शहर की पढ़ी लिखी बहू। Mastram Ki Khani | Best Story In Hindi | Hindi Story

Mastram Ki Khani : मेरा नाम राखी है मैं अपनी सास के कमरे की खिड़की से अंदर झांकने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंदर का नजारा मुझे साफ नजर नहीं आ रहा था सिर्फ अंदर से मुझे बातों की आवाज आ रही थी जो मेरी सास मेरी नंद के साथ कर रही थी मेरी सास और नंद एक ही कमरे में रहती थी कमरे के अंदर से जो आवाज आ रही थी वह किसी और की भी थी मगर यह इंसान कौन था जिसके बोलने की आवाज मुझे आ रही थी 

 

मैं इस आवाज को नहीं पहचानती थी कम के अंदर पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था खिड़की से मुझे सिर्फ बोलने की आवाज सुनाई दे रही थी मगर कोई दिखाई नहीं दे रहा था कुछ देर के बाद मेरी सास ने कमरे की लाइट ऑन की तो यह देखकर मैं दंग रह गई थी कि अंदर कोई मर्द आया हुआ था इसके बाद जो कुछ मैंने देखा और जो कुछ मैंने सुना उसे देखकर मेरे होश उड़ गए थे 

 

और मेरे पैरों तले से जमीन निकल गई थी मैं सोच भी नहीं सकती थी कि ऐसा भी कुछ हो सकता है मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मैं ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रह पाऊंगी क्योंकि मैं प्रेग्नेंट थी और मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी जो कुछ मैंने सुन लिया था उसके बाद तो मेरे लिए खुद को संभालना भी बहुत मुश्किल हो गया था मैं चाहती थी कि मुझे कोई सहारा देने वाला मिल जाए ताकि मुझे मेरे कमरे तक पहुंचा दे 

 

क्योंकि मैं अपने पैरों पर ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी जिस खामोशी से मैंने कमरे का नजारा देखा था इतनी खामोशी से ही मैं वहां से पलटक अपने कमरे में चली आई थी अपनी सांस के कमरे से मेरे कमरे तक का सफर करना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो गया था जबकि लगभग 14-15 कदम की दूरी पर मेरा कमरा बना हुआ था मेरे कदम लड़खड़ा रहे थे बात मेरी सोच से भी कहीं ज्यादा हद तक आगे की थी

 

 मेरी हालत बिगड़ती जा रही थी और मेरी कुछ समझ भी नहीं आ रहा था कि मुझे अब क्या करना चाहिए मेरे प्रेग्नेंट होते ही ना जाने मेरा पति मुझे कहां छोड़कर चला गया था मेरे पास मेरा अपना कोई ऐसा मौजूद नहीं था जिसे मैं अपनी परेशानी के बारे में बता सकती या फिर इस सच्चाई के बारे में बता ती मेरी हालत तो लगातार बिगड़ती चली जा रही थी पिछले कुछ दिनों से मैं डिप्रेशन का शिकार थी लेकिन अब मेरा डिप्रेशन और ज्यादा बढ़ चुका था जो मैंने कुछ अपनी आंखों से देखा था

 

 अगर मैं किसी और के मुंह से सुनती तो शायद मैं कभी यकीन ना कर पाती मगर मैंने अपने ही कानों से सुना था इसलिए मुझे पक्का यकीन हो गया था कि मैंने जो कुछ भी सुना है वह गलत नहीं है मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से बिलोंग करती थी मेरी शादी एक ऐसे घर में हुई थी जिनको मैं पहले जानती भी नहीं थी मैं शहर में रहती थी और मेरी शादी हमारे शहर से कई किलोमीटर दूरी पर बने हुए एक छोटे से गांव में हुई थी मैंने एम किया हुआ था मगर मुझे नहीं पता था कि एक दिन मेरी जिंदगी मेरे साथ इतना बड़ा मजाक करेगी कि मैं बेवकूफ बनकर रह जाऊंगी

 

 मेरी उम्र 27 साल थी सुना था कि गांव में जल्दी ही लड़कियों की शादी कर दी जाती है मगर मेरा होने वाला पति अपनी मां से यही डिमांड करता था कि उसे शहर की पढ़ी लिखी लड़की चाहिए इसलिए उसकी मां अपने बेटे के लिए शहर की लड़की देखने पर मजबूर हो गई थी मेरी शादी की उम्र हो गई थी मेरे घर वाले मेरे लिए रिश्ते तलाश करना शुरू कर रहे थे 

 

मगर फिर मेरे पापा के एक दूर के रिश्तेदार ने मेरे पति के रिश्ते के लिए बताया था वह मेरे पति और उसकी फैमिली को अच्छे तरीके से जानते थे इसलिए लड़के वाले हमारे घर मुझे देखने के लिए आ गए थे मेरे मम्मी पापा को जब पता चला कि यह रिश्ता गांव से आ रहा है उन्होंने साफ इंकार कर दिया था मगर हमारे दूर के रिश्तेदार की ज्यादा जिद पर पापा को एक बार लड़के वालों से मिलने की चाहत जाग रही थी इसलिए उन्होंने मुझे देखने के लिए भी यहां पर बुला लिया था मैंने शहर में रहते हुए अपनी जिंदगी को बहुत खुलकर एंजॉय किया था

 

 मुझ पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं लगाई जाती थी मेरी फैमिली भी पढ़ी लिखी थी इसलिए मुझे फुल आजादी दी जाती थी मैं अपने पेरेंट्स के घर में रहते हुए अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जी रही थी मेरी एक बहन की शादी दुबई में और दूसरी बहन की शादी मुंबई में हुई थी हम तीन ही बहनें थे और दो भाई थे दोनों भाई अभी छोटे थे अब मेरी शादी का नंबर था जब लड़के वाले मुझे देखने के लिए आए तो पापा को लड़का और उसकी फैमिली अच्छी लगी थी 

 

जब उन्होंने अपने गांव का नाम बताया तो मेरे पापा बहुत खुश हुए थे क्योंकि मेरे पापा उस गांव में अपने बचपन के समय आते जाते थे तभी से व गांव उनका फेवरेट हो गया था इसलिए उनका कहना था कि वह आंख बंद करके इस गांव में अपनी बेटी की शादी कर देंगे क्योंकि यह बहुत सादे और सिंपल लोगों का गांव है यहां के लोग अपने घर की बहू बेटियों को बहुत खुश रखते हैं और ना ही गांव में किसी भी चीज की रोक टोक है

 

