सच्ची मोहब्बत। Mastram Hindi Stories | Best Hindi Story | Moral Hindi Story | Hindi Story

Mastram Hindi Stories : मेरा नाम कीर्ति है मैं आज अपनी इस कहानी से उन सारी लड़कियों को यह मैसेज देना चाहती हूं जो हमेशा प्यार में धोखा खाती हैं वह जरूर मेरी यह कहानी सुने क्योंकि हर लड़की को पता होना चाहिए कि अगर वह अपनी जिंदगी आजादी से गुजारना चाहती है तो किस हिसाब से गुजारे और आजाद ख्याल रखने वाली लड़कियां हमेशा किसी ऐसे इंसान के चंगुल में फंस जाती हैं जिसके चंगुल से निकलना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है

जी हां मैं अपने मा माता-पिता की इकलौती और लाडली बेटी थी मेरे माता-पिता मुझसे बहुत प्यार करते थे उन्होंने मेरे हर शौक को पूरा किया था मगर मेरा एक शौक था जिसको वह पूरा नहीं करते थे वह शौक यह था कि मेरे माता-पिता ने कभी मुझे आजादी नहीं दी थी मुझे हर तरह का कपड़ा पहनने की परमिशन दी जाती थी मगर सिर्फ घर के अंदर मैं अगर कहीं घूमने जाती थी तो सिर्फ अपनी फैमिली के साथ मैं अगर अपने स्कूल और कॉलेज जाती थी

तो मेरे पापा ही मुझे लेने आते थे और मेरे पापा ही मुझे छोड़ ने जाते थे यह सब मेरे माता-पिता का प्यार था वह मेरा ख्याल रखना चाहते थे मगर मैं कभी उनके इस प्यार को समझ नहीं पाई थी बल्कि मुझे तो ऐसा लगता था जैसे मेरे माता-पिता मुझे कभी आजादी नहीं देना चाहते और उनका यह प्यार भी सिर्फ दिखावा है मेरे मम्मी पापा की जब शादी हुई थी तब मेरे दादा-दादी जिंदा थे मेरे पापा एक बहुत बड़े साइंटिस्ट थे

भगवान की कृपा से हम लोगों के पास सब कुछ था कभी किसी चीज की कमी नहीं हुई थी मेरी दादी पुराने ख्याल रखने वाली और औरत थी इसलिए जब मेरी मम्मी के पापा के साथ शादी हुई थी तो वह शादी के 3 महीने बाद ही मेरी मम्मी पर दबाव डालने लगी थी कि अभी तक उन्हें कोई खुशखबरी क्यों नहीं है लेकिन यह सब कुछ किसी औरत के अपने हाथ में नहीं होता फिर भी मेरी दादी को बस घर के अंदर बच्चे की किलकारी सुनने की बेचैनी हो रही थी

फिर हार कर मेरी मम्मी ने अपनी शादी के पांचवें महीने में ही डॉक्टर का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया था डॉक्टर ने मेरी मम्मी को साफ-साफ बता दिया था कि आपके अंदर कोई कमी नहीं है और ना ही आप आपके हस्बैंड में कोई कमी है बस भगवान की तरफ से ही देर है टेंशन ना ले जल्दी ही आप प्रेग्नेंट हो जाएंगी लेकिन दादी ने मेरी मम्मी का दिमाग खराब करके रखा हुआ था जिसकी वजह से मेरी मम्मी दिन रात प्रार्थना करती रहती थी कि उनके यहां बच्चा हो जाए

जिससे दादी मेरी मम्मी का पीछा छोड़ दे दादी की कलवी कड़वी बातें सुनते सुनते मेरी मम्मी की शादी के 2 साल गुजर गए थे दादी कहती थी कि मैं अपने बेटे की शादी किसी दूसरी लड़की के साथ करवा दूंगी तुम अभी तक मेरे बेटे को एक बच्चा तक नहीं दे सकी हो मेरी मम्मी दादी की सारी बातों को खामोशी से बर्दाश्त करती थी

जबकि पापा भी दादी को समझाया करते थे कि भगवान की तरफ से ही देर है जब भगवान चाहेगा तो हमारी गोद भर जाएगी दादी इसी तरह से हंगामा करते-करते एक दिन इस दुनिया को छोड़कर चली गई और उनको अपने पोता पोती की शक्ल देखनी भी नसीब नहीं हुई दादी के पीछे-पीछे दादाजी भी चल बसे थे क्योंकि दादी के मरने के बाद दादाजी बीमार रहने लगे थे और इस तरह घर में मेरे मम्मी पापा अकेले रह गए थे

मेरी मम्मी की जिंदगी अब कुछ सुकून से हुई थी क्योंकि उन्हें बातें सुनाने वाली दादी इस दुनिया से जा चुकी थी पर फिर उन लोगों की जिंदगी में सुकून के साथ-साथ एक बहुत बड़ी खुशखबरी भी आ गई थी यह खबर जब मेरी मम्मी ने पापा को सुनाई तो उन दोनों की ही जमीन पर पैर नहीं टिक रहे थे घर में इतनी सारी खुशियां मनाई जा रही थी कि आसपास के लोग भी चौक गए थे ऐसा इसलिए था क्योंकि मैं इस दुनिया में आने वाली थी

और मेरे मम्मी पापा धूमधाम से मेरे आने की तैयारी कर रहे थे मेरे दादी ने मेरी मम्मी के साथ बच्चा ना होने पर बहुत गलत बिहेव रखा था शायद भगवान ने उनको इसलिए अपने पास जल्दी बुला लिया था क्योंकि वह मेरी दादी को उनके पोता पोती की शक्ल दिखाना ही नहीं चाहते थे मेरी मम्मी के पूरे नौ महीने बहुत सुकून के साथ गुजरे थे क्योंकि मेरे पापा ने उनका बहुत-बहुत ख्याल रखा था वह दोनों ही बहुत खुश थे

और अपने आने वाले बच्चों के बारे में सोच सोचकर नए-नए सपने बुनने लगे थे और फिर फाइनली मेरी मम्मी के नौ महीने पूरे होने के बाद मैं मैंने इस दुनिया में कदम रखा था मेरे पापा बहुत खुश हुए थे कि भगवान ने उन्हें एक प्यारी सी बेटी दी है मैं पहली औलाद थी इसलिए मेरे मम्मी पापा को इस बात से कोई प्रॉब्लम नहीं थी कि उनका बेटा हो या बेटी वह दोनों को ही खुले दिल के साथ एक्सेप्ट करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे उन्हें तो बस अपना बच्चा चाहिए था

