सारे मर्द एक जैसे होते है। Moral Kahaniyan | Emotional And Sad Hindi Story | Best Story

Moral Kahaniyan : मेरा नाम नम्रता है मेरे माता-पिता मुझे इस दुनिया से छोड़कर जा चुके थे मुझसे छोटे मेरे दो भाई-बहन थे मुझसे छोटी मेरी बहन और उससे छोटा एक भाई पहले तो हम अपने चाचा चाची के साथ रहते थे वो लोग जैसे-तैसे हमें पाल रहे थे और इतना बड़ा कर दिया था मगर साथ ही साथ वह हमारे ऊपर अत्याचार भी करते थे कभी हमें खाना नहीं देना चाहते थे हम दोनों बहनों से घर के बहुत सारे काम करवाना और मेरे छोटे भाई को भी छोटी-छोटी बात पर डांटना

जब मैं 15 साल की थी तभी मेरे माता-पिता हमें इस दुनिया में छोड़कर जा चुके थे दोनों की ही आगे पीछे मौत हो गई थी मेरी छोटी बहन बहुत छोटी थी और मेरी भी उम्र ज्यादा नहीं थी मैं भी ज्यादा कुछ नहीं जानती थी इसलिए चाचा चाची के घर में रहकर चाचा के अत्याचार खामोशी से बर्दाश्त करते रहे जैसा चाची कहती थी हम तीनों भाई बहन वैसा ही करते थे लेकिन अब मेरी उम्र 20 साल हो गई मैंने इंटर किया हुआ था क्योंकि थोड़ा बहुत तो मैं अपनी मम्मी पापा के सामने ही पढ चुकी थी

मैंने अपनी पढ़ाई को बंद नहीं किया था मैंने जिद कर के इंटर पास किया था क्योंकि मैं पढ़ना चाहती थी और मैंने अपने चाचा चाची से कहा कि मुझे पढ़ने से कोई नहीं रोक सकता वो लोग मेरी जिद के आगे मजबूर हो गए थे मगर पढ़ाई के दौरान मुझे घर के भी सारे कामकाज करने होते थे जैसे-तैसे वक्त गुजर गया और मेरा इंटर कंप्लीट हो गया था अब हम लोगों के साथ चाची बहुत बुरा बिहेव रखने लगी थी मेरी उम्र 20 साल मेरी छोटी बहन की उम्र 15 साल और छोटे भाई की उम्र 13 साल थी

हम लोग काफी बड़े हो गए थे और मैंने सोच लिया था कि अब मैं अपने चाचा चाची के अत्याचार को और ज्यादा बर्दाश्त नहीं करूंगी वो लोग ऐसी कड़वी कड़वी बातें हमें कहते थे कि हम खामोशी से सुनते रहते थे जब मेरे मम्मी पापा जिंदा थे तब हम सब लोग एक साथ जॉइंट फैमिली में रहते थे तब हमारे दादा-दादी भी थे मगर दादा-दादी भी परलोक सुधार गए और मेरे मम्मी पापा भी नहीं रहे तो चाचा चाची का पूरे घर में रात चलने लगा था हमारी एक बुआ भी थी जो कि दूसरे शहर में रहती थी

और हमसे बहुत प्यार करती थी चाचा चाची उनसे दिखावा करते थे कि वोह हम तीनों भाई-बहन से बहुत प्यार करते हैं मगर सच तो यह था कि वह कभी हमसे ढंग से बात तक नहीं करते थे इस घर में रहते हुए कभी हम तीनों भाई बहन ने ताज खाना नहीं खाया था हमें हमेशा बासी ही खाना दिया जाता था चाची हम तीनों भाई-बहन को किसी भी तरह से घर से बाहर निकालना चाहती थी इसलिए किसी ना किसी बात पर मुझसे या फिर मेरी छोटी बहन से लड़ती रहती थी

मगर मैं अब बड़ी और समझदार हो गई थी इसलिए उनकी बातें नहीं सुन सकती थी मैंने बुआ को फोन करके सब कुछ बता दिया था कि चाची हमारे साथ किस तरह का बिहेव करती हैं और अब हम तीनों में ही इतनी हिम्मत नहीं है कि हम उनकी बातों को बर्दाश्त कर सकें चाचा का सिर्फ एक ही बेटा था जो सिर्फ अभी 10 साल का था और स्कूल में पढ़ने के लिए जाता था वो उसको बहुत प्यार से रखती थी हम भी उसको अपना ही भाई मानते थे

