ऐसी रस्म भी होती है क्या। Mastram Ke Kahani | Sad And Emotional Hindi Story

Mastram Ke Kahani : मेरा नाम पल्लवी है मैं एक ऐसे गांव में पल्ली बड़ी थी जहां के रस्मो रिवाज बड़े ही अलग थे बल्कि यूं कहूं कि बहुत ही अजीब थे मैं अपने गांव के रस्मो रिवाज के बारे में ज्यादा तो नहीं जानती थी लेकिन जब मुझे पता चला कि हमारे गांव में लड़कियों की शादी होने पर उनके साथ कुछ ऐसा किया जाता है जिसे सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए मैं जब 12 साल की थी तब मैं बहुत ज्यादा मासूम थी 

 

और मुझे अपने गांव के रस्मो रिवाज के बारे में कुछ भी नहीं नहीं पता था मैं पढ़ना लिखना चाहती थी और मैं गांव के सरपंच की बेटी थी मेरे पिता बहुत अमीर थे और पूरे गांव में मेरे पिता का ही फैसला चलता था गांव के सारे ही लोग मेरे पिता की बहुत इज्जत करते थे हमारा परिवार बहुत बड़ा था मेरे परिवार में मेरी दो बुआ जी और एक छोटे चाचा जी रहा करते थे मेरी दादी भी थी मगर दादाजी इस दुनिया में नहीं थे

 

 चाचा जी की एक बेटी थी जो कि मेरी ही उम्र की थी और एक बेटा था जो मुझसे बड़ा था मैं तो अपने माता-पिता की इकलौती और लाडली बेटी थी मेरे जन्म के बाद मेरी मां को दोबारा कभी औलाद नहीं हुई इसलिए वह दोनों मुझे ही बहुत लाट प्यार करते थे मैं जो कहती मेरे मुंह से कही गई बात वक्त से पहले ही पूरी हो जाती थी मुझे शहर जाने का और शहर जैसी जिंदगी गुजारने का बड़ा ही शौक था 

 

मुझे पढ़ने लिखने का भी बहुत शौक था इसलिए मैं बचपन से ही अपने पिताजी से कहती थी कि मुझे बाहर पढ़ने के लिए जाना है जबकि मैं उनकी इकलौती बेटी थी इसलिए वह मुझे खुद से दूर नहीं करना चाहते थे और हर बार मुझे टाल दिया करते थे कि तुम हमारी लाडली बेटी हो क्या तुम्हें अच्छा लगेगा कि तुम अपने माता-पिता से दूर रहो मैंने अपने पेरेंट से कहा कि मैं पढ़ लिखकर डॉक्टर बनना चाहती हूं 

 

और अपने गांव के लोगों का फ्री इलाज करना चाहती हूं मुझे लोगों की सेवा करना बहुत अच्छा लगता है और पिताजी आपने ही तो मुझे सिखाया है कि हमें हमेशा लोगों की सेवा करनी चाहिए तो मैं लोगों की सेवा इस तरह से करना चाहती हूं मेरे पिताजी मेरी बात को सुनकर खामोश हो जाते थे क्योंकि वो सिर्फ इस बात से मजबूर थे वह खुद मुझे अलग नहीं कर सकते थे मैंने अपने पिताजी को तसल्ली दिलाई थी कि सिर्फ कुछ सालों की ही तो बात है

 

 जब मैं डॉक्टर बनकर घर वापस आऊंगी तो आपका सर गर्व से ऊंचा हो जाएगा गांव वाले आपके साथ-साथ आपकी बेटी की भी इज्जत करने लगेंगे मेरे पापा मेरी मासूम बातों पर खिलखिला करर हंस देते थे और कभी-कभी मेरी इन बातों को इग्नोर कर दिया करते थे अभी तो मैं गांव की ही स्कूल में पढ़ रही थी मगर मैं शहर के प्राइवेट स्कूल में पढ़ना चाहती थी क्योंकि हमारे गांव में सरकारी स्कूल ही थे इसीलिए मेरे पापा ने मुझे खुशी देने के लिए शहर में मेरा स्कूल में एडमिशन तो करवा दिया था 

 

लेकिन वहां पर मुझे ड्राइवर छोड़ने जाता था और वही मुझे लेकर घर वापस आता था फ्री टाइम पर मैं मोबाइल देखती रहती थी मैं जब मोबाइल में विदेश के कॉलेज और यूनिवर्सिटी देखती तो मेरा विदेश पढ़ने जाने को बहुत मन करता था मैंने सोच लिया था कि मैं अब विदेश में ही पढ़ने के लिए जाऊंगी मैंने अपने पिताजी से बहुत जिद्द की उन्होंने मुझसे कहा बेटी मैंने तुम्हारे कहने पर तुम्हारा एडमिशन शहर के स्कूल में करवा दिया और अब तुम चाहती हो कि मैं तुम्हें विदेश पढ़ने के लिए भेज दूं ऐसा कभी नहीं हो सकता

 

 मैं नहीं जानती थी कि वह मेरे एक दो बार के कहने पर नहीं मानेंगे इसलिए मैंने घर में खाना पना बंद कर दिया था जिस पर मेरी मां और पिताजी दोनों ही मजबूर हो गए थे और फिर मुझे विदेश भेजने के लिए राजी हो गए मुझे विदेश पढ़ने भेजने के लिए तो कोई भी राजी नहीं था मैंने बड़ी मुश्किल से सबको तैयार किया था इस छोटी सी उम्र पर भी मैं अपनी जिदों को मनवा लिया करती थी लेकिन अभी मेरे पिताजी का कहना था कि वह इस प्राइवेट स्कूल में एक साल पूरा होने के बाद ही मुझे विदेश पढ़ने के लिए भेजेंगे विदेश में मेरे पिताजी के दोस्त रहा करते थे

 

 मेरे पिताजी ने उनसे बात कर ली थी इस तरह मेरा विदेश जाने का सपना भी पूरा होने वाला था मैं वहां पर हॉस्टल में रहकर पढ़ना चाहती थी हमारे घर में जोर शोर से मेरी बुआ जी की शादी की तैयारी चल रही थी मेरी बुआ जी का रिश्ता हमारे ही गांव में ल था हमारे गांव में मंगनी वगैरह की रसम नहीं होती थी बस रिश्ता फिक्स हो जाने के कुछ दिन बाद ही शादी रख दी जाती थी मगर मैंने देखा था कि जिस दिन से मेरी बुआ जी का रिश्ता लगा था 

 

