ईमानदारी | Mast Ram Ki Hindi Kahani | Best Hindi Story | Emotional Hindi Story Story no-32

Mast Ram Ki Hindi Kahani : मेरा नाम शरद है हमारे मोहल्ले में एक बहुत बड़ी जूतों की दुकान खुली थी वहां पर सेल्स बॉय की जरूरत थी मैं काफी समय से नौकरी की तलाश कर रहा था और मुझे नौकरी नहीं मिली जब मैंने इस नौकरी के बारे में सुना तो मैं फौरन ही वहां पर नौकरी के लिए चला गया था क्योंकि डिग्री हासिल होने के बाद भी मुझे नौकरी नहीं मिल पा रही थी ना जाने कितनी जगह पर मैं नौकरी के लिए धक्के खा चुका था

 शायद मेरे नसीब में यही नौकरी लिखी हुई थी इसलिए मेरे पास यहां नौकरी करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था मैंने अपनी डिग्री को उठाकर रख दिया था क्योंकि इस समय वह मेरे किसी काम में नहीं आ रही थी इस जूतों की दुकान की मालिक एक औरत थी लेकिन मैंने उन्हें कभी देखा नहीं था

 जब एक दिन मैं गोदाम से नया माल निकालने के लिए गया तो मैंने जैसे ही जूतों के बॉक्स हटाए तो यह देखकर हैरान रह गया कि वहां पर तो एक खुफिया रास्ता बना हुआ था मैंने खामोशी से वहां पर जूतों के बॉक्स रख दिए थे लेकिन जैसे ही मैंने पीछे पलट कर देखा तो एक औरत खड़ी हुई थी मैं उसे देखकर घबरा गया था 

वह औरत जबरदस्ती मुझे उसी दरवाजे से अंदर ले गई थी लेकिन अंदर का नजारा देखकर तो मेरा दिल धकधक करने लगा था कि इस छोटी सी दुकान के अंदर तो मेरी जिंदगी एक आम आदमी के जैसी तो बिल्कुल भी नहीं थी मैं बहुत सारी प्रॉब्लम में घिरा हुआ था और उन सारी प्रॉब्लम का सामना मुझे अकेले ही करना था मेरे पास किसी और इंसान का सहारा मौजूद नहीं था क्योंकि मैं सात बहनों का इकलौता भाई था

 और उन सब बहनों की शादी की जिम्मेदार दारी मुझ पर ही थी मेरे सर पर ना तो पिता का साया था और ना ही मेरा साथ देने के लिए मेरा कोई भाई था इतनी बहनों का साथ होने के बावजूद भी मैं खुद को अकेला समझता था मैं तीन बहनों से छोटा और चार बहनों से बड़ा था एक-एक करके मेरे माता-पिता की भी मौत हो चुकी थी और वह हम सब भाई बहन को इस दुनिया में अकेला छोड़कर चले गए थे

 इन सारी बहनों की जिम्मेदारी अब मुझ पर आ गई थी मेरे मम्मी पापा का सपना था कि हम सब भाई बहन पढ़ लिखकर कामयाब बने बड़ी मेहनत करके हम सब पढ़ाई तो कर रहे थे मगर घर में बहुत परेशानी हो रही थी मेरी दो बड़ी बहनें तो स्कूल में टीचिंग कर रही थी लेकिन जॉब करने के दौरान सबसे बड़ी बहन ने भागकर एक लड़के के साथ शादी करी थी मुझे इस बात का बहुत अफसोस हुआ था

 अगर मेरी मम्मी या मेरे पापा इस दुनिया में होते तो जरूर वह अपनी बेटियों का ख्याल रखते क्योंकि उनका ध्यान रखने वाला घर में कोई भी नहीं था वह सारा दिन घर में अकेली रहती थी मुझे काम भी करना होता था तो मैं उनके साथ घर में रहकर उनका ध्यान नहीं रख सकता था मेरी बहन के भाग जाने की वजह से मोहल्ले में मेरी बहुत बदनामी हुई थी मैं बहुत टेंशन का शिकार था 

मैं एक फैक्ट्री में छोटी सी जॉब कर रहा था लेकिन वहां पर मेरी सैलरी बहुत कम थी और इसी वजह से मेरा गुजारा करना बहुत मुश्किल हो रहा था मैं अपनी डिग्रियां लेकर दूसरी जगह नौकरी तलाश कर रहा था अब मेरी एक बहन और मैं ही नौकरी कर रहे थे बाकी सारी बहनों का खर्चा भी हम दोनों बहन भाई ही उठाते थे मुझे याद है कि शुरू से ही हमारे घर घर के हालात पहले से ही ऐसे नहीं थे 

शुरू में जब मैं छोटा था तो उस समय मेरे पापा का अच्छा कारोबार चलता था और हमारे घर में बहुत खुशहाली हुआ करती थी लेकिन जब मेरे पापा बीमार हुए तो धीरे-धीरे करके वो खुशहाली कहीं गुम सी हो गई थी क्योंकि मेरे पापा बीमार रहने लगे थे और उनके इलाज में भी पैसा उठ रहा था और फिर हमारा परिवार इतना बड़ा था कि एक अकेले मेरे पापा के लिए हम सब को पालना बहुत मुश्किल हो रहा था

 हमारे लिए मेहनत मजदूरी करते-करते व बीमार पड़ गए थे घर के हालात अब ज्यादा बिगड़ गए तो मम्मी ने घर में ही रजाई का कवर सिलना शुरू कर दिए थे जिससे मम्मी के पास काफी पैसे आ जाते थे और उन्हीं पैसों से वह पापा का इलाज भी कर रही थी और साथ-साथ हम लोगों का भी खर्चा करती थी मैं अपने इर्द-गिर्द देखता तो यह सोचता था कि कुछ लोग कितने सुकून की जिंदगी गुजारते हैं कितने सुकून से अपने घरों में रहते हैं उन लोगों की जिंदगी बिल्कुल कंप्लीट होती है

