रात में पति को दूध चाहिए | Mastram Hindi Story in Hindi | Best Hindi Story

Mastram Hindi Story in Hindi : मुझे ससुराल में आए हुए चार दिन हो गए थे और मुझे अपने पति की रूटीन का अच्छे से अंदाजा हो गया था कि वह रोजाना रात को दूध पीना पसंद करते थे पर मैं भुलक्कड़ थी छोटी-छोटी बातों को मैं भूल जाती थी और कुछ बातों को मैं सर पर सवार कर लिया करती थी और घंटों उनके बारे में सोचती रहती थी तीन दिन से मेरे शौहर मुझे इस बात की याददाश्त करवा रहे थे कि रोजाना रात को याद से दूध का गिलास कमरे में ले आया करो 

मुझे दूध पीने की आदत है अब फिर मैं उनके इस बात को भूल गई थी और जब वे कमरे में आकर मेरे पास खड़े हुए तो उन्होंने मुझसे गुस्से से यह बात पूछी थी मैं एकदम हड़बड़ा गई और फौरन अपनी जगह से उठी और जब किचन में आई तो मेरी सांस अपने कमरे में जा चुकी थी जब मैं दूध गर्म करके वापस आ रही थी तो यह देखकर सहम गई क्योंकि मेरी सास ससुर के कमरे से अजीबों गरीब आवाजें आ रही थी 

मेरी सास बार-बार एक ही बात कहे जा रही थी कि अब बस भी करो मैं थक गई हूं अब मुझ में हिम्मत नहीं है तुम तो बहुत ताकतवर हो मगर मैं कमजोर हूं तब मेरे ससुर की गुस्से भरी आवाज सुनाई दी कि इसमें थकने वाली कौन सी बात है अभी से तुम थक गई हो चलो जल्दी से फिर से शुरू हो जाओ इधर आ जाओ मेरे पास यह सब सुनकर मैं हक्का बक्का होकर अपने कमरे में आ गई 

और जब मैं सोने के लिए लेटी तो मेरे जहान में यही बात गूंज रही थी कि मेरे ससुर तो देखने में हड्डी का ढांचा जैसे हैं मगर मैं नहीं जानती थी कि वह इस कदर ताकतवर थे कि इस उम्र में भी उन्हें मेरे सांस की चीखें निकलवा दी थी मैं भी ऐसा ही पति चाहती थी मगर मेरा पति तो बहुत जल्दी थक जाता था मैं इसी बारे में सोचते सोचते सो गई थी सुबह जब मेरी आंख खुली तो मेरी सास रोज की तरह घर के काम काज कर रही थी

 और उनका मिजाज बिल्कुल सिंपल था लग नहीं रहा था कि वह पूरी रात यह सब कर रही है दिन को जब मेरे ससुर भी घर में आ गए तो तो फौरन ही अन्हो ने मेरी सास को भी कमरे में बुला लिया था मैं अब खाना बना चुकी थी मैं अपनी सास को खाने के लिए बुलाने के लिए उनके कमरे के पास गई तो जैसे ही मैं दरवाजे के पास पहुंची यह देखकर मैं हक्का बक्का रह गई 

रात वाला मंजर फिर से फिर से मेरी सांस उसी बात की तकरार की जा रही थी कि मैं थक गई हूं बस करो और रहम करो मुझ पर इस उम्र में मुझ में हिम्मत नहीं है यह सब कुछ मैं सहा नहीं सकती और मैं हैरान परेशान सी वापस आ गई थी और किचन में वापस आने के बाद मैं यही सोच रही थी कि आखिर मेरे ससुर ऐसा क्या खाते थे जो इस कदर ताकतवर थे आधे घंटे के बाद मैं दोबारा से उनके कमरे में गई

 और दोबारा से यही आवाजें गूंज रही थी अब तो मेरे पसीने छूट गए थे और मैं यह सोचने पर मजबूर हो गई थी कि ना जाने ऐसी कौन सी चीज वह इस्तेमाल करते हैं जिसकी वजह से वह इतने देर तक एक ही काम किए जा रहे हैं और उन्हें थकने का एहसास तक नहीं हो रहा है अब मैं दिल ही दिल में यह जानना चाहती थी कि मेरी सास उन्हें क्या देती है 15 मिनट के बाद मेरी सांस खुद ही कमरे से बाहर आ गई थी कमरे से बाहर आने के बाद उनके चेहरे नॉर्मल थे मगर उन्होंने दोनों हाथ अपने कमर पर रखे हुए थे 