 मेरे पापा ने मेरा रिश्ता फाइनल कर दिया था अब मैं अपने पापा की जिद के आगे कुछ नहीं कह सकती थी लड़का देखने में बहुत अच्छा था उसकी फैमिली छोटी थी उसकी सिर्फ एक छोटी बहन और माता-पिता के अलावा कोई भी नहीं था सुना था कि घर भी बहुत बड़ा है और लड़का अच्छी नौकरी करता है नौकरी करने के लिए वह शहर में ही आता है उसके पास अपनी गाड़ी है वह सुबह को अपने घर से निकलता है और शाम के 5:00 बजे तक घर वापस आ जाता है

 

 इस तरह मुझे रिश्ते के बंधन में बांध दिया गया था मेरा रिश्ता विशाल नाम के लड़के के साथ तय हो गया था और मेरे घर वाले भी इस रिश्ते के लिए राजी थे दोनों ही परिवार हमारे रिश्ते से बहुत खुश थे मैं देखने में खूबसूरत थी इसीलिए लड़के के घर वालों ने मुझे देखते ही पसंद कर लिया था मैं शादी होकर जब अपने ससुराल आई तो गांव देखने के लिए बहुत एक्साइटेड थी

 

 क्योंकि मैंने तो कभी गांव देखा ही नहीं था मुझे शादी जैसे बंधन में बांध दिया गया था एक रिश्ता जिसमें जिम्मेदारियों की गठरी बांधकर औरत को बड़ी सावधानी के साथ कदम उठाने पड़ते हैं मेरे ससुराल में मेरी छोटी नंद और सास ससुर के अलावा कोई भी नहीं था उन्होंने बहुत मोहब्बत और प्यार से मुझे अपने घर में रखा हुआ था मुझे अपने पापा की बात याद आ रही थी

 

 जिन्होंने कहा था कि इस गांव में बहू बेटियों को खुश रखा जाता है यह बात बिल्कुल सच थी मेरी सास इस घर में मेरे लिए बड़ी थी घर में उनका ही फैसला चलता था व मेरा बहुत ख्याल रखती थी और गांव के हर रस्मो रिवाज के बारे में भी वह मुझे एक-एक बात बताती रहती थी मेरी नंद मेरे पति से छोटी थी वह अपनी ससुराल में नहीं रहती थी क्योंकि उसका पति दुबई में काम करता है

 

 और वह अपने पति के साथ दुबई नहीं जाना चाहती इसलिए वह अपने माइके में ही रहती है लेकिन मैं जब से शादी होकर यहां आई थी मैंने उसको गुमसुम देखा था उसके पति को गए हुए अभी दो महीने ही हुए थे जबकि मेरी शादी को एक महीना होने वाला था वो मुझे बहुत परेशान सी दिखाई देती थी और जब भी मैं उससे कुछ पूछने की कोशिश करती तो वो मुझे टाल दिया करती थी मेरी नंद बहुत अच्छी थी वो बिल्कुल भी चालाक नंदो के जैसी नहीं थी 

 

मुझे बहुत प्यार करती थी और मेरी बहुत इज्जत किया करती थी क्योंकि मैं उसकी बड़ी भाभी थी एक दिन व किचन में मेरे साथ काम करते हुए रोने लगी तो मैंने उससे पूछा कि आखिर तुम रो क्यों रही हो तो वो मुझे कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं थी मगर मैंने उससे जबरदस्ती पूछना चाहा कि बताओ ना स्वाती क्या बात है तुम रो क्यों रही हो क्या तुम्हें कोई प्रॉब्लम है तो मुझे बताओ तुम मुझे अपनी बड़ी बहन समझ सकती हो

 

 आखिर ऐसी कौन सी परेशानी है जो तुम मुझे बताने में हिच किचा रही हो वह मेरी बात सुनकर मेरे करीब बैठकर रोने लगी थी वह कह रही थी कि भाभी मैं आपको परेशान नहीं करना चाहती क्योंकि आप भी तो यहां अभी नई-नई आई हो लेकिन इस गांव में एक अजीब सा रिवाज है कि जब भी किसी औरत के पास गुड न्यूज़ होती है और वह औरत प्रेग्नेंट होती है तो उसके पास पति को उसे छोड़कर जाना होता है उसका पति उससे कोई कांटेक्ट भी नहीं कर सकता और ना उसके सामने आ सकता है

 

 अगर पति अपनी पत्नी के सामने आ जाता है तो गर्भवती औरत का बच्चा मरा हुआ पैदा होता है मेरा पति भले ही मुझसे पहले ही दूर है मगर मैं उससे बातचीत करती हूं मैं नहीं चाहती कि मेरा पति मुझसे बातचीत करना भी बंद कर दे क्योंकि मैं अपने पति से दूर तो एक मजबूरी की वजह से रह रही हूं मगर उससे बात किए बिना नहीं रह सकती और ना ही मैं अपने बच्चे को मरा हुआ देखना चाहती हूं 

 

और मुझे टेंशन इसीलिए हो रही है क्योंकि मैं भी प्रेग्नेंट हूं और यह बात मैंने अभी तक अपने पति को नहीं बताई लेकिन कल रात उन्हें इस बारे में पता ही चल गया क्योंकि बातों ही बातों में मेरे मुंह से अपनी प्रेगनेंसी का जिक्र निकल गया था अब मुझे इस बात का डर है कि कहीं वह मुझसे सारे संबंध खत्म ना कर दे इतनी दूर रहने के बावजूद भी मेरी उससे बात तो होती ही है मैं नहीं चाहती कि वह मुझसे बात करना भी बंद कर दें 

 

अपनी नंद की बातों ने तो मुझे डरा कर रख दिया था मैं अपने पति से बहुत प्यार करती थी क्योंकि वह भी मुझसे बहुत प्यार करते थे और मेरा बहुत ख्याल रखते थे और यह सब मैं सोच भी नहीं सकती थी कि वह मुझे छोड़कर जाएं और मुझसे बातचीत करना बंद कर दें मैंने इस बात को कंफर्म करने के लिए अपनी सास से पूछा था कि यह बात सही है या नहीं क्या गांव में सच में ऐसे रिवाज हैं 

 

तो मेरी सास ने कहा था कि हां बहू मेरी बेटी बिल्कुल ठीक कह रही है तुम्हारे पति के होने के समय मैं और तुम्हारे ससुर ने भी कुछ ऐसा ही किया था वो मुझसे दूर चले गए थे और पूरे 9 महीने तक ना ही उनकी मुझसे कोई बात हुई थी और ना ही वह मेरे सामने आए थे और जब स्वाति पैदा हुई थी तब भी कुछ ऐसा ही हुआ था मगर जब मेरा तीसरा बच्चा पैदा होने वाला था तो मुझसे दो-दो बच्चों को संभालना बहुत मुश्किल हो रहा था