मगर चाची हमें अपने बेटे से बातचीत नहीं करने देती थी बुआ को जब इन सारी बातों का पता चला तो वह घर आ गई थी और इस तरह उन्होंने घर में हंगामा डाल दिया वो मेरे पापा मतलब अपने बड़े भैया से बहुत प्यार करती थी इसलिए उन्होंने अपने बड़े भाई का हिस्सा हम तीनों भाई-बहन को दिलवा दिया था चाचा चाची जबकि पूरा घर खुद हड़प कर लेना चाहते थे लेकिन बुआ जी के आ जाने की वजह से उनके सारी प्लानिंग चौपट हो गई थी हम इस घर में नहीं रहना चाहते थे इसीलिए हमने पैसों की डिमांड की थी चाचा ने हमें मेरे पापा के हिस्से के पैसे दे दिए थे

इस तरह बुआ जी ने भी हमें हिस्से के पैसों का एक मकान दिलवा दिया था जो छोटा जरूर था मगर हम तीनों भाई-बहन के लिए काफी था हम यहां पर अपनी मर्जी के मुताबिक रहना चाहते थे क्योंकि कभी भी हम चाचा चाची के घर में खुश और सुकून से नहीं रहे थे अब हमें खुशी थी कि हम अपने अलग घर में आ गए थे इसलिए अपने मुताबिक जिंदगी जिएंगे मगर अब यहां आने के बाद एक नई परेशानी निकल आई थी पहले तो हम रूखी सूखी जैसे भी खाते थे चाचा की पैसों की कमाई खा रहे थे लेकिन अब यहां हम भले ही अलग घर में रह रहे हैं

अब हमें यहां खिलाने के लिए पैसे कौन देगा और खाना कहां से आएगा मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब यह सब कुछ कैसे किया जाएगा इसीलिए मैंने फैसला कर लिया था कि मैं कहीं पर नौकरी करूंगी मैं इंटर पास थी मुझे किसी भी स्कूल में आसानी से नौकरी मिल जाती मैंने अपनी स्कूल की ही जान पहचान वाली दोस्त के थ्रू एक स्कूल में नौकरी करना शुरू कर दिया था मगर वहां मुझे सैलरी ज्यादा नहीं मिल रही थी

एक महीने में इतने पैसे भी नहीं आते थे कि हम तीनों भाई-बहन का गुजारा हो सके मैंने अपने छोटे भाई का स्कूल में एडमिशन करवा दिया था छोटी बहन घर में रहकर घर के कामकाज किया करती थी उसको कम उम्र से ही घर के काम अच्छे से आते थे जिस तरह चाची ने मुझे घर के काम में घेर दिया था इसी तरह मेरी बहन को भी घर के काम काम में घेर कर रख दिया था अपनी बहन को तो मैं खुद पढ़ाया करती थी

मैं नहीं चाहती थी कि मेरी बहन अनपढ रहे मुझे अपने भाई की भी स्कूल की फीस देनी होती थी और फिर उसकी कॉपी किताबों का खर्चा सबसे ज्यादा पैसे तो मेरे भाई की ही फीस में जा रहे थे घर में कुछ बचता ही नहीं था मुझे मेरी फ्रेंड ने सजेस्ट किया कि तुम्हें कहीं और नौकरी के लिए ट्राई करना चाहिए टीचिंग ना करके तुम अगर किसी कंपनी में नौकरी करना चाहो तो तुम्हें ज्यादा पैसे मिलेंगे मगर एक प्रॉब्लम यह थी कि मैं इंटर से ज्यादा पड़ी हुई नहीं थी

मेरी फ्रेंड ने कहा कि फिर भी तुम एक बार ट्राई करके तो देखो लक अगर कहीं चल जाए तो जिंदगी बदल कर रख देता है इसीलिए अपनी फ्रेंड के मुताबिक मैंने किसी कंपनी में नौकरी करने के बारे में सोच लिया था वैसे तो मैं शुरू से ही अच्छे नंबर से पास आती थी क्योंकि मुझे पढ़ने की बहुत लगन थी अगर मैं आगे और पढ़ती तो शायद मुझे आसानी से कहीं भी नौकरी मिल जाती मगर क्या कर सकते हैं चाचा चाची ने इतना कर दिया था वही मेरे लिए बहुत था

अब मुझे कुछ भी करके कहीं और नौकरी की तलाश करनी थी मगर कहां मैंने शहर की हर अच्छी कंप कनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने शुरू कर दिए थे मैंने नौकरी की तलाश में सब कुछ कर लिया था मगर मुझे कहीं भी अच्छी कंपनी में नौकरी नहीं मिल पा रही थी मैं बहुत मायूस हो गई थी मेरे बहन भाई मुझे हमेशा समझाते थे कि दीदी परेशान मत हो भगवान कोई ना कोई सॉल्यूशन जरूर निकाल देंगे और वैसे भी सबर का फल हमेशा मीठा होता है