वह बहुत ज्यादा उदास रहने लगी थी वह क्यों उदास थी इस बात की मुझे कुछ समझ नहीं आई थी मेरे चाचा की बेटी और मैं हम दोनों मिलकर पूरे घर में खेलते रहते थे उसका नाम हंसिका था हम दोनों एक दूसरे की अच्छी कजिन होने के साथ-साथ एक दूसरे की बहुत अच्छे फ्रेंड्स भी थे हंसिका मुझसे दूर दूर जाने वाली बात पर बहुत अफसोस कर रही थी वह मुझे यही एडवाइस देती थी कि तुम मुझे छोड़कर दूर पढने के लिए मत जाओ

 

 मगर मैं उससे कहती थी कि तुम भी मेरे साथ चलो हम दोनों विदेश में पड़ेंगे मैं डॉक्टर बनूंगी और तुम पुलिस बन जाना हंसी का इंकार करने लगी क्योंकि उसे बचपन से ही पढ़ाई में कोई इंटरेस्ट नहीं था और वह तो बस पूरा दिन खेल में ही लगी रहती थी एक दिन मैंने देखा कि घर में बहुत ज्यादा हंगामा हो रहा है बुआ जी किसी बात पर लड़ रही थी और किसी रिवा आज की बात हो रही थी

 

 हमारी तो समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या हुआ है क्योंकि हंसिका और मुझे हम दोनों को ही डांट करर अपने कमरे से भेज दिया गया था और कहा गया था कि अपने कमरे से बाहर मत निकलना हमारे घर में अब इस तरह से ही हर दूसरे तीसरे दिन हुआ कि शादी से पहले खूब झगड़े हो रहे थे ये झगड़े क्यों और किस बात के थे हमें समझ नहीं आ रहा था कि यह सब कुछ क्यों हो रहा है बस हमने बुआ को इतना कहते हुए सुना था वह बार-बार यही कह रही थी कि वह इस रस्म को नहीं करवाना चाहती

 

 बुआ की शादी फाइनली हो गई थी मगर बुआ अपनी शादी वाले दिन बुरी तरह से रो रही थी इतना रो रही थी जैसे उनको कहीं दर्द हो रहा हो ऐसा तो लड़की विदाई के समय होती है मगर बुआ तो शादी होने से पहले ही बहुत रो रही थी फाइनली जैसे-तैसे बुआ की शादी हो गई थी मगर घर में बहुत ज्यादा अफसोस भरा माहौल फैल गया था अब समय आ गया था मेरे विदेश जाने का मेरे पापा ने मुझे अमेरिका के बड़े स्कूल में पढ़ने के लिए सारे इंतजाम कर लिए थे क्योंकि मुझे सबसे ही खुशी मिलती थी 

 

मेरे जाने से भी मेरे घर वाले बहुत दुखी थे मगर मैंने सब लोगों को जैसे-तैसे मना ही लिया था और फिर मैं अमेरिका आ गई मुझे अमेरिका छोड़ने के लिए मेरे पापा और चाचा जी आए थे यहां पर मेरे पापा ने मुझे अपने एक दोस्त के हवाले कर दिया था वह अंकल बहुत अच्छे थे उन्होंने मुझे सब कुछ समझा दिया था और उनकी बेटी भी मेरे ही स्कूल में पढ़ती थी बस फर्क इतना था कि मैं हॉस्टल में रहती थी

 

 और वह अपने घर को चली जाती थी इस तरह उनकी बेटी वहां पर मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन गई थी और अंकल और उनकी फैमिली ने मेरा बहुत ख्याल रखा था मेरे घर वालों से मेरी हर रोज फोन पर बात होती रहती थी और साथ ही साथ वीडियो कॉल पर भी होती थी मेरे माता-पिता की आंखों में आंसू होते थे और वह कहते थे कि बेटी तुम हमें छोड़कर चली गई तुम्हारे बिना घर सूना सूना सा लगता है

Mastram Ke Kahani
                                     mastram hindi story

 

 ना जाने तुम्हें पढ़ने का इतना शौक क्यों है मैं अपने पिताजी से कहती कि मैंने आपको बताया है ना कि मैं अपने गांव के लोगों का फ्री में इलाज करना चाहती हूं मैं हमारे ही गांव में एक सरकारी अस्पताल खोलना चाहती हूं मेरे माता-पिता मुझ पर बहुत गर्व महसूस करते थे मेरी जिंदगी यहां पर पूरी की पूरी पढ़ाई में गुजर रही थी मैं मन लगाकर पढ़ती और अच्छे नंबर से पास होती थी कई साल इसी तरह से गुजर गए थे अब मैं स्कूल से कॉलेज में आ गई थी और फिर यूनिवर्सिटी में इसी तरह कुछ और साल गुजर गए

 

 और मैं इतनी बड़ी हो गई कि मैंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी और मैं काबिल डॉक्टर बनकर ही अपने गांव वापस लौटी थी मु मुझे अपनी जिंदगी बहुत अच्छी लगने लगी थी क्योंकि मैंने अपना सपना पूरा कर लिया था 12 साल की उम्र से 24 साल की उम्र में मैं अपने घर वापस आई थी इस बीच अपने घर बिल्कुल भी नहीं आई थी और ना ही छुट्टियों में और ना ही अपने घर के किसी फंक्शन में मेरे पीछे घर में काफी सारे फंक्शन हो गए थे ऐसा इसलिए था क्योंकि मैं अपनी पढ़ाई से बिल्कुल भी दूर नहीं होना चाहती थी

 

 फाइनली मेरा सपना पूरा हो चुका था आज इतने सालों बाद मुझे अपने गांव जाना था और अपनी फैमिली से मिलना था मैं अपनी फैमिली से मिलने के लिए बहुत ज्यादा खुश हो रही थी पिताजी ने कह दिया था कि वह मुझे एयरपोर्ट पर लेने के लिए आ जाएंगे पिताजी मुझे देखकर बहुत खुश हो गए और उन्होंने मुझे देखते ही गले से लगा लिया कहने लगे मेरी बेटी तो बहुत बड़ी हो गई और प्यारी भी हो गई है

 

 मैं भी अपने पिताजी से मिलकर बहुत खुश हुई थी मगर मैं एक बात पर बहुत हैरान थी कि मेरे पिताजी और मेरे चाचा जी हर काम एक साथ ही करते थे क्योंकि उन दोनों भाइयों में बहुत मोहब्बत थी जब मैं छोटी थी और वह दोनों मुझे छोड़ने के लिए आए थे तब भी वह दोनों साथ ही थे मगर अब पिताजी के साथ मेरे चाचा जी मुझे लेने क्यों नहीं आए थे यह सवाल मेरे दिमाग में घूम रहा था

 