 

 इसलिए तंग आकर मैंने तुम्हारे पापा को अपनी प्रेगनेंसी के बारे में नहीं बताया था और पूरे 9 महीने बाद जब मेरा बच्चा पैदा हुआ तो वह मरा हुआ ही पैदा हुआ था यह बात और यह रिवाज बिल्कुल सही है ऐसा ना करने पर बच्चा मरा हुआ पैदा होता है इसीलिए हर गर्भवती औरत के लिए इस रिवाज का पालन करना बहुत जरूरी है अपनी सांस की बात सुनकर तो मैं अपनी नंद की बात से भी ज्यादा डर गई थी और मेरा यह डर तब ज्यादा बढ़ गया था 

 

जब मेरी नंद के पति ने उससे कोई भी कांटेक्ट नहीं किया था मेरे नंद का पति दोपहर को और रात के समय अपनी पत्नी को कॉल जरूर करता था और दिन में एक बार वीडियो कॉल पर भी उससे बात किया करता था लेकिन जब उसे पता चल गया कि उसकी पत्नी प्रेग्नेंट है तब से ही उसने अपनी पत्नी को ब्लॉक कर दिया था ना तो वह उससे बात कर रहा था और ना ही उसने अपनी कोई भी खबर अपनी पत्नी को पता चलने दी थी ऐसा होने से मेरी नंद बहुत अफसोस में रहने लगी थी और बहुत ज्यादा रो रही थी 

 

मेरी नंद की कंडीशन बहुत खराब थी मैं भी उसकी हालत देखकर बुरी तरह से परेशान हो गई थी अब मुझे तो अपने फ्यूचर के बारे में सोचकर डर लग रहा था मैंने सोचा कि मैं इस बारे में अपने पति से बात करूंगी जब मेरे पति रात को घर आए तो मैंने उनको अपनी सास की बताई हुई और नंद की बताई गई एक-एक बात बता दी थी और यह भी कहा था कि स्वाती के पति ने उससे सारे कांटेक्ट खत्म कर दिए हैं 

 

प्रेगनेंसी के समय हर पत्नी को अपने पति की जरूरत होती है लेकिन स्वाती प्रेग्नेंट है और उसके पति ने उसका साथ छोड़ दिया यह बात सुनकर मेरे पति ने मेरे चेहरे की तरफ देखा और खामोशी से खाना खाने में बिजी हो गए मुझे नितिन का बिहेवियर देखकर बहुत हैरानी हुई थी कि उन्हें अपनी बहन के साथ ऐसा होने की कोई परवा नहीं है जबकि उन की बहन का तो रो-रो कर इतना बुरा हाल हो गया है

 

 मैंने अपनी सारी रात करवटें बदल-बदल कर गुजार दी थी क्योंकि मुझे टेंशन की वजह से नींद नहीं आ रही थी मैंने सोच लिया था कि मैं अपनी हालत स्वाती के जैसी बिल्कुल भी नहीं करूंगी मैं कुछ भी करके अपने पति से दूर नहीं होना चाहती इसलिए मेरे पति जब भी मेरे करीब आने की कोशिश करते तो मैं उन्हें मना कर दिया करती थी मैं नहीं चाहती थी कि मैं कभी भी प्रेग्नेंट हो जाऊं

 

 अपने पति के बिना रहने के बारे में सोचकर ही मुझे अब डर लगने लगता था अगली सुबह मैं जल्दी ही उठ गई थी डर की वजह से मुझे सारी रात नींद नहीं आई थी इसीलिए मैं सुबह सवेरे ही घर की साफ सफाई करने में लग गई थी तभी मेरी नंद कमरे से निकलकर बाहर आई तो मैं उसे देखकर चौक गई थी उसका हुलिया कुछ बदला-बदला सा लग रहा था लेकिन फिर मैंने सोचा कि वह अपने पति की याद में बेहाल हो गई होगी पति उसका गया था मगर मुझे उसकी टेंशन में सारी रात नींद नहीं आई थी

 

 तो फिर उस बेचारी पर इस समय क्या बीत र रही होगी लेकिन उसके चेहरे पर तो अजीब से एक्सप्रेशन नजर आ रहे थे और वह मुझसे पूछ रही थी कि भाभी आप इतनी सुबह-सुबह सफाई क्यों कर रही हो मैंने स्वाती से कहा कि मुझे तो तुम्हारी परेशानी में सारी रात नींद ही नहीं आई यह सुनकर स्वाती कहने लगी भाभी यह तो इस गांव की रीत है मैं खुद को इस काम के लिए तैयार कर चुकी हूं 

 

आप मेरी वजह से खुद परेशान मत हो मेरी नंद की बातों ने मुझे हैरान कर दिया था कोई भी औरत प्रेग्नेंट होते हुए अपने पति के बिना कैसे इस कड़े समय को पार कर सकती है लेकिन मेरी नंद तो हमेशा से ही इसी गांव में रही थी इस गांव में ही उसका मायका था और यहीं पर ही करीब में उसकी ससुराल थी उसकी ससुराल में कोई नहीं था उसका पति अकेला था इसलिए अकेले होने की वजह से वह उसे पिछले तीन महीने पहले माइके में छोड़ गया था

 

 ताकि वह घर में अकेली ना रह सके लेकिन अब उसके पति ने उसका साथ छोड़ दिया था सिर्फ एक रीत की वजह से इसलिए उसके लिए बात कोई अनोखी नहीं थी लेकिन मैंने पक्का इरादा कर या था कि मैं किसी भी हाल में नितिन को अपने करीब नहीं आने दूंगी अगले दिन नितिन ने मेरे करीब आने की कोशिश की तो मैंने साफ-साफ शब्दों में उन्हें कह दिया कि मैं आपके साथ संबंध नहीं बनाना चाहती 

 

मैंने अपनी सास से कह दिया था कि स्वाती से घर का कोई काम नहीं करवाना घर के सारे कामकाज में खुद देख लूंगी और वह ऐसी हालत में सिर्फ आराम करें क्योंकि उसकी कंडीशन ठीक नहीं है इस समय उसका पति भी उसका साथ नहीं दे रहा मेरी बात सुनकर मेरी सास ने घर की सारी जिम्मेदारियां मुझ पर ही डाल दी थी घर का हर छोटा-बड़ा काम मैं खुद ही कर रही थी और स्वाती को भी टाइम पर खाना और फ्रूट्स दिया करती थी नितिन का बिहेवियर दिन बदिरा साथ बिगड़ता जा रहा था

 