आपको मायूस नहीं होना चाहिए आप तो हमारी बहुत हिम्मत वाली बहन हो अगर आपने हिम्मत तोड़ दी तो हम दोनों भाई बहन का क्या होगा हम गरीबों के पास सिर्फ भगवान पर भरोसा भरोसा रखने के अलावा कुछ नहीं था मेरे भाई बहन का साथ और प्यार मेरे साथ था मैं जानती थी कि एक ना एक दिन मुझे अच्छी नौकरी जरूर मिल जाएगी मगर अब परेशानी यह थी कि मैं अपने भाई बहन के लिए खाने के लिए कहां से लाती घर खरीदने के बाद मेरे पास पैसे खत्म हो चुके थे

मैंने फिर भी अपने लिए कोशिश जारी रखी थी बुआ जी ने कॉल पर हालचाल पूछे थे तो मैंने उन्हें घर की परेशानी के बारे में सब कुछ बता दिया था वह हमेशा हमारा साथ दिया करती थी उन्होंने मुझे कुछ पैसे सेंड कर दिए थे उनके दिए गए पैसों से कुछ दिन हमारा गुजारा हो गया था मैं चाहती थी कि मेरे बहन भाई पढ़ लिखकर कुछ कामयाब बन जाए और अब हमारी जिंदगी भी आसान हो जाए मगर चाचा चाची के घर से निकलने के बाद तो हमारी जिंदगी और ज्यादा मुश्किल हो गई थी

एक दिन मुझे मेरे दोस्त की कॉल आई और उसने बताया कि तुम्हारे लिए कंपनी में नौकरी है वहां पर तुम्हारा इंटरव्यू है कल चली जाना मेरे दोस्त ने अपने हिसाब से वहां पर मेरे लिए बात कर ली थी इसलिए मैं अपनी दोस्त के कहने के मुताबिक अगले ही दिन इंटरव्यू के लिए जाने लगी थी तभी अचानक बुआ जी की कॉल आ गई मैंने बुआ जी को बताया कि आज मेरा इंटरव्यू है आप मेरे लिए प्रार्थना करना कि मेरी नौकरी पक्की हो जाए मैं कामयाब हो जाऊं बुआ जी ने मुझे कॉल पर बहुत आशीर्वाद दिया था

मैं अपने डॉक्यूमेंट लेकर घर से निकल गई थी क्योंकि मुझे बस से जाना था इसलिए मैं बस स्टेशन के पास जाकर बस के आने का इंतजार करने लगी मोबाइल में टाइम देखा तो इंटरव्यू शुरू होने में सिर्फ आधा घंटा रह गया था और मुझे जाना भी काफी दूर था मैं परेशान होते हुए इधर-उधर देखने लगी कि अचानक मेरी नजर मेरी बचपन की सहेली राख पर पड़ गई राखी अपनी स्कूटी से कहीं जा रही थी मैंने जल्दी से राखी को आवाज लगाई और उसे बताया कि मेरे पास टाइम बहुत कम है क्या

तुम मुझे इस एड्रेस पर पहुंचा सकती हो राखी ने कहा कि अच्छा ठीक है मैं तुम्हें यहां पर छोड़ दूंगी लेकिन मुझे जल्द ही अपने घर पहुंचना है मैंने उससे कहा कि प्लीज आज तुम मेरी मदद कर दो मुझे आज तुम्हारी मदद की बहुत जरूरत है राखी बहुत अच्छी थी इसलिए उसने मेरी मदद कर दी मैं जल्दी से उसके साथ बैठ गई और उससे कहा कि थैंक यू तुम्हारी बड़ी मेहरबानी होगी राखी ने स्कूटी स्टार्ट की और हम लोग ऑफिस की तरफ पहुंच गए थे

राखी बहुत तेज रफ्तार के साथ मुझे यहां लेकर आई थी 5 मिनट पहले ही मैं ऑफिस के गेट पर पहुंच गई थी मुझसे पहले भी वहां पर काफी सारे लोग इंटरव्यू दे चुके थे और इंटरव्यू देने के लिए अभी एक लड़का और एक लड़की वहां पर बैठे हुए थे इन दोनों के बाद मेरा नंबर आने वाला था मैंने गहरी सांस भरी और सोचा कि मैं बिल्कुल सही टाइम पर आ गई हूं आज राखी ने मेरी बहुत मदद कर दी थी भगवान उसका भला करें नहीं तो मैं आज लेट हो जाती और मेरा इंटरव्यू भी दे देर से होता

