Mastram Kahaniyan | Emotional And Sad Hindi Story | Manohar Hindi Story Ft-40

Mastram Kahaniyan : एक नजर पूरे घर में दौड़ाने के बाद बहुत धीरे धीरे वह सीधा मेन गेट की जानिब बढ़ गया था बड़े ही धीरे से उसने मेन गेट को अंदर से कुंडी लगाई फिर अपने हाथों को मसलकर अपनी जुबान होठों पर फेर कर बोला आज नहीं बचने वाली तू मेरे हाथों से आज तो मैं तेरा वह हशर करूंगा कि दोबारा मुझसे दूर भागने का ख्वाब में भी नहीं सोचेगी

 

इतना कहकर मेरा 45 से 50 साल का शौहर तेज तेज कदम उठाता घर के अंदर दाखिल हुआ था मैं खिड़की के पास खड़ी उसको यूं आता देखकर हवास बागता हो चुकी थी पूरे घर में बिल्कुल सन्नाटा छाया था सिवाय उस कमरे के जिसमें मैं मौजूद थी वह यूं ही बगैर आवाज पैदा किए चलता हुआ कमरे में आया धीरे से कमरे का दरवाजा खोला अंदर का मंजर देखकर उसकी आंखों में एक चमक पैदा हुई थी

 

क्योंकि मैं दूसरी जानिब चेहरा किए इसी सोच मे लगी थी कि खुद को इस दरिंदे से कहां छुपा सकूं कुछ देर पहले ही मैं बड़ी ही मुतमइन अपने सामने गुड़िया और बाकी खिलौने रखे उनके साथ खेल रही थी इस बात से अनजान कि कितना बड़ा शैतान मेरी ताक में खड़ा है बिल्कुल ही आराम से दरवाजे को लॉक करके वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाता आगे बढ़ा था

 

जैसे ही पलट कर मैंने देखा तो मेरी आंखें तो गोया पथरा ही चुकी थी मै तो सांस लेना ही भूल चुकी थी अगले ही पल मुनव्वर ने आगे बढ़कर मेरे हाथ से गुड़िया छीन ली और फिर बड़ी ही बेदर्दी से गुड़िया को नोच कर एक जानिब को फेंक कर बोला आज किसको बुलाएगी कौन आएगा तेरी मदद को आज तो घर भी बिल्कुल खाली है

 

बुला किसको बुलाना है बड़ी आपा आपा करती थी ना बुला आज अपनी आपा को देखता हूं कौन बचाने आता है तुझे आज मेरे चुंगल से इतना कहकर मुनव्वर ने अपने होठ दांतों से काट लिए थे अगले ही पल अपना सख्त मर्दाना हाथ उसने मेरी जानिब बढ़ाया था मारे खौफ के मैं कमरे में भागने लगी थी मेरा कद छोटा था

 

दरवाजे के ऊपर लगे लॉक तक मैं पहुंच ही नहीं सकती थी अंदर से दरवाजा बजाकर कहने लगी  आपा मुझे कमरे से निकालो यह मेरे कमरे में आ गया है देखो यह मुझे छूने की फिर से कोशिश कर रहा है मुझे यहां से निकालो आपा मुझे बहुत डर लग रहा है लेकिन कमरे में बड़ा ही है मज़ाक उठाने वाला कहकहा गूंजा था मुनव्वर हंसकर कहने लगा बुला लिया जिसको बुलाना है

 

अरे तू तो मेरे जाल में आज फंस चुकी है इतना कहने के बाद बड़ी ही कमीनगी से मुनव्वर ने अपनी कमीज के बटन खोले थे कुछ ही लम्हों के बाद अपनी कमीज उतार कर उसने एक जानिब को फेंकी थी यह मंजर देखकर तो मेरी आंखों के आगे अंधेरा सा छने लगा मुझे अपनी मौत दिखाई देने लगी

 

जब मुनव्वर ने आगे बढ़कर मेरी कलाई को दबोचा और बेड पर लाने लगा खौफ इस कदर मुझ पर हावी हो चुका था कि मैं दोनों हाथ जोड़कर मुनव्वर से कहने लगी कि मेरे साथ कुछ मत करो खुदा का वास्ता है मुझे छोड़ दो लेकिन मुनव्वर तो आज अपनी तमाम तर हवेस मुझसे पूरी करने वाला था उसने बड़ी बेदर्दी से मुझे बेड पर पटका था मुझे इस कदर सख्ती से दबोचा कि मेरे हाथ में मौजूद सुर्ख रंग की कांच की चूड़ियां टूटकर कलाइयों में पेवस्त होने लगी