मुझे देख देखकर मेरे मम्मी पापा हमेशा मेरे फ्यूचर के सपने देखते रहते थे आखिरकार मैं उनकी शादी के पूरे 3 साल बाद हुई थी मैं बहुत प्यारी थी मेरे मम्मी पापा ने मेरे पह पहले बर्थडे को भी खूब धूमधाम के साथ सेलिब्रेट किया था फिर जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई तो अपने मम्मी पापा को खूब नखरे दिखाती थी मैं जानती थी कि मेरा हर नखरा मेरी हर ख्वाहिश पूरी की जाती है

उन दोनों ने मेरी परवरिश इस तरह से की थी कि कभी मुझे खरोच तक नहीं आने दी थी फिर जब मैं बड़ी हुई और मेरे स्कूल में एडमिशन करवाया गया तो मेरे मम्मी पापा बहुत उदास हो गए थे ऐसा इसलिए था क्योंकि वह अपने आप से ज्यादा किसी दूसरे पर भरोसा नहीं कर सकते थे क्योंकि वह अपनी बेटी को लेकर बहुत सीरियस थे मेरे पापा ने शहर के सबसे बेस्ट स्कूल में मेरा एडमिशन करवाया था और वहां पर दो गार्ड्स भी देखरेख के लिए रखे हुए थे

मेरे बापा गार्ड्स के साथ खुद मुझे स्कूल छोड़ने के लिए जाते थे और स्कूल की छुट्टी के टाइम पर खुद ही मुझे स्कूल से घर लेकर आते थे मैं अगर किसी बच्चे के साथ खेलती थी तो वह मुझे किसी के साथ खेलने भी नहीं देते थे उनका कहना था कि बेटा आजकल किसी का कोई भरोसा नहीं है तुम सिर्फ अपने घर में ही खेला करो जब से मैं पैदा हुई थी मेरे पापा ने घर की सिक्योरिटी पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ा दी थी उस समय मैं छोटी थी

इसलिए सिक्योरिटी कैद आजादी ना मिलना इन सारी चीजों का मतलब मैं नहीं जानती थी फिर मैं बड़ी हुई और मेरा स्कूल कंप्लीट हो चुका था इसलिए मेरा एडमिशन शहर के सबसे बेस्ट कॉलेज में करवाया गया था मैं जिस कॉलेज में पढ़ती थी वहां पर सारे ही अमीर बच्चे पढ़ने के लिए आते थे जिनके फादर बिजनेसमैन होते थे डॉक्टर होते थे या फिर पुलिस इंस्पेक्टर होते थे या फिर एक्टर्स होते थे स्कूल में भी मेरी किसी किसी के साथ कोई फ्रेंडशिप नहीं थी

क्योंकि मेरे मम्मी पापा ने हमेशा मुझे यही समझाया था कि किसी से फालतू बातचीत करने की जरूरत नहीं है स्कूल जाती हो तो सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया करो मैं भोली-भाली मासूम सी लड़की थी बाहर की दुनिया को ज्यादा नहीं जानती थी इसलिए मैं सिर्फ अपने स्कूल की पढ़ाई पर ही ध्यान दिया करती थी मगर अब मैं कॉलेज में आ चुकी थी कॉलेज की लाइफ स्कूल की लाइफ से बहुत अलग थी मैं भले ही कॉलेज में भी किसी से बातचीत नहीं करती थी

लेकिन मैंने देखा था कि कॉलेज के लड़के-लड़कियां ग्रुप बनाकर बैठ जाते थे और एक दूसरे के साथ खूब हंसी मजाक करते थे और बातें करते थे एक मैं ही थी जिसकी दोस्ती भी सिर्फ बुक्स के साथ ही होती थी और जो बातचीत भी सिर्फ बुक्स के साथ ही किया करती थी मुझे उन लोगों की लाइफ अपनी लाइफ से बहुत डिफरेंट लगती थी मेरा मन करता था कि मैं भी इन लोगों की तरह फ्रेंड सर्कल बनाऊं और अपने फ्रेंड्स के साथ खूब हंसी मजाक करूं अपनी लाइफ को एंजॉय करूं

मगर मैं ऐसा नहीं कर सकती थी क्योंकि मैं जहां भी जाती थी मेरे गार्ड्स मेरे पीछे-पीछे जाते थे मेरे पापा ने जिस तरह से स्कूल वालों से गार्ड्स को साथ लाने की परमिशन ले ली थी इसी तरह से कॉलेज वालों से भी परमिशन ली हुई थी क्योंकि कॉलेज में भी जब मेरी क्लासेस होती थी तो गार्ड्स प्रोफेसर के दाएं बाएं खड़े हो जाते थे

कुछ प्रोफेसर्स की तो गार्ड से भी बहस हो जाती थी क्योंकि कुछ प्रोफेसर्स को यह बात बर्दाश्त नहीं होती थी कि आखिर कॉलेज में गार्ड्स रखने की परमिशन क्यों दी हुई है आखिर कॉलेज में हजारों के हिसाब से स्टूडेंट्स पढ़ते हैं लेकिन मेरे पापा एक बहुत अमीर आदमी थे पैसे की ताकत से कुछ भी करवा सकते थे कॉलेज में क्लास के टाइम पर मुझे कुछ स्टूडेंट्स के सामने बहुत एंबेरेसमेंट मेरी मजाक उड़ाया करते थे

कुछ लड़कियां तो कहती थी कि लड़की बड़ी अजीब है इसकी लाइफ तो गार्ड्स की नजरों में रहकर ही गुजर रही है यह वॉशरूम जाती होगी तब भी इसके साथ गार्ड साथ में ही जाते होंगे यह कहकर व लड़कियां खूब हंसा करती थी कई दिन हो गए थे इस नए कॉलेज में आने के बाद हर दिन मेरी कोई ना कोई किसी ना किसी बात पर मजाक उड़ाया करता था मैं इन सारी चीजों से तंग आ गई थी इसलिए मैंने घर आकर अपने पापा को बोल दिया था कि मुझे गार्ड्स नहीं चाहिए

मेरे पापा कहते थे कि हमें तुम्हारी फिक्र रहती है हम नहीं चाहते कि तुम्हें किसी तरह का कोई नुकसान पहुंचे बस तुम्हारी सिक्योरिटी के लिए हमने गार्ड्स रखे हुए हैं मैंने अपने पापा से कहा था पापा इन गार्ड्स की वजह से मेरी कॉलेज में बहुत मजाक बनती है हालांकि जिस कॉलेज में मैं पढ़ने के लिए जाती हूं वहां पर बहुत सारे अमीर लोगों के बच्चे आते हैं किसी के साथ भी गार्ड्स नहीं होते सिर्फ मेरे साथ ही होते हैं मैं तो कॉलेज की एक ऐसी फेमस लड़की बन गई हूं

