जैसे वह मुझे कोई ऐसी बात बताने वाली है जिसे सुनकर मुझे शदीद धज का लगेगा तब उन दोनों ने मुझे अपने पास बैठने को कहा जब मैं उनके सामने बैठ गई तो वह कहने लगे कि रवि छोटा सा था तो वह बहुत ही प्यारा बच्चा था

 वह घोड़ा चीता सा था उसे देखकर हर कोई उससे प्यार करता था एक दिन वह बापू के साथ मेले पर गया था और फिर बापू के हाथ से उसने अपना हाथ छुड़ा लिया था वह वहां से भागने लगा था वह एक जगह पर ठोकर खाकर गिर गया था उसका चेहरा जलते हुए तेल की कढ़ाई में जा लगा था जिसकी वजह से उसका चेहरा बुरी तरह से झुलस गया था उसी वक्त उसे डॉक्टर के पास लेकर जाया गया 

उसके चेहरे का इलाज करवाने की कोशिश की गई मगर उसका चेहरा ठीक नहीं हो सका डॉक्टर का कहना था कि वक्त गुजरने के साथ-साथ जब वह बड़ा हो जाएगा तो सर्जरी की मदद से उसका चेहरा ठीक किया जा सकता है यह सुनकर दोनों मां पिता हमो होश हो गए थे कि उनके पास डॉक्टर की बात मानने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा था मगर बड़ा होने पर भी जब उसे सर्जरी के लिए लेकर गया तो तब भी तमाम डॉक्टर्स ने मजरत कर ली थी उनका कहना था कि रवि का चेहरा अब कभी भी ठीक नहीं हो सकता 

सर्जरी करवाई गई तो उसका चेहरा मजीद बिगड़ सकता है और यह सुनकर हम सभी परेशान हो गए थे रवि का कहना था कि वह जैसा भी नजर आता है वह ठीक है उसे खुद को बदलने की जरूरत नहीं है मगर हर किसी की सोच ऐसी नहीं होती उसके लिए रिश्ता देखा जाता था तो लड़की उसे देखकर इंकार कर देती थी उसका रुपया पैसा मर्तबा कोई भी उसके काम नहीं आया था उसकी शक्लो सूरत को बुनियाद बनाकर लड़कियां उसे देखकर नफरत से मुंह मोड़ लिया करती थी यहां तक कि उसे एक लड़की से बेतहाशा प्रेम भी हो गया था

 वह लड़की के लिए जान भी दे सकता था मगर वह लड़की उसकी शक्ल देखने के लिए तैयार नहीं थी हमारी शादी पर ही उसने तुम्हें देखा तो तुम्हें देखते ही तुम पर दिल हार गया था वह तुमसे शादी करना चाहता था मगर हम लोग जानते थे कि तुम भी बाकी लड़कियों की तरह उसे देखकर ही नजर फेर लोगी तुम्हारे बारे में पता था कि तुम अजय को पसंद करती थी और यकीनन तुम दोनों शादी भी करने वाले थे मैं जब भी रूपा से तुम्हारे बारे में इस चीज के लिए कहता तो यह बताई कि तुम कभी भी नहीं मानोगे

 आप कोई और लड़की अपने भाई के लिए देख ले और फिर उसी दिन जब रूपा ने मुझे तुम्हारे मास्टर जी के बारे में बताया तो मेरे जहन में यह ख्याल आया कि मैंने रूपा से कहा कि वह तुमसे बात करें कि तुम्हें वह इस तरह से ट्रैप करने की कोशिश करें हो सकता है कि यूं तुम हमारी बातों में आ जाओ और ऐसा ही हुआ था जैसा मैंने सोचा था रूपा ने तुम्हें जज्बाती तौर पर ब्लैकमेल किया था क्योंकि इस वक्त तुम खुद भी जज्बाती हालत से गुजर रही थी

 तुम जजब में बहक कर यह फैसला कर गई थी कि तुम यह चाहने लगी थी क्या तुम अपनी सहेली को खुशी दो अगर रूपा की जिंदगी में तुम्हारी वजह से बाहर आ रही है तो तुम इसकी मदद करो मैंने रूपा को खुद ही इस बात से मना किया था कि वह तुमसे रवि के बजाय मेरा जिक्र करें और ऐसा ही हुआ क्योंकि इन दिनों हमें औलाद की खुशी की खबर मिल गई थी और फिर मैंने रूपा को खुद ही मना कर दिया कि वह तुम्हें यह बात ना बताए

 उसे दिन जब तुमने रवि को देख लिया तो तब हमें इस बात का डर था कि तुम शायद कभी दोबारा वापस ना आओ शायद तुम हकीकत तक पहुंच जाओ मगर तुम सच जानकर भी उससे अनजान रही थी अब मजीद तुमसे सच को नहीं छुपा सकते तुम्हारी शादी मुझसे नहीं बल्कि रवि के साथ हुई है और यह हकीकत तुम्हारी मां जी भी जानती थी यह सब सुनकर मेरा मुंह खुले का खुला रह गया था मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं आ रहा था कि मेरे साथ यह सब क्या हुआ था और मुझे रूपा पर गुस्सा था कि वह मुझे सच बता सकती थी

 मैं उस वक्त इस कदर मजबूर थी कि मैं कोई भी फैसला कर सकती थी उसके जेठ के साथ शादी कर सकती थी और फिर मैंने इस हकीकत को तो तस्लीम कर लिया था वैसे भी मैं यह जान गई थी कि जाहिरी शक्ल सूरत कुछ भी नहीं होता इंसान का दिल अच्छा होना चाहिए यकीनन मेरे पति का दिल बहुत अच्छा था वह मेरा बहुत ख्याल भी रखते थे और मेरी मां जी भी तो उन्हें पसंद करती थी यकीनन मेरी मां जी ने उनकी अच्छाई को देख लिया था आहिस्ता आहिस्ता मैंने इस रिश्ते को कबूल कर लिया 

तो मेरे पति इस बात पर बहुत खुश थे वह मेरा शुक्रिया अदा करते नहीं थकते थे कि मैंने उनकी जिंदगी में शामिल होकर उनकी जिंदगी में बहार लेकर आए हो रूपा भी मुझसे बहुत कुछ थी मैंने उसके फैसले की लाज रख ली थी अब हम दोनों एक ही घर में सहेलियों की तरह रहने लगे थे कुछ समय के बाद भगवान ने हम दोनों को बेटों से नवाज दिया था और हम दोनों इस बात पर खुश थे कि हमारी जिंदगी मुकम्मल हो गई थी मेरे जिंदगी में जो भी कमी थे वह दूर हो गई थे और अब मेरे दिल में किसी के साम का कोई मलाल नहीं था

 

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