और हांफ हुए कह रही थी कि यह कमर का दर्द ना जाने कब मेरी जान छोड़ेगा उनकी यह बात सुनकर मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी मुस्कुराहट रोकी थी मैं उन्हें कुछ कहते कहते रुक गई थी अब मैं यह जानना चाहती थी कि मेरी सास उन्हें क्या करवाती है जो उनकी ताकत इस हद तक बढ़ गई है मगर उन पर नजर रखने के बावजूद भी मैं उस चीज तक नहीं पहुंच सकी थी क्योंकि मेरा सारा ध्यान हर वक्त उनकी तरफ ही होता था

 मेरे पति अपने बाप से बहुत अलग थे बहुत जल्दी थक जाते थे और सोने के लिए लेट जाते थे और अक्सर मैं आधी रात तक जागती रहती थी और अपने पति के प्यार के लिए तरसती रहती थी तभी मेरा ध्यान अपने सास ससुर के कमरे की तरफ चला जाता था कि वो भी तो थे जो इस बुढ़ापे का भरपुर मज़े ले रहे हैं शिवम इस रात भी मेरे हिसाब से जल्दी सो गए मगर मेरे जज्बात बुरी तरह से मचल रहे थे

 मैं सोच रही थी कि काश मेरे पति भी मेरे ससुर की तरह होते तो आज मैं भी जिंदगी को भरपूर तरीके से जी रही होती तब मेरे जहन में मेरी सास की आवाजें गूंजने लगी जो वह ससुर जी को कहती थी कि अब बस भी कर दो अब छोड़ भी दो मेरी बस हो गई है और यह बात याद आते ही मेरे वजूद में लहरों को दौड़ लग जाती थी तब मेरे दिमाग में यह ख्याल आया कि क्यों ना मैं उनके कमरे में झांक कर देखूं कि वे दोनों ऐसा क्या करते हैं 

और मेरे ससुर क्या खाते हैं जो उनकी ताकत उफान तक पहुंची हुई है अपनी सांस की निगरानी करने पर मुझे कुछ नहीं मिला था तब मैं सोचती थी कि यकीनन वह चीज उन्होंने अपने कमरे में छुपा कर रखी है और मैं वह चीज देखना चाहती थी इस वक्त मेरा दिल उन दोनों को देखने के लिए मचलने लगा था कि वे दोनों क्या कर रहे होंगे तभी मैं अपनी जगह से उठी और सास ससुर के कमरे के बाहर आ गई थी 

उनके कमरे की लाइट अभी भी जल रही थी इसका मतलब था कि वे दोनों अभी तक जाग रहे थे तभी खिड़की के बाहर से उनकी फिर से आवाजें आने लगी मेरी सांस लगातार मेरे ससुर को कह रही थी कि तुम इस उम्र में भी मुझे नहीं छोड़ रहे जानते हो कि अब मुझ में इतना दम नहीं रहा और मेरे ससुर का कहना था कि बस थोड़ी देर और थोड़ी देर और बर्दाश्त कर लो मैं फिर तुम्हें तंग नहीं करूंगा

 और मेरी सांस फिर थोड़ी देर के लिए खामोश हो गई मैंने खिड़की से झांक कर अंदर देखने की कोशिश की मगर खिड़की के आगे उनके पर्दे थे सिर्फ आवाज बाहर आ रही थी बाहर से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था यह देखकर मेरा दिल मायूस हो गया था और मैं बुझे दिल से अपने कमरे में आ गई जैसे ही मैं अपने बिस्तर पर आकर लेटी तो मेरे पति अजीब से अंदाज में बोले कि तुम इस वक्त कहां से आ रही हो

 उनका अंदाज मुझे हैरान कर गया था मैंने एकदम उन्हें पलट कर देखा शिवम अपनी जगह से उठकर बैठ गए और मुझे अजीब सी नजरों से देखते हुए बोले कि तुम समझ क्या रही थी कि मैं सो रहा हूं तो तुम कुछ भी कर लोगी तो मुझे पता नहीं चलेगा उनका अंदाज मुझे हैरान परेशान कर गया था सच सच बताओ कहां पर गई थी तुम मैं इस सबसे गड़बड़ा कर रह गई और कहने लगी कि मेरी तबीयत खराब थी