 

खून की फुआर कलाई से बहकर बिस्तर को रंगीन कर रही थी बे साखता मेरे मुंह से लफ्ज अम्मा निकला था मैंने अपनी मां का प्यार और लम्स महसूस किया तो नहीं था हां अलबत्ता तसवीर में अपनी मां को देख रखा था मेरी मां बिल्कुल मेरे जैसी थी या यूं कहा जाए कि मैं अपनी मां की कॉपी थी वही आंखें वही चेहरा वही जिसने मुझे खानदान भर में  देखा था

 

मुस्कुरा कर आंखों में आंसू लाए यही कहा था कि नूर बिटिया तो बिल्कुल अपनी मां हीना की परछाई बनकर पैदा हुई है मेरी फुफो ने बड़े ही प्यार से मुझे लाकर मेरे बाप शहरियार की गोद में रखा तो अगले ही पल अब्बा ने मुझे झटक दिया अगर मेरी फुफो मुझे ना संभालती तो यकीनन मैं नीचे गिर चुकी होती

 

 

मेरा बाप गुस्से से कहने लगा दूर रख इसे मेरे करीब भी मत आने दे यह मेरी बीवी की कातिला है,अरे इसकी वजह से मेरी हीना मुझे छोड़कर चली गई ना यह दुनिया में आती ना मेरी बीवी मुझे छोड़ कर जाती अगर मुझे पता होता मेरी बीवी मुझे छोड़ जाएगी तो मैं तो इसे दुनिया में आने से पहले ही मार देता इतना कहने के बाद मेरा बाप फूट फूट कर रोने लगा था मेरे मां-बाप की मोहब्बत की शादी हुई थी उन्होंने साथ जिंदगी गुजारने के कई सपने देख रखे थे

 

पहली मर्तबा जब मां प्रेग्नेंट हुई तो अपने आने वाले बच्चे को लेकर भी उन्होंने कई ख्वाब सजा रखे थे मगर दिल में कई तरह के वसवसे थे अक्सर अब्बा कहते कि डिलीवरी के वक्त अगर जरा भी पेची दगी हुई तो मुझे बहुत डर लगता है कहीं मैं तुम्हें खो ना दूं इस बात पर मां मुस्कुरा कर कह देती कि अरे आप मेरे और मेरे बच्चे के लिए दुआ करें

 

खुदा हम दोनों को सही सलामत रखें जब सातवां महीना शुरू हुआ तो डॉक्टर ने साफ-साफ कह दिया कि डिलीवरी के वक्त  कुछ प्रॉब्लम हो सकती हैं हमें ऑपरेशन करना पड़ेगा जब यह बात अब्बा ने सुनी तो यही कहा कि मुझे बच्चा नहीं चाहिए बेशक बच्चे को अभी मां से जुदा करदे मैं अपनी बीवी को खतरे में नहीं देख सकता

 

इस कदर जुनूनी शख्स पर कयामत तब टूटी जब डिलीवरी के वक्त मुझे तो नर्स ने लाकर अब्बा की गोद में थमा दिया मुझे देखकर अब्बा ने बेसाखता अपने लब मेरे माथे पर रख दिए अगले ही पल रोते हुए नर्स से पूछने लगे कि मेरी  बीवी तो ठीक है ना क्या उसने हमारी बेटी को देखा है मगर नर्स नजरें चुराकर बताने लगी के सॉरी के साथ हम आपकी बीवी को नहीं बचा सके

 

शायद वह वक्त था जब एक बाप के दिल में अपनी बेटी के लिए नफरत आ चुकी थी मुझ मासूम को वो बड़ी ही हिकारत से मारने लगे कहने लगे इसकी वजह से मेरी मोहब्बत मुझसे जुदा हो गई ना यह दुनिया में आती ना मेरी बीवी मुझे छोड़कर जाती यह तो मेरी फूफा थी जिन्होंने मुझे पाला था वरना अब्बा तो अपनी नजरों के सामने से गुजरता देखना भी गवारा नहीं करते थे

 