 शायद इसकी वजह यही थी कि मैंने उन्हें खुद से दूर कर दिया था वह देर रात तक घर आते थे और जब घर आते तो मुझसे बिना बात किए ही करवट लेकर सो जाते थे लेकिन शायद मेरे भाग्य में आजमाइश लिखी हुई थी और एक हफ्ते के अंदर ही मुझे यह बात पता चल गई थी कि मैं भी प्रेग्नेंट हूं और मैंने यह बात छुपा ली अपने पति को भी मैंने इस बारे में कोई खबर नहीं होने दी

 

 और अपने घर में भी किसी को यह बात नहीं बताई मैं जानती थी कि इस घर के लोग मुझसे बहुत प्यार करते हैं लेकिन मुझे डर था कि अब यही बात किसी को भी पता चली तो कहीं मेरा पति मुझे छोड़कर ना चला जाए मैंने इस बारे में अपनी मम्मी से भी फोन पर बात की थी मेरी मम्मी मुझे अपने घर काफी दिनों से मिलने के लिए बुला रही थी लेकिन मेरा कहीं भी जाने का मन नहीं कर रहा था मैंने मम्मी को कॉल पर सब कुछ बता दिया था मेरी मम्मी मेरी बात सुनकर कहने लगी 

 

यह तो गांव की बड़ी ही अजीब रीत है मेरी मम्मी कहने लगी कहीं तुम्हारी सास ने और तुम्हारी नंद ने तुम्हें कुछ झूठ तो नहीं बताया है मैंने कहा नहीं नहीं मम्मी स्वाती के चेहरे से मुझे लगता ही नहीं कि वह झूठ बोल सकती है और मेरी सास तो बहुत अच्छी औरत है उन्होंने भी इस रीत की वजह से अपना एक बच्चा खो दिया था तो फिर वह झूठ कैसे बोल सकती हैं मेरी मम्मी ने कहा था चलो अपना ख्याल रखना मैं तो तुम्हारे लिए प्रार्थना करूंगी मगर मैं परेशान थी इस बारे में मैंने अपने घर में भी किसी को कुछ नहीं बताया था 

 

लेकिन मेरी सास एक तजुर्बे का औरत थी मेरी बदलती हुई तबीयत ने आने वाले कुछ ही दिनों में उन पर सच्चाई खोल दी थी और यह बात जानकर उनकी खुशी के ठिकाने नहीं रहे थे कि उनकी बहू प्रेग्नेंट है वह मुझसे कहने लगी कि मैं तो बहुत खुश हूं मेरी बहू मां बनने वाली है हमारे आंगन में भी फूल खिलेगा यह तो बहुत बड़ी खुशी की बात है बहू मैंने अपनी से माफी मांगते हुए कहा कि मैंने आपसे यह बात इसलिए छुपाई

 

 मुझे डर था कि कहीं नितिन मुझे छोड़कर ना चले जाएं मेरी सास ने मुस्कुराते हुए कहा कि तुम फिक्र मत करो बस खुश रहा करो मेरे दिल में अजीब अजीब तरह के ख्याल पैदा हो रहे थे और उस समय तो मेरी कंडीशन बहुत खराब हो रही थी जब देर रात तक मेरे पति घर वापस नहीं आए थे और जब यही बात मैंने अपनी सास को बताई तो उन्होंने मेरे ससुर को पति को ढूंढने के लिए घर से बाहर भेज दिया था 

 

और उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि कहीं नितिन को इस बारे में पता तो नहीं चल गया कि तुम प्रेग्नेंट हो मुझे इस बारे में कुछ भी आईडिया नहीं था लेकिन मैं बहुत परेशान हो गई थी और रोए चली जा रही थी मेरे ससुर को भी घर से गए हुए एक घंटा हो गया था ना तो वह वापस आए थे और ना ही मेरा पति वापस आया था मेरी सास ने मुझे तसल्ली दी और कहा कि अपने कमरे में जाकर आराम करो इस बारे में ज्यादा मत सोचो एक घंटे के बाद जब मेरे ससुर आए तो उन्होंने कहा कि उनका बेटा उन्हें कहीं भी नहीं मिल रहा रहा 

 

अपने ससुर की बात सुनकर मैं हैरान हो गई थी और अपने कमरे में जाकर फूट-फूट कर रोने लगी थी मैं जब से शादी होकर इस गांव में आई थी मैंने इस गांव की शक्ल तक नहीं देखी थी मैं घर की चार दीवारी में ही रह रही थी मेरी सास कहती थी कि गांव की औरतें घर में ही रहना पसंद करती हैं और यहां ज्यादा मिलने झुलन का भी रिवाज नहीं है मुझे अपने घर वालों की भी बहुत याद आ रही थी

 

 क्योंकि शादी से लेकर अब तक मैं अपने माई के भी नहीं गई थी और नितिन के इस तरह से गायब हो जाने के बाद तो मुझे अपना घर और ज्यादा याद आ रहा था मैंने अपनी सास से माय के जाने के लिए कहा था कि मैं अपने पति के बिना इस घर में वक्त नहीं गुजार सकती मैं अपनी सारी प्रेगनेंसी का टाइम अपने माइके में रहकर गुजार दूंगी और जब बच्चा पैदा हो जाएगा तो यहां आ जाऊंगी 

 

इस तरह मुझे मेरा बच्चा और मेरा पति दोनों ही मिल जाएंगे मेरी सास ने कहा कि तुम अभी प्रेग्नेंट हो और इस दौरान अगर तुम सफर करोगी तो तुम्हारी प्रेगनेंसी पर फर्क पड़ सकता है इसलिए तुम यही रहकर बच्चा पैदा कर लो उसके बाद अपने पति के साथ खुशी-खुशी अपने माइके में होकर आना मेरे लिए इस घर में अपने पति के बिना टाइम गुजारना एक-एक पल एक साल के बराबर लग रहा था

 

 मैं सारा सारा दिन घर के कामकाज में बिजी रहती थी और अपने पति को याद करती रहती थी मैंने अपने पति का नंबर भी ट्राई करने की कोशिश की मगर उनका नंबर स्विच ऑफ जा रहा था मेरे पति का कुछ भी पता नहीं चल रहा था मेरे ससुर तो शुरू से ही कोई काम नहीं करते थे जिस दिन से मैं इस घर पर आई थी मैंने अपने ससुर को काम पर जाते हुए नहीं देखा था जबकि वह हट्ट कट्टे थे 

 