फिर धीरे-धीरे मेरी मम्मी भी बीमार रहने लगी थी अपनी बीमारी से लड़ते लड़ते मेरे पापा इस दुनिया को छोड़कर जा चुके थे और पापा के जाने के छ महीने बाद ही मेरी मम्मी भी जिंदगी की जंग हार गई थी इस तरह एक ही साल में हम सबके सर से माता-पिता का साया उठ चुका था मैं इन सब बहनों का इकलौता भाई था इसलिए मैंने अपनी पढ़ाई पूरी होते ही नौकरी की तलाश करना शुरू कर दिया था 

मुझे बहुत तकलीफ होती थी और दुख भी होता था कि मेरे पास सिर्फ एक ही रास्ता था और बहुत सी बहनें थी उनमें से भी मेरी एक बहन तो मेरा भरोसा तोड़ छोड़कर चली गई थी मुझे समझ आ गया था कि जवान बहनों का भाई होना कोई आसान बात नहीं है मुझे अपने पापा से ज्यादा अपनी मम्मी की याद आती थी वह जब तक जिंदा थी उन्होंने गृहस्ती को अच्छी तरह से संभाल कर रखा था

 जिंदगी इसी तरह से गुजर रही थी मैं जगह-जगह अच्छी नौकरी की तलाश कर रहा था ताकि मैंने जितनी पढ़ाई की है उस हिसाब से मुझे अच्छी नौकरी मिल सके और मैं अपनी बहनों को पढ़ा सकूं क्योंकि मुझसे मेरी छोटी बहनें अभी पढ़ाई कर रही थी और इन सब बहनों में मेरी एक बहन ऐसी थी जिसे पढ़ाई लिखाई का बिल्कुल भी शौक नहीं था वह हम सबके लिए बहुत टेस्टी टेस्टी खाना बनाती थी

 मोहल्ले के ही कुछ लोगों का कहना था कि तुम्हारी दो बड़ी बहनें जवान हैं उनकी भी शादी कर दो ऐसा ना हो कि यह भी बड़ी बहन की तरह घर से भाग जाएं पर मैं उन लोगों को कैसे बताता कि अभी हमारा अपना गुजारा करना मुश्किल हो रहा है शादी करना कोई आसान बात नहीं होती मैं अपनी बहनों की शादी कैसे कर सकता हूं क्योंकि मैं तो खुद खाली हाथ हूं मुझे जितने पैसे मिलते हैं उतने पैसे एक महीने से पहले-पहले ही खत्म हो जाते हैं

 हम सबके लिए जिंदगी गुजारना बहुत मुश्किल हो रहा था मेरी एक बहन जिसे मेरी बहुत ज्यादा फिक्र रहती थी वह अभी तक नौकरी पर लगी हुई थी मगर मुझे उससे हमेशा डर लगा रहता था कि वह भी मेरी बहन की तरह ही भाग ना जाए लेकिन वह मुझे भरोसा दिलाती थी कि ऐसा कुछ नहीं होगा यही डर था कि मैंने अपनी बाकी बहनों को घर की चार दीवारी में बंद करके रखा हुआ था मेरी बहनें घर से बाहर नहीं निकल निकलती थी 

सिर्फ वही बहन निकलती थी जो नौकरी किया करती थी मैं बहुत परेशानी के हालात से गुजर रहा था हमारा कोई रिश्तेदार भी ऐसा नहीं था जो कि मेरी मदद कर सकता क्योंकि कभी-कभी बुरे समय में तो कोई भी अपना काम नहीं आता भगवान से हर रोज प्रार्थना करता था कि ना जाने मेरी किस्मत कब पलटेगी मुझे अपने माता-पिता की बहुत याद आती थी मुझे अब पता चला था कि घर को चलाना कितना मुश्किल काम होता है

 छोटी सी उम्र में ही मुझ पर घर की ढेर सारी जिम जिम्मेदारियां आ गई थी पूरे महीने की सैलरी घर का राशन भरने और छोटी बहनों की पढ़ाई की फीस देने में निकल जाती थी मेरे पास तो एक रुपया भी नहीं बचता था मैं पूरे महीने खाली जेब रहता था अगर मेरा किसी चीज को खरीदने का मन करता तो उसको खरीदने के लिए भी मेरे पास पैसे नहीं होते थे मेरी बहन जो टीचिंग के पैसे लेकर आती थी 

वो उससे लाइट का बिल और सिलेंडर खरीद लिया करती थी और फिर उसने घर में भी कुछ बच्चे ट्यूशन के लिए लगाए हुए थे वह बाकी के पैसे जोड़ लिया करती थी ताकि किसी इमरजेंसी के समय काम आ सके मेरी बहन बहुत समझदार थी मैं अपनी बहनों को बहुत प्यार करता था मगर मेरी जो बहन भाग गई थी मैंने उसके जाने के बाद कभी पलट कर नहीं देखा था क्योंकि मैं उससे बहुत नाराज था 

और हमेशा यही सोचता रहता था कि उसे अपने इकलौते भाई की कभी फिक्र नहीं हुई उसने नहीं सोचा कि वह चली जाएगी तो उसके भाई को लोगों की कितनी सारी बातें सुननी पड़ेंगी फिलहाल दिन इसी तरह से गुजर रहे थे मैं जो नौकरी कर रहा था उसको मैंने छोड़ दिया था क्योंकि वहां से मुझे प्रॉफिट नहीं हो रहा था वहां मुझे बहुत कम सैलरी मिलती थी मैंने उन लोगों से सैलरी बढ़ाने की बात की तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया था