 इसलिए मैंने अपने पिताजी से पूछ ही लिया कि चाचा जी मुझे लेने के लिए क्यों नहीं आए क्या उनकी तबीयत खराब है या फिर वह किसी काम में बिजी है पिताजी ने मेरे सवाल पर एकदम सर झटक दिया और मुझे दूसरी बातों में उलझा लिया इस दौरान मैं चाचा जी वाली बात को पूरी तरह से भूल गई थी और फिर हम लोग खुशी-खुशी घर घर आ गए घर में मेरे स्वागत के लिए मेरी मां और दादी जी ने बहुत अच्छी प्रिपरेशन की थी पूरा गांव मेरे आने से बहुत खुश था

 

 आखिरकार मैं सरपंच की बेटी थी और डॉक्टर बनकर ही इतने सालों बाद अपने घर वापस लौटी थी पूरा गांव मेरे आने की खुशी मना रहा था क्योंकि सब गांव वाले जानते थे कि मैं गांव में अब अस्पताल खोलूंगी और उसमें सारे ही गांव वालों का इलाज फ्री में होगा मैंने उन लोगों को भरोसा दिलाया था कि मैं आपकी उम्मीदों पर खरी उतरूंगा दी जी ने मुझे देखते ही गले से लगा लिया और कहने लगी कि बेटी तुम्हारे बिना यह घर सुना सुना लगता था मगर मैं घर में घुसकर भी बहुत हैरान हुई

 

 क्योंकि मेरे स्वागत के लिए दरवाजे पर सिर्फ दादी जी मेरे भैया और मेरी मां ही खड़ी हुई थी और पिताजी तो मेरे साथ ी आए थे मेरी दोनों बुआ मुझसे मिलने के लिए नहीं आई और ना ही घर में मुझे मेरे चाचा जी की फैमिली दिखाई दे रही थी आखिर सब लोग कहां गए थे घर का पूरा माहौल बदला-बदला सा लग रहा था मेरी समझ नहीं आ रहा था कि घर के माहौल को ना जाने इतने सालों में क्या हो गया

 

 मैंने घर में घुसते ही दादी से सवाल किया दादी चाची जी दोनों भैया और हंसिका कहां है और चाचा जी भी मुझे एयरपोर्ट पर लेने के लिए क्यों नहीं आए तो दादी मेरा हाथ पकड़कर मुझे घर के अंदर लेकर जाते हुए कहने लगी बेटी वो लोग अलग घर में रहते हैं दादी की बात सुनकर तो मैं हैरान रह गई इतने में ही पीछे से पिताजी ने आकर कहा अरे वोह लोग कुछ दिनों के लिए अपने किसी दूर के रिश्तेदार की शादी में गए हुए हैं 

 

कुछ दिनों बाद वापस आ जाएंगे तुम फिक्र मत करो और इतने सवाल जवाब मत करो जाओ अब जल्दी से फ्रेश हो जाओ उसके बाद सब मिलकर खाना खाते हैं दादी भी कहने लगी कि हां बेटी तुम जल्दी से खाना खा लो उसके बाद हम दोनों दादी पोती एक साथ बैठकर ढेर सारी बातें करेंगे मैं फ्रेश हो गई थी और हम लोगों ने एक साथ मिलकर खाना खाया था इतने सालों के बाद अपने घर आकर और अपनी मां के हाथ का बनाया हुआ खाना खाकर मुझे बहुत सुकून और खुशी मिली थी

 

 क्योंकि मां ने सारा खाना मेरी पसंद का ही बनवाया था मगर मुझे चाचा चाची और बाकी सबके बिना घर बहुत सोना लग रहा था बार-बार सबकी याद आ रही थी क्योंकि चाचा चाची ने कभी हंसिका और मुझ में फर्क नहीं किया था जिस तरह से वह अपने बच्चों से प्यार करते थे इसी तरह से मेरे भाई और मुझे भी प्यार किया करते थे मगर मुझे हंसिका से भी एक शिकायत थी कि उसने इतने सालों में मुझसे कांटेक्ट करने की कोशिश ही नहीं की थी ना जाने उसे क्या हो गया था चाचा चाची की फैमिली में से किसी ने भी मुझसे आज तक कोई बात नहीं की थी

 

 बाकी घर में दादी मां और मेरे भैया पिताजी सब मुझसे फोन पर बातें किया करते थे मैंने कई बार अपनी मां और पिताजी से कहा भी था कि बाकी सब लोग कहां हैं मुझे बाकी के लोगों से भी बात करनी है मगर इन लोगों ने मुझे बातों में उलझा दिया था और हर बार यह लोग बात को टाल दिया करते थे मुझे तो किसी गड़बड़ी का एहसास हो रहा था खाना खाने के बाद मैं दादी के रूम में उनके पास जाकर लेट गई

 

 इतने सालों बाद अपनी दादी के कमरे में जाकर लेटना मुझे बहुत अच्छा लगा था दादी मुझसे काफी देर तक बातें करती रही थी अचानक मुझे याद आ गया कि मैं दादी से ही सब लोगों के बारे में पूछ लेती हूं मैंने दादी से कहा दादी सब लोग आखिर हैं कहां और दोनों बुआ वो भी मुझसे मिलने के लिए नहीं आई उन्हें तो पता था ना कि उनकी भतीजी इतने सालों बाद डॉक्टर बनकर गांव वापस लौट रही है

 

 उन्हें मेरे स्वागत के लिए घर में आना चाहिए था मैं सब लोगों से मिलने के लिए कितनी एक्साइटेड हो रही थी तो दादी का चेहरा अचानक इस बात पर मुरझा गया और वह कहने लगी बेटी इस घर में में कोई नहीं है इतनी बड़ी हवेली में सिर्फ मैं और तुम्हारी मां अकेले रहते हैं तुम्हारे पिता तो पंचायतों में जाता रहता है और तुम्हारा भाई भी ज्यादातर घर से ही बाहर रहता है तुम्हारी मां भी कभी-कभी तुम्हारी नानी के घर चली जाती है तो मैं पूरी तरह से इतने बड़े घर में अपने आप को अकेला महसूस करती हूं

 

 अब तुम आ गई हो ना देखना हम दादी पोती बहुत ही ढेर सारी बातें करेंगे और एक दूसरे के साथ रहेंगे और मैं तुम्हें इस पूरे गांव की शहर करवा कर लाऊंगी इतने सालों बाद देखना तुम हमारा गांव पूरा बदल गया है अब तुम गांव देखोगी तो बहुत खुश हो जाओगी मैंने कहा दादी लेकिन बाकी सब लोग कैसे हैं और कहां हैं आप लोग मुझे कुछ बता क्यों नहीं रहे हो कोई भी मुझे कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं है 

