बहन की ख़ुशी | Mastram Story In Hindi | Hindi Kahaniyan | Sad Story In Hindi

Mastram Story In Hindi :  मेरा नाम सुनैना है वैसे तो मैं गांव की रहने वाली थी लेकिन मेरे खानदान में कुछ ऐसे रीति-रिवाज थे जो हमारी सोच से बिल्कुल ही अलग थे और मैं ऐसे रीति रिवाजों के सख्त खिलाफ थी मुझे समझ नहीं आता था कि आखिर लोग आज के जमाने में भी ऐसी मन अपनी पढ़ाई को पूरा कर लिया था मेरे घर वालों का कहना था कि हम गरीब लोग हैं और हम जैसे लोग चाहते हैं कि हमारी बेटियां इज्जत से अपने घर की हो जाएं

 मगर तुम तो पढ़ाई करना चाहती हो आखिर पढ़ लिखकर तुम्हें करना ही क्या है जाना तो तुम्हें फिर भी ससुराल ही है इसीलिए घर के कामकाज सीखो पढ़ाई-लिखाई करने की कोई जरूरत नहीं है मेरे पापा मुझसे बहुत प्यार करते थे हालांकि वह अपनी तीनों ही बेटियों से बराबर का प्यार करते थे मगर मैं बहुत जिद्दी थी इसलिए सभी लोग मेरे जिद के आगे हार मान जाया करते थे हम तीनों बहनों का कोई भाई नहीं था

 मेरी एक बड़ी बहन थी और मुझसे एक छोटी बहन थी हम तीनों ही बहनें आपस में बहुत मोहब्बत और प्यार के साथ रहा करते थे मेरी मम्मी का गांव की औरतों के साथ बहुत मिलना झुलना रहता था जबकि मेरे पापा सिर्फ अपने काम से काम ही रखते थे मेरे पापा का शहर जाने वाले रास्ते पर एक चाय का होटल था जहां पर आने जाने वाले लोग रुकते थे और लोग उनके होटल पर बैठकर चाय नाश्ता करते थे हमारी जिंदगी सुकून से गुजर रही थी हमारे यहां जिस लड़की की शादी होने वाली होती थी 

उसकी शादी से एक रात पहले उसको हरे रंग के कपड़े पहना दिए जाते थे जिसकी वजह से वह लड़की शादी से एक रात पहले अपनी नींद पूरी कर लिया करती थी वह सारी रात गहरी नींद में सोई रहती थी और अगली सुबह जब उसकी आंख खुलती तो उसके पास बहुत सारे पैसे होते थे ऐसा सिर्फ अभी तक हमारे रिश्तेदारों में हो चुका था लड़की के पैरों पर हल्दी लगी होती थी यह रसम मुझे कुछ कुछ अजीब सी लगती थी

 क्योंकि मैं पढ़ी लिखी थी और यह बात जानना चाहती थी कि आखिर ऐसा करने से क्या होता है इसी तरह जब मेरी शादी का समय आया तो एक रात पहले मुझे भी हरे रंग के कपड़े पहना दिए गए थे मैंने चुपके से अपने कमरे को बंद करके अपने कपड़े चेंज कर लिए थे और सोने का नाटक करने लगी अभी मुझे लेटे हुए 5 मिनट भी नहीं हुए थे कि मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरे होश उड़ा दिए थे जब शाम ढल गई और रात के आगोश में मैं गिरती चली जा रही थी एक अजीब सा सुकून और लापरवाह सी हवा चल रही थी 

मैं छत पर बैठी हुई पंछियों को अपने-अपने स्थान पर वापस जाता हुआ देख रही थी तभी छत पर मम्मी मेरे पास आई और कहने लगी सुनैना तुम्हारा रिश्ता तय कर दिया गया है और अगले महीने तुम्हारी शादी है अपनी मम्मी की बात सुनकर मैं चौक गई थी कि अचानक मेरी मम्मी ने मुझसे बिना पूछे मेरा रिश्ता कैसे फिक्स कर दिया यहां तक कि शादी की डेट भी फाइनल कर दी मेरी मम्मी बहुत अजीब थी और बहुत गुस्सा किया करती थी इसलिए उनसे बात करते हुए हम तीनों बहनों को डर लगता था 

हम लोग सिर्फ खुलकर हंसी मजाक अपने पापा से ही कर लिया करते थे मम्मी कहने लगी कि शादी से एक रात पहले तुम्हें हरे रंग के कपड़े पहनने हैं मैं वह कपड़े तुम्हारे लिए निकाल कर रख दूंगी शादी के समय घर के सारे मेहमान मौजूद होंगे इसलिए मैं तुम्हारे मुंह से कुछ उल्टा सीधा नहीं सुनना चाहती खामोशी से कपड़े पहन लेना मैं तुम्हें अभी से ही सावधान कर रही हूं यह कहकर मेरी मम्मी उठकर चली गई थी मैं गुस्से से उनको जाता हुआ देख रही थी मुझे अपनी मम्मी एक आंख नहीं भाती थी 

क्योंकि बचपन से लेकर अब तक उन्होंने हम बेटियों को बोझी समझा था जबकि वह खुद भी एक औरत थी मेरी मम्मी की चाहत थी कि उनके पास एक बेटा भी हो मगर इसमें हमारी कोई गलती नहीं थी हम तीनों बेटियां पैदा हो गए और इस तरह मेरी मम्मी की चाहत अधूरी रह गई आखिर हरे रंग के कपड़े पहनाने की वजह भी बड़ी अजीब थी जो मैं किसी को क्या बताती खुद को बताते हुए भी मैं डर जाती थी 

यह हमारे खानदान का रिवाज था कि जिस लड़की की भी शादी होती थी वह शादी एक रात पहले अपने शरीर पर हरे रंग के कपड़े पहन लिया करती थी फिर सुबह उसके पास ढेर सारे पैसे होते थे लेकिन मुझे यह रिवाज हरगिज भी पसंद नहीं था ऐसा तो लालची लोग करते हैं जो अपनी बेटियों के बदले ढेर सारे पैसे वसूलते हैं और हमारे घर में भी यह सब पहली बार नहीं हो रहा था 