 इसलिए मैंने वहां से नौकरी छोड़ दी और किसी दूसरी नौकरी की तलाश करने लगा था कि मुझे कहीं पर नौकरी मिल जाए और वहां पर मेरी सैलरी थोड़ी ज्यादा हो जाए जिससे मैं भी कुछ सेविंग्स कर सकूं पर ऐसा करना मेरे लिए नामुमकिन हो रहा था क्योंकि हर किसी पढ़े-लिखे इंसान के भाग्य में अच्छी नौकरी नहीं होती ये तो लक की बात होती है एक दिन मैं बड़ा परेशान अपने घर को आ रहा था 

पसीने से मेरे कपड़े भीग रहे थे गर्मी बहुत ज्यादा हो रही थी और गला भी प्यास से सूख रहा था आंखों में नमी थी और चेहरे पर उदासी थी कि अब कहां पर नौकरी करूं जो नौकरी थी उसको भी मैंने अपनी ईगो में आकर ठोकर मार दी थी जो पैसे आते थे अब वह भी आना बंद हो गए थे मुझे लगा था कि मैं अपनी डिग्रियां लेकर निकलूंगा तो मुझे नौकरी मिल जाएगी मगर मैं नाकाम रहा था इसीलिए उदास चेहरा बनाकर पैदल ही अपने घर को वापस आ रहा था

 तभी अचानक मुझे हमारे मोहल्ले में एक दुकान के बाहर एक बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ दिखा उस बोर्ड पर लिखा हुआ था कि जूतों के स्टोर पर कुछ लड़कों की जरूरत है यह जूतों की दुकान हमारे मोहल्ले में नई-नई खुली थी यह किसकी थी यह मैं नहीं जानता था क्योंकि मेरा ज्यादा मोहल्ले के लोगों के साथ उठना बैठना नहीं था मैं सिर्फ अपने काम से काम रखता था इसलिए मुझे मोहल्ले के लोगों की कोई खबर नहीं रहती थी जब मुझे इस बारे में पता चला कि इस जूतों की दुकान पर लड़कों की जरूरत थी

 तो मैंने सोच लिया कि इससे अच्छा काम मेरे लिए और क्या हो सकता है इस तरह से मैं अपने घर के करीब भी हो जाऊंगा और मुझे यहां पर पैसे भी थोड़े ज्यादा मिल जाएंगे मैंने सोच लिया था कि मैं इस दुकान के मालिक से ज्यादा सैलरी की बात करूंगा उनको अपनी परेशानी के बारे में बताऊंगा तो शायद वह तरस खाकर मुझे थोड़ी ज्यादा सैलरी दे देंगे यह काम मेरे लिए बिल्कुल परफेक्ट था 

मैंने अपनी डिग्रियों को घर जाकर उठाकर रख दिया था क्योंकि मैं समझ चुका था कि कभी-कभी हमारा ज्यादा पढ़ना लिखना भी हमारे काम नहीं आता इन डिग्रियों से मुझे जितनी उम्मीद थी आज ये मेरे किसी काम नहीं आ रही थी इसलिए मैं उस जूतों की दुकान पर बात करने के लिए चला गया था मुझे इस समय पैसों की बहुत जरूरत थी इसलिए मुझे कम से कम इतनी सैलरी तो मिल ही जाती कि मैं अपने घर का गुजारा कर लेता 

यही सोचते हुए मैंने जूतों के स्टोर पर जाकर बात की थी तो मुझे नौकरी मिल गई थी मैंने वहां पर काम करना शुरू कर दिया था मुझे वहां काम पर किसी दूसरी औरत ने रखा था जबकि उस औरत का यह कहना था कि जूतों के स्टोर के मालिक व नहीं बल्कि कोई दूसरी औरत है मुझे इस जूतों की दुकान पर काम करते हुए 15 दिन गुजर गए थे मगर मैंने अभी तक यहां की मालकिन को नहीं देखा था

 वह अभी तक अपनी दुकान पर नहीं आई थी वहां पर और लड़के भी काम करते थे इस जूतों की दुकान में अच्छी क्वालिटी के जूते रखे गए थे क्योंकि यहां का माल बहुत दूर से आता था इसीलिए बहुत सारे कस्टमर यहां से जूते खरीदने के लिए आते थे यहां पर कुछ सेल्स गर्ल्स भी थी और कुछ सेल्स बॉय भी थे सबको सैलरी भी वही औरत दिया करती थी जिसने मुझे इस नौकरी पर रखा था 

जबकि मालकिन से मुलाकात सिर्फ और सिर्फ इसी औरत की हुआ करती थी बाकी यहां पर काम करने वाले किसी भी लड़के या लड़की ने इस दुकान की मालकिन को नहीं देखा था मुझे वहां पर काम करते हुए काफी दिन गुजर गए थे वहां से मुझे अच्छी सैलरी मिल रही थी जिससे मैं अपने घर का खर्चा आसानी से उठा रहा था और मुझे ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती थी मैं दोपहर को खाना खाने के लिए अपने घर चला जाता था

 और एक घंटे में दुकान पर वापस आ जाता था इस दौरान में अपनी बहनों को भी चेक कर लेता था कि वह घर पर क्या कर रही हैं और क्या नहीं यह जूतों की दुकान बहुत बड़ी नहीं थी लेकिन इसके पीछे एक बहुत बड़ा गोदाम बना हुआ था सारा दिन मैं जूतों की दुकान पर काम करता और उसके बाद रात को अपने घर चला जाता था थोड़ी देर अपनी बहनों के साथ बातचीत करने के बाद मैं सो जाता था

 इस दुकान पर काम करने से मुझे बहुत फायदे हो रहे थे क्योंकि मुझ मुझे एडवांस में भी कुछ पैसे दे दिए गए थे जिससे मैंने घर में राशन भर लिया था और मेरी बहनें भी बेफिक्र हो गई थी मैं रात को सारे लड़कों के जाने के बाद ही अपने घर जाता था जिस औरत ने मुझे काम पर रखा था वह मुझसे कहने लगी कि तुम सबसे आखिर में यहां से जाते हो अगर तुम चाहो तो यहां पर ओवर टाइम भी कर सकते हो 