जिसके कॉलेज में कदम रखते ही लोग मजाक बनाना शुरू कर देते हैं कि आ गई कॉलेज की सेलिब्रिटी और उनके गार्ड्स मुझे बहुत बुरा लगता है जब मुझे शर्मिंदा होते हुए कॉलेज के स्टूडेंट की मजाक का सामना करना पड़ता है बस यह मेरी जिद्द है कि कल से कॉलेज मेरे साथ गार्ड्स नहीं जाएंगे और अगर आप लोगों ने मेरी बात नहीं मानी तो मैं कॉलेज ही नहीं जाऊंगी मेरे मम्मी पापा को लगता था यह जद मेरी सिर्फ थोड़ी ही देर की है लेकिन वह नहीं जानते थे

कि मैंने ठान लिया था कि मेरे साथ कॉलेज में गार्ड्स नहीं जाएंगे सारा दिन मैं अपने कमरे से बाहर नहीं निकली थी और ना ही मैंने रात का खाना खाया था जब मेरे मम्मी पापा मुझे मनाने के लिए मेरे रूम में आए तो उन लोगों ने मुझसे कहा था कि अपनी जिद खत्म कर दो हम चाहते हैं कि हमारी बेटी हमेशा सुरक्षित रहे हम सिर्फ गार्ड्स को इसलिए तुम्हारे साथ भेजते हैं मगर तुम हो कि अपनी जिद करके बैठ गई हो

लेकिन फिर जब भी मैंने किसी की बात नहीं मानी तो हार कर मेरे पापा को गार्ड्स की छुट्टी करनी पड़ गई थी अगले दिन जब मैं अपने पापा के साथ कॉलेज गई थी तो अकेले ही मैंने कॉलेज के अंदर एंटर किया था मुझे देखकर कॉलेज के काफी सारे स्टूडेंट हैरान हुए थे लेकिन मैं फिर भी अकेली ही रहती थी अब मेरा मजाक बनना तो कम हो गया था मेरा मन करता था कि मेरे भी फ्रेंड्स हो और मैं भी अपने दिल की हर बात अपने फ्रेंड से कर सकूं

मैं किसी भी तरह कॉलेज की लड़कियों से दोस्ती करना चाहती थी लेकिन मेरे पापा ने मुझे सख्ती से मना किया हुआ था कि तुम्हें कॉलेज में ना किसी लड़की से ज्यादा बात करनी है और लड़ लड़को से तो बिल्कुल भी बात नहीं करनी है बल्कि लड़कों से हमेशा दूरी बनाए रखना एक दिन मेरे पापा के फ्रेंड के बेटे की शादी थी हमें वहां पर शादी अटेंड करने के लिए जाना था हम लोग तैयार होकर घर से शादी में जाने के लिए निकल गए थे

जब हम लोग वहां शादी में गए तो मैं अपनी मम्मी के साथ ही बैठी हुई थी क्योंकि मैं हर जगह ज्यादातर अपनी मम्मी के साथ ही जाया करती थी मेरी मम्मी ही मुझे लोगों के बारे में बताया करती थी कि यह कौन-कौन है मैं किसी को भी ज्यादा नहीं जानती थी क्योंकि हमारे घर पर ना तो कोई ज्यादा आता था और ना ही हम ही ज्यादा किसी के घर पर जाते थे हम लोग एक तरफ बैठे हुए थे जब मम्मी ने मुझसे कहा कि मैं अभी वॉशरूम होकर आती हूं

तुम यहीं बैठो यहां से हिलना नहीं अपनी मम्मी की बात पर मैं उसी जगह पर बैठी रह गई थी जहां पर वह मुझे छोड़ कर गई थी मैंने नोटिस किया था कि शादी में एक लड़का था जो मुझे काफी देर से लगातार देख रहा था अब जब मेरी मम्मी मेरे पास से जा चुकी थी तो वह लड़का मुझे अकेला देखकर मुझसे बातचीत करने के लिए मेरे करीब आया था जब अचानक गार्ड्स ने उसे मुझसे बात करते हुए देख लिया

और जाकर मेरे पापा से शिकायत लगा दी गार्ड्स मेरे साथ कॉलेज तो नहीं जा रहे थे उसके अलावा हम लोग कहीं भी जाते थे तो वह अभी भी हमारे साथ ही थे व लड़का सिर्फ मेरे करीब आकर खड़ा ही हुआ था उसने मुझसे कोई बात करी भी नहीं थी मेरे पापा ने आते ही गार्ड्स को इशारा किया और गार्ड्स ने उसको गिरेबान से पकड़कर धक्के देना शुरू कर दिया पता चला था कि वह लड़का दूल्हे का दोस्त है

और अपने फ्रेंड की शादी अटेंड करने के लिए इस फंक्शन में आया हुआ है को लगा था कि वह लड़का मुझे छेल रहा है मगर उसने तो मेरे करीब आने के बाद मुझसे कोई बात ही नहीं की थी हालांकि वह मुझे देख रहा था इसके अलावा उसने कुछ भी नहीं किया था अच्छे खासे फंक्शन में काफी हंगामा हो चुका था क्योंकि गार्ड्स ने उस लड़की की अच्छी खासी इंसल्ट कर दी थी वह लड़का खामोशी से वहां से चला गया था मैं बार-बार सबको समझाने की कोशिश कर रही थी कि उसने मेरे साथ कोई गलत हरकत नहीं की है मगर किसी ने भी मेरी बात पर यकीन नहीं किया था

मम्मी वॉशरूम से वापस आई तो पापा ने उन्हें भी बहुत डांट लगाई थी और कहा था कि तुम्हें अपनी बेटी की परवा नहीं है तुम उसे अकेला छोड़कर कैसे जा सकती हो तुम्हें पता है कि एक लड़का उसके करीब आ गया था जिस बात पर मेरी मम्मी सबके सामने बहुत शर्मिंदा हुई थी और उन्होंने अपनी गलती एक्सेप्ट कर ली थी कि वोह आगे से अपनी बेटी को कभी अकेला नहीं छोड़ें मुझे इस सबसे बहुत गुस्सा आ चुका था और मैं बिना खाना खाए ही मम्मी पापा के साथ फंक्शन से घर वापस आ गई थी

मैंने घर आकर बहुत हंगामा किया था ना जाने हर जगह मुझ पर इतनी पहरे क्यों लगाए जाते हैं मुझे फ्रीडम क्यों नहीं दिया जाता मैं खुलकर सांस तक नहीं ले सकती मैंने मम्मी पापा से कहा वह लड़का सिर्फ मेरे करीब आकर खड़ा हुआ था उसने मेरे साथ कोई गलत हरकत नहीं की थी पता नहीं आप लोगों ने उस बेचारे की इतनी इंसल्ट क्यों कर दी आप लोग हर जगह मुझे शर्मिंदा करवाते हो कभी कॉलेज में तो आज शादी में भी आप लोगों ने मुझे शर्मिंदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है