 

मैं सबके बारे में जानना चाहती हूं कि हमारी इतनी बड़ी फैमिली में आखिर इतने कम मेंबर क्यों रह गए इतने बड़े घर में हमेशा कितनी रौनक लगी रहती थी सब लोग एक साथ रहते थे एक साथ खाना पीना करते थे कितना अच्छा लगता था ना लेकिन अब मैं यहां आई हूं तो मुझे घर का पूरा माहौल ही बदला हुआ लग रहा है और मेरी बहन मेरी दोस्त हंसिका वह कैसी है इतने सालों में उसने मुझसे कोई कांटेक्ट करने की कोशिश ही नहीं की

 

 मैं उससे मिलूंगी तो जरूर उससे लडूंगी मगर वह लोग आखिर हैं कहां पर यहां पर क्यों नहीं हैं मुझे दिखाई क्यों नहीं दे रहे तो दादी कहने लगी बेटी वह सब लोग इस घर को छोड़कर चले गए हैं मैंने हैरान होते हुए दादी से कहा आखिर क्यों वह लोग यहां से चले गए यह तो उनका अपना घर है शादी में कहां आ गए तो दादी कहने लगी कि तुम अब यहां आ गई हो ना कुछ दिन यहां पर रहोगी तो तुम्हें सब कुछ समझ आ जाएगा

 

 इसके अलावा मुझे दादी ने कुछ भी नहीं बताया था अगले दिन हमारे घर गांव से शादी का एक इन्विटेशन आया था मैं इस शादी में जाना चाहती थी क्योंकि मुझे शादी में गए हुए काफी समय हो गया था और अपने गांव की शादी तो मैं पूरी तरह से भूल चुकी थी इसीलिए मैं शादी में जाने के लिए बहुत ज्यादा एक्साइटेड हो रही थी शादी अगले हफ्ते थी मैंने अपनी मां से शादी में जाने के लिए कहा कि मैं इस शादी में जरूर जाऊंगी तो मां ने कहा कि नहीं बेटी तुम इस शादी में हमारे साथ मत चलना 

 

मैंने कहा लेकिन क्यों तो मां कहने लगी बस ऐसे ही हमारे गांव के रस्मो रिवाज बहुत अलग हैं मैंने अपनी मां से कहा तो मां मेरी शादी थोड़ी हो रही है जो मुझे रस्मो रिवाज करने पड़ेंगे मैं तो उस शादी में सिर्फ शामिल होना चाहती हूं मेरी मां मेरे सवाल पर बस खामोश सी हो गई थी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया था फिर हमारे घर एक और इन्विटेशन आया था जो कि गांव से नहीं बल्कि शहर से आया हुआ था मेरी नानी के घर से शहर में मेरी नानी का घर था और वहां मेरी मां के सारे रिश्तेदार और उनका मायका था 

 

और यह शादी मेरे मामा जी के बेटे की थी मेरे कजिन की शादी थी मां कहने लगी कि तुम वहां पर चलना वहां सब लोगों को मिले हुए तुमसे काफी समय हो गया मैंने कहा मां लेकिन मैं दोनों शादी में जाना चाहती हूं गांव भी और शहर भी आप मुझे नहीं रोक सकोगी मैं यह कहकर अपने कमरे में आ गई थी रोक टोक कर ने की आदत तो मेरी मां के अंदर शुरू से ही थी यह बात मैं अच्छी तरह से जानती थी 

 

लेकिन मुझे बार-बार अपनी बिछड़ी हुई फैमिली की याद आ रही थी मुझे इस घर में उनके बारे में कोई कुछ नहीं बता रहा था इसीलिए मैंने सोच लिया था कि मैं खुद ही इस बारे में जानकारी निकाल कर रहूंगी इसलिए मैंने हमारे घर की नौकरानी जो कि यहां पर काफी पुराने समय से काम कर रही थी उनसे बात करने की कोशिश की और उनसे पूछा कि आखिर घर के बाकी सारे लोग कहां गए वो मेरी बात सुनकर घबरा गई थी और मुझे कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं हो रही थी 

 

मगर मैंने उन्हें थोड़े पैसों का लालच दिया तो फिर वह मुझे कुछ बताने पर राजी हुई थी उन्होंने कहा देखो बिटिया रानी सरपंच जी को अगर इस बारे में पता चल गया तो वह हमें काम से निकाल देंगे मैंने उनसे कहा आंटी किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा मैं आपसे वादा करती हूं मेरे होते हुए आपसे कोई कुछ नहीं कह सकता बस आप मुझे यह बता दो कि मेरे पीछे इस घर में क्या होता रहा है सरला आंटी ने बताया कि बेटी दरअसल तुम्हारे जाने के कुछ सालों के बाद इस घर में बहुत ज्यादा हंगामे हो रहे थे

 

 तुम्हारे पिता की दोनों बहनें तुम्हारे पिता से कोई संबंध नहीं रखती और ना ही उनके भाई जो कि तुम्हारे चाचा जी थे मैं इस बारे में नहीं जानती कि लड़ाई किस बात पर हुई थी बस एक दिन बहुत ज्यादा लड़ाई हुई थी और तुम्हारे चाचा जी अपने परिवार को लेकर कहीं दूर रहने के लिए चले गए और अपना सारा सामान भी बांध कर ले गए थे तुम्हारे चाचा जी किसी बात पर बहस कर रहे थे 

 

क्योंकि जब तुम्हारी छोटी बुआ की शादी हुई थी तब भी तुम्हारे चाचा जी अपनी कोई बात मनवाना चाहते थे और तुम्हारे पिताजी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे वो क्या बात थी यह हम नहीं जानते क्योंकि इस घर में जितने भी फैसले होते हैं उसमें सिर्फ बड़े मौजूद होते हैं और घर के कुछ बड़े मेंबर्स होते हैं हम नौकरों को भी मौके से हटा दिया जाता है इसलिए मैं तो सिर्फ तुम्हें इतना ही बता सकती हूं 

 

इसके अलावा मैं कुछ नहीं जानती जिस दिन के बाद से तुम्हारे पिताजी के छोटे भाई और उनका परिवार इस घर से गया है तब से ही उन्होंने कभी पलटकर इस घर में दोबारा कदम नहीं रखा और ना ही तुम्हारी दोनों बुआ शादी हो जाने के बाद वह दोनों भी इस घर में कभी नहीं आई मैंने सरला आंटी से पूछा कि आपको पता है कि चाचा जी की फैमिली कहां पर है वह लोग कहां रह रहे हैं हमारा गांव तो बहुत बड़ा है 

 