जिसके तुम्हें अलग से पैसे भी दिए जाएंगे मैं उसकी बात सुनकर खुश हो गया था क्योंकि उन्होंने बाकी लड़कों से यह बात नहीं कही थी यहां पर तीन लड़के और दो लड़ लड़कियां काम किया करती थी लड़कियां तो शाम के 5:00 बजे ही चली जाती थी लेकिन जो बाकी के दो लड़के थे वह ज्यादा मेहनत के काम नहीं करते थे और ना ही कस्टमर को ठीक से हैंडल कर पाते थे इसलिए उस औरत को सबसे ज्यादा भरोसा मुझ पर हो गया था

 मेरे लिए इससे अच्छी बात और कोई नहीं थी क्योंकि मैं मेहनत से पीछे नहीं था मैं अभी तक गोदाम में सिर्फ एक दो बार ही गया था त्यौहार का टाइम था और कस्टमर ज्यादा आ रहे थे इसलिए माल जल्दी-जल्दी खत्म हो रहा था इस दुकान पर अच्छे क्वालिटी के चप्पल और जूते बिकते थे लेडीज जेंट्स और बच्चों के भी इसलिए यहां पर हर तरह के लोग अपने लिए जूते खरीदने के लिए आते थे

 माल खत्म हो जाने की वजह से मैं गोदाम की तरफ चला गया था मेरे साथ काम करने वाले लड़कों ने बताया था कि गोदाम में हर तरह के साइज के जूते अवेलेबल हैं कुछ कस्टमर आए थे जिनको बड़े साइज के जूते चाहिए थे इसलिए मैं बड़े साइज के बॉक्सेस लेने के लिए आया था मैं वहां से जाकर बॉक्स उठा लाया था इससे पहले भी मैं गोदाम में ही जाता था ज्यादातर माल गोदाम में ही रखा जाता था

 क्योंकि दुकान में सिर्फ सिलेक्टेड पीस ही रखे जाते थे लेकिन आज स्टोर पर ज्यादा भीड़ होने की वजह से मेरा बार-बार गोदाम में आना जाना हो रहा था जब मैं बड़े साइज के जूतों के बॉक्स ढूंढ रहा था वह बॉक्स हटाते ही मैंने देखा कि वहां पर एक खुफिया दरवाजा बना हुआ था पहले तो मैं इस दरवाजे को देखकर डर गया था मैंने यही सोचा था हो सकता है कि इसके आगे भी गोदाम बना हुआ हो वहां पर भी कुछ सामान पड़ा हुआ हो 

लेकिन इस दरवाजे को खोलने की हिम्मत मैंने नहीं की थी और ना ही मैंने इसको खोलने की कोशिश की थी मैंने फौरन ही वह सारे जूतों के बॉक्स दरवाजे के आगे लगा दिए थे जिस तरह से पहले ही लगे हुए थे वहां पर सारे बॉक्स अपनी जगह पर रखकर मैं जैसे ही पलटा था तो यह देखकर हैरान रह गया कि मेरे पीछे एक अधेड़ उम्र की औरत मौजूद थी आज से पहले मैंने इस औरत को कभी नहीं देखा था

 वो कौन थी और यहां पर क्या कर रही थी मुझे कुछ नहीं पता था लेकिन मैं इस औरत से कुछ पूछने के काबिल नहीं था उसने मुझे घूर कर गुस्से से देखा मैं वहां से जाने लगा था तभी अचानक उसने मुझे रोक लिया मेरा हाथ पकड़कर उसने वह सारे बॉक्सेस जो मैंने इस दरवाजे के आगे रखे थे उसे हटाने लगी थी मैं उसकी सारी कार्यवाही खामोशी से खड़ा हुआ देख रहा था जब उसने सारे बॉक्स हटा दिए 

और दरवाजा खोला तो यह देखकर मैं हैरान रह गया कि दरवाजे के पीछे तो सीढ़ियां बनी हुई थी जो कि नीचे की बेसमेंट की तरफ जा रही थी वो जबरदस्ती मुझे अपने साथ सीढ़ियों से नीचे लेकर जाने लगी मैंने अपना हाथ उससे छुड़ाने की बहुत कोशिश की थी मैंने उससे कहा कि आप यह क्या कर रही हो

 और आप कौन हो मुझे कहां पर लेकर जा रही हो जबकि उसका कहना था कि खामोश रहो और मेरे साथ चलते रहो वह जबरदस्ती मुझे अपने साथ नीचे ले गई मैं तो सोच रहा था कि शायद इस दरवाजे के पीछे भी गोदाम बना हुआ होगा वहां पर भी जूतों की दुकान का ही हिस्सा मौजूद होगा लेकिन अंदर का नजारा देखकर तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे क्योंकि अंदर तो कोई सामान मौजूद ही नहीं था 

सीढ़ियां थी और इन सीढ़ियों से नीचे उतरकर बेसमेंट में जाकर ऐसा लग रहा था जैसे यह किसी का घर है व जितनी बड़ी जगह में था उतना ही खूबसूरत भी था थोड़ी देर तक तो मुझे अपनी आंखों पर विश्वास भी नहीं हो रहा था कि इस छोटे से दरवाजे के पीछे इतना खूबसूरत घर भी हो सकता है इस बेसमेंट में बहुत महंगा महंगा फर्नीचर और सामान रखा हुआ था इस बात का आईडिया मुझे बिल्कुल भी नहीं था

 और ना ही मैंने ऐसा कभी सोचा था इसलिए मैं यह सब देखकर बहुत हैरान हुआ था वह औरत मुझे अपने साथ एक कमरे में ले गई उसका कहना था कि वह मेरे बारे में सब कुछ जानती है स्टोर वाली औरत ने उसे मेरे बारे में सब कुछ बता दिया था कि किस तरह मजबूरी में आकर मैं यह नौकरी करता हूं और ज्यादा पैसों की खातिर सुबह को जल्दी और रात को देर से दुकान बंद करके यहां से अपने घर जाता हूं 