आज पहले ही दिन मेरे यहां पर इंसल्ट हो जानी थी और फिर शायद मुझे नौकरी भी नहीं मिलती मैं यही सब सोच रही थी कि अंदर से 15 मिनट बाद मेरे नाम की आवाज आ गई थी मैंने अपना नाम सुना तो मैं थोड़ी नर्वस हो गई थी और फिर मैंने भगवान को याद किया और फिर मैं केबिन के अंदर चली गई थी जाते ही मेरी नजर सामने की तरफ गई तो लगभग एक 50 साल की उम्र के आदमी बैठे हुए थे और उनके बराबर में ही चेयर पर मेरी उम्र का एक लड़का बैठा हुआ था

जो देखने में बहुत हैंडसम और स्मार्ट था सामने बैठे एक आदमी ने मुझसे मेरी फाइल मांगी थी शायद वो वहां के बॉस थे मेरी फाइल खोलते हुए वो मुझसे कुछ सवाल करने लगे उन्होंने जब मेरे डॉक्यूमेंट चेक किए तो वो कहने लगे तुमने सिर्फ इंटर किया हुआ है लेकिन हमारे यहां तो नौकरी के लिए पढ़े-लिखे लोगों की जरूरत है उनकी बात सुनकर मैं हैरान हुई थी बल्कि शर्मिंदा भी हो रही थी मैंने उनको सच-सच बता दिया था कि मेरी पढ़ाई किस वजह से रुक गई थी

क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलती थी मैं झूठ बोलकर किसी को भरोसे में रखने वालों में से नहीं थी जबकि सच बोलकर मैं मैं अपना किनारा कर लिया करती थी मेरी सारी बातें सुनने के बाद और मेरे डॉक्यूमेंट चेक करने के बाद सर ने साथ बैठे हुए इस लड़के को मेरी डॉक्यूमेंट थमा दिए थे उसने एक नजर मेरे डॉक्यूमेंट की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगा मैं उसकी इन हरकतों से बेहद कंफ्यूज हो रही थी इसी घबराहट में मैं उस लड़के और उनके सामने बैठे हुए सर को देखे जा रही थी

और मन ही मन बार-बार यही प्रार्थना कर रही थी कि ये लोग मुझे जॉब दे दें उन दोनों ने आपस में कुछ देर डिस्कस किया था और इसी तरह से डिस्कस करने के बाद सर ने मुझे बाहर इंतजार करने के लिए कह दिया था मुझे पक्का यकीन था कि यह लोग मुझे नौकरी नहीं देंगे क्योंकि यह बड़ी कंपनी थी यहां पर इन लोगों को मुझसे भी अच्छी वर्कर मिल सकती थी मेरी भले ही एजुकेशन ज्यादा नहीं थी मगर मैं बहुत टैलेंटेड और इंटेलिजेंट लड़की थी हमारे स्कूल में कंप्यूटर भी सिखाया जाता था

इसलिए मुझसे कंप्यूटर चलाना भी आता था मुझे नहीं लगता था कि ये जॉब मुझे मिलेगी मैं निराश होकर अपना उदास चेहरा लिए बाहर आकर बैठ गई थी इतनी ही देर में दोबारा से मेरा नाम लेकर मुझे अंदर बुलाया गया जैसे ही मेरा नाम पुकारा गया मैं फौरन ही केबिन की तरफ चली गई अंदर जाते ही सामने कुर्सी पर बैठे हुए सर ने मुझे मेरी फाइल देते हुए कांग्रेचुलेशन कहा और कहने लगे कि कल से आप अपनी जॉब जॉइन कर सकती हो सर का इतना कहना था कि मेरी खुशी का कुछ ठिकाना ही नहीं रहा

मैं तो समझो खुशी से पागल ही हो गई थी क्योंकि यह मेरे लिए बहुत बड़ी खुशी की बात थी इतनी बड़ी कंपनी में नौकरी करना मेरी खुशकिस्मती थी मैंने सर को थैंक यू कहते हुए उस लड़के के चेहरे पर पर भी ध्यान दिया था वह अपने मोबाइल में शायद कुछ कर रहा था वह सर का ही बेटा था और उसको भी थैंक यू बोलकर मैं केबिन से बाहर निकल आई थी वापस आने पर सारे रास्ते मेरे दिल में खुशी ही खुशी थी कि जब मैं घर जाकर अपने भाई बहन को यह खुशी सुनाऊंगा

क्रेडिट राखी को जाता था जिसने आज मेरी हेल्प करके मुझे टाइम पर ऑफिस पहुंचा दिया था इसलिए मैंने रास्ते में सबसे पहले मिठाई खरीदी और मैं राखी के घर चली गई थी मैंने मिठाई का डब्बा खोलकर खी और उसकी मां का मुंह मीठा करवाया और उन्हें बताया कि मेरी जॉब लग गई है राखी की मम्मी ने मुझे आशीर्वाद दिया और गले से भी लगाया था राखी की मम्मी मुझे अच्छे से जानती थी उनको पता था कि मैं किस परेशानी भरे हालात से गुजर रही थी

