सबक आमोज़ हिंदी स्टोरी। Mastram Kahani Hindi | Sad And Emotional Hindi Story | Meri Kahaniyan

Mastram Kahani Hindi : मेरी शादी मेरी पसंद के लड़के से हई थी मै बहुत ही खुश थी, लेकिन मेरी शादी को करीब एक महीना हो चुका था पर मेरे पति ने अभी तक मेरे साथ पति-पत्नी जैसा रिश्ता नहीं निभाया, मेरा पति मुझसे प्यार भरी बाते तो करता लेकिन मेरी के ज्यादा करीब,और वह हर समय ही मेरी मां की सेवा में लगे रहते एक दिन मैं मेरी मां के कमरे से गुजर ही रही थी कि तभी मुझे मेरे पति और मेरी मां के बात करने की आवाज आई और जब मैंने दरवाजा खोला तो जो देखा उसे देखकर मेरे होश ही उड़ गए 

मेरा नाम सुबी है मेरी शादी मेरी ही पसंद के लड़के  अर्जुन के साथ हुई थी अर्जुन मुझ पर जान देता था मैं और अर्जुन दोनों ही एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे वह मेरे घर पर आया करता और मेरी मम्मी को भी अर्जुन बहुत पसंद था इसलिए मेरी मम्मी ने मेरी और अर्जुन की शादी करवा दी अर्जुन यूं तो एक मिडल क्लास फैमिली से था पर वह मेरा सच्चा दोस्त था

 वह हमेशा ही मेरी ढाल बनकर खड़ा रहता उसकी इन्हीं अच्छाइयों के कारण मेरी और अर्जुन की दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई और हमने शादी कर ली पर शादी के बाद अर्जुन ने मेरे साथ कोई भी पति-पत्नी जैसा रिश्ता नहीं बनाया वह हर समय ही मेरी मम्मी की सेवा में लगा रहता शादी के बाद मेरी मम्मी बहुत ही बीमार रहने लगी थी 

कभी तो उनकी कमर में दर्द तो कभी पैर में दर्द रहता ही रहता और जब हमें यह बात पता चलती तो मुझसे पहले अर्जुन मेरी मम्मी के पास भागे भागे जाता और मम्मी की दवाई लगाकर कमरे से बाहर आ जाता और दरवाजा बंद करते हुए मुझे बोलता कि चलो अब मम्मी को आराम करने दो मैं मम्मी के दवाई लगा दी हैं पहले तो मैं बहुत खुश होती कि चलो मेरे पति मेरी मम्मी के मुझसे भी ज्यादा केयर करते हैं

 और अपनी मां जैसा ही मानते हैं पर यह अब रोज-रोज का हो चुका था यूं तो मेरी मां बहुत ही जवान थी शादी से पहले तो उन्हें आज तक किसी भी तरह की बीमारी ने नहीं पकड़ा था वह खुद ही और कभी बीमार हो भी जाती तो वह खुद ही घरेलू तरीके से ठीक भी हो जाती मेरी मां अपने शरीर का बहुत ध्यान रखती वह मुझसे भी बहुत ज्यादा खूबसूरत लगती वैसे तो वह 40 साल की थी 

पर जब मैं और मेरी मां कभी बाहर निकलते तो सब मुझे तो सब वह उनको मेरी छोटी बहन बताते और हर कोई मुझसे पूछता कि यह तुम्हारी छोटी बहन है क्या तब मैं उन्हें हंसते हुए बोलती नहीं नहीं यह मेरी मां है मेरी मां थी ही इतनी खूबसूरत और जवान उनको देखकर हर कोई लड़का उनको देखता ही रह जाता 

जब भी मेरे पति के साथ कमरे में जाती तभी मेरी मां के कमर में कमरे से दर्द भरी आवाज आती और मेरे पति भागे भागे उनके पास चले जाते अब यह सब मुझसे अब देखा नहीं जा रहा था भले ही वह मेरी मां थी पर अपने पति को मैं अपने से दूर होता हुआ कैसे देख लूं क्योंकि मैं अपने पति से बहुत प्यार करती थी

और कोई भी पत्नी यह नहीं चाहेगी कि उसका पति उसे छोड़कर किसी और के पास जाए किसी और की इतनी केयर करें अब मेरी मां और मेरे पति के बीच का रिश्ता कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था सास और दामाद के रिश्ते से कई ज्यादा एक दिन की बात है, मैं अर्जुन का इंतजार कर रही थी पर अर्जुन दो घंटे हो गए पर नहीं आया 