इस औरत का कहना था कि वह कोई और नहीं बल्कि इस जूतों के स्टोर की मालकिन है जहां मैं काम कर रहा था उसका कहना था कि मैंने अब तुम्हारे लिए काम बदल दिया है और तुम्हें मेरे बताए हुए काम से ज्यादा पैसे मिलेंगे काम तो तुम्हें अभी भी मेरे पास ही करना होगा लेकिन तुम्हें अब मेरे स्टोर में नहीं बल्कि मेरे घर में काम करना होगा मैं तो उसकी बात सुनकर हैरान रह गया था कि आखिर घर में रहने वाला काम कौन सा था

 मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह औरत क्या कहना चाहती है मैं यह समझा था कि शायद वह मुझे घर के कामों के लिए रख रही है पर मैं इतना भी मजबूर नहीं था कि लोगों के घरों की की साफ सफाई करता मैं पढ़ा लिखा था और मैं कोई नौकरी ही डिजर्व करता था जूते बेचने वाला काम मेरे लिए ठीक था 

मैं कभी भी इस घर में झाड़ू बर्तन नहीं कर सकता था क्योंकि यह काम मेरे लायक बिल्कुल भी नहीं था उसका कहना था कि तुम्हें यहां पर सुबह से लेकर रात तक की ड्यूटी करनी होगी जिसके तुम्हें ढेर सारे पैसे दिए जाएंगे जितनी सैलरी तुम्हें जूतों के स्टोर से मिल रही है उससे कहीं गुना ज्यादा सैलरी तुम्हें यहां पर ड्यूटी करने की मिलेगी मगर मैंने उस औरत से पूछा कि आखिर मुझे कैसी ड्यूटी करनी है

 तो वह कहने लगी कि घबराने की जरूरत नहीं है तुम्हें सिर्फ इस घर में सुबह से लेकर रात तक रहना है तुम्हारे लिए कोई काम नहीं होगा बस तुम्हें यहां पर एक कमरा दिया जाएगा और तुम्हें वहां पर रहना है उसके अलावा तुम्हारा कोई दूसरा काम नहीं होगा मैं तो यह बात सुनकर शॉक्ड रह गया था कि भला एक कमरे में रहने के लिए वोह मुझे इतने ढेर सारे पैसे देने के लिए क्यों तैयार थी

 मैंने सोचा कि पहले मैं एक दो दिन इस काम को करके देख लेता हूं कि आखिर मैटर क्या है मैं काम करने के लिए तैयार हो गया था क्योंकि इस समय मुझे पैसों की भी जरूरत थी इसलिए पहले मैंने उस औरत से एक दो दिन यहां पर काम करने के लिए कह दिया था मैंने कहा था कि अगर मुझे काम पसंद आया तभी मैं काम करूंगा वरना मैं जूतों की दुकान पर ही ठीक हूं 

वह मेरी बात पर राजी हो गई थी उस औरत का सिर्फ इतना कहना था कि तुम्हें यहां पर मेरे साथ रहना है तुम्हें यहां पर खाना भी दिया जाएगा और रहने की जगह भी दी जाएगी फिर भी मैंने उनसे दोती तीन दिन इस काम को समझने के लिए वक्त मांगा था इसलिए मैंने अगले दिन से ही यह काम शुरू कर दिया था मुझे पता नहीं था कि आखिर मुझे इस घर में रहने पर क्या काम करना होगा अगले दिन मैं जैसे ही वहां पहुंचा 

तो उसने जिस तरह का मुझे काम बताया था उसे देखकर तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी है जो मैं यहां आया था मुझे तो इस घर से दूर रहना चाहिए था मालकिन का कहना था कि मुझे कोई भी काम नहीं करना क्योंकि इस घर में बहुत सारे नौकर मौजूद हैं मुझे सिर्फ उनकी बेटी का ख्याल रखना है उससे दोस्ती करनी है उसके काम करने हैं मुझे तो यह काम बहुत ही अजीब लगा था

 मुझे लगा कि शायद उनकी बेटी छोटी होगी उसकी देखभाल के लिए वो मुझे यहां पर रख रही हैं लेकिन जैसे-जैसे वो मुझे अपनी बेटी के बारे में बता रही थी मैं यह सोच रहा था कि मुझे फौरन इस काम से इंकार कर देना चाहिए मालकिन का कहना था कि उनकी बेटी छोटी नहीं बल्कि जवान है कुछ सालों पहले उनकी बेटी एक हादसे में पागल हो गई थी मुझे उनकी बेटी का ख्याल रखना है 

उनकी बेटी को मुझसे किसी तरह की कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए मुझे उसकी हर जरूरत का ख्याल रखना है बाकी उसके कमरे की साफ-सफाई करने के लिए और खाने पीने के लिए घर में नौकरा नियां मौजूद हैं मुझे सिर्फ उसके साथ दोस्ती बढ़ाकर धीरे-धीरे उसके पागलपन को खत्म करना है मुझे बड़ी हैरानी हुई थी कि आखिर वह मालकिन इस तरह का काम मुझे क्यों दे रही थी वह अपनी जवान बेटी के काम के लिए किसी और को भी तो रख सकती थी

 मुझे अपने घर में लाने की क्या जरूरत थी उनकी सारी बातें सुनकर मैंने यही सोचा था कि मैं यह काम नहीं कर सकता क्या पता उनकी बेटी कैसी थी ऐसा भी तो हो सकता है कि वह किसी की जान की दुश्मन हो क्योंकि पागल इंसान तो कुछ भी कर सकता है मैंने उनसे कह दिया था कि मुझे यह काम पसंद नहीं है मैं यह काम नहीं कर सकता मैं जूतों की दुकान में काम करने के लिए तैयार हूं