ना तो आप लोग मुझे किसी से बात करने देते हो ना कहीं आने जाने देते हो आखिर आप लोग चाहते क्या हो आज मुझे इतना गुस्सा आ रहा था कि मैंने अपने मम्मी पापा को एक बहुत बड़ी बात कह दी थी जिसकी वजह से उन लोगों के दिल पर ठेस पहुंची थी मैंने उनसे कहा था अगर आप लोगों को अपनी बेटी से इतना ही डर लगता है तो फिर आप लोगों ने मुझे पैदा ही क्यों किया था मुझे इस दुनिया में आने ही नहीं देते फिर आप लोगों को घर में इतनी सिक्योरिटी लगाने की और अपनी बेटी पर इतने पहरे लगाने की भी जरूरत नहीं होती

यह कहकर मैं रोती हुए अपने कमरे में आ गई थी जबकि मेरे मम्मी पापा मेरी आंखों में आंसू नहीं देख सकते थे मैं बहुत रोई थी और मैंने ठान लिया था कि कल कॉलेज में जाकर मैं खुद ही कॉलेज के लड़कियों से बातचीत करना शुरू करूंगी और उनसे फ्रेंडशिप आगे बढ़ाऊ लेकिन मुझे साथ ही साथ अपनी गलती पर पछतावा भी हो रहा था कि आज मैंने अपने मम्मी पापा के साथ अच्छी खासी बदतमीजी कर ली है मुझे उनकी फीलिंग्लेस जाने के लिए तैयार होने लगी

तो मैं अपने मम्मी पापा से नजरें नहीं मिला पा रही थी लेकिन वह फिर भी बहुत अच्छे थे और मेरी रात की गलती के लिए उन्होंने मुझे माफ कर दिया था मैंने फिर भी उनसे माफी मांगी थी तो उन्होंने कहा था कि हम तुम्हारे साथ जो कुछ भी करते हैं तुम्हारी भलाई के लिए ही करते हैं आखिर तुम बहुत ही मन्नत मुरादों के बाद पैदा हुई थी और फिर तुम हमारी इकलौती बेटी हो तुम्हारे बाद हमारा और कोई बच्चा नहीं हो सका तुम जानती हो कि हम तुमसे कितना प्यार करते हैं

हमेशा हमें तुम्हारी फिक्र लगी रहती है जब तुम हमारी आंखों के सामने होती हो तभी हमें सुकून मिलता है बस यही वजह है कि हम तुम पर रोक टोक करते हैं तुम बहुत मासूम हो कीर्ती तुम नहीं जानती कि बाहर की दुनिया कितनी बुरी है यहां अगर हम किसी से हंसकर बात कर लेते हैं तो लोग हमारी हंसी का फायदा उठाने लगते हैं बस हम तुम्हें दुनिया की बुरी नजरों से बचाना चाहते हैं मैंने अपने मम्मी पापा को सॉरी बोल दिया था और इस तरह से उन लोगों का आशीर्वाद लेकर पापा के साथ कॉलेज आ गई थी

कॉलेज में जब कुछ क्लासेस के बाद फ्री टाइम आया तो मैं अकेली बैठी हुई थी तभी मेरे करीब एक लड़की आकर बैठ गई और कहने लगी कि तुम इतनी अकेले-अकेले क्यों बैठी हो क्या हुआ तुम्हें किसी से बातचीत करना पसंद नहीं है मैंने उसे कहा था नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है बस मैं हर किसी के साथ आसानी से एडजस्ट नहीं होती तो वह मेरी इस बात पर मुस्कुराई और उसने मेरे आगे अपना हाथ बढ़ाया था और कहने लगी कि क्या तुम मुझसे फ्रेंडशिप करोगी

मैंने भी उसकी फ्रेंडशिप एक्सेप्ट कर ली थी और उससे हाथ मिला लिया था इस तरह कॉलेज की एक लड़की से मेरी फ्रेंडशिप हो गई थी हम दोनों एक ही क्लास के स्टूडेंट्स थे मुझे उसके बारे में सब कुछ पता था और वह भी मेरे बारे में सब को जानती थी भले ही हम लोग किसी से बात नहीं करते लेकिन जब एक साथ एक ही जगह होते हैं तो उसकी सारी जानकारी हमें जरूर होती है इस लड़की का नाम शनाया था और इसके कॉलेज में बहुत सारे फ्रेंड्स थे

इसकी जितनी भी लड़कियां फ्रेंड्स थी और इस तरह मेरी भी धीरे-धीरे उसके पूरे ग्रुप से बातचीत होने लगी थी उन लोगों ने भी मुझे अपने ग्रुप सर्कल में शामिल कर लिया था और हम लोग एक साथ बैठकर खूब ढेर सारी बातें करते थे मुझे अब कॉलेज जाने में मजा आने लगा था क्योंकि मेरे फ्रेंड्स बन चुके थे और मैं अपने फ्रेंड्स के साथ कॉलेज लाइफ को खूब एंजॉय कर रही थी मैंने इस बारे में अपने मम्मी पापा को नहीं बताया था कि मेरे फ्रेंड्स बन चुके हैं

अगर अभी भी मेरे गार्ड्स कॉलेज मेरे साथ जाया करते तो वह जरूर मेरी शिकायत मेरे मम्मी पापा से कर देते गार्ड्स के ना होने का मैंने फायदा उठाया था जिस वजह से मुझे कॉलेज जाना अच्छा लगने लगा था हमारे ग्रुप में पांच लड़कियां थी और उन पांचों से ही मैं बहुत घुल मिल गई थी मगर इन लड़कियों के अंदर बड़ी अजीब सी हरकतें थी जिनको देखकर मैं हैरान होती थी धीरे-धीरे मुझे उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में पता चलने लगा था वह सब मुझे अपनी पक्की फ्रेंड्स मान चुकी थी

इसलिए अपने बॉयफ्रेंड के बारे में भी मुझे बताया करती थी प्यार मोहब्बत क्या होता है बॉयफ्रेंड किस लिए होते हैं मैं यह बातें ज्यादा नहीं जानती थी क्योंकि ना तो मेरे पास मोबाइल था और ना ही मैं टीवी देखती थी मेरी पूरी जिंदगी सिर्फ अपने मम्मी पापा को देखते हुए ही गुजरी थी बॉयफ्रेंड और प्यार मोहब्बत जैसी बातें मेरे लिए एक अजनबी और अनोखी बात थी मुझे ये बातें बहुत अजीब लगती थी और पसंद भी नहीं आती थी