हालांकि इससे पहले भी मेरी बहन की शादी हुई थी तब भी मेरे घर वालों को ढेर सारे पैसे मिले थे मेरी बहन के साथ भी यही सब कुछ किया गया था मैं इस रिवाज को लालच समझती थी इसलिए मैं इस रस्म के पीछे छुपी हकीकत के बारे में भी जानना चाहती थी इसलिए मैं दिल ही दिल में एक प्लान बनाकर बैठ गई थी लेकिन शायद मेरी मम्मी को इस बारे में अंदाजा हो गया था

 तभी तो वह मुझे सावधान करने के लिए आ गई थी मैं नहीं जानती थी कि मेरी शादी किसके साथ हो रही है मुझे तो कोई लड़के वाले भी देखने के लिए नहीं आए थे मुझे इतना यकीन जरूर था मेरी बड़ी बहन की तरह मम्मी ने मेरा रिश्ता भी मेरा फोटो दिखाकर ही फिक्स कर दिया होगा क्योंकि मेरी बड़ी बहन को भी लड़के वाले देखने के लिए नहीं आए थे मेरी मम्मी का कहना था कि लड़के वालों को मेरी बहन की फोटो दिखा दी गई है 

उन्होंने उसकी फोटो में ही देखकर उसे पसंद कर लिया और वो लोग कुछ दिन बाद बारात लेकर आ जाएंगे मैं इस बात के बहुत खिलाफ थी हमें लड़के वालों के बारे में पूरी जांच पड़ताल करनी चाहिए थी मगर मेरे मम्मी पापा ने मेरी इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया था और अब मैं यह भी चाहती थी कि मेरे साथ भी ऐसा ही होना चाहिए आखिर पता होना चाहिए कि मेरी शादी किस परिवार में हो रही है

 कौन सी जगह पर हो रही है और लड़का कौन है दिखने में कैसा है मैंने मम्मी से दबे दबे शब्दों में पूछने की कोशिश की थी मगर वह गुस्सा हो गई और कहने लगी क्या तुम्हारे लिए यह जानना काफी नहीं है कि तुम किस दिन दुल्हन बनोगी पता नहीं आजकल की लड़कियों को क्या हो गया है अपनी ससुराल के बारे में सब कुछ जानने के लिए पहले ही बेचैन होती हैं हमारे जमाने में तो हमारे माता-पिता रिश्ता तय कर दिया करते थे

 और हमें शादी के दिन ही पता चलता था कि हम कहां पर विदा होकर आए हैं और तुम आज की लड़की जो बेचैन हो रही हो सब कुछ जानने के लिए मैंने अपनी मम्मी से ज्यादा जिद की तो वह मुझे मेरी शिक्षा के ताने देने लगी थी और तो और मेरी बड़ी बहन को भी कोसने लगी थी मम्मी कहने लगी ज्यादा पढ़ लिखकर तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है इसलिए मैं तुम्हें मना करती थी कि तुम्हें ज्यादा नहीं पढ़ना चाहिए 

लेकिन तुमने अपने पिता को अपनी बातों में ले लिया पढ़ी लिखी लड़कियां बहुत चालाक होती हैं और वह तुम्हारी बड़ी बहन सुरभी जो घर से भागने की नई रस्म पैदा कर गई तो तुम उसकी पैरवी मत करना तुम दोनों बेटियों ने तो गांव में हमारी नाक कटवा दी है किसी से नजर मिलाने के काबिल तक नहीं छोड़ा मैं अपनी मम्मी की बात सुनकर खामोश हो गई थी क्योंकि मुझे अपनी मम्मी से ऐसी ही बातों की उम्मीद थी

 वह जब भी बोलती थी हम बेटियों के बारे में कड़वा ही बोलती थी मेरी छोटी बहन को भी वह छोटी-छोटी बातों पर डांट रहती थी उनकी बातें सुनने की हम तीनों बहनों को आदत थी इसलिए मैं ने भी अपनी मम्मी की बात को इग्नोर कर दिया और अपना मूड खराब नहीं किया लेकिन मैं पापा से बात करना चाहती थी मैं पापा के पास बड़ी आस के साथ गई थी मैंने पापा से कहा पापा मेरी जिस लड़की के साथ शादी हो रही है

 मैं उसकी फोटो देखना चाहती हूं प्लीज आप मुझे उसकी फोटो दिखा दो आपको तो पता होगा ना कि मेरा रिश्ता कहां पर फिक्स किया गया है लेकिन आज पहली बार मुझे बहुत हैरत हुई थी मुझे अपने पापा से इस तरह के जवाब की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी आज तो उन्होंने बिल्कुल मम्मी का रूप धारण कर लिया था वह कहने लगे सुनैना खामोश हो जाओ अपने पिता से तुम्हें ऐसी बेशर्मी की बातें करते हुए शर्म नहीं आ रही क्या

 तुम भी अपने दिल में सुरभी के जैसे इरादे रखकर बैठी हुई हो बस खामोशी से तुम शादी की रात हरे रंग के कपड़े पहन लेना यही हमारी रीत है और यही रिवाज है मैं पापा की बात सुनकर खामोश हो गई थी मैं समझ गई थी कि पापा का इतना बदला हुआ बिहेवियर सिर्फ और सिर्फ मेरी बड़ी बहन की वजह से है क्योंकि जिस दिन से वह घर से गई है उसी दिन से पापा का भी मूड हम बहनों की तरफ से बदल गया है

 मेरे पापा नहीं समझते थे कि रीति रिवाज हम बहनों को रास नहीं आए थे आज भी सोचकर मेरा दिल दहल जाता था कि जिस रात मेरी बड़ी बहन सुरभी की शादी थी वह बहुत खुश थी और उसने बड़ी खुशी-खुशी वह हरे रंग के कपड़े पहन लिए थे हम लोग तो उसकी शादी की खुशी में गानों पर डांस कर रहे थे लेकिन आधी रात अचानक ना जाने क्या हुआ कि उसकी चीख की आवाज से पूरा घर गूंज उठा था