 मेरा दिमाग फट रहा था इसलिए मैं बाहर सहन में गई थी और इसमें क्या बुराई है मैं कांपते लहजे में बोली तो एक पल को शिवम चुप हो गए और फिर थोड़े नरम से बोले कि तुम्हें किसने कहा है कि अधी रात को कमरे से बाहर निकलकर सहन में जाने को अगर आगे तबीयत खराब हो तो मुझे जगा दिया करना और अकेली कमरे से बाहर जाने की जरूरत नहीं है इतना कहकर वह फिर से नींद की वादियों में खो गए थे

 यह जाने बिना कि मेरे दिल में क्या तूफान मचल रहा था मैं उनके साथ के लिए तरस रही थी मगर खुद से उनके पास जाने की हिम्मत नहीं थी और ना जाने कब मैं नींद की आगोश में चली गई मैं अब दिन रात उनकी यही आवाजें सुनती थी जो मेरे अंदर आग पैदा करती थी और मैं सोचती थी कि आखिर देखूं तो सही कि वह यह सब ऐसा क्या कर रहे हैं एक दिन मेरे पति ने बताया कि वे दो दिन के लिए शहर से बाहर जा रहे हैं और अब वह घर वापस दो दिन के बाद ही आएंगे जब उन्होंने मुझे यह बात बताई तो मेरे दिमाग में एक अच्छा सा ख्याल आया 

और मैं सोचने लगी कि क्यों ना मैं इस ख्याल पर अमल करूं तो मैं इस बारे में जान सकती हूं कि उन दोनों के कमरे में आखिर क्या हो रहा है मेरी सास ससुर शाम को खाने के बाद लाउन में टहेला करते थे और साथ एक दूसरे से बातें भी करते रहते थे मैं उन दोनों को देखकर हैरान रहती थी कि इस उम्र में भी इतना समय साथ गुजारने के बाद भी उन दोनों में खूब दोस्ती थी और छोटी-छोटी बातें वह एक दूसरे से करते थे कि मेरी जिंदगी उन दोनों से काफी अलग है

 यह लोग इस उम्र में में पहुंच जाने के बावजूद भी अभी तक जिंदगी को भरपूर तरीके से गुजार रहे हैं और हम दोनों हैं उस दिन मैंने जल्दी-जल्दी अपने सारे काम खत्म किए और फिर अपने सास के कमरे में जाकर छुप गई थी मैं ऐसी जगह पर बैठी थी जहां से मैं तो उन दोनों को देख सकती थी मगर वे दोनों मुझे नहीं देख सकते थे और फिर रात को वे दोनों कमरे में दाखिल हो गए थे मुझे नींद आ रही थी

 मगर उन दोनों को देखने की जस्त जू में मैंने अपनी नींद की कुर्बानी दे दी थी फिर मेरा इंतजार खत्म हुआ और फिर जो मंजर मेरी आंखों ने देखा मेरे नाम सुनैना है मेरे परिवार में मेरे माता-पिता के अलावा मेरा एक छोटा भाई था मेरे माता-पिता भाई से ज्यादा मुझसे प्यार करते थे वह मेरी हर फरमाइश और जिद्द को पूरा करते थे मैं बचपन से ही खुद्दार और जिद्दी थी इस वक्त मैं कॉलेज में पढ़ती थी 

ज़ब,मेरी  सीमा नाम की लड़की के साथ दोस्ती हो गई थी सीमा बहुत अच्छी लड़की थी वह मुझसे बहुत प्यार करती थी मुझे उसकी सबसे अच्छी बात यह लगती थी कि वह अच्छी शख्सियत की मालिक थी और जब वह मेरे हुस्न की मेरी खूबसूरती की तारीफ करती तो यह देखकर मैं खुशी से झूम जाती थी कॉलेज में तरह-तरह के लड़के लड़कियां थी और बहुत से नजरें देखने को मिलते थे 

जिनमें कुछ ऐसे भी होते जो मुझसे नजरें चुराने पर मजबूर कर देते थे ज्यादातर लड़कियों के बॉयफ्रेंड थे और जब वह उन सब के बारे में बातें करती थी उनके हाथों में हाथ डालकर घूमती थी तो यह देखकर मेरे जजबात भी उभरने लगते थे और मैं भी उन्हें देखकर रश्क से सोचती कि देखने में तो वह बिल्कुल मामूली शक्ल सूरत की थी मगर उनके बॉयफ्रेंड उनसे कितनी मोहब्बत करते थे मैं भी किसी से कम नहीं थी मुझसे भी कई लड़कों ने अपने प्यार का इजहार किया था मगर मैंने किसी को घास नहीं डालती थी 

मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत ज्यादा लाड प्यार देने के बावजूद भी मुझे इस मामले में आजादी नहीं दी थी उन्हें लड़कियों का लड़के से दोस्ती करना बातचीत करना बहुत बुरा लगता था हमारे मोहल्ले में यह बात आम थी मगर इसके बावजूद भी मेरे माता-पिता यह सब देखकर गुस्सा करते थे मेरी क्लास में एक लड़का था जो मुझ पर बुरी तरह से आशिक था वह मेरे आगे पीछे फिरता रहता था 

मुझसे बात करने के बहाने ढूंढता मगर मैं उसकी शक्ल तक देखती नहीं थी और मुझे ऐसे लोग बिल्कुल भी पसंद नहीं थे पिछले काफी दिनों से मुझे बुखार था और मैं अपने कॉलेज में नहीं जा सकी थी मेरी गैर मौजूदगी की वजह से परेशान होकर वह लड़का घर तक चला आया तो यह बात मेरे माता-पिता को बहुत बुरी लगी थी जब मैं ठीक होकर कॉलेज गई तो उस लड़के ने मुझे रोक लिया और अपने प्यार का इजहार करने लगा वह मुझे कहने लगा कि मैं बहुत चाहता हूं तुम्हें

 जब मैं उसे मना कर दिया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया उसका हाथ पकड़ना मुझे अच्छा नहीं लगा और मैंने उसे एक थप्पड़ मार दिया और मैं घर चली आई और वह लड़का रोज मेरे घर के पास घूमता था मुझसे बात करने की कोशिश करता था पर मैं उससे बात नहीं करती थी एक दिन उसने बहुत जिद्द की कि बस एक बार मुझसे बात कर लो उसने मुझे मिलने को बुलाया जब मैं वहां गई तो उसने फिर से मुझे अपने प्यार का इजहार किया मैं उसे मना करती रही पर मेरी बदकिस्मती थी कि उस पार्क में मेरे पापा भी थे 

जब पापा ने मुझे इस हालत में देखा तो बौखला गए और मेरे पास आकर उस लड़के को मारने लगे और मुझे लेकर घर आ गए घर जाकर पापा ने भी मुझे एक दो पड़ मारा और मेरी पढ़ाई छुड़वा कर मेरी शादी कर दी और आज मैं सांस के कमरे में राज जानने के लिए छुपी हुई थी और सोच रही थी कि मेरे ससुर अपनी पत्नी से प्यार जताते हैं और उन्हें बहुत खुश रखते हैं जबकि मेरे पति इस हद तक मुझे खुश नहीं कर पाते थे और तभी मैं यह राज जानना चाहती थी कि आखिर वह ऐसी कौन सी चीज इस्तेमाल करते थे

 जिसकी वजह से उनकी ताकत इतनी बढ़ गई थी मैं चाहती थी कि मैं भी अपने पति से वही चीज इस्तेमाल करवाऊं और यही देखने के लिए उस दिन मैं उनके कमरे में छुप गई थी और जो कुछ मैंने देखा था वह मुझे हैरान परेशान कर गया था कितनी देर तक मैं बे यकीनी से उन दोनों की तरफ देखती रही और फिर बेखुदी के आलम में मैं अपनी जगह से उठ खड़ी हुई और फिर उन दोनों के साथ मिलकर वह सब करने लगी थी पहले तो उन दोनों ने मुझे हैरत की नजर से देखा उन्हें यकीन नहीं आ रहा था कि इस वक्त मैं उनके कमरे में मौजूद थी

 लेकिन पता नहीं वह कहां चले गए थे जबकि वह आदमी मुझे बर्बाद करके जा चुका था मैं रोती रही और इसी हालत पर बिस्तर पर पड़ी रही मेरा जिस्म थरथर कांप रहा था कुछ पल बाद मुझे होश आया तो मैं भागकर बाथरूम में बंद हो गई और खुद को रगड़ रगड़ के साफ करने लगी ना जाने वह कौन सा आदमी था जिसका चेहरा मैं देख नहीं पा रही थी और वह लगातार मुझे इस्तेमाल कर रहा था काफी देर तक अपने शरीर को साफ करने के बाद मैं बाथरूम से बाहर आ गई सामने ही मेरे पति परेशानी वाला चेहरा लेकर बैठे हुए थे