राखी भी बहुत खुश थी मुझे देखकर उसने कहा कि चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर अपनी स्कूटी से छोड़ आती हूं मैंने राखी से कहा कि नहीं नहीं आज तुमने मुझे ऑफिस तक छोड़ दिया था यही मेरे लिए बहुत बड़ी मेहरबानी है मेरे लाख मना करने के बावजूद भी वो नहीं मानी थी और मुझे घर घर के दरवाजे पर छोड़कर चली गई थी मैंने उसे घर के अंदर बुलाया मगर उसे कोई काम था इसलिए वह अंदर नहीं आ सकी थी

जैसे ही मैं घर के अंदर गई मेरे चेहरे की मुस्कुराहट और खुशी देखकर मेरे छोटे भाई बहन को भी इस बात का आईडिया हो गया था कि मेरी जॉब लग गई है मेरे हाथ में मिठाई का डब्बा था मैंने सबसे पहले अपने दोनों भाई बहन को गले लगाया उनका मुंह मीठा करवाया और कॉल करके बुआ जी को भी यह गुड न्यूज़ दी थी मेरी बुआ और मेरे बहन भाई मेरी इस कामयाबी से बहुत खुश थे मेरा छोटा भाई तो मिठाई का ब्बा लेकर आस पड़ोस के घरों में बांटने के लिए चला गया था

मैंने अपने भाई को रोकने की कोशिश की थी और कहा था कि यह मिठाई मैं तुम्हारे लिए लेकर आई हूं इसे तुम खा लो मेरे पास पैसे कम थे इसलिए मैं कम मिठाई लेकर आई हूं मेरा भाई कहने लगा दीदी पैसों की क्या औकात है दिल बड़ा होना चाहिए मैं अपने पड़ोसियों का इसी मिठाई से थोड़ा-थोड़ा मुंह मीठा करवा दूंगा ताकि उन लोगों को भी तो पता चले कि मेरी दीदी की जॉब लग गई है अब हमारे घर की सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी

और मैं भी आपकी तरह पढ़ लिखकर बड़ी कंपनी में नौकरी करूंगा मेरा भाई उम्र में छोटा जरूर था मगर बहुत अच्छी-अच्छी और समझदारी की बातें करता था मेरी बहन भी खुश थी वोह फौरन मेरे लिए पानी लेकर आई उसने मुझे पानी दिया और कहने लगी दीदी आज तो मैं आपकी ही पसंद का खाना बनाऊंगी अपने भाई बहन को इस तरह से खुश देखकर मैं दिल ही दिल में भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि मेरे घर में खुशियां इसी तरह से बरकरार रहे मेरे भाई बहन मेरी कामयाबी की खुशियां मना रहे थे

मुझे अगले दिन सुबह ड्यूटी पर भी जाना था मैंने अपने साफ सुथरे कपड़े निकाले और उनको स्त्री करके लटका दिया था मेरे पास ढंग के कपड़े नहीं थे सिर्फ यही थे जो मुझे अभी दिवाली पर चाची ने दिलवाए थे यह भी सस्ते थे चाची को उनके किसी रिश्तेदार ने दिए थे उनको पसंद नहीं थे इसलिए उन्होंने दिवाली पर मुझे दे दिए मगर मैं इन कपड़ों को कहीं खास जगह ही पहनती थी अब तो मैं इतनी बड़ी कंपनी में नौकरी करने के लिए जाती तो मुझे अच्छे ही कपड़ों की जरूरत पड़ी थी

दो-तीन दिन तो मैं यह कपड़े पहनकर चली जाती मगर फिर मुझे और कपड़ों की जरूरत होती मैंने सोच लिया था कि बात की बात में दे देखा जाएगा अभी तो यही कपड़े पहनकर चली जाऊंगी मेरी सुबह की तैयारी लगभग पूरी थी मैंने सोच लिया था कि मैं कुछ दिन यह कपड़े पहन लूंगी उसके बाद जल्द ही कुछ ना कुछ करके नए कपड़ों का इंतजाम करूंगी क्योंकि मैं ऑफिस में वहीं के लोगों की तरह अपना गेटअप बनाकर जाया करूंगी

मेरी बहन ने मेरी तरफ देखकर कहा कि दीदी यह रहे मेरे पास के कुछ पैसे मेरी बहन ने मुझे ₹2000000 क्योंकि अब आपका बड़े लोगों में उठना बैठना होगा मैं नहीं चाहती कि मेरी दीदी का सर शर्मिंदगी से नीचा हो इसीलिए आपको अच्छे कपड़े और अच्छे सैंडल की जरूरत पड़ेगी मैंने अपनी बहन से कहा कि नहीं मैं यह पैसे नहीं रख सकती यह पैसे तुम्हारे हैं वो कहने लगी दीदी अब क्या मेरे और क्या आपका यह पैसे भी तो आपके ही कमाए हुए हैं