तब मैंने कमरे से बाहर जाकर खुद ही उसे देखा तो वॉचमैन ने मुझे बताया कि अर्जुन साहब  वो किसी की शादी में गए हैं मैंने बोला किसकी शादी में तो उन्होंने बोला तो उसने बोला कि उन्होंने मुझे केवल यह बोला कि वह कल सुबह आएंगे वह उनकी वह अपने दोस्त की शादी में गए हैं मैंने सोचा कि अभी तक तो उसका कोई दोस्त नहीं था अचानक से दोस्त कहां से प्रकट हो गया

और मुझे भी नहीं बताया मैंने बोला ठीक है तुम जाओ अपना काम करो और यह कहकर मैं अपने कमरे में जाने लगी मैं अपने कमरे का दरवाजा बंद करके बेड पर लेटी हुई थी मुझे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि मुझे  अर्जुन की बहुत याद आ रही थी इस चक्कर में मैं बस आंख बंद करके लेटी ही थी कि कुछ समय बाद मुझे मेरी मां के कमरे से वापस से वह प्यार भरी आवाज आने लगी मुझे समझ नहीं आया 

मैंने सोचा अर्जुन तो है ही नहीं यहां पर तो फिर मां किससे बातें कर रही है और फिर मैंने सोचा कि मेरे पापा तो किसी  और कमरे में सोते हैं तो मेरी मां मेरे पापा से भी बात नहीं कर सकती तो फिर किससे बात कर रही है और वह आवाज बढ़ने ही लगी थोड़ी देर बाद मैं फट से उठी और मैंने अपनी मां के कमरे में पास गई उससे पहले मैं अपने पापा के कमरे में गई तो मैंने देखा कि मेरे पापा तो सो रहे थे

मैंने सोचा फिर  तो आवाज किसकी है अर्जुन भी घर पर नहीं है थोड़ी देर बाद मैं अपनी मां के साथ अपनी मां के कमरे के पास गई और जब मैंने ध्यान से सुना तो वहां से प्यार भरी आवाज सुनाई देने लगी जब मैंने और ध्यान दिया तब पता चला कि जैसे कि कोई लड़का है जो अर्जुन की तरह ही बोल रहा है और जब बहुत ध्यान दिया तब पता चला कि धीरे-धीरे वह आवाज अर्जुन की जैसी ही लगने लगी, 

फिर मैंने सोचा अर्जुन तो यहां है नहीं फिर और फिर वह मेरी मां के पास कमरे में अंदर कमरे में ही हूं तभी मुझे याद आया कि जब भी मैं अपनी मां के कमरे में जाती तो अर्जुन दरवाजा बंद करके आ जाता और अपनी मां के कमरे से इस तरह की आवाज मुझसे और सुनी नहीं जा रही थी इसलिए मैंने फौरन दरवाजा खोला और जैसे ही मैंने दरवाजा खोला मैंने देखा कि अर्जुन और मेरी मां एक ही बेड पर थे 

अर्जुन ने जब मुझे देखा तो वह बेड से नीचे गिर गया और बोलने लगा तुम यहां क्या कर रही हो तो मैंने बोला यह तो मुझे पूछना चाहिए कि तुम यहां क्या कर रहे हो तुम तो अपने दोस्त की शादी में गए थे ना  अच्छा तो तुम यहां मेरी मां की दवाई लगाने आए हो,मैंने अपनी माँ की तरफ देखा और बोला मां आपको शर्म नहीं आती आप अपनी ही बेटी का घर बर्बाद कर रही हो मेरी मां ने मुझे खामोश करते हुए बोला तुम चुप हो जाओ 

तुम्हें अपनी मां से ऐसे बात नहीं करनी चाहिए मैंने गलत बोल दिया,मजाक तो तुम लोगों ने बना रखा है सास और दामाद के रिश्ते का सास और दामाद के रिश्ते की कदर ही नहीं कर रहे मैं तो क्या करूं मैंने बोला अगर अच्छा तुम जान तब मेरी मां ने बोला अगर तुम जान ही चुके तो तुम्हें सच बता ही देती हूं 