और मेरी सास नंद घर से बाहर नहीं निकलती थी इतने दिनों से मेरे पति घर में मौजूद नहीं थे लेकिन फिर भी घर के हालात बिल्कुल ठीक थे घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं हुई थी और हमेशा मैं इस बात को लेकर हैरान हो जाती थी कि इस घर से कोई ज्यादा बाहर नहीं जाता तो फिर घर की सारी जरूरत की चीजें कैसे आ जाती हैं ससुर बीमार रहते थे इसलिए अपने कमरे से तभी बाहर निकलते थे

 

 जब बहुत ज्यादा इमरजेंसी होती थी वरना ज्यादातर वह अपने कमरे में आराम ही करते थे मेरे ससुर को अकेले रहने की आदत थी इसलिए मेरी सास और मेरी नंद का एक ही कमरा था जबकि मेरे ससुर का रूम अलग बना हुआ था मेरी नंद स्वाती का हर सुबह अजीब सा लिया भी मेरी आंखों में खटकता था लेकिन मैं चाहकर भी उससे कभी कुछ नहीं पूछ पाती एक दिन गांव की कुछ औरतें हमारे घर चली आई

 

 तो मेरी सास ने कहा कि तुम अपने कमरे के अंदर ही रहना और उन के सामने बिल्कुल भी मत आना तुम नई नवेली दुल्हन हो और प्रेग्नेंट भी हो यह लोग अपनी बातों से तुम्हें और ज्यादा परेशान करके रख देंगी और मैं नहीं चाहती कि तुम्हारे बच्चे को कोई भी नुकसान पहुंचे कभी मैं यह सोचकर बहुत खुश होती थी कि मुझे सास के रूप में मां मिल गई वरना इन हालात में तो मेरे लिए जिंदा रहना ही मुश्किल था

 

 घर के कामकाज करते-करते और नितिन की जुदाई में तड़पते हुए मैं बहुत कमजोर हो चुकी थी जबकि मेरी नंद तो दिन बदिनी खिलती जा रही थी मैं उसे घर का का कोई काम नहीं करने देती थी और टाइम पर उसको खाना भी दिया करती थी मेरी नंद ने कहा था कि भाभी आप इसलिए कमजोर हो रही हो क्योंकि आप बेटे को जन्म देने वाली हो और मैं इसीलिए सेहतमंद और अच्छी हो रही हूं 

 

क्योंकि मैं बेटी को जन्म देने वाली हूं हमारे गांव में यही कहा जाता है कि जो औरत बेटे को जन्म देने वाली होती है वह दिन बदन बदसूरत होती जाती है आज गांव में बहुत ज्यादा गर्मी थी और मुझे बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी बराबर में मेरे पति के सोने की जगह बिल्कुल खाली पड़ी हुई थी और मेरी आंखें उन्हें देखने के लिए बेताब थी मैं अपनी आंखें मलते हुए उठ बैठी और खुद को संभालने की कोशिश करने लगी 

 

लेकिन मेरी तबीयत बिगड़ती जा रही थी ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरा दम घुट रहा हो मैं धीरे से उठी और कमरे से निकलकर आंगन में आ गई थी मैंने सोचा कि कुछ देर तक आंगन में इधर-उधर टहल लेती हूं ताकि ताजी हवा लगने से मेरा दम घुटना बंद हो जाए और मुझे ठीक महसूस होने लगे मेरी तबीयत अगर ठीक हो जाएगी तो मैं थोड़ी देर के बाद अपने कमरे में जाकर सो जाऊंगी वरना यहीं पर एक कोने में बैठ जाऊंगी

 

 क्योंकि कमरे में ज्यादा गर्मी हो रही थी और बाहर हल्की-हल्की हवा चल रही थी इसलिए अच्छा लग रहा था लेकिन मैं बहुत सावधानी से कमरे से बाहर निकली थी क्योंकि मेरी सास ने मुझे कमरे से बाहर और रात में खुले आंगन में आने से सख्त मना किया था वह हमेशा कहती थी कि ऐसी हालत में जब तुम प्रेग्नेंट हो तो रात के 12:00 बजे के बाद अपने कमरे से बिल्कुल बाहर मत निकला करो प्रेग्नेंट औरत पर जल्दी ही काले जादू का असर हो जाता है

 

 और रात के समय कुछ लोग काले जादू का प्रयोग बहुत करते हैं मेरे लिए तो अपनी सास की बात पत्थर की लकीर होती थी क्योंकि मुझे यकीन था कि वह मेरी भलाई के लिए ही बात करती हैं लेकिन आज मुझसे किसी भी हाल में यह घुटन बर्दाश्त नहीं हो रही थी और जैसे ही मैं आंगन में आई तो मुझे अपनी सास और नंद के कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दी मेरे अंदर एक अजीब सा इंटरेस्ट जागने लगा था

 

 क्योंकि वो लोग तो कहती थी कि हम 10 बजे तक सो जाते हैं तो फिर आज कैसे जाग रही हैं मैंने सोचा शायद स्वाती की तबीयत ठीक नहीं होगी वह भी तो मेरी ही तरह प्रेग्नेंट है इसलिए जब मैं कमरे के करीब पहुंची तो मुझे हल्की-हल्की बातों की आवाज सुनाई दे रही थी मेरी सास किसी से बात कर रही थी मैंने अपने ससुर के कमरे की तरफ देखा तो वह भी अपने कमरे में सो रहे थे मगर अंदर से किसी मर्द के बोलने की भी आवाज आ रही थी 

 

फिर वह रात कि समय किस मर्द से बातें कर रही थी मैं उनके कमरे की खिड़की के पास गई खिड़की थोड़ी ऊंचाई पर बनी हुई थी इसलिए मुझे उचक करर खिड़की के अंदर झांकना पड़ा शायद कमरे के अंदर मौजूद लोगों को बिल्कुल भी आईडिया नहीं था कि मैं इस तरह आधी रात को कमरे से निकलकर उनकी बात भी सुन सकती हूं इसलिए वह लोग बेफिक्र होकर बात कर रहे थे और जो कुछ मैंने सुना मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए थे मैं अंदर से आने वाली आवाज को पहचान नहीं पाई थी

 

 लेकिन अपनी आंखों से उन चेहरे को देखना चाहती थी और शायद अब मेरी आजमाइश का समय खत्म हो चुका था इसलिए अचानक ही मेरी सास ने कुछ देर के लिए कमरे की लाइट ऑन कर दी थी और मैंने उन लोगों को भी देख लिया था जिनके बारे में मैं बात सुन रही थी और मैंने उस मर्द का भी चेहरा देख लिया था जो कमरे के अंदर मौजूद था मैं सोच भी नहीं सकती थी कि इतना बड़ा खेल भी मेरे साथ खेला जा सकता था 

 