,पाच साल तक मैं अपनी फुफो के पास ही रही मगर जब फुफो की शादी हो गई तो घर में सिर्फ अब्बा और मैं रह चुके थे इतना तो मैं जान ही चुकी थी कि मेरा बाप मुझसे शदीद नफरत करता है मैं अपनी मां की तसवीर को सीने से लगाकर अक्सर सरगोशियां में अपनी मां से बातें करती थी कि काश अम्मा आप इस दुनिया में होती तो हम सब हंसी खुशी रहते

 

मैंने तो सचमुच मेंने आपकी जान ले ली अब्बा सही कहते हैं मैं ही अम्मी की मौत की जिम्मेदार हूं क्योंकि मेरे आने के बाद ना मुझे आपका प्यार मिला ना ही मेरे अब्बा का प्यार नसीब हुआ मैं तो बिल्कुल यतीम जैसी जिंदगी गुजार रही हूं धीरे-धीरे वक्त यूं ही गुजरने लगा मगर अब्बा के दिल में मेरे लिए मोहब्बत नहीं आ पाई

 

अगर गलती से मैं अब्बा के सामने चली भी जाती तो यही कहते कि तू मेरी बीवी की कातिला है मेरा बस चले तो मैं तेरा अभी यूं ही गला घोंट कर मार दूं लेकिन मैं अपने हाथ तेरे खून से नहीं रंगना चाहता जैसे ही मेरी उम्र 10 साल हुई तो उस रोज अब्बा बहुत रोए रो-रो कर कहने लगे कि आज तुम्हारी वजह से मेरी बीवी को मुझसे बिछड़े हुए 10 साल हो गए मैं अब तुम्हें मजीद इस घर में नहीं रखूंगा

 

अगले ही रोज अब्बा ने रिश्ते वाली से बात करके कहा कि मुझे एक रिश्ते की तलाश है रिश्ते वाली भी हैरान हो गई फिर कहने लगी हो सकता है 10 साल बाद अब्बा अपनी पहली बीवी को भूलकर शादी करना चाहता हो रिश्ते वाली ने मुंह में पान चबाते हुए कहा कि किस उम्र की लड़की का रिश्ता लेना चाहते हो उस पर अब्बा ने घूर कर रिश्ते वाली को देखा कहने लगा मुझे अपने लिए नहीं अपनी बेटी के लिए रिश्ता चाहिए

 

रिश्ते वाली तो गला साफ करने लगी भला यह कैसे मुमकिन था मैं मासूम बच्ची थी मगर जब पैसों की को देखा तो फिसल गयी रिश्ते वाली भी हैरान थी मगर क्या करती यह जानते हुए भी कि वह शख्स पहले से शादीशुदा है दो बीवियां हैं उसकी छह बेटियां दोनों बीवियों से मिलाकर मौजूद हैं तीसरी शादी वह इसलिए करना चाहता है

 

ताकि अपना वारिस पैदा कर सके उसकी पहली दोनों बीवियों से अभी तक बेटा नहीं हुआ था इसलिए तीसरी का तलबगार था अब्बा सब जानते बूझ इस रिश्ते के लिए हां कर चुके थे जब अब्बा से बड़ी उम्र का शख्स मेरे रिश्ते के लिए आया तो अब्बा ने मुझे वहां बुलाया मैं बड़ी डरी सहमी सी वहां पर दाखिल हुई उस शख्स ने जब मुझे देखा तो अगले ही पल उसकी तो गोया राल टपकने लगी

 

इतनी कम उम्र लड़की यानी मैं उसकी जिंदगी में शामिल होने वाली थी उसकी तो खुशी की कोई इंतहा नहीं रही थी मैं तो पहले समझ ही ना पाई कि यहां पर हो क्या रहा है मगर जब सुर्ख रंग का जोड़ा सुर्ख चूड़ियां और तमाम तर चीजें रखी गई तब जाकर मुझे एहसास हुआ कि मेरे अब्बा ने तो मेरा रिश्ता तय कर दिया है मैं रोने लगी चिल्लाने लगी इंकार करने लगी कि अब्बा मैं तो बच्ची हूं

 

मेरी शादी मत करवाओ मगर अब्बा मुझे दबोच कर कहने लगे कि मुझे तुझसे इस कदर शदीद नफरत है शुक्र कर अभी तेरे टुकड़े-टुकड़े करके मैंने कुत्तों को नहीं खिला दिए जिंदा सांस लेना चाहती है तो जिस शख्स के साथ भेज रहा हूं जा,दोबारा पलट कर यहां आने की कोशिश मत करना क्योंकि तेरा बाप उसी रोज तेरे लिए मर गया था