 हमारे घर में सारे मेहमान आए हुए थे हम सब लोग घबरा गए थे हम जैसे ही भागकर अपनी बहन के कमरे की तरफ गए तो उसका कमरा खाली था जबकि उसके बिस्तर पर बहुत सारे पैसे पड़े हुए थे इतने ढेर सारे पैसे शायद मैंने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं देखे थे मेरी बहन की शादी मेरी शादी से 1 साल पहले हुई थी मुझे यह सब देखकर डर लगने लगा था मेरी मम्मी को अपनी बेटी के भागने की ज्यादा टेंशन नहीं थी 

उन्होंने वह सारे पैसे उठाकर रख लिए मैंने अपनी मम्मी से सवाल किया किया था कि मम्मी आखिर सुरबी कहां चली गई है मेरी मम्मी ने कहा कि तुम्हारी बहन घर छोड़कर भाग गई है लेकिन ना जाने क्यों मुझे मम्मी की बात पर यकीन नहीं आ रहा था मैं अपनी बहन को अच्छी तरह से जानती थी वह बहुत मासूम और सीधी थी उसका किसी लड़के के साथ रिश्ता नहीं था तो फिर वह किसके साथ भाग सकती थी

 अगर उसका किसी लड़के के साथ रिश्ता होता तो वह मुझे जरूर बताती मैं अपनी मम्मी की बात सुनकर डर गई थी क्योंकि मेरी मम्मी हमेशा गुस्से में रहती थी जब सारे मेहमान अपने-अपने घर को वापस चले गए तो मैंने फिर से अपनी मम्मी से सवाल किया था मम्मी सुर भी आखिर कहां चली गई है और वह किसके साथ गई है तो मम्मी ने फिर कहा कि तुम खामोश रहो तुम्हें बताया है ना कि तुम्हारी बहन घर से भाग गई है क्या

 पता किसके साथ गई है जाते-जाते हमारे मुंह पर कालिक मल गई सारे गांव वाले कहते हैं कि मैंने उसकी अच्छी परवरिश नहीं की इसलिए तुम्हारी बहन मेरी नाक कटवा कर चली गई मेरी मम्मी हर बार अपनी बेटी पर इल्जाम लगा रही थी मैं अपनी बहन को अच्छी तरह से जानती थी वो यह बात क्यों नहीं समझ रही थी कि वह गलत नहीं थी और वह कभी भी भाग नहीं सकती थी क्योंकि वह तो अपनी शादी से भी बहुत खुश थी 

समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह किसके साथ जा सकती थी मैंने मम्मी से कहा कि अगर सुरभी को भागना ही था तो फिर उसने शोर क्यों मचाया था वह खामोशी से भी तो भाग सकती थी ना क्या पता उसे किसी ने किडनैप कर लिया हो मेरी मम्मी ने मुझे घूर कर देखा था और कहने लगी अभी तू छोटी है इसलिए अपने दिमाग पर ज्यादा जोर मत डाल मैं नहीं चाहती कि तुम दोनों बहने भी अपनी बहन सुरभी पर जाओ 

इसलिए इस बात में ज्यादा दखल अंदाजी करने की जरूरत नहीं है मुझे और मेरी छोटी बहन को सुरभी की बहुत याद आती थी हम दोनों बहनें आपस में यही बातें करते थे कि जरूर सुरभी के साथ कुछ गलत हुआ है वह इतनी आसानी से कैसे जा सकती है मैं छुप-छुपकर सुरभी के लिए रोती थी मगर वह तो ऐसी बेवफा निकली कि उसने कभी पलटकर हम लोगों की तरफ देख देख ही नहीं

 मेरे दिल से मेरी बहन का गम नहीं जाता था मैंने सोच रखा था कि मैं अपनी बहन को ढूंढ कर ही रहूंगी मैंने गांव में अपनी मम्मी से बाजार जाने के बहाने कई बार अपनी बहन को तलाश किया था मगर सुर भी मुझे कहीं भी नजर नहीं आई थी मैं और कहीं तो नहीं जा सकती थी और मेरी समझ भी नहीं आ रहा था कि मैं अपनी बहन को किस तरह से तलाश करूं इसी तरह से एक साल गुजर गया था मगर मेरी बहन का कुछ पता नहीं चला था

 हमारे पड़ोस में एक लड़का रहता था वह पुलिस ऑफिसर था मैंने अपनी मम्मी के मोबाइल से चुपके से उसे एसएमएस सेंड किया था मैंने उसको अपनी शादी के बारे में बता दिया था गौतम एक महीने पहले ही हमारे पड़ोस में शिफ्ट हुआ था जब मुझे पता चला कि वो एक पुलिस ऑफिसर है तो मैंने एक दिन अपनी मम्मी से छुपकर उसके घर चली गई थी मैंने उसे उसका मोबाइल नंबर लिया था 

और उससे हेल्प मांगी थी कि वो मुझे मेरी गुमशुदा बहन से मिलवा दे और मेरी बहन को कहीं ना कहीं से तलाश करने की कोशिश करें क्योंकि वो पुलिस ऑफिसर था और वह इस काम को आसानी से कर सकता था वह मेरी मदद करने के लिए तैयार हो गया था वह एक नरम दिल और एक अच्छा इंसान था मेरी शादी में भी अभी एक महीना था धीरे-धीरे हम दोनों के बीच बातचीत होने लगी थी

 क्योंकि मैं चोरी चुपके उसके घर चली जाया करती थी और मुझे उससे कोई काम होता तो मैं उसे मम्मी के मोबाइल से चुपके से एसएमएस सेंड कर दिया करती थी लेकिन इस दौरान वह मुझे अच्छा लगने लगा था मैं मन ही मन उसको चाहने लगी थी मैंने अपनी शादी से एक हफ्ता पहले उससे अपनी मोहब्बत का इजहार भी कर दिया था उसने भी मुझे फौरन ही जवाब दे दिया था कि वह भी मुझसे प्यार करता है 