मेरी पेठ में छुरा घोप वाले कोई और नहीं बल्कि मेरे अपने ही थे जिन पर मैंने हद से ज्यादा भरोसा किया था उन्हीं लोगों ने मेरे हंसते हुए संसार को उजाड़ दिया था मैं बड़ी मुश्किल से जैसे-तैसे अपने कमरे में आई थी मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे आगे क्या करना है मैंने अपने कानों से अपनी सांस को कहते हुए सुना था कि बस एक बार इस बेवकूफ लड़की का बच्चा पैदा हो जाने दो

 

 इसके बाद मैं इसे और इसके पति को इस घर से और इस गांव से ऐसे निकालू गी जैसे दूध में से मक्खी को निकाल देते हैं और तो और यह लोग दोबारा पलटकर कभी इस घर में नहीं आ सकेंगे इतने में कमरे से उस मर्द की आवाज निकली थी जो और कोई नहीं मेरी सास का अपना सगा बेटा था उसने मेरी सास से कहा कि मम्मी क्या आपको यकीन है कि यह लड़की और इसका पति इतनी आसानी से यहां से निकल जाएगा 

 

लेकिन यह आदमी मेरी सास को मम्मी क्यों बोल रहा था क्योंकि यह उनका अपना सगा बेटा था और मेरा पति उनका सौतेला बेटा है मेरी सास कह रही थी कि मैंने और स्वाती ने मिलकर ऐसा जाल बिछाया है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे शादी के पहले ही दिन से हम दोनों ने उस बेवकूफ लड़की को अपनी झूठी मोहब्बत के जाल में बांधा हुआ है और वह ना समझ यही समझती है कि मैं उसे अपनी बेटियों की तरह प्यार करती हूं

 

 मैं उसका बहुत ख्याल रखती हूं लेकिन सच तो यह है कि मुझे अपने पति के बेटे और उसकी बहू से इतनी नफरत है कि मैं बता भी नहीं सकती मैंने नितिन के दिल में पहले से ही उसकी पत्नी के लिए नफरत डाल दी थी और उसे बता दिया था कि उसकी पत्नी शहर की पागल और सरफिरी लड़की है जो कभी-कभी बहकी बहकी बातें भी करती है और उसके घर वालों ने झूठ बोलकर हमारे सर पर उसे बांध दिया

 

 मैंने कभी राखी को गांव वालों से भी मिलने झुलन नहीं दिया ताकि जब मैं उसे पागल साबित करूं तो वह कुछ ना कह सके और जब हकीकत गांव वालों के सामने आएगी तो वह खुद समझ जाएंगे कि यह लड़की पागल थी मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि राखी इतनी बेवकूफ होगी वह शहर की इतनी चालाक और पढ़ी लिखी लड़की होते हुए भी हमारी बातों में आ गई और आसानी से बेवकूफ बन गई

 

 तभी मेरी नंद स्वाती हंसने लगी और कहने लगी कि आप बिल्कुल ठीक कह रही हो मम्मी जी वह सच में बहुत बेवकूफ है जब मैंने उससे कहा कि मैं प्रेग्नेंट हूं तो उसने मेरी बात का आसानी से यकीन कर लिया और यही बात जब उसने नितिन से कही तो नितिन ने उसे पागल समझ लिया और जब मैंने और मम्मी ने नितिन के कान में यह बात डाल दी कि आपकी पत्नी कभी भी प्रेग्नेंट नहीं हो सकती

 

 तो उसने हमारी बात पर यकीन कर लिया था लेकिन जब राखी ने उसे बताया कि मैं प्रेग्नेंट हूं तो वह समझ गया था कि मेरी पत्नी पागलों जैसी बातें कर रही है वह बेवकूफ लड़की मेरी बहुत सेवा करती थी और साथ-साथ घर के भी सारे काम किया करती थी उसने हमारी प्लानिंग के मुताबिक खुद ही अपने पति को खुद से दूर कर दिया हम तो यही चाहते थे कि इन दोनों पति-पत्नी के बीच में इतनी दूरियां हो जाए कि हम अपने मकसद में कामयाब हो सकें मेरी सास कहने लगी कि जब मुझे पता चला कि राखी प्रेग्नेंट है

 

 तो मैंने खुद ही नितिन को शहर के कामों में बिजी कर दिया और वह कुछ दिनों के लिए शहर चला गया मैंने नितिन से कह दिया था कि तुम जाओ तुम्हारी पत्नी को मैं खुद बता दूंगी लेकिन मैंने राखी से यह बात छुपा ली और वह यही समझी कि उसका पति भी उसे छोड़कर जा चुका है अब मुझे इस बात का बेसब्री से इंतजार है कि राखी जब अपने बच्चे को जन्म देगी और मैं उससे उसके बच्चे को छीन लूंगी 

 

और तुम्हारी पत्नी की गोद भर दूंगी राखी तो वैसे भी नितिन की जुदाई में आधी पागल हो चुकी है मैं खुद राखी को पागल साबित करके उसको उसके मायके छोड़ आऊंगी राखी का बच्चा मेरे बेटे और बहू की जिंदगी को इस तरह से संवार देगा कि मेरा अपना सगा बेटा और उसकी पत्नी अपनी जिंदगी में बहुत खुश रहेंगे और मुझे अच्छे से याद है कि राकी के जाने के बाद नितिन कभी दोबारा शादी नहीं करेगा

 

 इस तरह मेरे प की दी हुई प्रॉपर्टी जो उसने अपने इकलौते बेटे नितिन के नाम कर दी तो वह हमारी हो जाएगी कुछ दिनों पहले जब गांव की औरतें हमारे घर पर आई थी तो मैंने राखी को उनके सामने भी नहीं जाने दिया और गांव की औरतों को भी यही बताया था कि वह एक पागल लड़की है उसके घर वालों ने धोखे से हमारे बेटे के साथ उसकी शादी कर दी 

 

मैंने राखी को गांव के रस्मो रिवाज के बारे में इतनी गलत और झूठी बातें बताई कि वह चाहकर भी कभी खुद को सच्चा साबित नहीं कर पाएगी मैं अपनी जिस सास को मां समान और अपनी नंद को बहन समान समझती थी व दोनों तो आस्तीन का सांप निकली जो मुझे जानबूझकर मेरे पति से दूर कर चुकी थी और अब मेरा बच्चा भी छीनने वाली थी इन लोगों की बातें सुनकर तो मैं अपने पैरों पर खड़े रहने काबिल भी नहीं बची थी

 