 मैंने खुद को जल्दी ही काबू किया और उनके बराबर में बैठकर उनसे पूछने लगी कि आप ठीक तो हैं आपके चेहरे पर इतनी परेशानी किस बात की है मेरा पति कहने लगा ना जाने उसे क्या हो गया है मुझे समझ नहीं आ रहा रात तक बिल्कुल ठीक था आज मैं गया तो उसकी हालत अचानक इतनी ज्यादा खराब हो गई कि वह बिल्कुल भी होश में नहीं आ रहा था यह बात सुनकर मेरे दिमाग में अजीब अजीब सा ख्यालात आ रहे थे मेरा पति पहली रात को जब गया था तब इनके दोस्त का एक्सीडेंट हो गया था 

और आज अचानक उसके दोस्त की तबीयत खराब होना मुझे इन सब चीजों के पीछे एक ही आदमी का हाथ लग रहा था और वह आदमी वह था जो मेरे पति के गैर मौजूदगी में मेरे पास आता था मैं बिल्कुल खामोश थी वह मेरी तरफ देखकर कहने लगा अगर मां बाप की याद ज्यादा आ रही है तो मैं तुम्हें घर ले चलता हूं लेकिन मैंने सर ना में हिला दी थी और आंखें बंद करके अपना सर अपने पति के कंधे पर रख दिया मेरा दिल बहुत बुरी तरीके से रो रहा था

 मुझे अपने आप पर बहुत तरस आ रहा था कि मैं कहां फंस गई हूं शादी से पहले मेरी जिंदगी कितनी अच्छी थी और अब मेरी जिंदगी तबाह हो गई थी काफी दिन हो गए थे मुझे अपने मां-बाप की भी बहुत ज्यादा याद आती थी अपनी सहेलियां अपना घर अपना आंगन सब कुछ मुझे बहुत याद आ रही थी जैसे मैं सभी परेशानियों और बोझ से आजाद हो चुकी थी अगले दिन भी मेरे पति घर पर नहीं थे और फिर से मेरा इरादा था कि मैं अपने सास ससुर के कमरे में रात गुजार शायद मेरी सास को इस बात का अंदाजा हो गया था 

तभी वह मुझे गुस्से से कहने लगी कि अगर आज रात तुम हमारे कमरे में आई तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा इसे देखकर मैं परेशान हो गई मैंने कहा मां जी आपको आखिर किस बात पर ऐतराज है जबकि ससुर जी को और मुझे इस बात पर ऐतराज नहीं है तो आप मुझे इस बात से क्यों रोक रही हैं उसी दौरान मेरे ससुर भी वहां पर आ गए और जब हम दोनों को बात करते देखे तो वह हमारे पास आकर खड़े हो गए सवाल नजरों से मेरी तरफ देखने लगे 

तब मैंने उन्हें दबे लफ्जों में कहा कि मां जी मुझे रात को कमरे में आने से मना कर रही है यह सुनते ही मेरे सासुर जी को बहुत गुस्सा आया और वह सुर्ख चेहरे के साथ उन्हें देखते हुए बोले कि तुम्हें बहू को मना नहीं करना चाहिए इसका भी मुझ पर इतना ही हक है जितना कि तुम लोगों पर और तुम उसे मना कर रही हो जो काम तुम खुद नहीं कर सकती तुम उसे तो करने दे सकती हो उनके जाने के बाद मेरी सांस कहने लगी कि अगर तुम आज हमारे कमरे में आई तो मैं तुम्हारे पति को तुम्हारे खिलाफ कर दूंगी 

यह सुनकर मैं परेशान हो गई अगर वह मेरे पति को मेरे खिलाफ कह देती तो वह मुझ पर गुस्सा करने लगते और यह सब बर्दाश्त करना मेरे लिए फिर नामुमकिन हो जाता मुझे अंदाजा था कि मेरे पति एक शक्की मिजाज इंसान थे उनके जहन में जब कोई बात आ जाती थी तो उसको निकालना आसान नहीं था मुझे आज भी वह दिन याद था जब शुरुआती दिनों में मैं एक बार कमरे से बाहर चली गई थी तो वह मुझे किस कदर गुस्से से बोले थे उनकी आंखों में शक देखकर मैं डर गई थी