अर्जुन ने तुमसे शादी सिर्फ मेरे बोलने पर की थी उसने तुम्हें फसाया था अर्जुन तुमसे कोई प्यार नहीं करता बल्कि मैं और अर्जुन एक दूसरे से प्यार करते हैं और तुमसे शादी का नाटक करके वह इस घर में आ गया तुम्हारे पापा तो मेरे शौक पूरे नहीं कर सकते थे, तो मुझे कुछ तो करना ही पड़ता तभी मेरी मुलाकात अर्जुन से हुई और अर्जुन को पहली नजर में देखते ही पसंद आ गया

 मैंने बोला बस करो मां आपको शर्म नहीं आती सांस और दमाद के रिश्ते को ही बिगाड़ दिया अर्जुन मेरा पति है तुम्हारा नहीं तभी मैं अर्जन का हाथ पकड़ते हुए वहां से लेकर जाने लगी कि अर्जुन ने मेरा हाथ झटका और बोला सुना नहीं तुम्हारी मां ने क्या मैं तुम्हारा पति जरूर हूं पर मेरा और तुम्हारा ऐसा कोई रिश्ता नहीं तुम चाहो तो जा सकती हो मैं सिर्फ तुम्हारी मां से प्यार करता हूं 

और तुम्हारी मां की खातिर ही यहां आया हूं वरना तुम जैसी लड़की को तो मैं देखता तक नहीं तुमसे शादी ही कौन करता तुम्हारी हाइट तो इतनी छोटी है कि तुम मेरे कंधे तक नहीं आ सकती जब मैंने यह सुना तो मेरा दिल जोर-जोर से रोने लगा मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि वही लड़का है जो कभी मेरे लिए लोगों से लड़ता था और आज वह मुझसे ही लड़ रहा है

 अब मैं इस रिश्ते में नहीं रहना चाहती थी क्योंकि मेरा उस घर में कोई भी नहीं था मेरी मां ही मेरी खुद की सगी नहीं रही और मेरा पति भी मैं वहां से चली गई और अब मैं धीरे-धीरे इंडिपेंडेंट बनने लगी लोग मुझ से  लोग जॉब लेने के लिए आते हैं और मेरे नीचे कई लोग काम करते हैं इसलिए मैंने इतनी मेहनत की इतना पैसा कमाया और एक बिजनेस खड़ा कर लिया अब मेरे नीचे बहुत से लोग काम करने लगे 

अब मेरे पास हर कोई जॉब लेने के लिए आता एक दिन मेरे पास अर्जुन भी आया जब उसने देखा कि मैं बॉस की चेयर पर बैठी हूं तो अर्जन ने कहा कि मुझे पैसों की सख्त जरूरत है अब हम रोड पर आ चुके इसलिए मुझे जॉब की सख जरूरत है 

मैंने कहा मैं तो इतनी छोटी हूं ना तुम्हारे कंधे तक नहीं आती तो मैं तुम्हें जॉब कैसे दे दूं जाओ दूसरी जॉब ढूंढो और यह कहकर मैंने उसे धक्के मार के बाहर निकाल दिया और मैंने उसे ऐसा जवाब दिया कि वह उम्र भर याद रखेगा और अब मैं अपनी लाइफ में बहुत खुश थी मैं अकेली थी इंडिपेंडेंट थी पर बहुत खुश थी….

 

बहन की इज्जत 

 

मैं विदेश में काम करता कुछ समय पहले ही विदेश से अपने घर आया था क्योंकि मुझे अपनी मम्मी की बहुत ही याद आ रही थी इसलिए मैं उनसे मिलने एक दो हफ्ते की छुट्टी लेकर घर आ पहुंचा जब मैं घर आया तो मैंने देखा कि एक पड़ोसन अपनी खूबसूरत बेटी को मेरे घर छोड़कर चली जाती व मेरी मम्मी को कहती कि मैं रात तक आ जाऊंगी

 तब तक आप इसका ध्यान रखना वह लड़की दिखने से ही खूबसूरत  लग रही थी उसकी खूबसूरत हाथ देख मुझे उसे देखने का मन करता पर मैं चाहकर भी नहीं देख सकता था क्योंकि वह हर  समय बर्गा पहन कर रखती और सिर्फ उसकी आंखें और हाथ ही दिखते मैं उस लड़की को हर समय देखता रहता इतनी खूबसूरत लड़की को अपने सामने बैठा देख मेरा सब्र अब टूटता ही जा रहा था