 मेरी सास कह रही थी कि यह प्रॉपर्टी के पेपर्स हैं कभी भी किसी भी तरह इस पर नितिन के सिग्नेचर करवाने हैं और फिर यह सारी प्रॉपर्टी हमारी होगी और नितिन का इस घर में कोई हिस्सा नहीं बचेगा वही पेपर्स निकालने के लिए मेरी सास ने कुछ देर दे के लिए कमरे की लाइट ऑन की थी तभी तो मैं कमरे में मौजूद उनके सगे बेटे और बहू का भी चेहरा देख पाई थी सारा का सारा प्लान मेरी नंद और मेरी सास का था

 

 वो ये सब कुछ अपने सगी बेटे और बहू के लिए कर रही थी मैं वापस अपने कमरे में चली आई थी जिस तरह मेरी सास और नंद ने अपनी मीठी-मीठी बातों से मुझे अपने जाल में फंसाया था उसी तरह मुझे अपने काबू में भी किया हुआ था कमरे में आने के बाद मैं बहुत देर तक सोचती रही कि मैं किस तरह खुद को इस मुसीबत से निकालूं अपने पति से कैसे कांटेक्ट करूं किस तरह से उन्हें अपनी सच्चाई के बारे में बताऊं

 

 मैं अपने ससुराल वालों की चंगुल से कैसे निकलूं मैं डरते डरते ही आधी रात को घर से निकलने लगी थी और मैंने अपने दुपट्टे को सर पर रख लिया था और पल्लू से अपने चेहरे को भी छुपा लिया था और घर से निकल पड़ी नितिन हमेशा मुझे बताया करते थे कि इस गांव में उनका एक बहुत पक्का फ्रेंड है जो उनके साथ ही ऑफिस जाता है और हर अच्छे बुरे काम में उनका साथ देता है 

 

मुझे उसी समय अपने पति के दोस्त का ख्याल आया मुझे उसके नाम की सिवा कुछ भी नहीं पता था मैं तो इस गांव की सड़कों से भी वाकिफ नहीं थी क्योंकि मेरी सास ने मुझे कभी घर से निकलने ही नहीं दिया था मैं घर से निकली तो मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था गांव के कुत्ते मुझे देखकर भोकने लगे थे नितिन के दोस्त का नाम राहुल था और मुझे किसी भी तरह राहुल के घर के बारे में पता करना था

 

 जिसके थ्रू मैं नितिन को हकीकत बता सकती लेकिन एक नाम के सहारे में कैसे उसे इतनी रात को तलाश करती नितिन हमेशा मुझसे यही कहा करते थे कि वह आगे वाली गली में अपने दोस्त के घर जा रहे हैं इसलिए घर से निकलकर मैं आगे वाली गली की तरफ जाने लगी थी मैं यह भी नहीं जानती थी कि मुझे उसके घर का किस तरह से पता चलेगा लेकिन शायद भगवान ने मेरे लिए आसानी निकाल दी थी 

 

अब मुझे अपने पति की यह बात अचानक याद आ गई थी कि इस गांव में सरपंच जी के बाद सिर्फ राहुल का ही घर ज्यादा बड़ा है बाकी किसी ने भी इस गांव में इतना बड़ा मकान नहीं बनाया आगे वाली गली में जाने के बाद एक बहुत बड़ा घर बना हुआ था डर की वजह से मेरा बुरा हो रहा था लेकिन मुझे नितिन तक अपना मैसेज पहुंचाने के लिए कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ता मैं जैसे ही उस दरवाजे पर पहुंची तो अचानक दरवाजा खुल गया

 

 और एक जवान लड़का दरवाजे से बाहर निकला वह मुझे देखकर ठिठक गया और मुझे देखते ही पहचान गया इतने अंधेरे में मुझे इस तरह देखकर वह कहने लगा राखी भाभी आप यहां इतनी रात में क्या कर रही हो जबकि नितिन भी गांव में मौजूद नहीं है मैंने राहुल को शुरू से लेकर अब तक की एक-एक बात बता दी थी और यह भी बताया कि कि वो लोग मुझे पागल साबित करना चाहते हैं 

 

मेरी बात सुनकर तो राहुल एकदम से हैरान रह गया था और कहने लगा कि भाभी नितिन ने भी मुझे यही बताया था कि आप एक पागल और सरफिरी लड़की हो और हमेशा ही उल्टी सीधी बातें करती हो मैंने कसम खाकर राहुल को यकीन दिलाया कि मैं पागल नहीं हूं और उसे बताया कि उसकी सौतेली मां मुझे पागल साबित करना चाहती है जबकि मुझे तो आज पहली बार यह बात पता चली कि नितिन की मां उसकी सगी मां नहीं बल्कि सौतेली मां है

 

 और उसकी बहन सगी नहीं उसकी सौतेली बहन है राहुल कहने लगा कि हां वह नितिन की सौतेली मां और सौतेली बहन है नितिन जब 5 साल का था तब उसकी मां की मौत हो गई थी इसलिए अपने बेटे की परवरिश करने के लिए उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी और तब से ही वह उसके घर में रह रही है मगर नितिन की सौतेली मां का बेटा अपने पहले पिता के पास ही रहता था

 

 और उसकी मां अपनी सगी बेटी को यहां लेकर आ गई थी जिस पर नितिन के पिता को कोई ऐतराज नहीं हुआ था मैंने राहुल से रिक्वेस्ट की थी कि किसी भी तरह वो मेरी नितिन से बात करवा द राहुल ने कहा कि भाभी आप फौरन ही घर पहुंच जाओ मैं आपकी बात समझ चुका हूं सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन आधी रात को अगर किसी ने आपको मेरे साथ देख लिया तो हम दोनों के साथ अच्छा नहीं होगा यह गांव है

 

 और यहां इज्जत के मामले पर जान देना और लेना मामूली सी बात है आप पहले ही बहुत परेशान हो मैं आपको और परेशानी में नहीं डालना चाहता मैं राहुल की बातों पर यकीन करके खामोशी से घर के अंदर आ गई थी मगर मुझे यह नहीं पता था कि राहुल को मेरी बातों पर यकीन आया भी था या नहीं बड़ी मुश्किल से मेरा टाइम पास हो रहा था

 

 मैंने अपनी सास और नंद को बिल्कुल भी यह बात जाहिर नहीं की थी कि मैं उनकी सच्चाई को जान चुकी हूं और घर के कामकाज में ऐसे बिजी हो गई जैसे हर रोज होती थी जबकि मेरे ससुर भी अपनी पत्नी की बात से बेखबर थे मेरी कोशिश यही थी कि मैं कम से कम उन पर ध्यान ना दूं ताकि उनको मेरे ऊपर शक ना हो वह दोनों मां बेटी बहुत चालाक थी और मैं नहीं चाहती थी कि वह मेरा चहरा पढ़ ले उस समय मेरे दिल को सुकून आ गया था