लेकिन लड़कियों की फैमिली में इन्हें कोई भी रोक टोक करने वाला नहीं था मुझे लड़कियों की जिंदगी अच्छी लगने लगी थी कहने को तो मेरी जिंदगी भी बहुत अच्छी गुजर रही थी मगर उनका जो मन करता था वह वही किया करती थी जिसके साथ मन होता था उसके साथ जाती थी जहां मन करता था वहां जाती थी मेरी जिंदगी उनके मुकाबले कैद से भरी हुई थी हैरानी की बात तो यह थी कि वह सारी ही लड़कियां मेरी उम्र की थी और उनके कई-कई बॉयफ्रेंड थे

और इतनी चालाक और हो होशियार थी कि मैं आप लोगों को बता भी नहीं सकती शायद यह उनको ज्यादा दी गई आजादी का नतीजा था देखा करती थी मैं कि ये पांचों लड़कियां कॉलेज में तो अपनी कार से आती थी लेकिन वापसी में कॉलेज के ही स्मार्ट और हैंडसम लड़कों के साथ उनकी कार में वापस जाती थी वो लड़के हमारे ही कॉलेज के होते थे जिनसे उनकी अच्छी फ्रेंडशिप थी मैंने अभी तक कॉलेज में किसी भी लड़के से फ्रेंडशिप नहीं की थी ये लड़कियां उनके साथ कहां जाती थी

यह भी मुझे पता होता था कोई किसी होटल में जाती तो कोई किसी सिनेमा हॉल में तो किसी पार्क में या फिर किसी रेस्टोरेंट में जाती थी इस बात पर ना उनके घर वालों को कोई ऑब्जेक्शन होता था और ना ही लड़कियों को कोई डर था और ना ही कोई शर्म वह तो मुझे भी अपने जैसे ही रास्ते पर चलने की एडवाइस दिया करती थी बल्कि मुझसे जिद्द करती थी कि तुम भी हमारे जैसी ही बन जाओ वह मुझे ऐसी-ऐसी बातें बताती

अपने दोस्त और अपने बॉयफ्रेंड के साथ गुजरे हुए टाइम के बारे में वह मुझे हर बात बताती थी उनकी बातें सुनकर मेरे दिल में भी फीलिंग जागने लगती थी और मेरा मन करता था कि मेरी जिंदगी भी इन जैसी ही हो जाए इन लोगों की बातें सुनकर मुझे अपने घर का माहौल पुराने जमाने के टाइप के जैसा मालूम होने लगा मुझे लगता था कि मेरे पेरेंट्स मेरे साथ नाइंसाफी करते हैं लड़कियों को तो फ्रीडम देनी चाहिए लेकिन मेरे पेरेंट्स मुझे कैद करके रखते हैं मैं अपनी फ्रेंड्स के जैसे ही आजादी से जिंदगी जीने और अपनी मर्जी के मुताबिक हर काम करने के सपने देखने लगी थी

साथ ही साथ मेरे दिल में यह भी ख्वाहिश आने लगी थी कि मुझे भी कोई चाहिए मुझसे भी कोई प्यार करें और मैं भी किसी से प्यार करूं उसे चाहूं उसके साथ खूबसूरत जगह पर मैं भी बैठकर बातचीत करूं और उसके कंधे पर सर रखकर प्यार भरी बातें कर सकूं कोई तो हो जो मुझ पर अपना प्यार निछावर करे हमारे बीच भी खूबसूरत और प्यारी-प्यारी बातें हो मेरी ये डिमांड हर रोज अपनी फ्रेंड्स की बातें सुनकर बढ़ती चली जा रही थी

मैं बेताब हो रही थी और पढ़ाई से मेरा ध्यान हटता चला गया था मेरे पापा मुझे मेडिकल लाइन से पढ़ाना चाहते थे और मैं मेडिकल का पहला साल ही बड़ी मुश्किल से पास कर सकी थी मेरी फ्रेंड्स भी इसी तरह से घसीट घसीट कर सेकंड ईयर में पहुंची थी क्योंकि इन सारी ही लड़कियों का ध्यान पढ़ाई पर नहीं था बल्कि यह हमेशा लड़कों से बातें करने में लगी रहती थी

इन्हें पढ़ाई की वैसे भी कोई फिक्र नहीं थी लेकिन मेरे इस तरह से पास होने पर मेरे मम्मी पापा बेहद परेशान हो गए थे उनको लग रहा था कि मैं पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रही हूं और ऐसा ही था मैं सच में पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रही थी

जब से मेरी फ्रेंड्स बनी थी मैंने अपना पूरा-पूरा ध्यान उनकी तरफ लगा लिया था मेरे मम्मी पापा ने मुझसे पूछा भी था कि मैं जो अब तक अपनी एजुकेशन में एक्सीलेंट रिकॉर्ड रखती आ रही थी अब मुझे क्या हो गया है जो मैं इस तरह अपनी पढ़ाई में कमजोर हो गई हूं उनके इस सवाल पर मैंने कॉलेज की पढ़ाई अच्छी ना होने का बहाना बना दिया था मेरी सारी फ्रेंड्स के घर हमेशा पार्टी और फंक्शंस लगे रहते थे मेरी फ्रेंड्स मुझे हर बार इनवाइट करती थी

मगर मैं किसी के घर भी नहीं जा सकती थी क्योंकि मेरी मम्मी पापा मुझे कहीं भेजने के लिए कभी तैयार ही नहीं होते मैंने तो अभी तक उन को अपनी फ्रेंडशिप के बारे में भी नहीं बताया था तो मैं कहीं कैसे जा सकती थी जब मैं कॉलेज में होती थी तो हमारे कॉलेज का एक लड़का था जो मुझे बड़े गौर से देखता था और मुझे पसंद भी करता था उसने कई बार मेरी फ्रेंड से कहा था कि वह उसके लिए मुझसे बात करें मेरी फ्रेंड्स उसका नाम लेकर अब मुझे छेड़ने लगी थी

वैसे भी मैं किसी लड़की की तलाश में थी जो मुझे प्यार कर सके मुझे वैल्यू दे सके फिर जिस दिन उस लड़के ने मुझे फेस टू फेस प्रपोज किया तो मैंने उसका प्रपोजल एक्सेप्ट कर लिया था और मुझे लगा था कि मेरी चाहत पूरी हो गई है मैं देखती थी कि मेरी फ्रेंड कॉलेज में ही पढ़ने वाले अपने बॉयफ्रेंड के साथ खूब घुली मिली रहती थी जबकि जिस लड़के ने मुझे प्रपोज किया था मैं उससे दूर-दूर रहती थी क्योंकि मैं तो प्यार मोहब्बत के बारे में ज्यादा जानती नहीं थी