वह काफी दिनों से मेरी बहन को तलाश कर रहा था मगर सुरभी का तो कुछ पता ही नहीं चल रहा था मैं गौतम को अपनी शादी के बारे में बताने के बाद बेफिक्र हो गई थी मुझे उम्मीद थी कि बाकी का मामला वह संभाल लेगा मगर उसके रिप्लाई ने तो मेरे होश उड़ा दिए थे शादी से एक हफ्ते पहले उसने मुझसे कहा था कि तुम अपने पेरेंट्स का कहना मान लो और उनके कहने के मुताबिक शादी कर लो 

तुम्हें अपने पेरेंट्स के फैसले के मुताबिक सर झुका देना चाहिए मैं उसके मैसेज को बार-बार पढ़ रही थी और मेरी आंखों से आंसू निकल रहे थे अब मेरे पास कोई सॉल्यूशन ही नहीं बचा था इसलिए मैंने शादी की तैयारी शुरू कर दी थी और मैंने अपनी शादी को एक्सेप्ट भी कर लिया था मैंने अपने लिए कपड़े खरीद लिए थे एक दिन मेरे घर में कोई भी नहीं था क्योंकि मम्मी पापा मेरी शादी का इन्विटेशन हमारे रिश्तेदारों को देने के लिए शहर गए हुए थे

 इसलिए मैं और मेरी छोटी बहन घर पर अकेले थे तभी अचानक से घर घर के दरवाजे पर दस्तक हुई मैंने खिड़की से झांक कर देखा तो एक भिखारी खड़ा हुआ था मुझे लगा कि उसे पैसे चाहिए होंगे मैं उसके लिए पैसे निकाल कर ले गई थी मैंने जैसे ही उसको पैसे दिए तो उसने मेरे हाथ से पैसे नहीं लिए बल्कि वो तो कहने लगी कि शादी की रात तुम हरे रंग के कपड़े हरगिज मत पहनना नहीं तो तुम बर्बाद हो जाओगी 

सुरबी की तरह इतना कहकर व भिकारी हमारे घर से चला गया था मैं उसे आवाज देती रह गई थी मगर उसने मेरी आवाज नहीं सुनी थी मैं उसकी बात से बहुत घबरा गई थी इसलिए घर का दरवाजा जल्दी से बंद करके अपनी बहन के गले लग गई थी मेरी बहन भी मुझे देखकर परेशान हो गई और पूछने लगी दीदी क्या हो गया है मैंने उसको उस भिखारी की बात बताई तो वह कहने लगी दीदी यह भिखारी तो पैसे लेने के लिए ऐसा ही कहते हैं 

लेकिन फिर भी मैं सारा दिन उसकी बात से परेशान रही थी रात को फिर से जब मैं सोने के लिए लेट गई तो मुझे वह भिकारी याद आ रहा था उसकी बातों से तो मेरा शरीर थरथर कांप रहा था उस भिखारी में कुछ ऐसा जरूर था जिसने मुझे चौका दिया था आखिर क्या था यह मैं याद नहीं कर पा रही थी लेकिन उसके शब्द अभी तक मेरे दिमाग में घूम रहे थे वह कौन था और गुंजन और सुरभी को कैसे जानता था 

गुंजन मेरी बुआ की बेटी थी और उसकी शादी भी इसी तरीके से हरे रंग के कपड़े पहनने के बाद ही हुई थी उसकी शादी को 3 महीने गुजर गए थे मगर अभी तक वह अपने मायके नहीं आई थी हमारे खानदान में जितनी भी लड़कियों की शादी होती थी वह अपनी ससुराल जाने के बाद माइक में कभी पलट कर नहीं आती थी हर लड़की रात में हरे रंग के कपड़े पहनती और सुबह विदा होकर अपनी ससुराल चली जाती थी

 लेकिन फिर उनका कोई अता पता ही नहीं मिलता था वह कहां रहती कहां जाती उनकी कोई खबर किसी को होती ही नहीं थी और ना ही उनके मायकी वाले इस बारे में कोई जानकारी लिया करते थे हमारे खानदान वाले तो बेटियों को विदा करने के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया करते थे मैं अपनी मम्मी से पूछती तो वह कहती कि ये सब कुछ इन हरे रंग के कपड़ों का कमाल होता है

 मैंने ठान लिया था कि मैं इन हरे रंग के कपड़ों का सच जानकर ही रहूंगी मगर जब मेरे लिए वह समय आ गया तो मेरे हौसले दम तोड़ने लगे थे अभी भी बहुत सी ऐसी बातें थी जिनके बारे में मुझे पता लगाना था मैंने खामोश रहने का फैसला किया था और मैं खामोशी से अपनी शादी की तैयारी करती चली जा रही थी मम्मी और पापा मेरी तरफ से दोनों ही बेफिक्र हो गए थे अब वह अपने कामों में बिजी हो गए थे 

मेरे पापा हर रोज अपने चाय के होटल पर जाते थे मम्मी पापा के घर से निकलते ही घर के कामकाज में बिजी हो जाती थी हमारे घर के हालात बहुत खराब थे लेकिन जिस दिन से मेरी बहन घर से गई थी उसके बिस्तर से हमें ढेर सारे पैसे मिले थे तब से ही हमारे घर के हालात बहुत बेहतर हो गए थे हमारे घर में एक से एक अच्छी चीज आ गई थी आज दोपहर के टाइम पर मेरी मम्मी सो रही थी 

तो मैंने घर से बाहर निकलने का फैसला कर लिया था ताकि मुझे उस दिन वाला भिकारी मिल जाए मगर वह मुझे कहीं नहीं मिला था मैंने उसे पूरे मोहल्ले में तलाश कर लिया था मैं बहुत देर तक गली मोहल्ले में उसे ढूंढ ढूंढ कर परेशान होती रही और फिर मायूस होकर मैं अपने घर लौट आई थी मैं घर वापस आ रही थी तब अचानक मेरी नजर गौतम के घर पर पड़ी मेरे दिल में ख्याल आया कि चार दिन बाद मेरी शादी है 