 

जब तेरी वजह से तेरी मां मुझे छोड़कर गई थी मैं वक्त से पहले ही बड़ी तो हो ही चुकी थी मगर एक खौफ सा मेरे वजूद पर हावी था पूरे खानदान वाले अब्बा को लानता कर रहे थे इतनी मासूम बच्ची की शादी मत करो मगर अब्बा ने किसी की ना सुनी चंद रोज बाद ही सादगी से निकाह किया और मुझे उसके साथ रुखसत कर दिया मैं बच्चों की तरह रोती रही चिल्लाती रही गाड़ी से बार-बार बाहर निकल कर आ जाती

 

मगर मेरे अधेड़ उम्र शौहर मुनव्वर ने इस मर्तबा काफी सख्ती से काम लिया था वह मुझे लेकर अपने घर की जानिब निकल आया सारे रास्ते में सिसकती रही रोती रही जब मुनव्वर के साथ उसके घर पहुंची तो उसकी दोनों बीवियां इस बात से बेखबर थी कि वह शादी करके आ रहा है जब उसने मुझे इतना तैयार शैयार मुनव्वर के साथ देखा तो उससे पूछने लगी कि यह बच्ची कौन है

 

इस बच्ची को यहां पर क्यों लाए हो हमारे खानदान की तो नहीं लगती इस पर मुनव्वर मुस्कुरा कर कहने लगा कि यह मेरी तीसरी बीवी है यह सुनकर तो पहली दोनों बीवियों पर गोया आसमान ही टूट चुका था कहने लगी कि यह क्या कह रहे हो मुनव्वर होश में तो हो यह तो तुम्हारी अपनी बेटियों से भी छोटी है बात तो ठीक थी मुनव्वर की बड़ी बेटी 14 साल की थी जबकि मैं तो सिर्फ 10 साल की थी

 

मैं अभी भी रो रही थी मुनव्वर मुझे पकड़कर कमरे में ले जाने लगा तो मुनव्वर की पहली बीवी बीच में आ गई कहने लगी खबरदार जो तुमने इसे कमरे में रखा तो तुम्हें शर्म नहीं आई अपनी बेटी की उम्र की लड़की से शादी करते हुए अरे पहले क्या दो बीवियां कम थी जो तीसरा निकाह किया और वह भी इस छोटी सी बच्ची से करके आ गए हो जरा तरस नहीं आया

 

इस पर मुनव्वर तो हत्थे से ही उखड़ चुका था कहने लगा जब इसके बाप को तकलीफ नहीं है तो तुम लोगों को क्यों मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं तुम दोनों तो मुझे बेटा पैदा करके नहीं दे सकी यही अब मुझे मेरा वारिस देगी मगर उसकी बड़ी बीवी बड़ी खुदा तरस और रहम दिल किस्म की थी यह जानते हुए भी कि मैं उसकी सौतन हूं उसने मुझे अपने पीछे छुपा लिया

 

कहने लगी नहीं मैं तुम्हें इसके करीब नहीं आने दूंगी यह मेरे साथ मेरे कमरे में रहेगी जब तक यह बालिग नहीं हो जाती तुम इसको हाथ नहीं लगा सकते, दूसरी बीवी को तो इन सब से कोई सरोकार ना था उल्टा वह सौतन वाली नजरों से मुझे देख रही थी क्योंकि मुनव्वर ने उसके साथ बड़े मोहब्बत के दावे करके उसे यहां लाया था

 

मगर जब उसने उसे चार बेटियां पैदा करके दी तो बहरहाल मुनव्वर तीसरी शादी करके एक और बीवी यानी मुझे ले आया था मुझे तो अपनी बड़ी सौतन ही अपना सहारा लगी थी मैं आप कहते हुए उसके दुपट्टे में छुप गई कहने लगी कि मुझे इस शक से बचा ले मुनव्वर भले ही बड़ा बारोबार हट्टा कट्टा किस्म का इंसान था उसके आगे किसी की नहीं चलती थी मगर इस मामले में वह अपनी बीवी से जरा हिचकिचाया क्योंकि यह घर उसकी पहली बीवी का ही था

 

अगर वह जरा भी चू चि करता या उसकी मर्जी के खिलाफ जाकर कुछ भी करने की कोशिश करता तो यकीनन वह उसे घर से निकालने का हक भी रखती थी इसलिए उसने कड़वा घूंट भरा और अपने कमरे में जाकर बैठ गया एक मर्तबा फिर बीवी से कहने लगा कि इसे मेरे वाले कर दो आज मेरी इसके साथ सुहाग रात है