विदेश में तो यह सब आम बात होती है वहां पर सिर्फ लड़के ही नहीं बल्कि लड़कियां भी उनका साथ देती है पर यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता था क्योंकि उसकी मम्मी और मेरे परिवार में बहुत अच्छी दोस्ती थी और अगर मैं ऐसा कुछ करता तो इससे मेरे पूरे परिवार को बहुत ज्यादा बदनामी  उठानी पड़ती पर मैं अपने मन को कैसे काबू कर सकता था मन तो मन होता है

 इतना चंचल मन कभी किसी के काबू में नहीं हुआ मैंने अभी तक अपनी सभी जिद पूरी की थी जो भी मेरे मन में आया मैंने वह सारे काम किए मैं करना चाहता था मैं विदेश भी गया और मैं एक अच्छी कंपनी में काम करना चाहता था मैंने वह भी किया पर अब जो मेरे मन में चल रहा था वह मैं नहीं कर पा रहा था ना जाने किस चीज का डर था जो मुझे बार-बार सता रहा था

एक दिन वापस से वह पड़ोसन अपनी बेटी को हमारे घर ले आई तभी वह मेरी मम्मी से कुछ बातें करने लगी उसकी बात सुनकर मुझे बहुत हैरानी हुई कि कोई मां अपनी बेटी के लिए यह सब कैसे कह सकती है ऐसा सुन तो मैं हैरान हो गया क्योंकि वह कह रही थी कि इस लड़की ने मुझे बहुत तंग कर रखा है जब से मेरी जिंदगी में आई है तब से मेरा सुख चैन सब ले गई 

यह लड़की तो मुझे एक आंख नहीं  भाती मन तो करता है कि इसे अपने घर से बाहर निकाल दूं पर यह सब निमरा आंटी अपनी बेटी के लिए क्यों कह रही थी इतनी खूबसूरत बेटी के लिए क्यों कह रही थी अपनी फूल जैसी बेटी के बार बार में कोई मां ऐसे कैसे कह सकती है तभी मेरी मम्मी कहने लगी कि निमरा तुम ऐसे मत कहो बेटी तो घर की लक्ष्मी होती है

तुम अपनी बेटी के लिए ऐसा क्यों कह रही हो निमरा आंटी ने बोला लक्ष्मी होती तो पर यह मेरे घर की लक्ष्मी नहीं है क्योंकि वह मेरी  नहीं तभी मैं मम्मी के कमरे में आ गया और निमरा आंटी ने मुझे देख चुप हो गई वह कुछ कह रही थी पर मुझे आता देख अपनी बात पूरा ना कर सकी मैं भी सोचने लगा कि कोई मां अपनी बेटी के लिए ऐसा कैसे कह सकती है बच्चों के अंदर दो मां की जान बचती है

 और यह अपनी बेटी अपनी ही जान को कोस रही है कि तभी मुझे मौका मिल गया क्योंकि जब वह अपनी बेटी से खुद ही पीछा छुड़ाना चाहती है तो उसके साथ कुछ भी गलत हो या अच्छा उससे उसकी मम्मी को क्या फर्क पड़ता है अब मुझे भी मौका मिल गया था मेरे शरीर में जो शैतान उछल रहा था और उछल उछल के कह रहा था कि अपना सब छोड़ अपनी मनमानी कर जैसा मैं सोच रहा था वैसा ही हुआ

कुछ दिन बाद निमरा आंटी फिर से आई और  अपनी बेटी को घर पर छोड़ते हुए कहने लगी कि मम्मी को कहना मैं शाम को आकर इसे ले जाऊंगी मैंने उन्हें यह बात नहीं बताई कि मम्मी बाहर गई हुई है निमरा आंटी भी यह कहकर घर से बाहर चली गई उनकी बेटी हमारे घर के होल में सोफा सेट पर ही बैठी हुई थी कि तभी मैं पीछे से आया और उसके सिर पर जोर से डंडा मारकर उसे अपने कमरे में ले गया

 मेरे मन में बहुत बार यह ख्याल आ रहा था कि मैं ऐसा कुछ भी ना करूं बिना लड़की की रजामंदी के यह सब करना गलत है पाप है किसी भी किसी की जिंदगी बर्बाद करना बहुत गलत बात होती है आज पहली बार मेरे मन में यह बात आ रही थी वरना इससे पहले तो कई लड़कियां मेरी जिंदगी में आई और गई पर यह सब पहली बार हो रहा था