मुझे एक आखिरी बार गौतम से बात कर लेनी चाहिए आखिर मुझे भी तो मालूम हो कि उसने अचानक मुझसे नजरें क्यों फेर ली है मैं यही सोचती हुई गौतम के घर के अंदर चली गई थी मेरी खुशकिस्मती यह थी कि गौतम के घर का दरवाजा खुला हुआ था मैं दबे दबे कदमों से आगे बढ़ रही थी थी तभी अचानक मुझे किसी लड़की की आवाज आई थी मुझे लगा था कि शायद वह किसी और की मोहब्बत में फंस चुका है 

इसलिए मैं वापस अपने घर को आ गई थी क्योंकि वह मुझ जैसी एक मामूली सी लड़की से शादी करके भी क्या कर सकता था मेरा दिल बुरी तरह से टूट चुका था इधर मेरी शादी के फंक्शन शुरू हो गए थे मेहंदी के बाद संगीत और फिर मेरी विदाई का टाइम भी आ गया था मैं डर से कांप रही थी जब शादी से एक दिन पहले मम्मी ने मुझे वह हरे रंग के कपड़े लाकर दे दिए जो हमारे खानदान के दुल्हन को पहनाए जाते थे 

वो कपड़े उन्होंने मुझे पहनने के लिए कहे थे मैंने वह कपड़े पहनकर मम्मी को यह जाहिर कर दिया था कि मैं कपड़े पहन चुकी हूं लेकिन मम्मी के जाते ही जब सब लोग अपने-अपने कमरे में चले गए तो मैंने खामोशी से कपड़े चेंज कर लिए और वो हरे रंग के मम्मी के दिए हुए कपड़े मैंने अलमारी में छुपा दिए थे और जो मैं हरे रंग के कपड़े पहले ही मार्केट से लेकर आई थी मैंने उनको पहन लिया था 

मैं सोने के लिए लेट गई थी थोड़ी ही देर गुजरी थी कि अचानक मुझे किसी की खटपट की आवाज आने लगी थी कोई दबे दबे कदमों से मेरे कमरे की तरफ बढ़ रहा था मैं बहुत डर गई थी वह आवाज धीरे-धीरे मेरे कमरे की तरफ आ रही थी फिर अचानक किसी ने मेरे मुंह पर हाथ रख लिया था सामने खड़े हुए इंसान को देखकर मेरे पैरों तले से जमीन निकल गई थी क्योंकि मेरे सामने कोई और नहीं बल्कि गौतम खड़ा हुआ था

 गौतम ने मुझे खामोश खड़े रहने का इशारा किया था और फिर वह मेरे कान में कहने लगा कि चुपचाप मेरे साथ चलो मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं मैंने ने अपने दिल की सुनने की ठान ली थी मैं चुपचाप गौतम के साथ चली गई थी जो मुझे हमारे घर के पीछे ले गया था फिर वह कहने लगा तुम मेरे साथ मेरे घर चलो मैं तुम्हें एक्सेप्ट कर लूंगा मैं समझ गई थी कि वही मेरा रखवाला है 

वही मुझे हमारे खानदान की बाकी लड़कियों की तरह गायब होने से बचा सकता है मैं उसके साथ जाने के लिए तैयार हो गई तो उसने मुझे दीवार कूदने के लिए कहा था मैं उसके साथ दीवार कूदकर अपने घर की चार दीवारी से दूर हो चुकी थी गौतम ने मेरा साथ किसी मेहरबान दोस्त की तरह दिया था उसने मेरे लिए खाना बनाया था और मुझे खाना खिलाकर उसने मुझे अपने घर में ही बना हुआ एक कमरा दिखा दिया था 

और कहने लगा कि तुम यहां पर आराम करो मैं कमरे में आराम करने के लिए चली गई थी और बिस्तर पर लेट गई मैं जैसे ही लेटी तो मैं गहरी नींद में चली गई थी सुबह जब उठी तो मैंने गौतम को पुलिस के यूनिफॉर्म में देखा था वह कहने लगा कि मैं ड्यूटी पर जा रहा हूं मेरे जाते ही तुम दरवाजा बंद कर लेना मैंने गौतम के जाते ही उसके घर के दरवाजे को अच्छी तरह से अंदर से लॉक कर लिया था दोपहर का 1:00 बज रहा था जब मुझे पड़ोस से बैंड बाजे की आवाज आ रही थी 

मैं बड़ी हैरान हुई थी कि आज किसकी शादी है दो घंटे के बाद वह बारात बड़ी धूमधाम के साथ वापस लौट गई थी फिलहाल मैंने इग्नोर कर दिया था और मैं गौतम के घर की सफाई करने के बाद किचन में ठंडा पानी पीने के लिए गई थी कि किसी ने पीछे से आकर मेरे मुंह पर रुमाल रख दिया था जिसमें शायद नशे की दवाई मिली हुई थी उसे संगकर मैं बेहोश हो गई थी फिर जब मेरी आंख खुली तो मैंने खुद को एक टूटे-फूटे घर में पाया था

 मैंने आंखें खोलकर इधर-उधर देखने की कोशिश की थी वह बहुत अजीब सा और छोटा सा कमरा था जमीन भी कच्ची थी और बाहर से छोटे-छोटे बच्चों के रोने की आवाज आ रही थी मेरा सर बहुत घूम रहा था लेकिन मैं फिर भी उठकर बैठ गई थी मैंने सोचा कि मैं बाहर जाकर तो देखूं कि आखिर मैं कहां आ गई हूं मैं जैसे ही बाहर गई तो बाहर तीन जवान लड़कियां बैठी हुई थी वो तीनों ही मुझे देखकर मुंह सिकोल लगी थी