 लेकिन आपके घर में नहीं जबकि उस औरत का कहना था कि अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुम्हें अपनी जूतों की दुकान से भी निकाल दूंगी और तुम नहीं जानते कि तुम्हें यहां से ज्यादा प्रॉफिट कहीं भी नहीं होगा इस काम को करने के तुम्हें ढेर सारे पैसे दिए जाएंगे मुझे इंकार करता हुआ देखकर उस औरत ने ₹5000000 अपने पर्स से निकालकर मेरे सामने रख दिए थे 

कहने लगी यह रहा तुम्हारा एडवांस इन पैसों को देखकर मेरी आंखों में चमक आ गई थी य औरत मुझे पैसों का लालच दे रही थी ऐसे में मैं भी उसकी बातों में आ गया था मुझे लगा कि मुझे उस औरत की ऑफर एक्सेप्ट कर लेनी चाहिए जो भी था मैं इस काम को करने के लिए तैयार हो गया था ना चाहते हुए भी सिर्फ पैसों की खातिर मुझे इसकी बेटी का ख्याल रखना था जब मैंने देखा कि सॉल्यूशन काफी बेहतर है

 तो मैंने उस औरत से हां कर दी थी हां करते ही वह मुझे अपने साथ अपनी बेटी से मिलवाने के लिए ले गई कोने की तरफ एक कमरा बना हुआ था वह मुझे वहां पर ले गई थी वहां जाकर मैंने देखा था कि उस कमरे में एक जवान लड़की बैठी हुई थी वह देखने में बहुत बदसूरत थी उसका रंग भी बिल्कुल काला था व तो मुझे मुझे कहीं से भी इस औरत की बेटी नहीं लग रही थी क्योंकि मालकिन की बेटी अपनी मां से बिल्कुल अलग थी

 वह एक तरफ डरी हुई बैठी थी जब मालकिन ने उसे बताया कि तुम्हारा दोस्त आ गया है आज से यह तुम्हारा ख्याल रखेगा मुझे देखकर उसने अपना मुंह मोड़ लिया था मैं मालकिन के साथ कमरे से बाहर आ गया था जब उन्होंने मुझे बताया था कि उनकी बेटी के नाम पर बहुत सारी प्रॉपर्टी है जो उसके पिता ने मरने से पहले अपनी बेटी के नाम कर दी थी लेकिन वह तो पागलपन की शिकार है

 उन्होंने अपनी बेटी का इलाज काफी सारे डॉक्टरों से भी करवाकर देख लिया डॉक्टर्स ने यही बताया कि आपकी बेटी गहरी डिप्रेशन में जा पहुंची है मेरी बेटी को किसी के साथ की जरूरत है उसके पागलपन की वजह से उसके सारे दोस्त भी उससे दूर हो चुके हैं इसीलिए मैं चाहती हूं कि तुम उससे दोस्ती करो और उसको ठीक कर दो काफी सारे लोग यह बात जानते हैं कि उसके पिता ने उसके नाम काफी सारी प्रॉपर्टी की हुई है

 इस वजह से लोग उसकी जान के दुश्मन बने हुए हैं इसलिए मैंने अपनी बेटी को यहां पर छुपा कर रखा हुआ है मेरी बेटी के बारे में यहां कोई भी नहीं जानता अगर तुम मेरे इस काम में मदद करोगे तो तुम्हारी बहुत मेहरबानी होगी मैंने भी उसे सच-सच अपनी लाइफ के बारे में बता दिया था कि मैं तुम्हारा ख्याल रखने के लिए किस वजह से राजी हुआ था जब मैंने उसे बताया था कि मेरी सात बहनें हैं

 और मेरे माता-पिता भी नहीं है मैं उन सबका बोझ अकेले ही उठा रहा हूं तो श्वेता को बहुत अफसोस हुआ था वह हैरान थी और मेरी तारीफ कर रही थी कि तुम बहुत अच्छे इंसान हो श्वेता धीरे-धीरे काफी बेहतर हो गई थी पर मुझे अब तक यह बात सता रही थी कि आखिर उसकी इस कंडीशन का जिम्मेदार कौन था हम दोनों को एक दूसरे की बहुत आदत हो गई थी क्योंकि धीरे-धीरे हम दोनों की दोस्ती को छ महीने गुजर गए थे

 श्वेता मुझे अच्छी लगने लगी थी उसका ख्याल रखना अब मुझे पसंद आता जा रहा था मेरे घर के हालात पूरी तरह से बदल गए थे मेरी बहनें भी बहुत खुश थी क्योंकि मैं दो बहनों की शादी और कर चुका था अब मेरी तीन बहनें बची थी जो की अभी पढ़ाई कर रही थी और उनकी पढ़ाई का खर्चा भी मैं उठा रहा था अब मुझे किसी बात की कोई टेंशन नहीं थी

 एक दिन मैंने श्वेता का अच्छा मूड देखकर उसके पास्ट के बारे में पूछा था मेरी बात सुनकर उसकी आंखों में आंसू आ गए थे मुझे लगा कि शायद वह अपने बारे में मुझे कुछ नहीं बताएगी पर उसने मुझे अपना बहुत अच्छा दोस्त मान लिया था इसलिए उसने मुझे सब कुछ बता दिया उसने बताया था कि जब वह कॉलेज में पढ़ रही थी तब उसकी मुलाकात कॉलेज के ही एक लड़के से हुई थी