जब मैं किसी लड़की के लिए इतना सब सोच रहा था उसकी इज्जत और उसकी रक्षा के बारे में इतना सब सोच रहा हूं ऐसा लग रहा था जैसे कि वह लड़की कोई और नहीं मेरी ही कोई अपनी है पर उससे मेरा क्या रिश्ता था तभी मैं आज के मिले हुए मौके पर ध्यान करने लगा कि इतने समय बाद इतना अच्छा मौका मिला है तो इस मौके को गवाना नहीं चाहिए और फिर मैं कमरे में चला गया

 वहां पर मैंने उस लड़की को अपने बेड पर लेटा दिया था और फिर जैसे ही मैंने उसके चेहरे पर से बुर्का हटाया उसे देख मैं बहुत ज्यादा डर गया और डर के बेड से ही नीचे गिर गया ऐसा लग रहा था जैसे कि मैंने कोई लड़की नहीं बल्कि कोई चुड़ैल देख ली हो थोड़ी देर बाद मैं जोर-जोर से चिल्लाने लगा नहीं नहीं यह मैं क्या करना चाह रहा था क्योंकि वह लड़की कोई और नहीं मेरी ही 

और मैं जोर-जोर से कहने लगा यह मुझे क्या हो गया अपनों के साथ ही कोई ऐसा करता है क्या मां को पता चलेगा तो मां क्या सोचेगी मेरे बारे में कि तभी मेरी चीख सुन मां भी कमरे में दौड़ी चली आई और जब मां ने उस लड़की को देखा तो कहने लगी अरमान यह तुम क्या करने जा रहे थे तुम्हारी हिम्मत भी कैसे हुई यह सब सोचने की जब मां ने उस लड़की को देखा तो मां को भी ऐसा आभास हुआ 

जैसे कि वह कोई और नहीं उनकी अपनी हो पर वह कौन थी उसका हमारे साथ क्या रिश्ता था जब मां ने उसे और करीब से देखा तो उसकी शक्ल बिल्कुल मां जैसी लग रही थी मां को पता चल चुका था कि वह लड़की कोई और नहीं उनकी ही बेटी है जो वह बेटी जो 12 साल पहले ही हमसे दूर हो चुकी थी मेरे पापा और मेरी मम्मी के बीच एक दिन बहुत बुरी लड़ाई हुई 

क्योंकि पापा मम्मी को धोखा दे रहे थे मम्मी ने कहा पापा का किसी और औरत के साथ गलत संबंध था इसलिए जब यह बात मेरी मम्मी को पता चली तो मां ने उनसे रिश्ता तोड़ दिया और अपना सिर पकड़ के रोने लगी कहने लगी आप मुझे और मेरे बच्चों को अकेला छोड़ दीजिए आपने तो मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी पर मैं नहीं चाहती कि आपका साया भी मेरे बच्चों पर पड़े

 तभी पापा कहने लगे कि तुम मेरे बेटे को तो मुझसे दूर कर ही चुकी हो पर मैं अपनी बेटी को कभी अपने से दूर नहीं जाने दूंगा और यह कहकर मेरी बेटी यह कहकर मेरी छोटी सी बहन मोना जो कि मात्र दो साल की ही थी उसे अपने साथ ले गए हमने पापा को बहुत ढूंढने की कोशिश की पर पापा कहीं ना मिले हम इस बात को भूल से गए थे 

लेकिन आज इतने सालों बाद यह बात फिर से हमारे सामने आ गई मैं एक तरफ तो बहुत खुश था कि मुझे मेरी बहन वापस मिल गई और दूसरी ओर मुझे खुद पर ही बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था कि मैं अपनी बहन के साथ ही कि क्या करने जा रहा था ऐसा पाप होते-होते बच गया पर अगर फिर भी वह मेरी बहन नहीं होती कोई और लड़की होती मैंने जो सोचा था 

जो करने का मेरा इरादा था वह बहुत गलत था किसी भी लड़की के साथ यह सब करना बहुत ज्यादा गलत होता है हमारा तो क्या हम तो एक लड़के हैं हमारी तो एक दिन की प्यास होती है जो हम मिटाकर चले जाते हैं लेकिन उस लड़की की उम्र भर की जिंदगी बर्बाद हो जाती है और सिर्फ उसकी जिंदगी ही नहीं बल्कि उसके मम्मी पापा की इज्जत उनकी नाक पूरे समाज में कट जाती है