 और अगर मेरी सास ने भी उन्हें कुछ ऐसा वैसा कह दिया तो मैं क्या करती वह तो अपनी मां की ही सुनेंगे उन्हें ही वह सच्चा करार देंगे तभी मैंने सोच लिया कि मैं अपनी सास की बात मानूंगी उनके साथ मिलकर रहूंगी उन्हें गुस्सा नहीं दिलाऊंगा मेरे पति को मेरे खिलाफ करने की कोशिश ना करें यह सोचकर मैं खाना खाने के बाद जल्द ही अपने कमरे में आकर लेटी थी मेरा बहुत दिल चाह रहा था कि मैं ससुर के कमरे में जाऊं और जैसा मैंने कल सुकून हासिल किया था वैसा ही सुकून हासिल करूं मगर फिर जब अपनी सास का रवैया याद करती हूं 

तो मैं चुप की चुप रह जाती थी तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी मैंने दरवाजा खोला तो सामने मेरे ससुर खड़े थे वह मुझे हैरान नजरों से देखते हुए बोले कि तुम आज मेरे कमरे में आने वाली थी अभी तक तुम आई क्यों नहीं उनकी बात सुनकर मैं सोच में पड़ गई और कहने लगी कि बस आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है

 

मेरे सासुर मुझे कुछ देर खामोश नजरों से देखते रहे फिर कहने लगे कि मैं जानता हूं कि तुम क्यों इंकार कर रही हो मैंने उनके चेहरे की तरफ सवाली नजरों से देखा तो वह कहने लगे कि तुम शायद अपनी सांस की वजह से यह सब कह रही हो इसके डर की वजह से मना कर रही हो फिक्र मत करो 

वह तुम्हें कुछ भी नहीं कहेगी मैंने उसे समझा लिया है अब तुम जल्दी से आओ मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं उनकी बात सुनकर मैं बहुत खुश हुई सुकून की एक लहर मेरे वजूद में उतर गई थी 

तभी मैं फिर उनके कमरे में आ गई और वह दोनों यह काम कर रहे थे मैं भी फिर उनके साथ शामिल हो गई आज तो मेरी सास कल से भी ज्यादा जल्दी थक गई थी थोड़ी ही देर गुजरी थी कि वह हापना शुरू हो गई थी और मेरे ससुर को कहने लगी कि आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है आज मैं यह सब नहीं कर सकती तभी मेरे ससुर कहने लगे कि तुम्हारे साथ मसला क्या है दिन बदन तुम बहुत ही कम वक्त देने लगी हो और जल्द ही तुम थक जाती हो फौरन से यहां पर आओ

 और अब अगर तुम अपनी जगह पर बैठी तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा और फिर मेरी सास हम दोनों के साथ शामिल हो गई थी काफी देर तक हम उसी काम में बिजी रहे कुछ देर बाद मेरी सांस फिर से एक तरफ हो गई और कहने लगी कि अब मेरी बस हो गई है अब मुझ में और हिम्मत नहीं है उसके बाद हम दोनों ही यह काम करते रहे और फिर काफी देर के बाद जब मैं थक कर चूर हो गई तो मेरे ससुर खुद ही मुझे कहने लगे कि अब तुम भी चली जाओ तुम बहुत थक गई हो

 और जैसे ही मैं अपने बेड पर आकर लेटी तो नींद की वादियों में चली गई थी और मैं सोचने लगी कि आज तो मुझे कल से ज्यादा सुकून हासिल हुआ था आज मेरे पति को वापस आ जाना था मैंने उनकी पसंद के रंग के कपड़े पहने अच्छा सा मेकअप किया और अच्छी सी परफ्यूम लगाकर उनके वापस आने का इंतजार करने लगी तभी उनका फोन आया कि वह आज भी वापस नहीं आ सकते 

आज भी वहीं पर रहेंगे यह सुनकर मैं उदास हो गई थी कि मैंने तो उनके लिए इतनी तैयारियां कर दी थी आज रात के लिए क्या-क्या कुछ सोच लिया था और वे घर पर नहीं आएंगे मैं यही सोच रही थी जब फिर से दरवाजे पर दस्तक हुई जब दरवाजा खोली तो सामने मेरे ससुर खड़े थे 