जब आप मुझे मेरे खर्चे के लिए पैसे दिया करती थी तो मैं उनसे पैसे जोड़ लिया करती थी इस तरह तो मैंने ₹2000000 तुम जैसी बहन भगवान सबको दे तुम्हें मेरा कितना ख्याल है तुम फिक्र मत करो मेरी जैसे ही पहली सैलरी आएगी मैं तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस लौटा दूंगी मेरी बहन ने कहा कि दीदी ये पैसे तो हम सबके हैं आपको पैसों की फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है आप आराम से अपनी जॉब पर ध्यान दो मुझे सुबह ऑफिस के लिए जल्दी उठना था

क्योंकि मेरे पास कोई सवारी नहीं थी और मुझे बस से ही ऑफिस जाना था इसलिए मैं एक घंटा पहले ही घर से निकलना चाहती थी आज तो मुझे जैसे-तैसे राखी ने पहुंचा दिया था मगर मैं अब उसकी बार-बार तो हेल्प नहीं ले सकती थी सारी रात मुझे खुशी की वजह से नींद नहीं आ रही थी मैं अपने बिस्तर पर लेटकर कल के बारे में सोचने लगी कि ऑफिस में ना जाने क्या होगा और मुझे कैसे-कैसे काम दिए जाएंगे सोचते-सोचते ना जाने मेरी आंख कब लग गई

मुझे कुछ पता ही नहीं चला सुबह मेरी छोटी बहन ने जगाया और कहने लगी कि दीदी आपको कहीं ऑफिस जाने के लिए देर ना हो जाए इसलिए जल्दी उठ जाओ मैंने आपके लिए नाश्ता बनाकर तैयार कर दिया है मैं जल्दी से उठी दिल में बहुत सारे अरमान लेकर तैयार हो गई आज मेरे ऑफिस में पहला दिन था मुझे बेहद खुशी महसूस हो रही थी आज मैं अपने मकसद में कामयाब होने वाली थी जो सपना मैंने देखा था किसी बड़ी कंपनी में काम करने का वह आज पूरा हो चुका था

मैं जल्दी से तैयार हुई तो मेरी बहन ने जल्दी से मुझे नाश्ता दिया आज खुशी की वजह से मेरा छोटा भाई भी जल्दी ही उठ गया था और हम सब भाई-बहन ने साथ बैठकर नाश्ता किया था मैंने अपने दोनों भाई-बहन को गले से लगाया मेरी आंखों में आंसू आ गए थे मैं सोच रही थी अगर आज मेरे पेरेंट जिंदा होते तो कितना खुश होते मैं अप अपने भाई-बहन को गले लगाकर घर से निकलने लगी तभी मेरी बहन ने हाथ में खाने का डब्बा थमा दिया कहने लगी दीदी इतना बड़ा ऑफिस है

कहीं आपको शर्मिंदगी महसूस ना हो लोग आपकी मजाक ना उड़ाए कि बच्चों की तरह खाने के डिब्बे में क्या लेकर आई हो मैंने अपनी बहन की बात सुनी तो अपनी बहन को प्यार से देखते हुए कहा कि ऑफिस जितना भी मर्जी बड़ा हो तुम्हारी मोहब्बत से बड़ा नहीं है मेरे लिए तुम्हारे हाथ के खाने से बढ़कर कुछ भी नहीं है तुम परेशान मत हो और तुम कितनी अच्छी हो तुमने इतनी सुबह सवेरे उठकर मेरे लिए नाश्ता भी बनाया और खाना भी बनाकर तैयार कर लिया

तुम्हारी उम्र कम जरूर है मगर हालात ने तुम्हें वक्त से ज्यादा बड़ा बना दिया तभी मेरा भाई भी मेरे करीब आकर मुझसे चिपट गया वह दोनों कहने लगे कि दीदी हम आपसे बहुत प्यार करते हैं हमारे मां और पिता दोनों आप ही हो मैंने अपने भाई बहन को समझा दिया था कि घर से ज्यादा बाहर मत निकलना और मेरे आने का इंतजार करना घर के दरवाजे को अच्छी तरह से अंदर से बंद कर लेना अपने भाई बहन को समझाने के बाद मैं घर से निकल गई थी मैं बस स्टॉप पर जाकर बस का इंतजार कर रही थी कुछ ही देर में बस आ गई और मैं उसमें बैठकर ऑफिस के लिए निकल गई