पूरे समाज में उसकी मम्मी पापा की इज्जत क्या रह जाती होगी पर मैं इस बात से बहुत खुश था कि मुझे मेरी बहन मिल गई पर अब मामला यह था कि वह औरत जो मेरी बहन को अपनी बेटी बताया करती और उसे और मेरी बहन को यहां छोड़कर जाती उसका मेरी बहन से क्या रिश्ता था और जब शाम को निमरा आंटी आई तो मेरी मम्मी ने बातों ही बातों में पूछा

 कि आप अपनी बेटी को ऐसे ही किसी गैर घर कैसे छोड़कर चली जाती हो आपको चिंता नहीं होती मेरे घर एक जवान बेटा है कल को आपकी बेटी के साथ कुछ हो गया तो फिर क्या तभी निमरा आंटी कहने लगी अरे क्या होगा कुछ भी तो नहीं होगा मुझे इस लड़की से कोई फर्क नहीं पड़ता वैसे भी यह मेरी सगी बेटी थोड़ी ना है जब मेरी मम्मी ने और मैंने यह सुना तो हम सब हैरान हो गए जो हमारा शक था 

वह एकदम सही निकला तभी उस आंटी ने बोला यह तो मेरे पति की पहली पत्नी की औलाद है मेरे पति अपनी पत्नी और अपने बेटे को तो छोड़कर आ गए पर इस मुसीबत को मेरे गले डाल दिया अब वह तो पूरे दिन  भर दारू पीकर पड़े रहते हैं और मुझे इसकी जिम्मेदारी सोप कर सो जाते हैं और मुझे दिन भर काम रहता है और वैसे भी मुझे इससे छुटकारा चाहिए 

इसलिए मैं इसे आपके घर छोड़कर चली जाती हूं जब हमने यह सब सुना तो हमें बहुत दुख हुआ कि तभी मेरी मम्मी ने कहा कि अब से तुम्हें इसकी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है अब से यह हमारे घर की बेटी है मेरी कोई बेटी नहीं है ना इसलिए मैं इसे अपनी बेटी बनाना चाहती हूं अगर तुम्हें ऐतराज ना हो तो मैं इसे बेटी बना सकती हूं जब उस औरत ने यह सुना तो उसकी खुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं रहा

जैसे कि उसके सिर का बोझ हल्का हो गया हो अब हमारा परिवार पूरा कंप्लीट हो चुका था कुछ समय बाद जब मोना कहने लगी कि आंटी मुझे जाने दीजिए मेरी मम्मी आती ही होगी तभी मेरी मम्मी ने उसे सारी बात बताई और कहने लगी कि यह तुम्हारा ही घर है कुछ साल पहले तुम्हारे पापा तुम्हें मुझसे दूर ले गए थे 

लेकिन भगवान का करिश्मा तो देखो तुम मेरे पास वापस आ गई जब उसे यह सब बातें पता चली तो कहने लगी कि मां भगवान ने मेरे साथ बहुत ज्यादा गलत किया है मुझे आपसे दूर किया मुझे आपकी कितनी जरूरत थी मुझे व औरत हर समय मार रहती मुझे बहुत मारती पर मेरे पास कोई नहीं था जो मुझे बचा सके और ऐसा कहकर मोना रोने लगी तभी मेरी मां ने उसके आंसू पूछे और कहा बेटा बस अब तुम्हें डरने की कोई ज़रूरत नहीं है

अब मैं हूं तुम्हारा भाई है और यह तुम्हारा घर है तुम्हें वहां जाने की जरूरत भी नहीं है मेरी बहन के साथ यह सब क्यों हुआ उसे इतने साल हमसे दूर रहना पड़ा आखिर उसकी क्या गलती थी लेकिन कहते हैं ना अंत भला तो सब भला आखिरकार मुझे मेरी बहन मिल ही गई थी अब मैं बहुत खुश था और अब मैं किसी भी लड़की को बुरी नजर से देखता भी नहीं था और उसकी तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखता

 क्योंकि मुझे आज भी याद है अगर मेरी बहन के साथ वह गलती हो जाती तो क्या होता और सिर्फ मेरी बहन के साथ ही नहीं अगर किसी के भी साथ ऐसा होता तो उस परे क्या बीतती…. हमें हमेशा हर किसी को इज़्ज़त की नज़र से देखना चाहिए… हर लड़की मे एक रूप होता ही माँ का बहन का भाभी का और हमें सब रिश्तो को इज़्ज़त की निगहा से देखे…..

 

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