 

 जब अगले ही समय मेरा पति घर को लौट आया मेरी सास तो इस तरह मेरे पति को घर के दरवाजे पर खड़ा हुआ देखकर चौक स गई थी क्योंकि उनका सारा प्लान फ्लॉप हो चुका था मेरे पति ने घराने के बाद अपने पिता को यह सारी बात बता दी थी जो इस बात से घर में रहते हुए भी बेखबर थे मेरे ससुर को यकीन नहीं आ रहा था मगर हम दोनों ने उन्हें मिलकर यकीन दिलाया था तो वह हमारी बात पर यकीन कर गए थे

 

 उन्होंने जब सख्ती से अपनी पत्नी से सवाल किया कि उन्होंने यह सब कुछ क्यों किया तो मेरी सास कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं थी मगर जब मेरे ससुर ने मेरी सास के गाल पर थप्पड़ मारकर उनसे पूछा तब उन्होंने जवाब दिया था कि उन्होंने यह सब कुछ इसलिए किया क्योंकि उन्होंने बचपन से ही मेरे ससुर के बेटे को अपनी औलाद की तरह पाल पोस करर बड़ा किया था मेरे ससुर का बेटा उनके सौतेली औलाद था 

 

मगर उन्होंने उसे सगी मां की तरह पाला था और अपने बेटे को अपने पति को दे दिया था जिससे वह डिवोर्स लेकर आई थी उनका पति मर गया और उनका बेटा बेसहारा हो गया था वह उसे इस घर में लाना चाहती थी मगर मेरे ससुर ने मना कर दिया था हां पर मेरे ससुर ने उनकी बेटी को घर में रहने की परमिशन दे दी थी क्योंकि वह लड़की थी मेरी सास को लगता था कि वह उनके सौतेले बेटे की परवरिश अच्छे से करेंगी

 

 तो मेरे ससुर की जो ढेर सारी प्रॉपर्टी है वोह उसमें से अपने सगे बेटे के साथ-साथ मेरी सास के दोनों बच्चों को भी हिस्सा देंगे मगर मेरे ससुर को जब से लगने लगा था कि वह बीमार रहने लगे हैं तो उन्होंने देर ना करते हुए अपनी सारी प्रॉपर्टी नितिन के नाम कर दी थी जो कि उनका सगा बेटा था यह बात मेरी सास को बहुत बुरी लगी थी मेरी सास के सगे बेटे ने शादी कर ली थी और उसकी शादी को 5 साल हो गए थे 

 

मगर उसकी पत्नी के पास कोई औलाद नहीं थी इस तरह मेरी सास ने बड़ी प्लानिंग के साथ सोच रखा था कि वह मेरा बच्चा अपने सगे बेटे और बहू की गोद में डालकर उसकी सोनी गोद को भर देंगी और हम दोनों पति-पत्नी में झगड़ा करवाने के बाद मेरा पति जब अफसोस में रहने लगेगा तो उसे प्रॉपर्टी के पेपर्स पर साइन करवा लेंगी और उसकी सारी जायदाद अपने और अपने बच्चों के नाम कर लेंगी 

 

मगर अब सारी सच्चाई मेरे ससुर के सामने खुलकर आ गई तो मेरे ससुर ने एक और थप्पड़ मेरी सास के मुंह पर मार दिया था और उन दोनों मां बेटी को घर से निकल जाने के लिए कहा था मेरी सास की बहू बेटे आधी रात के समय जब मेरे ससुर और मैं कमरे में सो जाते थे तब उनसे मिलने के लिए आते थे और इस तरह यह लोग रात को बैठकर प्लानिंग करते थे उस दिन मेरे सामने सारी हकीकत खुलकर आ गई थी

 

 वरना यह लोग हमें कहीं का नहीं छोड़ते मेरे पति और मुझे बर्बाद करने का इन लोगों ने पूरा पूरा प्लान बनाया हुआ था मेरे पति ने अपनी सौतेली मां से कहा कि मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी मैंने आपको हमेशा अपनी सगी मां की तरह प्यार किया था और स्वाती को भी अपनी सगी बहन समझा था और मैं नहीं जानता था कि आप लोग मेरे साथ इतना बड़ा धोखा भी कर सकते हो मेरे ससुर ने मेरी सास और स्वाती को घर से निकल जा के लिए कह दिया था मेरे ससुर ने फौरन ही अपनी पत्नी को डिवोर्स दे दी थी

 

 और उनकी जवान बेटी के साथ उन्हें घर से निकाल दिया था उनका कहना था कि अब तुम जाकर अपने बेटे और बहू के साथ ही रहो जिनके लिए तुमने यह सब कुछ किया और मैं अपने बेटे और बहू के साथ रहूंगा यह मेरा और मेरे बेटे का घर है इस घर में तुम लोगों की कोई जगह नहीं है मेरी सास और नंद रो-रोकर मेरे ससुर और मेरे पति से माफी मांग रही थी मगर अब उन लोगों के रोने का कोई फायदा नहीं था

 

 मेरे ससुर ने उन्हें घर से निकाल दिया वह लोग ना जाने कहां चली गई इस बारे में हमें कुछ भी नहीं पता चला क्योंकि हम लोग उनसे सारे संबंध खत्म कर चुके हैं इस तरह मेरी जिंदगी अपने पति के साथ खुशी-खुशी गुजर रही है मैंने एक सेहतमंद और प्यारे से बेटे को जन्म दिया मेरे और मेरे पति के बीच सारे झगड़े खत्म हो गए और हम लोग एक साथ एक घर में रह रहे हैं मेरी शादी को अब 10 साल हो गए

 

 मेरे ससुर अब इस दुनिया में नहीं है क्योंकि वह मेरा बच्चा पैदा होने के 2 साल के बाद ही इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे मेरी सौतेली सास उनकी बेटी और उनका बेटा और बहू कहां गए इस बारे में हमें कुछ भी नहीं पता और ना ही कभी हमने उनके बारे में कुछ जानने की कोशिश की आज मैं अपने पति के साथ खुशी-खुशी जिंदगी गुजार रही हूं मगर मुझे इस बात पर आज भी अफसोस होता है कि मैं शहर की थी

 

 और पढ़ी लिखी होने के बावजूद भी गांव की इस झूठी और अपनी सास की मन गणन बातों की वजह से बेवकूफ बन गई आप लोग भी सावधान हो जाइए और किसी की मन गणन बातों में कभी ना हमेशा अपने दिमाग से काम ले दोस्तों उम्मीद करती हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी 

 

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