 वह देखने में बहुत स्मार्ट था जो श्वेता को भी पसंद आ गया था श्वेता ने बताया था कि मैं दिल ही दिल में उसे पसंद करने लगी थी धीरे-धीरे मेरी उसके साथ दोस्ती बढ़ गई थी और फिर इस तरह से हम दोनों का अफेयर चलने लगा था हम दोनों एक दूसरे की मोहब्बत में काफी डूब गए थे वो लड़का मिडिल क्लास फैमिली से था श्वेता इस बात से हैरान थी कि वो लड़का उसे पसंद क्यों करता है और उसे प्यार क्यों करता है 

पर उसे लगा कि शायद प्यार अंधा होता है क्योंकि श्वेता बहुत ही मामूली सी शक्ल की लड़की थी हालांकि वह बदसूरत थी जिस वजह से उसके कॉलेज में काफी सारे लड़के-लड़कियां उसकी मजाक उड़ाया करते थे पर राहुल नाम का लड़का जो उससे मोहब्बत करने के दावे करता था उसकी बातों में श्वेता आ गई और फिर एक दिन श्वेता को पता चल गया था कि वह लड़का उसको सिर्फ उसकी प्रॉपर्टी की वजह से पसंद करता है

 लेकिन इस दौरान श्वेता उसके बहुत करीब आ गई थी जिसकी वजह से उन दोनों के बीच ऐसा रिश्ता बन गया था जिसे शायद कोई भी लड़की किसी लड़के को छोड़ने पर तैयार नहीं होती वो लड़का उसको अपनी बातों में लेकर उसकी इज्जत के साथ खेल चुका था और उसने श्वेता का वीडियो बनाने के बाद कॉलेज के सारे लड़कों को दिखा दिया जिससे श्वेता की हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी 

श्वेता उस इंसान से बदला लेना चाहती थी मगर जब वो गुस्से में कॉलेज से घर आ रही थी तब अचानक रास्ते में उसका एक्सीडेंट हो गया जिस वजह से श्वेता अपने दिमागी संतुलन खो चुकी थी और वो उस लड़की से भी बहुत प्यार करती थी इसलिए धीरे-धीरे वो पागल होने लगी थी उसके दिमाग पर अभी भी यही बात सवार थी कि कहीं वह लड़का उसको और ज्यादा बदनाम ना कर दे मगर अब काफी समय बीत चुका था

 अब वह लड़का कुछ नहीं कर सकता था उसे लग रहा था कि शायद श्वेता मर गई है क्योंकि श्वेता जब से पागल हुई थी तब से ही उसकी मां ने उसे घर से बाहर नहीं निकाला था क्योंकि श्वेता बाहर के लोगों को बहुत नुकसान पहुंचा रही थी मुझे श्वेता की कहानी सुनकर बहुत अफसोस हुआ था श्वेता की मां इस बात से बहुत खुश थी कि उनकी बेटी अब पूरी तरह से ठीक हो गई श्वेता की मां ने उस लड़ लड़के को जिसने श्वेता की ऐसी हालत की थी 

अरेस्ट करवा लिया था क्योंकि पैसे वाले लोग तो आसानी से कुछ भी करवा सकते हैं श्वेता के पास बहुत ज्यादा प्रॉपर्टी थी इसीलिए वह लड़का उसके पीछे पड़ा हुआ था और उसने अपनी बातों में लेकर उसके साथ यह सब कुछ गलत किया था वह चाहता था कि धोखे से श्वेता को अपनी बातों में लेकर उसकी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा लेगा मगर श्वेता को ऐसा होने से पहले ही उसकी सारी सच्चाई के बारे में सब कुछ पता चल गया था

 और फिर उसने श्वेता का वो वीडियो कॉले में वायरल कर दिया जिससे श्वेता पागलपन का शिकार हो गई थी और उसकी हालत ऐसी हो गई थी कि उसे हर इंसान बुरा लगने लगा था उसकी ऐसी हालत की वजह से श्वेता के सारे दोस्त भी उससे दूर हो गए थे श्वेता की मम्मी ने इसीलिए मुझे उसका ख्याल रखने के लिए रखा था कि मैं उसका दोस्त बन जाऊं और मेरे साथ रहने से वह हंसना बोलना सीख जाए 

और पुरानी वाली श्वेता बन जाए श्वेता की मम्मी मेरी बहुत शुक्रगुजार हो रही थी कि उनकी बेटी मेरी वजह से ठीक हो गई लेकिन फिर उन्होंने एक फैसला कर लिया था उन्होंने कहा था कि मैं अपनी बेटी की शादी तुम्हारे साथ करवाना चाहती हूं मैं उनकी बात पर चौक गया था मुझे लगा था कि शायद श्वेता मुझसे शादी करने के लिए तैयार नहीं होगी मैंने उनसे मना कर दिया था कि मैं श्वेता के साथ शादी नहीं कर सकता 

उन्हें लगा कि शायद उनकी बेटी बदसूरत है इसलिए मैं उससे शादी नहीं कर रहा हूं वह मुझे प्रॉपर्टी का लालच दे रही थी मैंने उनसे साफ इंकार कर दिया था कि मुझे आपकी प्रॉपर्टी से एक रुपया भी नहीं चाहिए क्योंकि मुझे जायदाद का लालच नहीं था मुझे सिर्फ और सिर्फ अच्छी दोस्त मिल गई थी यही मेरे लिए बहुत है मैंने उनसे कहा अब आपकी बेटी ठीक हो गई है 

मेरी आपकी बेटी के साथ दोस्ती हमेशा रहेगी मगर अब मैं पहले की तरह आपके जूतों की दुकान पर काम करना चाहता हूं आपकी कृपा से मेरी फैमिली के हालात काफी सुधर गए इसलिए मुझे अब ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं है मैं सिर्फ इतने पैसे अपने पास रखना चाहता हूं जिससे मेरी जरूरत पूरी हो सके इसलिए मुझे अपनी ही नौकरी करनी है जो मैं किया करता था हम दोनों की बात श्वेता सुन रही थी 