उनका कोई एड्रेस है आपके पास या आपको पता है कि वह हमारे गांव की कौन सी जगह पर रह रहे हैं ताकि मैं उनको तलाश कर सकूं सरला आंटी बोली कि मैं उनके बारे में ज्यादा कुछ तो नहीं जानती हां मगर गांव के लोगों के मुंह से इतना जरूर जरूर सुना है कि सरपंच जी का छोटा भाई और उनकी दोनों बहने ही शादी होने के बाद यहां पर नहीं रहती बल्कि इस गांव में ही नहीं रहती वो लोग या तो किसी दूसरे गांव या फिर कहीं शहर में जाकर रह रहे हैं 

 

मैंने कहा क्या वोह लोग इस गांव को ही छोड़कर चले गए सरला आंटी कहने लगी कि हां बिटिया तुम्हारी दोनों बुआ तो अपने-अपने पतियों को ही लेकर चली गई सुना है कि उनके बाकी ससुराल वाले हमारे गांव में ही रहते हैं और वह दोनों अपने पतियों के साथ कहीं और शिफ्ट हो गई यह सब मेरी कुछ समझ नहीं आया था कि आखिर उन लोगों की लड़ाई मेरे घर वालों से थी या फिर पूरे गांव से थी जो वह लोग गांव को ही छोड़कर चले गए मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था मुझे लग रहा था कि जरूर कोई बड़ी परेशानी है

 

 मैं इस बारे में जानकर ही रहूंगी और अपने पूरे परिवार को इस घर में लाकर ही रहूंगी इतने सालों तक मैंने देखा था कि मेरे चाचाजी और मेरे पिताजी एक दूसरे के साथ दोनों भाई बहुत मोहब्बत के साथ रहते थे ना जाने मेरे पीछे ऐसा क्या हुआ कि वो दोनों एक दूसरे के दुश्मन बन गए और इस घर से चाचा जी तो अपने परिवार के साथ ही चले गए जबकि मेरी बुआ बुआ जी को क्या हो गया था जो दोनों ही अपने पतियों के साथ इस गांव से रवाना हो गई यह सब सोच सोच कर मेरा दिमाग खराब हो रहा था

 

 लेकिन फिर भी मैं बातों ही बातों में अपने घर वालों से सब कुछ पूछने की कोशिश कर रही थी मगर मैं अब जान चुकी थी कि इनमें से कोई भी मुझे कुछ बताने के लिए तैयार नहीं है दादी का तो हर बार यही कहना होता था कि अब तुम आ गई हो और तुम्हारी शादी की उम्र है तो तुम्हें सब कुछ पता चल जाएगा आखिरी सबसे मेरी शादी का क्या मतलब था कुछ दिन इसी तरह से गुजर गए और वो दिन भी आ गया था

 

 जब हमारे गांव की शादी का दिन था मैं इस गांव की शादी में जाने के लिए तैयार हो रही थी तैयार होने के बाद जैसे ही मैं नीचे गई और मेरे पिताजी की नजर मुझ पर पड़ी तो उन्होंने देखते ही कहा कि मेरी बेटी तो बहुत खूबसूरत लग रही है बिल्कुल चांद का टुकड़ा लग रही है लेकिन मेरी बेटी इतना सज धज कर आखिर जा कहां रही है मैंने पिताजी से कहा आज आप लोग गांव की शादी में जा रहे हो ना तो मैं भी आप लोगों के साथ जा रही हूं मेरी बात सुनकर अचानक मेरे पिताजी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी थी

 

 तभी मेरी मां पिताजी को आवाज लगाते हुए उनके सामने आई तो उन्होंने भी मुझे तैयार होता हुआ देखा उनके भी होश उड़ गए थे और वह फटी फटी नजरों से मुझे देख रही थी पिताजी ने अचानक गहरी नजर मां पर डाली तो मां सहम गई थी उन्होंने कहा हम लोग कहीं शादी में नहीं जा रहे यह कहकर पिताजी पलटकर अपने कमरे में चले गए थे ना जाने उन्हें क्या हो गया था मैंने मां से कहा मां पिताजी को क्या हो गया हम लोग तो शादी में जा रहे हैं ना तो अब वह जाने से इंकार क्यों कर रहे हैं 

 

आखिर वह गांव के सरपंच हैं उनका शादी में जाना बहुत जरूरी है मां कहने लगी तुमसे किसने कहा है कि हम शादी में जाएंगे मैंने कहा मां मैंने तो आपसे उस दिन कहा था ना कि मैं आपके साथ शादी में जाऊंगी इसीलिए मैं तैयार भी हो गई हूं मां कहने लगी मैंने तुमसे कहा था ना कि तुम गांव की शादी में नहीं जा सकती तुम हमारे साथ अपनी नानी के घर शादी में चलना मैंने कहा मां अगर आप लोग शादी में मुझे लेकर नहीं जाना चाहते हो तो मैं खुद शादी में चली जाऊंगी मुझे लगता है कि आप लोग मुझसे कुछ छुपा रहे हो

 

 आखिर ऐसा भी क्या है और तो और मुझे बाकी लोगों के बारे में भी नहीं बताया जा रहा कि हमारे परिवार के बाकी सारे लोग कहां हैं मुझे कोई कुछ बताने के लिए तैयार ही नहीं है मैं कुछ सालों के लिए इस घर से क्या चली गई सब लोगों ने मुझे पराया कर दिया आखिर आप सब लोगों को क्या हो गया है मां कहने लगी कि धीमी आवाज में बात करो अगर तुम्हारे पिताजी को पता चल गया तो वह मुझ पर बहुत गुस्सा करेंगे

 

 मैंने कहा मां अब पिताजी गुस्सा करें या फिर चाहे जो भी हो मैं अकेली ही शादी में जा रही हूं आखिर मेरे शादी में चले जाने से क्या हो जाएगा मुझे तो लगता है कि आप लोग मुझे लेकर ही नहीं जाना चाहते मां कहने लगी अच्छा चलो शांत हो जाओ मैं तुम्हारे पिताजी से जाकर बात करती हूं मां तो पिताजी को मनाने के लिए चली गई थी मगर मैंने भी आज ठान ली थी कि मैं भी शादी में जाकर ही रहूंगी और देखूंगी कि आखिर यह दोनों मुझे शादी में जाने से क्यों रोक रहे हैं थोड़ी देर के बाद पिताजी आए 

 

और उन्होंने शादी में चलने के लिए कहा मैं भी खुशी-खुशी पिताजी के साथ गाड़ी में बैठ गई थी और मेरे साथ मां भी थी दादी तो हम लोगों के साथ नहीं गई थी क्योंकि वह बीमार थी इसलिए ज्यादातर घर में ही रहा करती थी हम लोग शादी में गए तो वहां पर खाना खाने के बाद दुल्हन को तैयार करने की रस्म शुरू होने लगी सारी औरतें कमरे के अंदर दुल्हन को तैयार कर रही थी जहां पर मेरी मां की भी आवाज लग रही थी