 

मगर उसकी बीवी ने हाथ खड़े कर दिए कि अगर तुमने ऐसा कुछ भी करने की कोशिश की तो एक सेकंड नहीं लगेगा मुझे पुलिस स्टेशन में तुम्हारे खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाने में यह धमकी सुनकर मुनव्वर खामोश हो चुका था मेरी तो हालत ही गैर हो चुकी थी फिलहाल तो मेरी सौतन ने बचा लिया था लेकिन आखिर कब तक मैं रोते हुए अपनी सौतन से लिपट गई कहने लगी कि आप मुझे बचा लो मुझे कोई शादी नहीं करनी मुझे उस शख्स से बहुत डर लगता है

 

मैं उसके कमरे में नहीं जाऊंगी मैं तो बिल्कुल ही बधवाश सी हो चुकी थी जो मुंह में आ रहा था बोलती चली जा रही थी मगर पहली बीवी को मुझ पर तरस सा भी आ चुका था आंखों में आंसू डगमगाने लगे बड़े ही प्यार से मुझे अपने पास बिठाया मेरे गालों को सहला कर कहने लगी कि फिक्र मत करो जब तक मैं जिंदा हूं कोई तुम्हारा बाल भी बैका नहीं कर सकता

 

जब मैंने मुनव्वर की पहली बीवी की इतनी मोहब्बत और अपनेपन की बातें सुनी तो मुझे कुछ राहत मिली मेरी हालत तोड़ा सही हो रही थी, मुनव्वर की पहली बीवी गई और गरम-गरम खाना लेकर आई फिर अपने हाथों से मुझे खिलाया भूख इस कदर हावी थी कि हड़बड़ाहट में खाना आधा मुंह से बाहर गिर रहा था यह देखकर  मेरी सौतन के मुंह से यह निकला था

 

कि मुनव्वर तुझे कीड़े पड़े कैसा जालिम इंसान है तू इस मासूम बच्ची को बिहा कर घर ले आया सबसे बड़ी लानत तो इसके बाप पर है जिसने इतनी छोटी बच्ची को अपने घर से रुखसत कर दिया अरे इतनी भारी थी तो किसी दारुल अमान में छोड़ आते कम से कम बच्ची को यूं मुनव्वर जैसे दरिंदे के हवाले ना करते मैं तो मुनव्वर की पहली बीवी के कमरे में ही रह रही थी जबकि वहीं वह रात बड़ी मुश्किल से मुनव्वर की कटी थी

 

रात में दो-तीन मर्तबा उठकर वह उस कमरे में आया था कि किसी तरह मौका मिले और वह मुझे वहां से निकाल कर ले आए लेकिन सब  कुछ तो जैसे मलिया मेट हो चुका था मुनव्वर यही चाहता था कि किसी बहाने से मुझे कमरे में ले जाए या डरा धमका कर वह अपना हक वसूल करें मगर मैं तो कमरे से बाहर ही ना निकलती

 

एक रोज पड़ोस में कुरान ख्वानी थी मुनव्वर की पहली बीवी वहां पर चली गई बच्चे भी सहन में बैठे पढ़ाई कर रहे थे और मुनव्वर की दूसरी बीवी अपने कमरे में सो रही थी यही मौका था जब मुनव्वर का दिल मचलने लगा वह उस कमरे में चला गया जहां पर मैं थी जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला तो मैं सामने बेड पर सो रही थी मुनव्वर खुद पर काबू ना रख पाया आकर मेरा कंधा सहलाने लगा

 

अभी उसने मेरे कंधे को थामा ही था कि अगले ही पल उसके कंधे पर किसी ने हाथ रख दिया मैं भी चिल्लाकर खौफ से उठ बैठी हड़बड़ा कर जब मुनव्वर ने पलट कर देखा तो उसकी बड़ी 14 साला बेटी उसे घूर कर देख रही थी, बेटी को खड़ा देखकर वह शर्मसार हो गया फौरन पीछे हटा बुखलाकर कहने लगा तू यहां क्या कर रही है चल जा यहां से मगर अगले ही पल वह कहने लगी कि अब्बा अम्मा मुझे कह कर गई हैं

 