मैं ऑफिस में 15 मिनट पहले पहुंच गई थी अभी ऑफिस में कम लोग ही आए थे और मैं भी जाकर वेटिंग रूम में बैठ गई और सर के आने का इंतजार करने लगी देखते ही देखते पूरा ऑफिस काम करने वालों से भर गया इतना बड़ा ऑफिस था चारों तरफ लोग ही लोग नजर आ रहे थे इतनी भीड़ देखकर पहले तो मैं घबरा गई लेकिन फिर अपने दिल को समझाने लगी कि अब मेरा काम यही है और इसी से ही मुझे अपने आपको को और अपने बहन भाई को पालना है

इसलिए मुझे पूरे कॉन्फिडेंस के साथ यह काम करना है कुछ ही देर में मुझे ऑफिस में बुलाया गया मैं जैसे ही ऑफिस में गई तो मुझे बहुत घबराहट महसूस हो रही थी सर ने मुझे पहले दिन नौकरी पर आने के लिए बधाइयां दी मेरे हाथों में मेरी कुछ फाइल्स पकड़ाई और कहा कि इन पर काम करना शुरू कर दो मैंने अपना काम पकड़ा और अपने केबिन में लौट आई थी मेरा केबिन बहुत ही खूबसूरत था इतना बड़ा कमरा आराम दे कुर्सी और एसी भी लगा हुआ था

मैं अपने केबिन में बैठकर बहुत खुश हो रही थी मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि यह मेरा ही केबिन है और मैं इतने बड़े केबिन में बैठकर काम किया करूंगी मैंने अपना काम करना शुरू कर दिया और अपने भगवान जी का शुक्रिया अदा करने लगी ऐसे ही दिन गुजरते गए और मैं अपने काम में बहुत ज्यादा बिजी हो गई थी सर को मेरा काम पसंद आता था उनका कहना था कि तुम्हारे पास एजुकेशन भले ही ज्यादा नहीं है मगर तुम बहुत टैलेंटेड लड़की हो काम बहुत तरीके से और समझदारी से करती हो

सर मेरी तरफ से बहुत खुश और बेफिक्र थे मुझे यहां पर एक मिनट का भी टाइम नहीं मिलता था क्योंकि मैं अपनी नौकरी के लिए बहुत सीरियस थी मैंने अपनी स्वर्गवासी मां से एक ही बात सीखी थी कि जो भी काम करो दिल से काम करो मेहनत और लगन से काम करने से ही इंसान कामयाब बनता है इसीलिए मैं अपने काम में बहुत सीरियस थी काफी दिन गुजर गए मैंने सर के बेटे को दोबारा ऑफिस में नहीं देखा था मेरे सर जो कि इस कंपनी के ओनर थे

वह बहुत अच्छे इंसान थे और मेरे काम से खुश होकर हर तरफ मेरी तारीफ करते रहते थे और मुझे एप्रिशिया और मुझसे बहुत ही अजीबो गरीब सवाल किया मैं बहुत हैरान हुई थी उनका चेहरा देखते हुए मैंने जवाब दिया सर ने मुझसे पूछा क्या तुम शादीशुदा हो मैंने इंकार करते हुए सर हिला दिया था सर मुस्कुराए और कहने लगे कहीं तुम्हारा रिश्ता तो नहीं लग गया या फिर तुम्हारी इंगेजमेंट हो गई हो सर की आंखों में एक शर्ट थी वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे

मैंने नजर झुकाकर जवाब दिया कि जी नहीं सर सर मेरी बात पर बहुत खुश हुए और कहने लगे तुम्हारी फैमिली में कौन-कौन है मैंने सर को बताया कि मेरी फैमिली में मेरे दो छोटे भाई बहन के अलावा कोई भी नहीं है क्योंकि मेरे पेरेंट्स इस दुनिया से जा चुके हैं और अपने भाई बहन का ख्याल मैं ही रखती हूं सर के सवाल बहुत ही अजीबोगरीब थे अबकी बार उन्होंने जो सवाल किया उसने तो मेरे होश ही उड़ा दिए थे सर ने कहा शादी के बाद तुम्हारे लिए तुम्हारा पति ज्यादा इंपॉर्टेंट होगा या फिर तुम्हारे भाई-बहन मैंने सर को इस बार एक टोक जवाब दिया था

मैंने कहा सर मेरे भाई-बहन मेरे लिए बहुत जरूरी हैं क्योंकि उनके सर पर माता-पिता का साया नहीं है अगर मेरा पति मुझसे प्यार करने वाला होगा तो मेरे भाई बहन को भी अपना भाई बहन समझेगा यह देखकर कि उनका इस दुनिया में मेरे अलावा कोई नहीं है और रही मेरी बात तो जितना हक एक पत्नी का एक पति पर होता है मैं उसके साथ वो सारे हक अदा करूंगी और जितना हक एक बहन का अपने भाई बहन के लिए होता है मैं वो सब भी अदा करूंगी