 

 मेरी मां जल्दी से उठकर दुल्हन के पास जाने लगी तो मैं भी उनके साथ-साथ चलने लगी मुझे देखते ही मां कहने लगी कि तुम कहां आ रही हो तुम वहीं बैठ जाओ मैं अभी थोड़ी देर में दुल्हन से मिलकर आती हूं मैंने कहा मां मैं भी दुल्हन से मिलने के लिए ही जा रही हूं देखना चाहती हूं कि दुल्हन कैसी है मां कहने लगी कि तुम कैसी बातें कर रही हो पल्लवी जाओ जाकर अपनी जगह पर बैठ जाओ बड़ी बदतमीज हो गई हो 

 

अपनी मां का बिल्कुल भी कहना नहीं मानती तुम्हारे पिताजी तुम्हें इस शर्त पर ही लेकर आए हैं कि तुम एक तरफ बैठी रहोगी मैंने कहा मां यह कैसी शादी है कि मैं एक तरफ बैठी रहूं मैं एंजॉय करना चाहती हूं और दुल्हन के साथ जाकर एक दो फोटो क्लिक करना चाहती हूं प्लीज मुझे लेकर चलो ना दुल्हन के पास मेरी मां कहने लगी कि तुम बहुत तंग करने लगी हो पल्लवी जाकर एक तरफ बैठ जाओ

 

 मैं तुम्हें दुल्हन के पास लेकर नहीं जा सकती मैंने कहा आखिर क्यों नहीं लेकर जा सकती तो फिर कहने लगी कि कुछ रस्मो रिवाज हो रहे हैं जिसमें बड़ों के होने की जरूरत है कुंवारी लड़कियां उसमें शामिल नहीं होती मैंने कहा छ ठीक है आप जा सकती हो मैं जाकर बैठ जाऊंगी अगर ऐसी ही बात है तो आप जल्दी आ जाना मां कहने लगी कि हां ठीक है तुम जाकर बैठ जाओ मैं सारे मेहमानों के साथ जाकर बैठ गई थी

 

 और वहां की लड़कियों के साथ खूब बातें कर रही थी थोड़ी ही देर बाद दुल्हन को तैयार करके लाया गया था लेकिन दुल्हन को देखकर तो मैं हैरान रह गई थी दुल्हन इतनी बुरी तरह से तड़प-तड़प कर रो रही थी जैसे उसके साथ कुछ गलत किया गया हो हालांकि इतना ज्यादा तो दुल्हन सिर्फ विदाई के समय ही रोती है लेकिन यह दुल्हन तो बड़ी अजीब थी बेचारे की शक्ल देखी नहीं जा रही थी

 

 वह बहुत बुरी तरह से रो रही थी ऐसा लग रहा था जैसे उसे कहीं तकलीफ हो रही है उसे मंडप में लाकर बैठा दिया गया था और वह तब भी रो रही थी उस बेचारी से तो चला तक नहीं जा रहा था उसकी कंडीशन देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे और आसपास जो मेरे मौजूद लड़कियां थी वह भी उसको देखकर अजीब अजीब तरह की बातें कर रही थी बल्कि एक लड़की के मुंह से तो मैंने सुना था कि हमें शादी में जाना तो बहुत अच्छा लग ता है 

 

मगर ना जाने क्यों शादी करने से बहुत डर लगता है समझ नहीं आता कि दुल्हन के साथ ऐसा क्यों किया जाता है मैंने जैसे ही उनके मुंह से ऐसे शब्द सुने तो मैं चौक कर रह गई थी मैंने जैसे ही पलट कर देखा तो वहां की लड़कियां खामोश हो गई थी क्योंकि वहां पर सब लोग जानते थे कि मैं सरपंच की बेटी हूं मुझे बहुत ज्यादा इज्जत दी जा रही थी मगर बेचारी दुल्हन को देखकर मुझे कुछ गड़बड़ी का एहसास हो रहा था

 

 रात के समय में दादी के पास लेटी हुई थी दुल्हन का चेहरा बार-बार मेरी नजरों में घूम रहा था दादी ने जब मुझे जागते हुए देखा तो कहने लगी कि क्या हुआ तुम सोई क्यों नहीं हो पल्लवी अभी तक तो मैंने दादी को अपनी बेचैनी की वजह बताई और कहा दादी आखिर हमारे गांव में क्या हो रहा है प्लीज मुझे सब कुछ बता दो तो दादी का चेहरा अचानक अफसोस भरा हो गया था वह कहने लगी बेटी मैं तुम्हें कुछ नहीं बता सकती बस इतना जरूर बता सकती हूं कि जब तुम्हारी शादी का समय आएगा तो तुम्हें सब कुछ पता चल जाएगा

 

 और और यह भी पता चल जाएगा कि आखिर तुम्हारे बाकी के सारे अपने इस घर से क्यों चले गए मैंने दादी से कहा दादी मैं अभी शादी नहीं करना चाहती आप तो जानती हो कि मेरी शादी में अभी समय लगेगा मैं इतना पढ़कर आई हूं तो मुझे अस्पताल भी तो बनाना है और सारी सच्चाई जानने के लिए मैं इतने सालों तक नहीं रुक सकती दादी मुझे कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं हो रही थी मगर मैंने दादी का हाथ अपने सर पर रख दिया 

 

और कहा दादी आपको मेरी कसम है आपको मुझे सब कुछ बताना ही पड़ेगा दादी की आंखों में आंसू आ गए थे फिर दादी ने मुझे जो कुछ भी बताया उसे सुनकर मेरे होश उड़ गए थे दादी ने बताया दरअसल हमारे गांव में एक ऐसी रस्म है जो लड़की के साथ शादी से पहले की जाती है और यह रस्म अगरबत्ती जलाकर की जाती है मैं हैरान रह गई थी मैंने कहा यह कौन सी रस्म है दादी तो वह कहने लगी कि यह रस्म दुल्हन को उसकी शादी वाले दिन तैयार करते समय की जाती है

 

 गांव की सारी बड़ी बूढ़ी औरतें उसके पास होती हैं और उसकी कमर को अगरबत्ती से जलाया जाता है ताकि यह अगरबत्ती के निशान उसकी कमर पर रह जाएं क्योंकि यह निशान उसके कुवारे पन के होते हैं हमारे पुरखों के समय से यह रस्म चलती आ रही है और तुम्हारी बुआ जब उन दोनों बहनों की शादी हुई तो वह भी इस रस्म के बारे में अच्छी तरह से जानती थी उन्होंने अपने भाई से इस रस्म का विरोध किया क्योंकि तुम्हारे दादाजी के बाद इस गांव का सरपंच तुम्हारा पिता है इस गांव में उसकी ही ज्यादा चलती है