कि नूर के कमरे में आपको ना जाने दूं इसलिए बेहतर है कि यहां से चले जाएं वरना मैं अम्मा को जाकर बता दूंगी बेटी के मुंह से ऐसी दीदा दलेरी सुनकर तो मुनव्वर गुस्से से बिफर चुका था जोरदार थप्पड़ बेटी के मुंह पर लगा दिया कि तेरी इतनी औकात बाप पर हुकम चलाएगी उसी वक्त वहां पर उसकी पहली बीवी भी आ चुकी थी

 

बीवी को देखकर मजबूरन मुनव्वर को वहां से जाना पड़ा मुझे लगा था कि मैं मुनव्वर से सारी जिंदगी यूं ही बचती रहूंगी आखिरकार वह दिन भी आ गया जब एक रोज मुनव्वर की पहली बीवी के मैके में दावत थी वह बच्चों समेत वहां चली गई दूसरी बीवी को खास ताकीद करके गई थी कि इसका ख्याल रखना

 

 

मुनव्वर को इसके पास भटकने भी मत देना लेकिन उस रोज वह भी अपने बच्चों समेत मैयके चली गई घर में सिवाय में मेरे और मुनव्वर के और कोई भी मौजूद नहीं था आज तो जो मर्जी हो जाता मैं मुनव्वर के हाथ लग चुकी थी कमरे में जाकर उसने मुझे दबोचा मैं चीखती रही चिल्लाती रही मदद के लिए पुकारती रही मगर मुनव्वर को मुझ पर रहम नहीं आया था

 

उसने अपना हक मुझसे वसूल कर लिया था मेरी तो हालत गैर हो चुकी थी सारी रात मैं करब में मुब्तला रही अगली सुबह जब मुनव्वर की पहली बीवी घर को लौटी तो जो हालत मेरी देखी वह सब समझ चुकी थी उसने अपने शौहर को बहुत बातें सुनाई मुझे लेकर हस्पताल गई एक हफ्ते तक मैं हस्पताल में ही रही ऐसे लग रहा था जैसे मैं मुनव्वर के खौफ से अपनी जान दे दूंगी रो-रोकर अब्बा को पुकारने लगी

 

 

 

काश वह मेरे साथ ऐसा जुल्म ना करते मुनव्वर ने बड़ा ही हैवान वाला सलूक मेरे साथ किया था चंद ही हफ्तों बाद मेरी तबीयत खराब रहने लगी जब चेकअप करवाया तो यह बात सामने आई कि मैं प्रेग्नेंट हूं

 

जब इस बारे में मुनव्वर को पता चला तो उसकी खुशी की कोई इंतहा ना रही वह खुद मेरा ख्याल रखने लगा मेरे लिए पसंदीदा चीजें लाकर देता नौ माह का वक्त बड़ी ही तेजी से गुजरा जिस कदर मेरी तबीयत खराब थी मुनव्वर की बीवियों को तो यही लगता था कि मैं बच ही नहीं पाऊंगी नौ माह बाद ऑपरेशन के जरिए मैंने एक बेटे को जन्म दिया था

 

बेटे की पैदाइश पर तो मुनव्वर की खुशी की कोई इंतहा नहीं थी मुझसे ज्यादा उसे अपने बेटे की खुशी थी पूरे खानदान में उसने मिठाइयां बटवा बेटे का हकीका तो जैसे गोया वलीमा  जैसा करवाया था

 

 

मैं जब घर आई तो आपा मुझे अपने कमरे में ले जाने लगी मगर मुनव्वर ने उसे रोक दिया कहने लगा नूर मेरी बीवी है मेरे कमरे में ही रहेगी मैं एक बेटा तो ले चुका हूं लेकिन मेरी यह ख्वाहिश है कि मैं और भी बेटों का बाप बनूं नूर को मेरे कमरे में रहने तो अब यह कोई बच्ची नहीं रही है एक बेटे की मां बन चुकी है मगर उसकी पहली बीवी ने उसे ऐसा करने ही नहीं दिया मुनव्वर की दूसरी बीवी तो हसद करने लगी मुझसे क्योंकि मैंने मुनव्वर को बेटा पैदा करके दे दिया था

 

,जबकि पहली बीवी बिल्कुल अपनी औलाद की तरह मेरा ख्याल रखती धीरे-धीरे वक्त यूं ही गुजरता गया भले ही मैं 11 साल की उम्र में मां बन चुकी थी मगर अब अपने बेटे सरमद की देखभाल तो मैंने खुद ही करनी थी आधी रात को बच्चा रोता तो मुनव्वर मुझे डांटने लगता कि इसे चुप करवाओ