और अभी मेरी शुरुआत थी इसलिए मुझे अजीब अजीब सा महसूस हो रहा था इस लड़के का नाम शेखर था मेरे मम्मी पापा को कभी मुझ पर शक नहीं हुआ था क्योंकि पापा ही मुझे कॉलेज में लेने जाते थे और पापा ही छोड़ने के लिए आते थे और जिस समय वह कॉलेज जाते थे तो कॉलेज के प्रोफेसर से हर बार मेरे बारे में पूछा करते थे कि उनकी बेटी को कोई परेशान तो नहीं करता मेरे और शेखर के बारे में अभी कॉलेज में कोई नहीं जानता था

मैं शेखर को बहुत पसंद करने लगी थी वह मुझसे कहता था कि तुम मुझसे फोन पर बात किया करो लेकिन मुझे तो मेरे मम्मी पापा ने मोबाइल ही नहीं दिया था फिर एक दिन कॉलेज में शेखर मेरे लिए मोबाइल लेकर आया और उसने कहा था कि तुम अपने घर में चुपके से कमरा बंद करके मुझसे बात कर लिया करो मैं शेखर से रात के टाइम पर बाद किया करती थी क्योंकि मेरा कमरा बिल्कुल अलग था जैसे ही हम लोग खाना खा लेते थे

तो मैं अपने मम्मी पापा से कहती थी कि मैं बहुत थक चुकी हूं इसलिए अपने कमरे में सोने के लिए जा रही हूं वैसे भी मुझे कॉलेज के लिए सुबह को जल्दी उठना होता है इस तरह बातें बनाकर मैं अपने कमरे में आ जाती थी मेरा मोबाइल मेरे कॉलेज के बैग में ही रखा हुआ होता था कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करने के बाद मैं अपना मोबाइल ऑन करती थी और शेखर से सारी सारी रात बात करती थी सुबह को जब मैं सो जाती थी तो कॉलेज का टाइम हो जाता था

और मुझे पता ही नहीं चलता था मम्मी जोर-जोर से दरवाजा बजाती थी और कहती थी आखिर तुम्हें इतनी नींद कब से आने लगी है पहले तो तुम इतना नहीं सोती थी रात को तुम जल्दी कमरे में आ जाती हो उसके बावजूद भी सुबह को कॉलेज के लिए लेट हो जाती हो मुझे अपनी मम्मी से बात बनानी पड़ती थी कि मैं सोती नहीं हूं कुछ देर तक तो मैं पढ़ाई भी करती हूं मेरे मम्मी पापा को अभी तक मुझ पर किसी तरह का भी शक नहीं हुआ था

शेखर का साथ मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था मुझे ऐसा लगता था कि हर लड़की के लिए बॉयफ्रेंड का होना बहुत जरूरी है क्योंकि वह उसकी बहुत केयर करता है और उससे प्यार भरी बातें करता है मैं तो अपने आप को बहुत खुशनसीब समझती थी मुझे अपना हीरो इतनी आसानी से मिल जाएगा यह तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था अब मैं दिन रात शेखर के सपने देखती रहती थी पढ़ाई में तो मेरा इंटरेस्ट पहले ही खत्म हो चुका था

अब सिर्फ मैं नाम के लिए पढ़ाई कर रही थी हम लोग कॉलेज में तो मिलते ही थे लेकिन अब शेखर मुझसे पर्सनली मिलना चाहता था था मैं भी उसे अकेले में मिलकर बातचीत करना चाहती थी और फिर एक दिन हम दोनों के बीच मुलाकात हो ही गई पापा जब मुझे कॉलेज छोड़ने के बाद चले गए तो मैं कॉलेज के गेट पर ही खड़ी हो गई थी कॉलेज के अंदर नहीं गई थी शेखर भी उस दिन कॉलेज नहीं आया था वह कॉलेज के बाहर ही अपनी कार में बैठा हुआ मेरा इंतजार कर रहा था

जैसे ही मेरे पापा चले गए तो मैं दौड़कर शेखर की कार में जाकर बैठ गई थी शेखर मुझे अपने साथ एक रेस्टोरेंट में ले गया था जहां पर बहुत कम लोग थे और हम दोनों को मीटिंग करते हुए कोई देख भी नहीं सकता था वह भी मुझसे मिलने के लिए बहुत एक्साइटेड हो रहा था इस मुलाकात में हम दोनों के बीच ढेर सारी बातें हुई थी और उसकी पर्सनालिटी की तरह उसकी बातें भी बहुत अच्छी थी जिनके हसीन जाल में मैं उलझती चली गई और फिर वह दिन मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन बन गया था

मैंने उस दिन कॉलेज से छुट्टी कर ली थी छुट्टी के टाइम पर मैं कॉलेज के गेट के बाहर खड़े होकर अपने पापा का इंतजार करने लगी थी जैसे ही पापा मुझे कॉलेज से लेने के लिए आए तो उनको मुझ पर बिल्कुल भी शक नहीं हुआ था हम दोनों हर रात कॉल पर ढेर सारी बातें करते थे मेरे दिल में अब हमेशा यही ख्वाहिश जागने लगी थी कि किसी तरह मेरी और शेखर की शादी हो जाए जाहिर सी बात थी

कि हम दोनों की जिंदगी बहुत अच्छी गुजरती मुझे यह यकीन था कि मेरे मम्मी पापा शेखर के लिए जरूर मान जाएंगे क्योंकि शेखर बहुत बड़े बिजनेसमैन का बेटा था शेखर के घर वाले भी हम दोनों की शादी के लिए आसानी से मान जाएंगे मैंने जब शेखर से शादी के बारे में बात की तो वह कहने लगा कि मैं अपना अलग बिजनेस सेट करना चाहता हूं इसमें अभी मुझे कुछ टाइम लग सकता है और तुम्हारी फैमिली भी तुम्हारी शादी इतनी जल्दी नहीं करेगी

क्योंकि अभी तुम पढ़ाई कर रही हो शेखर ने कहा अभी मैं भी शादी के बारे में नहीं सोच सकता जब तक मेरा अलग से बिजनेस सेटअप नहीं बन जाता मुझे शेखर की बात पर मायूसी तो हुई थी मगर उसकी मोहब्बत मुझे इस हद तक उसका दीवाना बना चुकी थी कि मैंने उसे कह दिया था कि मैं तुमसे ही शादी करूंगी और मैं तुम्हारे लिए सारी जिंदगी भी इंतजार करने के लिए तैयार हूं मेरी इस बात पर वह बहुत खुश हुआ था और उसने ने मेरी बहुत तारीफ की थी