 

 लेकिन तुम्हारे पिता ने रस्म को बदलने के लिए साफ इंकार कर दिया बात उसकी बहनों पर आ गई थी मगर उसने मान मर्यादा और अपने पुरखों के पुराने रस्मों को बदलने से साफ इंकार कर दिया उसका कहना था कि यह तो मेरी बहनों की बात है अगर बात मेरी अपनी बेटी पर भी आई तो मैं कभी भी इस रिवाज को नहीं बदलूंगा तुम्हारे चाचा जी भी इस रस्म के खिलाफ थे और वह भी चाहते थे कि उनकी बहनों को यह तकलीफ शादी वाले दिन ना दी जाए इसलिए उसने तुम्हारी बुआ की शादी पर बहुत हंगामा किया था 

 

तुम्हारी बुआ शादी वाले दिन तो यहां से च ली गई थी मगर उसके बाद उसने अपने पति के साथ इस गांव को छोड़ने का फैसला कर लिया था क्योंकि उसका पति पढ़ा लिखा था और वह भी इस गांव की रसम के खिलाफ था वह अपने परिवार को छोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गया और वह दोनों वहां पर रहने लगे उसके बाद तुम्हारी छोटी बुआ को भी यही सब होने का डर था इसलिए वह भी शादी के बाद हमारे घर से चली गई

 

 मगर उसने हमसे सारे संबंध खत्म कर दिए फिर तुम्हारे चाचा जी को फिक्र सताने लगी अपनी बेटी की कि आगे चलकर उनकी बेटी भी जवान होगी तो फिर उसके साथ भी ऐसी ही रस्म की जाएगी और वह अपनी बेटी को इस तकलीफ में नहीं देख सकता उसने अपने बड़े भाई के सामने इस रस्म को खत्म करने के लिए बहुत विरोध किया मगर तुम्हारा पिता नहीं माना इसलिए वह अपने पूरे परिवार को लेकर इस घर इस गांव को ही छोड़कर चला गया 

 

लेकिन तुम्हारे पिता के दिल में थोड़ा भी एहसास ना रहा कि इस रस्म की वजह से सब लोग उससे अलग हो रहे हैं तुम तो जानती हो कि तुम्हारा पिता कितना घमंडी इंसान है वह कभी भी अपने आप को दूसरों के सामने नीचा साबित नहीं कर करना चाहता और गांव के सारे ही लोग उसके फैसले का मान रखते हैं बस यही वजह है कि तुम्हारे सारे अपने इस गांव को छोड़कर जा चुके हैं क्योंकि इस गांव में जिस भी लड़की की शादी की जाती है उसके साथ यह रस्म जरूर की जाती है ताकि उसका कुवारा पन सामने ला सके 

 

यह कहकर दादी जोर-जोर से रोने लगी कहने लगी कि मुझसे मेरे सारे बच्चे अलग हो गए सिर्फ इस रस्म की वजह से और गांव की ना जाने कितनी ऐसी लड़कियां हैं जो बेचारी इस रस्म की वजह से शादी करने से डरती हैं क्योंकि जब उनके शरीर को जलाया जाता है तो वह बेचारी तड़प-तड़प कर रोती हैं शादी वाले दिन जिस लड़की को खुश होना चाहिए वह इस रस्म के बाद बुरी तरह से रोती है और उदास हो जाती है और यह जले हुए जख्म ना जाने कितने दिनों में जाकर भरते हैं 

 

दादी की बातें सुनकर तो मेरे होश उड़ गए थे कि आजकल के जमाने में भी इस गांव में इतने घटिया रिवाज है मैंने दादी को तसल्ली दी और उनसे कहा कि दादी आपको रोने की कोई जरूरत नहीं है मैं पिताजी से बात करूंगी और सब कुछ ठीक कर दूंगी आप मुझे नहीं जानती कि मैंने अपने पिताजी के सामने कैसी-कैसी जिद्द रखी है और उन्होंने हर बार मेरी जिद्द के आगे हार मान ली है मैं अपने पूरे परिवार को एक करके ही रहूंगी

 

 और इस गांव में इस रस्म को खत्म करवा कर ही रहूंगी इसलिए मैंने अगला कदम बढ़ा लिया था क्योंकि मैं इस गांव से इस रस्म को खत्म करना चाहती थी अगले दिन मैंने अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया पिताजी ने जब देखा कि उनकी बेटी सामान पैक कर रही है उन्होंने कहा कि बेटी तुम कहां जा रही हो मैंने पिताजी को बताया कि आपके बेटी बेटी इस घर को छोड़कर जा रही है 

 

और हमेशा-हमेशा के लिए जा रही है क्योंकि मुझे सारी सच्चाई के बारे में पता चल गया है कि हमारे गांव की इस रस्म की वजह से कितने घर खराब हो चुके हैं और कितनी लड़कियां डर की वजह से शादी नहीं कर रही पिताजी कहने लगे अच्छा तो तुम भी अब बाकी लोगों की तरह ही मेरे साथ इस रस्म को खत्म करने के लिए मेरे सामने आकर खड़ी हो गई हो मैंने कहा जी पिताजी क्या वह बेटियां आपकी बेटियां नहीं है

 

 जिनके साथ इतना गलत सुलूक किया जाता है शादी वाले दिन और तो और आपने अपने भाई बहनों तक के बारे में नहीं सोचा आपको अपनी बहनों की तकलीफ का अंदाजा होना चाहिए था पिताजी यह नया जमाना है अगर यह रस्म आपके पुरखों के समय से चलती आ रही है तो वह पुराना जमाना था अब जमाना मॉडर्न हो गया है अब तो गांव के लोग भी समझदार हो गए और उन लोगों ने भी पुराने रीति रिवाज खत्म कर दिए

 

 इसलिए समय के साथ-साथ आपको भी बदलना होगा पिताजी कहने लगे कि चाहे कुछ भी हो जाए तुम इस घर से जाना चाहती हो तो चली जाओ मगर मैं इस रस्म को खत्म नहीं कर सकता मैंने कहा तो ठीक है मैं इस घर को छोड़कर जा रही हूं लेकिन इससे पहले मैं आपकी आंखों के सामने आपको यह दिखाना चाहती हूं कि जब अगरबत्ती से जलाया जाता है तो कितनी तकलीफ होती है मैंने अगरबत्ती ली और उससे जलाना शुरू कर दिया हम दोनों के बीच मेरी मां भी आकर खड़ी हो गई थी और वह भी फटी फटी आंखों से मुझे देख रही थी 