 तभी घर की तरफ से एक औरत निकल कर आई थी वह मुझे देखकर कहने लगी हमारे घर इतनी देर तक सोते रहने का रिवाज नहीं है तुम अपने चाल चलन सीधे कर लो मैं तो उस औरत की बात सुनकर हैरान रह गई थी मैंने उससे कहा कि आखिर आप कौन हो और मैं इधर क्या कर रही हूं यह किसका घर है मैं कहां पर आ गई हूं मैं उस औरत से तरह-तरह के सवाल करने लगी थी उस औरत ने किसी को आवाज लगाई थी

 अरे गजेंद्र आज तेरी पत्नी सोकर उठ गई पति गजेंद्र की मैं तो यह बात सुनकर हैरान रह गई थी मेरी तो शादी ही नहीं हुई थी बल्कि मुझसे शादी तो गौतम करना चाहता था और वह मुझे अपने घर पर ले गया था मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था मैं बार-बार यही सब कुछ सोच रही थी जब कोई 55 साल का आदमी छत से उतर कर नीचे आ गया था वो तीनों जवान लड़कियां उसी की थी

 उसकी सबसे बड़ी बेटी की उम्र 19 साल थी और बाकी दोनों बेटियां उससे दो-दो साल छोटी थी वह बहुत काला सा और मोटा सा आदमी था वो आदमी मुझे देखकर बहुत खुश हुआ था फिर वह अपनी मां की तरफ देखकर कहने लगा कि हमारी शादी का बंदोबस्त किया जाए अब मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती थी मैं चिल्लाने लगी थी कि कौन हो तुम लोग और मुझे यहां पर क्यों लाया गया है मैंने उनसे कहा कि मैं जानती हूं 

तुम लोगों ने मुझे गौतम के घर से किडनैप किया है वह तुम लोगों को छोड़ेगा नहीं व मोटा सा आदमी हंसकर कहने लगा तुमने बिल्कुल ठीक आईडिया लगाया हमने तुम्हें किडनैप किया है लेकिन तुम बेफिक्र रहो क्योंकि गौतम तुम्हें कभी भी नहीं ढूंढ पाएगा क्योंकि तुम्हारा गांव इस जगह से बहुत दूर है अब तुम्हारी भलाई इसी में होगी कि तुम खामोशी से मेरे साथ शादी कर लो नहीं तो इस घर में तुम्हें खाना तक नहीं दिया जाएगा 

और फिर भूख से बिलक बिलक कर तुम मर जाओगी मरने से अच्छा है कि तुम खामोशी से शादी कर लो यही तुम्हारे लिए बेहतर होगा मैं उस आदमी की कड़ाके दार आवाज से डर कर रोने लगी थी मैं समझ गई थी कि यहां से बाहर निकलना मेरे बस में नहीं है इसलिए मैंने खामोशी से गजेंद्र का कहना मान लिया था इसी तरह मेरी शादी गजेंद्र के साथ हो गई थी और मैं कम उम्र की लड़की उसकी जवान बेटियों की मां बन गई थी

 मेरी अनचाही सास तो घर का कोई भी काम नहीं करती थी उसने घर का सारा काम मेरे हवाले कर दिया था कि अब किडनैप करके लाई गई बहू ही कि अब किडनैप करके लाई गई बहू ही घर का सारा काम किया करेगी मैंने सब कुछ बर्दाश्त करना सीख लिया था और खुद को इस घर के माहौल में ढाल लिया था यह भी मेरे ही गांव की तरह एक गांव था मगर यह बहुत पुराना गांव लग रहा था

 यहां पर तो गैस का चूल्हा भी नहीं था मिट्टी के चूल्हे पर ही आग जलाकर खाना पकाना पड़ता था आग जलाते जलाते मेरी आंखें धुएं से फूट जाती थी काफी समय तक तो मुझे कुछ भी नजर नहीं आता था मैं अपनी किस्मत को घंटों बैठकर रोती रहती थी और गजेंद्र की तीनों ही बेटियां मुझे तंग करने में कोई कमी नहीं छोड़ती थी गजेंद्र की सबसे बड़ी बेटी मुझसे सिर्फ 2 साल छोटी थी और रिश्ते में मैं उसकी मां बन गई थी 

गजेंद्र की पहली पत्नी मर चुकी थी इसलिए उसने मुझसे दूसरी शादी की थी मैं इन तीनों लड़कियों के सारे काम किया करती थी और अपनी सास की भी खूब सेवा करती थी लेकिन मैंने खुद को हर लम्हा चौकन्ना करके रखा हुआ था मेरी सास के पास सारा दिन गांव की औरतें आती रहती थी उनकी ही वजह से मुझे पता चला था कि मुझे बंगाल के एक छोटे से गांव में लाया गया है जबकि मेरा घर बंगाल से बहुत दूर था

 मैं कभी बंगाल नहीं आई थी यहां पर तो मेरा कोई अपना भी नहीं था मुझे कोई ढूंढ नहीं पाता इसलिए मुझे यहां से गायब होने के लिए खुद ही कोई कोशिश करनी थी इस गांव में गजेंद्र की पत्नी बनकर रहना मेरे लिए ना काबिल बर्दाश्त था इस तरह तो मैं रह-रह कर ही मर जाती एक दिन मैं घर के कामकाज कर रही थी जब मुझे एक आईडिया याद आया मैं फौरन ही चक्कर खाकर गिर गई थी गजेंद्र दौड़ता हुआ मेरे पास आया

 और मुझे करीब के ही अस्पताल में ले गया था मैंने सारे रास्ते थोड़ी-थोड़ी आंखें खुली रखी थी मैं रास्ते को समझने की कोशिश कर रही थी लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था इसलिए मैंने बेहोश होने का नाटक दो-तीन बार किया था फिर मैंने अपनी सास से कहा था कि आप क्यों घर से बाहर सब्जी लेने के लिए जाती हो अब आपके आराम करने के दिन आ गए हैं आप घर की सारी जिम्मेदारी मुझ पर छोड़ दो