और फिर वह मुझे कॉलेज में गिफ्ट भी देने लगा था जिनको मैं खामोशी से अपने बैग में छुपाकर घर ले आती थी और चोरी चुपके अपने कमरे में रख देती थी जिनके बारे में मेरी मम्मी को कोई खबर नहीं होती थी मेरी सारी फ्रेंड्स अपने बॉयफ्रेंड के किस्से मुझे बड़ी खुशी-खुशी सुनाती थी अब मैं भी इनको अपने और शेखर के किस्से मजे ले लेकर सुनाने लगी उन्होंने मुझे खूब तसल्ली दी और कहा कि अगर शेखर तुमसे शादी ना करें

तो तुम उससे शादी करने की जिद्द मत ठान लेना क्योंकि तुम शेखर से भी अच्छा लड़का डिजर्व करती हो तुम एक अमीर पिता की इकलौती बेटी हो तुम्हारे लिए तो शहर के ना जाने कितने अमीर रिश्तों की लाइन लग जाएगी लेकिन मैं तो शेखर के सिवा किसी और की तरफ देखना भी नहीं चाहती थी उसकी मोहब्बत ही मेरे लिए सब कुछ बन गई थी अब मेरी शेखर से मुलाकातें भी बढ़ गई थी पहले की तरह ही मैं शेखर से मिलने लगी थी

हर हफ्ते कॉलेज की एक छुट्टी करने के बाद मैं शेखर से कभी पार्क में मिलने जाती तो कभी हम लोग कार में ही लॉन्ग ड्राइव करते रहते थे शेखर ने मुझे बताया था कि उसके डैड ने हमारे ही शहर में एक बहुत खूबसूरत सा रिसॉर्ट बनाया है शेखर मुझे अपने रिसॉर्ट में लेकर जाना चाहता है उसने कहा कि अगर तुम मेरे रिजॉर्ट में पहला कदम रखो गी तो मुझे अच्छा लगेगा शेखर ने कहा कि शादी के बाद हम अपने रिजॉर्ट में रहा करेंगे

मैंने भी सोच लिया था कि शेखर जब मुझसे इतना प्यार से कह रहा था तो क्यों ना मैं उसके रिसॉर्ट को चलकर एक बार देख लेती हूं ना जाने मुझे क्या हो गया था मैंने फौरन ही उसको उसके रिसॉर्ट पर चलने के लिए हां कह दी थी अभी तक तो हम पब्लिक प्लेस में ही मिलते रहे थे लेकिन अब शेखर मुझे अपने अकेले रिसॉर्ट में लेकर जा रहा था जो कि अभी तक पूरी तरह से खाली पड़ा हुआ था उसमें कोई भी नहीं था हम लोगों ने दिन डिसाइड कर लिया था

और फिर जब सुबह के टाइम पर मेरे पापा मुझे कॉलेज छोड़ने के बाद वहां से जा चुके थे तो मैं शेखर के साथ उसकी कार में बैठकर जाने लगी थी शेखर की कार काफी दूर तक चलते हुए आ गई थी यह एक सुनसान जंगल वाला इलाका था जबकि शेखर ने कहा था कि उसकी डैड ने शहर में ही रिसॉर्ट बनाया है लेकिन हम लोग तो बहुत दूर आ चुके थे मुझे ऐसा लग रहा था जैसे हमारा शहर तो पीछे रह गया है हम किसी और जगह आ गए हैं

गाड़ी के साथ-साथ शेखर की जबान भी लगातार चल रही थी वह उस टाइम पर कुछ ऐसी बातें कर रहा था जो उस दिन से पहले उसने मुझसे कभी की ही नहीं थी रोमांटिक टाइप की बातें जो मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही थी वह कह रहा था कि जब हम रिजॉर्ट में पहुंचेंगे तो कुछ रोमांटिक सीन क्रिएट करेंगे जैसे हस्बैंड वाइफ करते हैं ताकि रिजॉर्ट में जाने के बाद हमारे पल यादगार हो सके पहले तो मैं उसकी बातों को बहुत इंटरेस्ट लेकर सुनती रही

लेकिन जब उसकी बातें हद से आगे बढ़ने लगी तो मुझे उसकी बातें बुरी लगने लगी थी काफी देर तक सुनसान सड़क खत्म होने के बाद जब कार एक भीड़-भाड़ वाली जगह पर आ गई जहां पर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स बनी हुई थी अलग-अलग सड़कों पर से गुजरते हुए शेखर ने एक मेडिकल स्टोर के सामने कार रोक दी और यह कहकर कार से उतर गया कि उसे मेडिकल स्टोर से कुछ जरूरी सामान खरीदना है

मैंने उसे मेडिकल स्टोर की तरफ जाते हुए देखा इसके साथ ही ना जाने कैसे एक अनजान सा डर मुझे महसूस होने लगा था मुझे एहसास होने लगा कि मेरे साथ कुछ अच्छा नहीं होने जा रहा मैं जरूर किसी मुसीबत में फंसने वाली हूं ऐसी मुसीबत जो मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए तबाह कर देगी मुझे वहां से फौरन भाग जाना चाहिए क्योंकि मुझे बिल्कुल भी अच्छी फिलिंग्स नहीं आ रही थी मुझे ऐसा लग रहा था मुझे शेखर से अपनी जान छुड़ा लेनी चाहिए

वह एक अनजान इंसान था और मुझे उसके साथ इस तरह से अकेली जगह पर नहीं जाना चाहिए मेरी फ्रेंड्स हमेशा मुझे अपने बॉयफ्रेंड के रोमांटिक किस्से सुनाया करती थी उन्होंने मेरे दिमाग में भी खतरे की घंटी बजाना शुरू कर दी थी मैं समझ गई थी कि शेखर मुझे किस लिए खाली पड़े हुए रिजॉर्ट में लेकर जाना चाहता था और मुझे याद भी आ रहा था कि क्यों मेरे मम्मी पापा मुझे लोगों से मिलने नहीं देते मुझे यह बात भी याद आ गई थी

जब उस दिन एक लड़का मेरे करीब आया था तो मेरे पापा ने गार्ड से उसकी इंसल्ट करवाई थी हालांकि वह सिर्फ मेरे करीब आया था लेकिन मेरे पापा को उस पर बहुत गुस्सा आ गया था मैं शेखर से वैसे तो कई बार मिल चुकी थी लेकिन हमेशा मैं उसे पब्लिक में मिलती रही थी इसलिए मुझे उससे डर महसूस नहीं हुआ था लेकिन आज वह मुझे अकेले में और बंद घर में लेकर जा रहा था इसके बारे में सोच सोच कर ही मुझे अब डर लग रहा था