वह हम दोनों के बीच में आकर खड़ी हो गई और कहने लगी कि मैं तुमसे प्यार करती हूं शरद प्लीज तुम मुझे छोड़कर मत जाना मैं समझ गई हूं कि तुम बहुत अच्छे और शरीफ इंसान हो शायद तुम्हारे जैसा इंसान मुझे नहीं मिल सकता तुम चाहो तो मेरी पूरी प्रॉपर्टी ले लो मगर मुझसे शादी कर लो सच कहूं तो मैं भी श्वेता से प्यार करने लगा था क्योंकि मुझे उसके चेहरे से प्यार नहीं था

 मुझे उसके मन से प्यार था वो मन की बहुत साफ थी और बहुत भोली लड़की थी श्वेता की मम्मी भी इस बात से बहुत खुश थी कि मुझे दौलत का बिल्कुल भी लालच नहीं है और उनका कहना भी यही था कि मेरी बेटी के लिए तुमसे बेहतर कोई और रिश्ता नहीं हो सकता इसी तरह मेरी शादी श्वेता के साथ हो गई थी श्वेता के नाम पर जो कुछ भी था उसमें मैंने अपना कोई हिस्सा नहीं डाला था

 मुझे उससे कुछ नहीं चाहिए था मेरे लिए यही काफी था कि मेरी पत्नी एक अच्छी और समझदार भोली-भाली लड़की थी मैंने शादी के लिए हां कर दी थी और मालकिन ने हमारी शादी के लिए खूब धूमधाम से तैयारी की थी उन्होंने अपनी हैसियत के मुताबिक अपनी बेटी के लिए काफी कुछ किया था उनका कहना था कि मेरा भी इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है मेरा कोई बेटा भी नहीं है

 इसलिए मैं तुम्हें अपना बेटा मानती हूं श्वेता तो धीरे-धीरे मेरे प्यार में पागल हो गई थी क्योंकि वह बेचारी यह समझती थी कि शायद इस दुनिया में जितने भी लोग हैं वह सभी दौलत के लालची हैं मुझे उसकी दौलत से कोई लालच नहीं था इसलिए वह मुझे पसंद करती थी श्वेता को जब यह पता चला था कि मैंने उसकी मम्मी की जायदाद वाली ऑफर ठुकरा दी थी तो उसके दिल में मेरे लिए बहुत जगह बन गई थी

 मुझे तो कोई भी अच्छी और खूबसूरत लड़की मिल सकती थी मैं भी मन ही मन श्वेता को पसंद करने लगा था उसकी दौलत की वजह से नहीं उसके अच्छे होने की वजह से क्योंकि इस दुनिया में अमीर लड़कियां बहुत घमंडी होती हैं और ऐसी लड़कियां बहुत कम पाई जाती हैं जो प्यार में सीरियस हो आजकल लोगों ने प्यार को खेल बनाया हुआ है अब श्वेता की मम्मी ने मुझे उस जूतों की दुकान का मालिक बना दिया है

 मेरी श्वेता के साथ शादी हो चुकी है और वह विदा होकर मेरे घर पर आ गई हम सब खुशी-खुशी जिंदगी गुजार रहे हैं मेरी बहनें भी अपनी भाभी के आ जाने से बहुत खुश हैं श्वेता की मम्मी ने मुझे दहेज में अपने दो बंगले दिए जो कि हमारे ही शहर में बने हुए थे मुझे यह सब कुछ चाहिए ही नहीं था मगर उनका कहना था कि मेरी खुशी है मैं तुम्हारे लिए जितना करूं उतना कम है 

क्योंकि मेरी बेटी को बर्दाश्त करना हर किसी के बस की बात नहीं थी तुमने ने मुझे मेरी बेटी वापस लौटा दी तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया मैं अपनी पत्नी के साथ खुशी-खुशी जिंदगी गुजार रहा हूं मेरी बहने भी खुश हैं कि उनके भाई ने सारी जिंदगी जितनी मेहनत की और आज यही वजह है कि भगवान ने मुझे उसका फल दे दिया आज मेरे पास किसी चीज की कोई कमी नहीं है क्योंकि मैंने कभी भी इंसान को पैसे के तराजू में नहीं तोला था 

मेरी नजर में इंसान की अहमियत थी उसकी फीलिंग्लेस की कमी की मैं तो आज भी इस बात पर अफसोस में हूं कि जब मैंने पहली बार श्वेता को देखा था तो मेरे दिल में ख्याल आया था कि वह कितनी बदसूरत है पर धीरे-धीरे उसके साथ रहते हुए मुझे पता चला कि उसके साथ बहुत गलत हुआ था जबकि वह तो एक बहुत अच्छी इंसान है मेरा यह मानना है कि जिसका दिल सबसे खूबसूरत हो वह दुनिया का सबसे खूबसूरत इंसान होता है

 और मेरी हमसफर जो लड़की बनी है वह दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की है आज मुझे अपने भाग्य पर खुशी होती है कि शायद श्वेता की जैसी हम मु सफर मुझे कभी नहीं मिल सकती थी वह अच्छी पत्नी होने के साथ-साथ एक अच्छी ग्रहणी भी साबित हुई है जिसने मेरी बहनों को बहुत प्यार दिया और मेरे घर को अपनी खुशहाल कदमों से रोशन कर दिया वह भी मेरी बातों को सुनती थी और समझती थी मैं उससे बहुत प्यार करता हूं और हम दोनों पति-पत्नी एक दूसरे के साथ अब खुशी-खुशी जिंदगी गुजार रहे हैं 

इसलिए कहते हैं कि अच्छे और ईमानदार इंसान को उसकी मेहनत का फल जिंदगी में कहीं ना कहीं मिलकर ही रहता है आप लोग भी हमें हमेशा ईमानदारी से ही काम कीजिए कभी किसी का भरोसा ना तोड़े और कभी भी ज्यादा के लालच में ना आए दोस्तों उम्मीद करती हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी

 

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