 

और रोकने की कोशिश कर रही थी मगर मैंने उनको सावधान कर दिया था और वह वहीं पर रुक गई पिताजी सब कुछ खड़े हुए देख रहे थे वह मुझे कमजोर समझ रहे थे मगर मैं विदेश में रहकर पढ़ लिखकर बहुत ज्यादा मजबूत बन गई थी मैंने अगरबत्ती जलाने के बाद उसको अपने हाथ पर लगाना शुरू कर दिया जिसको देखकर मेरी मां तड़प गई और कहने लगी कि बेटी तुम यह सब क्या कर रही हो 

 

यह सब बंद कर दो वह रो रही थी मैंने कहा मां आज पिताजी की बेटी उनके सामने ही इस रस्म को कर रही है तो मैं देखना चाहती हूं कि पिताजी के अंदर कितनी हिम्मत है और वह कब तक अपनी बेटी को जलते हुए देख सकते हैं क् क्योंकि उनके इस घटिया रस्म की वजह से ना जाने कितनी लड़कियां इस रस्म का शिकार हुई है मुझे दर्द तो बहुत हो रहा था मगर मैं अपने पिता को एहसास दिलाना चाहती थी कि बेटियां कितनी नाजुक होती हैं उनके साथ यह अत्याचार ना किया जाए मेरा हाथ काफी ज्यादा हद तक जल चुका था 

 

पिताजी पत्थर बने खड़े हुए मुझे देख रहे थे मां बार-बार पिताजी से कह रही थी कि रोक लो हमारी बेटी को यह कितनी जख्मी हो रही है मगर जब मैंने अपने दूसरे हाथ पर निशान डालने शुरू किए तो मेरे पिताजी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और हाथ जोड़ लिए कहने लगे कि अच्छा तुम यह सब कुछ बंद करो

 

और अंदर जाओ मैं कुछ करता हूं मैंने कहा नहीं पिताजी मैं इस घर में अब नहीं रहूंगी यहां तक कि मैं इस गांव में भी नहीं रहूंगी जब तक इस गांव के लोग अपनी सोच नहीं बदल देते तब तक मैं यहां नहीं रह सकती मेरे पिताजी ने समझा बुझाकर मुझे मां के साथ अपने कमरे में भेज दिया था 

 

और डॉक्टर को बुलवाया था डॉक्टर ने मुझे दवाई दी थी मैं बिस्तर पर लेटी हुई आराम कर रही थी मगर मेरा हाथ बहुत जलन का शिकार हो रहा था तभी अचानक मुझे लोगों के बोलने की आवाज आने लगी मैं जैसे ही नीचे उतर कर गई तो यह देखकर हैरान रह गई कि पिताजी ने गांव के बहुत सारे लोगों को इकट्ठा किया हुआ था और वह उनसे कह रहे थे कि मुझे आप लोगों से एक जरूरी बात करनी है 

 

दरअसल मैं अगरबत्ती के रस्म को हमारे गांव से खत्म करना चाहता हूं मैं जानता हूं कि यह रस्म पुराने जमाने से चलती आ रही है और इस रस्म को हमारे पुरखों ने बनाया था मगर इस रस्म की वजह से हमारी बेटियों पर एक तरह से अत्याचार हो रहा है मैं इस रस्म को खुद खत्म कर रहा हूं क्योंकि इस रस्म की वजह से मेरा अपना घर भी बिखर कर रह गया मेरे भाई बहन मुझसे अलग हो गए 

 

अगर आप इस फैसले पर राजी हो तो ठीक है लेकिन मेरे खानदान में ऐसी कोई रस्म नहीं की जाएगी अगर आप लोग चाहो तो इस रस्म को मेरे साथ मिलकर पूरी तरह से खत्म कर सकते हो क्योंकि बात अब मेरे परिवार से मेरी बेटी तक आ गई वो इस रस्म को खत्म करने की जिद कर रही है उसने अपना हाथ तक जला लिया और वह इस गांव को छोड़कर जाना चाहती है तभी उन आदमियों में से एक आदमी कहने लगा जो इस गांव का जमीदार था

 

 सरपंच जी हमें आपके फैसले पर बहुत खुशी हुई हम भी चाहते थे कि यह रस्म हमारे गांव से खत्म हो जानी चाहिए मगर आपके सामने कौन बोल सकता था इसलिए हमने कभी इस बारे में आपसे बात नहीं की यह तो बहुत खुशी की बात है कि अब हमारी बेटियां बिना डरे ही शादी कर सकेंगी वहां के सारे ही लोग खुशी-खुशी चले गए थे मुझे खुशी हुई थी कि पिताजी ने मेरी बात का मान रखा था अब बारी थी

 

 मेरे सारे रिश्तेदारों को बुलाने की इसलिए मैंने पिताजी से कहा कि अब मैं चाहती हूं कि हमारा परिवार पहले की तरह साथ रहे इसलिए आपको सब लोगों को मनाकर यहां पर बुलाकर लेकर आना होगा मेरे पिताजी तो बहुत घमंडी थे किसी के आगे झुकते नहीं थे मगर मैंने उनके हाथ से फोन लेकर सबको फोन किए सबसे माफी मांगी और पिताजी को जबरदस्ती उन सबके घर ले गई और सबको जबरदस्ती बुलाकर अपने घर लेकर आई इस तरह से हम सब लोग एक साथ मिल गए और अब सब कुछ ठीक है 

 

और हमारे गांव में इस रस्म को भी खत्म कर दिया गया है मुझे अपने पहले जैसे परिवार को देखकर अब बहुत खुशी होती है और अब हमारे घर में हंसिका की शादी की तैयारियां की जा रही है और मैंने भी अपना अस्पताल बना लिया है जहां पर मैं गरीबों का मुफ्त में इलाज कर रही हूं अब हमारे गांव में खुशहाली ही खुशहाली फैली हुई है मैं आप लोगों से कहना चाहती हूं कि अब जमाना काफी बदल गया है

 

 अगर आप लोग भी अपने गांव या फिर अपने आसपास के गांव में ऐसी कोई रस्मो रिवाज को करते हुए देखते हो तो प्लीज उन पर रोक लगाएं जिस पर बेटियों के साथ अत्याचार हो रहा है क्योंकि ऐसे रस्मो रिवाज करने से कुछ भी हासिल नहीं होता यह सब मनगण बातें हैं दोस्तों उम्मीद करती हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी 

 

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