उनकी जब नजर मेरे हुलिए पर पड़ तो वह अजीब अंदाज में मुझे देखने लगे और कहने लगे कि आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो उनकी तारीफ सुनकर मैं शर्मा गई तभी वह कहने लगे कि अब फौरन से कमरे में आ जाओ मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं मैं उनके कमरे में आ गई और फिर से हम तीनों वह सब करने लगे थे अब मेरा दिल कर रहा था कि मैं रोज ही यह काम करूं अगले दिन मेरे पति भी घर वापस आ गए थे

 वह मुझे अपनी बेताबियां अपनी मोहब्बत की कहानियां सुनाने लगे कि वह मेरे बगैर  कितने बेचैन थे और मुझे कितना याद कर रहे थे उनकी बात सुनकर मैं भी बहुत खुश हो गई कि आखिर उन्हें मेरा एहसास हो गया और मेरी कमी महसूस होने लगी थी तभी मैंने उनके बाजुओं पर सर रख दिया और फिर शांत नींद सो गई थी अब मैं रोज अपने पति के सोने के बाद सास ससुर के कमरे में चली जाती थी

 और फिर अधी रात तक हम उसी काम को करते रहते थे एक रात जब मैं ससुर के कमरे से अपने कमरे में वापस आई तो मेरे पति सख्त गुस्से में थे मुझे कहने लगे कि मैंने तुम्हें मना किया था कि तुम रात को कमरे से बाहर मत जाया करो मगर तुमने मेरी बात नहीं मानी कहां गई थी तुम मैंने उनके पास बैठे हुए कहा कि मैं अपकी मां जी के कमरे में थी यह सुनकर वह हैरान रह गए कि तुम इस वक्त मेरे मम्मी के कमरे में क्या कर रही थी वह सक्की नजरों से मुझे देखने लगे मैं कहने लगी कि उनके साथ मुझे काम था 

इसलिए गई थी वह चुप रह गए उन्होंने फिर उसके बाद कोई बात बात नहीं की थी अब जब मैं हर दूसरे तीसरे दिन सुकून हासिल करने के लिए अपने सास ससुर के कमरे में जाने लगी तो मेरे पति मुझसे यह बात पूछने लगे कि कौन सा काम करने जाती हो तुम मम्मी के पास मैंने कुछ ना कहा और वहां से जाने लगी तो शिवम ने मुझे खींचकर बेड पर धकेल दिया और गुस्से से बोलने लगे शिवम को इतने गुस्से में देखकर मैं डर गई और डर के मारे में बताने ही जा रही थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई तो मेरे पति ने जाकर दरवाजा खोला सामने ससुर जी थे

 ससुर जी को शिवम से काम था इसलिए शिवम ससुर जी के साथ चले गए तो मैंने ठंडी आह भरी जब एक रात में ससुर जी के कमरे में गई तो शायद शिवम सोए नहीं थे वह मुझे तलाश करते हुए सांस ससुर के कमरे में आ गए और यह सब करते देखकर बहुत हैरान हो गए जब हमें एक पैर पर खड़े होकर पूजा करते हुए देखा तो उनकी चीखें निकल गई और कहने लगे कि यह आप लोग क्या कर रहे हैं

 तभी मेरी सास ने अपना दूसरा पैर जमीन पर रख दिया और सोफे पर बैठते हुए बोली काफी दिनों से तुम्हारे पापा यह पूजा कर रहे हैं उनका कहना है कि इस तरह एक पैर पर खड़े रहकर पूजा करने से भगवान बहुत खुश होता है और इंसान को वह सब कुछ मिल जाता है जो वह चाहता है मैं तो जल्दी थक जाती हूं मगर तुम्हारी पत्नी और तुम्हारे पापा तो कितनी देर तक इस काम को करते रहते हैं ना जाने यह दोनों क्यों नहीं थकते यह देखकर मेरे पति ने मुझे मुस्कुराती हुई नजरों से देखा

 और कहने लगे कि हां मेरी पत्नी बहुत अच्छी है और कभी भी यह किसी खास काम को करते हुए नहीं थकती यह बात उन्होंने खुश अंदाज में कही थी यह सुनकर मैं शर्मा गई और फिर उसके बाद मेरे पति भी हमारे साथ इस काम में शामिल हो गए थे और हम चारों मिलकर रोज इसी तरह एक पैर पर खड़े होकर पूजा करते हैं 

 

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