मैं समझ गई थी कि वह मुझे वहां पर क्यों लेकर जा रहा था मुझे अब अपनी इज्जत खराब होने से बचानी थी मैंने मेडिकल की तरफ देखा तो शेखर अपना सामान खरीदने में बिजी था उसका ध्यान मेरी तरफ नहीं था टाइम वेस्ट करने का मेरे पास कोई मौका नहीं था इसलिए मैं खामोशी के साथ कार का दरवाजा खोलकर बाहर निकल आई मैं जैसे ही कार से निकली थी तो भगवान की कृपा से मेरे आगे ही एक ऑटो आकर रुक गई थी मैं फौरन ही उसमें बैठ गई

और ड्राइवर को अपना पता बताते हुए उसे ऑटो चलाने के लिए कहा मैं बार-बार ऑटो से झांक कर शेखर को देख रही थी जो अभी भी मेडिकल स्टोर पर सामान लेने में बिजी था उस समय मेरा दिल बुरी तरह से धड़क रहा था मैं बहुत डर रही थी और मुझे रोना आ रहा था उस समय मुझे अपनी मम्मी पापा और उनकी दी गई हमेशा की एडवाइस भी बहुत याद आ रही थी मैं बार-बार पीछे देख रही थी कि कि कहीं मेरे पीछे-पीछे शेखर तो नहीं आ रहा उसने मुझे भागते हुए तो नहीं देख लिया

मगर सब कुछ ठीक रहा और मैं आसानी से अपने घर पहुंच गई मैं जैसे ही घर पहुंची तो मेरी मम्मी मुझे देखकर बहुत परेशान हो गई थी सिक्योरिटी गार्ड ने उनको बता दिया था कि मैं ऑटो में बैठकर घर आई हूं सिक्योरिटी गार्ड ने ऑटो वाले को भी पैसे दे दिए थे मैं घर आते ही अपनी मम्मी के गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगी थी मेरी मम्मी परेशान हो गई और पूछने लगी कि तुम कॉलेज से अकेले क्यों आई हो और ऑटो में बैठकर आने का क्या मतलब है तो मैंने मम्मी को कुछ नहीं बताया

और सिर्फ इतना ही कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मैं कॉलेज से छुट्टी लेकर घर आ गई मेरी मम्मी ने घबराकर जल्दी से पापा को कॉल कर दी थी आधे घंटे में पापा भी घर पहुंच गए थे और बार-बार दोनों ही मुझसे पूछे जा रहे थे कि तुम्हें क्या हुआ है इतना क्यों रो रही हो पापा ने डॉक्टर को भी घर बुला लिया था इस डर की वजह से मुझे बुखार हो गया था डॉक्टर ने दवाई दे दी थी मैं सो गई थी अगले दिन जब मैं सोकर उठी तो मेरी तबीयत नॉर्मल थी

और मैं शेखर वाले डर से भी बाहर आ चुकी थी मेरी मम्मी पापा मेरे लिए बहुत परेशान थे इसलिए मैंने उनको बताया था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं थी मैं इस वजह से रो रही थी और इसी वजह से परेशान थी कॉलेज में मुझे अजीब अजीब सी फीलिंग्लेस से ऑटो करके घर आ गई मेरे मम्मी पापा ने कहा कि तुम हमें कॉल कर दती तो तुम्हें इतना परेशान नहीं होना पड़ता बेटा उस दिन जैसे-तैसे मेरी इज्जत बच चुकी थी और मैं अपने घर वालों के सामने सही सलामत थी

मैंने अपनी मम्मी पापा से कहा था कि मुझे कॉलेज नहीं जाना मैं अब कॉलेज में पढ़ाई नहीं करना चाहती क्योंकि पढ़ाई के ज्यादा डिप्रेशन की वजह से मेरी तबीयत खराब रहने लगी है मैंने बस जितना पढ़ लिया है मेरे लिए उतना ही काफी है मेरे मम्मी पापा मेरी इस बात को मान गए थे मैंने शेखर का मोबाइल तोड़कर घर के पीछे की तरफ फेंक दिया था और उसने जितने भी गिफ्ट्स दिए थे मेरे पास थे वो सब मैंने मोबाइल के साथ-साथ ही फेंक दिए थे

उस दिन के बाद मैं कभी कॉलेज नहीं गई और घर में ही अपनी मम्मी के साथ उनकी आंखों के सामने रही भगवान की कृपा थी कि मेरी सारी फ्रेंड्स और शेखर ने मुझसे कभी भी कांटेक्ट करने की कोशिश नहीं की क्योंकि मम्मी पापा के डर की वजह से मैंने अपनी फ्रेंड्स को अपनी कोई डिटेल्स नहीं दी थी और ना ही मैं चाहती थी कि उनमें से कोई मेरे घर पर आए इस तरह में शेखर के घिनौने खेल की चपेट में आने से बच चुकी थी

और मुझे तब समझ आई थी कि माता-पिता अपनी बेटियों पर जितनी रोक टोक करते हैं वह बिल्कुल ठीक करते हैं हम लड़कियां चालाक लड़कों की बातों में आसानी से आ जाती हैं और भूल जाती हैं कि हमारे मा माता-पिता ने हमें सारी जिंदगी कितनी मेहनत से पाल पोस कर बड़ा किया है हम लड़कों की मोहब्बत के आगे अपने माता-पिता कि इतने सालों की मोहब्बत को भूल जाते हैं मुझे तो उस समय अकल आ गई थी और मैं मौके से फरार हो गई थी

मगर मैं आप लोगों से रिक्वेस्ट करती हूं कि आप लोग कभी भी ऐसे लड़कों की बातों का शिकार ना हो और जितना हो सके अपने पेरेंट्स की बातों का कहना माने आपके पेरेंट्स अगर आपको किसी से बातचीत करने की या किसी से मिलने की आजादी नहीं देते तो व बिल्कुल ठीक करते हैं क्योंकि उन्हें आपकी परवाह है मैं अब अपने पेरेंट्स के हर कहने को मानती हूं और अब मेरा रिश्ता लग चुका है जल्दी ही मेरी शादी भी हो जाएगी

शेखर का ख्याल मेरे दिल से जल्दी इसलिए निकल गया था क्योंकि सच्ची मोहब्बत करने वाले लोग कभी भी अपनी मोहब्बत की इज्जत के साथ खिलवाड़ नहीं करते अगर शेखर मुझसे प्यार करता होता तो यह पता करने की कोशिश करता कि मैं कहां चली गई हूं मेरे घर रिश्ता भी भेज सकता था क्योंकि इस बात को गुजरे पिछले 5 साल हो चुके हैं मेरी मुलाकात कभी दोबारा शेखर से नहीं हुई भगवान की कृपा से अब मेरी शादी एक अच्छे परिवार में होने जा रही है

जिसकी वजह से मेरे मां-बाप भी बहुत बेफिक्र है और आज मैं भी खुश हूं कि मैंने अपने मम्मी पापा का कहना मानकर अच्छाई का काम किया है दोस्तों उम्मीद करती हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी

 

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