 मैं घर के सारे काम किया करूंगी और साथ ही साथ आपकी सेवा भी करूंगी लेकिन वह बुढ़िया भी बड़ी चालाक औरत थी मुझ पर इतनी जल्दी भरोसा कैसे कर सकती थी फिर मैंने अपने पति की बेटियों से दोस्ती बढ़ाना शुरू कर दिया मैंने अपनी मीठी-मीठी बातों और उनके हर अत्याचार को बर्दाश्त करके उनके दिलों को जीत लिया था और मैं गजेंद्र की भी हां में हां मिलाया करती थी ताकि उसको लगे कि उसकी पत्नी बहुत अच्छी है 

घर को मैंने पूरी तरह से संभाल लिया था और इस घर के लोगों का भी दिल जीत लिया था तब कहीं जाकर इन सब को मुझ पर यकीन हुआ था और मुझे यहां पर आए हुए भी चार महीने गुजर गए थे मेरी सास ने मुझे घर से बाहर सामान खरीदने की परमिशन दे दी थी मैं हर रोज रास्ते में ठहर कर किसी ना किसी औरत से पूछती रहती थी कि यहां का बस अड्डा किधर है यहां से बस अड्डे पर कैसे जाया जाता है

 ये सारी इंफॉर्मेशन इकट्ठी करते-करते मुझे पूरा एक महीना लग गया था और फिर फाइनली मेरी आजादी का दिन भी आ गया था मैंने रोज की तरह जल्दी-जल्दी अपने सारे काम निपटाए और अपनी सास को खाना बनाकर दे दिया गजेंद्र की तीनों बेटियों के भी मैंने सारे काम कर दिए थे मैंने इन सबको खाने में नींद की दवाई मिलाकर दे दी थी वह सब लोग खाना खाते ही सो गए थे जबकि गजेंद्र किसी काम से घर से बाहर गया हुआ था

 मैंने घर से कुछ पैसे उठा लिए और फिर मैं खामोशी से घर से फरार हो गई थी अब मुझे सारी इंफॉर्मेशन मिल चुकी थी इसलिए मुझे खुद पर बहुत भरोसा था मगर मेरा डर अभी तक पीछा नहीं छोड़ रहा था डरते डरते मैं बस अड्डे तक आ गई थी और फिर बस में बैठ गई थी और फिर फाइनली जब बस चली तो मेरी सांस में सांस आई थी सारा रास्ता इसी तरह से गुजर गया था मैं अपने गांव पहुंच गई थी 

यहां आने के बाद मेरी आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे अब मैं कहां जाती यह फैसला करना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो रहा था मगर मैं अपनी एक फ्रेंड के घर की तरफ चली गई थी वह मुझे देखकर शॉक्ड रह गई थी वह कहने लगी कि तुम कहां से आ रही हो तुम्हारी शादी तो बंगाल में हुई थी और तुम्हारा पति कहां पर है मैंने उससे कहा तुम्हें कैसे पता कि मेरी शादी बंगाल में हुई थी 

तो वह कहने लगी मैं खुद तुम्हारी शादी वाले दिन तुम्हारे घर गई थी तुम्हारी बारात जैसे धूमधाम से आई थी उसी तरह से धूमधाम से वापस गई थी उसकी बात सुनकर तो मैं चौक गई थी बंगाल में मेरे साथ जो कुछ हुआ था वह सब कुछ मैंने उसे बता दिया था और मैंने उसे यह भी बताया था कि मैं तो घर से भाग गई थी मैंने उससे कहा कि मैं तो गतम के घर थी पता नहीं मुझे कौन किडनैप करके बंगाल ले गया था

 मेरी फ्रेंड कहने लगी हम इस रात से पर्दा उठाकर ही रहेंगे इसलिए उसने मुझे कुछ दिनों तक अपने घर में ही छुपाकर रखा हुआ था वह बहाने बहाने से मेरे घर जाकर मेरी मम्मी से मेरी इंफॉर्मेशन लेती रही थी मगर मेरी मम्मी ने उसे मेरे बारे में कुछ नहीं बताया था शायद मम्मी का मेरे ससुराल वालों के साथ कोई कांटेक्ट ही नहीं था मैंने अपनी फ्रेंड से एडवाइस लेकर गौतम के साथ मिलने का इरादा बनाया था 

इसलिए मैंने रात के टाइम जाने का फैसला कर लिया था क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मुझे कोई देख ले इसीलिए मैं सबसे छुपती छुपाती हुई गौतम के घर पहुंच गई थी गौतम के घर का दरवाजा हमेशा खुला ही मिलता था मैं उसके घर में चली गई थी मुझे गौतम की किसी से फोन पर बात करने की आवाज आ रही थी वह तेज तेज बोल रहा था वह फोन पर किसी से झगड़ा कर रहा था वह कहने लगा कि अगर लड़की भाग गई है

 तो इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है और मैं भी तुम्हारे पैसे वापस नहीं करूंगा उस लड़की का ध्यान तुम्हें खुद ही रखना चाहिए था मैं उसकी बात सुनकर शॉक्ड रह गई थी मैं समझ गई थी कि इसका मतलब यह कि गौतम ही सबके पीछे है मैं उल्टे पैरों अपनी फ्रेंड के घर वापस आ गई थी मैंने उसको पूरी बात सुना दी थी तो वह भी काफी परेशान हो गई मगर हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए 

और किससे मदद मांगी जाए इसलिए मैंने अपने दोस्त की एडवाइस पर ध्यान देने की ठान ली थी हम दोनों सीधा पुलिस स्टेशन चले गए थे और हमने वहां पर गौतम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी थी पुलिस ने उसे कुछ ही दिनों में अरेस्ट कर लिया था मैं उससे मिलने के लिए गई तो वह खुद शॉक्ड रह गया था वह कहने लगा तुम्हें हमारी प्लानिंग के बारे में कैसे पता चल गया 