 

क्यों रो रहा है इसे भूख लगी होगी मैं नींद से बोझल अपने बेटे को चुप करवाने की कोशिश करती मगर वह तो किसी ौर भी चैन नहीं ले पाता था हर वक्त रोता रहता मजबूरन मैं अपनी सौतन के दरवाजे पर दस्तक देती कि ना जाने यह क्यों रो रहा है बाज दफा तो बच्चे को रोता देखकर मैं खुद भी रोने लगती समझ नहीं आता था कि क्या करूं

 

मेरी हालत दिन बदन गिरती चली जा रही थी अभी तो बड़ी मुश्किल से पहला बेटा ही पाच माह का हुआ था कि जब मुनव्वर ने एक और हुकम सादिर कर दिया कि मैं तुम्हारे साथ दोबारा ताल्लुक कायम करना चाहता हूं मुझे इस मर्तबा भी बेटा चाहिए मेरी तबीयत पहले भी खराब थी मैंने इंकार किया मगर मुनव्वर को मुझ पर कहां रहम आने वाला था वह मेरे साथ बहुत ज्यादा ताल्लुक कायम करने लगा था

 

आखिर को सात माह बाद मैं दोबारा से प्रेग्नेंट हो चुकी थी मगर इस मर्तबा कुछ ऐसी पेची दगिया हुई कि हाला हुए 6 माह ही हुए थे कि मैंने एक प्रीमेच्योर बच्चे को जन्म दे दिया डॉक्टर्स का तो कहना था कि हम नूर को बचा ही नहीं पाएंगे मगर यह मेरी बड़ी सौतन की दुआएं थी और मुनव्वर को भी कुछ अकल आ चुकी थी

 

उसने पानी की तरह पैसा बहाया था मेरे वजूद से बच्चे पैदा करने की सलाहियत को खत्म कर दिया गया तब जाकर मेरी जान बच पाई कहीं ना कहीं मुझे मौत के दहाने पर खड़ा देखकर मुनव्वर को भी एहसास हो चुका था कि बेटे की चाह में उसने मुझ पर किस कदर जुल्म किया है जब मैं वापस अस्पताल से लौट कर आई तो मुनव्वर ने खुद ही अपना कमरा मुझसे अलग कर दिया

 

पहली बीवी से कहने लगा कि इसको संभालने की जिम्मेदारी अब तुम्हारी है बेटियों के साथ-साथ वह अपने बेटे से भी बहुत मोहब्बत करता था अपना बेटा भी उसने अपनी पहली बीवी के सुपुर्द कर दिया मुझ पर किए जाने वाले जुल्मों ज्यादति हों का आजा काला करना चाहता था इसलिए एक रोज जब उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया

 

तो मैं बिल्कुल किसी कठपुतली की मानिंद वहां पर आई समझ रही थी कि शायद आज भी एक मर्तबा फिर से मेरी रूह को छलनी किया जाएगा मगर ऐसा नहीं था मुनव्वर ने बड़े ही प्यार से मुझसे बात की धीरे-धीरे वह मेरे साथ अपना रवैया बिल्कुल दोस्ताना रखने लगा पहले पहल तो मुझे बड़ी हैरत हुई मगर धीरे-धीरे मैं खुश भी हुई जब मुनव्वर ने मुझे स्कूल में पढ़ने का कहा

 

तो मेरी हैरत की कोई इंतहा नहीं रही पढ़ने का शौक तो मुझे बहुत था मगर मैंने थोड़ी बहुत ही तालीम हासिल की थी जब तक मेरी फुफो मेरे साथ रही,मुनव्वर ने अपने बच्चों के साथ-साथ मुझे भी स्कूल भेजना शुरू कर दिया भले ही मैं उसकी बीवी थी मगर दोबारा उसने मेरे साथ कोई भी ताल्लुक कायम नहीं किया था,

 

मै बस हर माँ बाप यही कहूँगी अपने बच्चो के साथ कभी ऐसा मत करें, उनकी शादी उनकी उम्र होने पर करें, उम्र से पहले इस तरह उनको किसी के साथ ना बाधे,ऐसे अपने बच्चो की ज़िन्दगी बर्बाद करने से अच्छा उसका गला अपने हाथो से दबा दे एक ही बार मे

 

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