तुम्हें कैसे पता चला कि तुम्हारी किडनैपिंग में मेरा हाथ भी है मुझे गौतम की बात सुनकर करंट लगा था फिर मैं मुस्कुराकर उससे कहने लगी हर मुजरिम अपना जुर्म करने के बाद कोई ना कोई निशानी जरूर छोड़ देता है तुमने भी एक निशानी छोड़ दी थी मुझे यह बताओ आखिर तुमने यह सब क्यों किया गौतम कहने लगा कि मैं कोई पुलिस ऑफिसर नहीं हूं मैं तो तुम्हारे पेरेंट्स और तुम्हारे रिश्तेदारों की ही गैंग का एक हिस्सा हूं 

तुम्हारी फैमिली में यह रिवाज है कि शादी से एक रात पहले लड़कियों को गायब कर दिया जाता था इसीलिए हरे रंग के कपड़ों का नाटक किया जाता था दरअसल उन हरे रंग के कपड़ों पर नशे की दवाई मिली हुई होती थी जिसको पहनने के बाद लड़कियां बेहोशी का शिकार हो जाती थी और वह लोग जिनको लड़कियां बेच दी जाती थी वो उसे उठाकर ले जाते थे और उसकी जगह ढेर सारे पैसे रख जाते थे

 ऐसा इसलिए कि जाता था ताकि शादी के समय दूल्हे को देखकर दुल्हन शादी से इंकार ना कर दे और फिर सुबह के समय बारात आई थी और बिना दुल्हन के ही वापस चली जाती थी क्योंकि दुल्हन तो पहले ही ठिकाने पर पहुंचा दी जाती थी तुम्हारी बड़ी बहन सुरभी ने भी उस रात बहुत चालाकी की थी उसने वह कपड़े बदल लिए थे और वह बेहोश नहीं हुई थी जबकि उसके खरीदार आए तो वह डर गई

 इसीलिए वह चिल्लाने लगी थी और वह लोग घबरा गए और उसे उठाकर ले गए थे इसलिए तुम्हारी मम्मी ने सबको ही बता दिया था कि उनकी बेटी भाग गई है हर लड़की जो बेची जाती थी वह शादी के लिए ही बेची जाती थी क्योंकि कई अलग-अलग शहर और जगह पर ऐसे लोग मौजूद हैं जिनकी शादियां नहीं होती उन लोगों की शादी हम इस तरह से पैसे वसूल करके करवाते हैं

 जिसमें सबसे ज्यादा फायदा तुम लोगों के पेरेंट्स का होता है तुम्हारी बड़ी बहन बहुत जिद्दी लड़की थी वह किसी हाल पर भी उस उम्रद आदमी की पत्नी नहीं बनना चाहती थी इसलिए उसको जबरदस्ती किडनैप करके इतनी दूर भेज दिया गया कि तुम कभी भी अपनी बहन को नहीं ढूंढ सकती हमें पता था कि हर लड़की को उन कपड़ों पर शक होता था और तुम भी बहुत चालाक हो सबसे ज्यादा शक तो तुम्हें था 

मम्मी मुझे इस बारे में पहले ही बता चुकी थी इसलिए मैं तुम्हारे पड़ोस में पुलिस ऑफिसर बनकर आ गया था और तुम्हारी मम्मी को यह भी पता चल गया था कि तुम मुझे एसएमएस करती हो इसलिए तुम आसानी से हमारे जाल में फंस गई थी ऐसी ही बाकी सारी लड़कियां भी मेरी बातों में आ गई थी मैं किसी के लिए कुछ भी बन जाता था और उनको अपने घर में ज दे दिया करता था उसके बाद वह लड़कियां मेरे ही घर से किडनैप हो जाती थी

 तुम्हारी रिश्तेदारी की हर लड़की अपने-अपने पति के साथ जिंदगी गुजार रही है वह सही सलामत है हालांकि उनके पतियों में कोई ना कोई कमी है लेकिन तुम दोनों बहनें बहुत चालाक हो अब मुझे गौतम की पूरी बात समझ आ गई थी अब मुझे गौतम की पूरी बात समझ आ गई थी कि मेरे माता-पिता और मेरे सारे रिश्तेदार भी इस काम में मौजूद थे मैंने अपने माता-पिता और सारे रिश्तेदारों के बारे में पुलिस को बता दिया था 

 और उन सब लोगों को भी अरेस्ट कर लिया गया था अब मैं अपनी छोटी बहन के साथ ऐसा नहीं होने देना चाहती थी जैसा हम दोनों बहनों के साथ हुआ था इससे पहले कि वह सब लोग अरेस्ट हो चुके थे मुझे अपनी मम्मी से इसलिए नफरत थी क्योंकि वह बहुत चालाक औरत थी उन्होंने कभी भी अपनी बेटियों से मोहब्बत नहीं की थी मेरे पापा गलत इंसान नहीं थे वह मम्मी के कहने में आकर ही दौलत के लालच में अंधे हो गए थे

 जिस वजह से उन्होंने खामोशी से अपनी बेटियों को किडनैप होने दिया जितनी भी लड़कियां जबरदस्ती की जिंदगी गुजार रही हैं पुलिस ने उन सारी लड़कियों से पूछताछ कर ली और इस दौरान मुझे मेरी बहन भी मिल गई लेकिन मेरी बहन ने अब फैसला कर लिया था कि वह अब इस इंसान की पत्नी है इसलिए वह उसके साथ ही जिंदगी गुजार रही है 

अपनी बहन को इतने सालों बाद देखकर मुझे बहुत खुशी हुई थी पर मैं अपनी छोटी बहन के साथ इस घर में रह रही हूं और हम दोनों बहनें अब अपने माता-पिता के बगैर अकेले हो गए क्योंकि उन दोनों को सजा हो चुकी है हम अपनी जिंदगी खुशी-खुशी गुजार रहे हैं ऐसे माता-पिता का हमें कोई फायदा नहीं है जो अपनी बेटियों की जिंदगी अपने ही हाथों से तबाह करते हो दोस्तों उम्मीद करती हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी

 

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