मैं किसी भी रिश्ते में कोई कमी नहीं करना चाहती क्योंकि मैं एक ऐसी लड़की हूं जो हर रिश्ते को दिल से निभाती है मेरा इतना कॉन्फिडेंस देखकर सर बहुत खुश हुए थे और मुझसे कहने लगे कि मैं तुम्हारे जवाब से बहुत इंप्रेस हुआ हूं या तुम्हारा ऐसा कोई रिश्तेदार है जो तुमसे बड़ा हो और जो तुम्हारा रखवाला भी हो मैंने सर को बताया था कि वैसे तो हमारे इस दुनिया में कोई नहीं है लेकिन मेरी एक बुआ जी हैं जिनसे हम बहुत प्यार करते हैं

और वह भी हमेशा हमें अपने बच्चों की तरह प्यार करती हैं दूसरे शहर में रहती हैं लेकिन कभी-कभी हमसे मिलने के लिए आ जाती हैं सर ने कहा तो फिर मैं कब आऊं तुम्हारी बुआ से मिलने के लिए मेरे लिए यह बहुत हैरान कर देने वाली बात थी क्योंकि इतनी बड़ी कंपनी का मालिक जो हम जैसे लोगों से मिलना तो दूर की बात बात करना भी पसंद नहीं करें वह मेरी बुआ से मिलना चाहता था सर से मिलकर मुझे इस बात का यकीन तो हो गया था कि सर को अपनी दौलत का और रुतबे का कोई घमंड नहीं था

सर अपने सब वर्कर्स के साथ बहुत अच्छे से पेश आते थे अब मैं रोज ऑफिस आई तो सर मुझसे एक ही सवाल करते थे नम्रता तुम मुझे कब अपनी बुआ से मिलवा रही हो मैं तुम्हारी बुआ से मिलना चाहता हूं और मिलकर उनसे तुम्हारे बारे में कुछ बात करना चाहता हूं मैंने सर से मुस्कुरा कर कहा था कि बहुत जल्द मैं आपकी मुलाकात से करवा दूंगी सर ने कहा तुम एक काम करो अपनी बुआ को लेकर कल हमारे घर डिनर पर आ जाओ मेरी पत्नी तुम्हारी बुआ को देखकर खुश हो जाएगी

सर की बात मुझे कुछ समझ नहीं आई थी सर ने कहा था कि यह मेरा ऑर्डर है कल तुम्हें अपने भाई बहन और बुआ को लेकर मेरे घर डिनर पर जरूर आना है मैं खुश हो गई थी मुझे लग रहा था कि मेरी काबिलियत और मेरे काम की वजह से सर मुझसे इंप्रेस हुए हैं इसलिए सर ने मुझे और मेरी फैमिली को इनवाइट किया है लेकिन यहां तो मामला ही कुछ और था मैं अपने बुआ और अपने अपने छोटे भाई बहन के साथ सर के घर चली गई थी

मैं जैसे ही सर के घर पहुंची तो सर का घर बहुत खूबसूरत था बिल्कुल किसी महल के जैसा सर के घर की दीवार पर उनके बेटे की फोटो लटकी हुई थी यह वही था जिसको मैंने इंटरव्यू के दौरान देखा था मैं सबको लेकर वेटिंग रूम में बैठ गई थी ज्यादा देर इंतजार ना करवाते हुए सर और उनकी वाइफ आ गए थे सर की वाइफ भी बहुत खूबसूरत थी वो दोनों पति-पत्नी मेरी बुआ और बहन भाई से अच्छे तरीके से मिले और उनके सामने मेरी ढेर सारी तारीफ करने लगे

सर की पत्नी की आदत भी बहुत अच्छी थी वह बार-बार मुझे बेटी बेटी कहकर पुकार रही थी बुआ जी भी ये सब देखकर बहुत खुश हुई इतनी ही देर में सर ने मेरी बुआ से एक ऐसी बात कही जिसे सुनकर मेरे तो होश भी उड़ गए थे सर ने कहा कि मुझे घुमा फिरा कर बात करने की आदत नहीं है इसलिए साफ-साफ बात कर देता हूं मुझे नमृता बहुत पसंद आई है इंटेलिजेंट है सिंपल है मासूम है और बहुत ही कॉन्फिडेंशियल है इस हिसाब से तो मुझे

और मेरी पत्नी को आपकी बेटी बहुत पसंद आई है इतनी ही देर में सीढ़ियां उतरता हुआ व हैंडसम लड़का जो सर का बेटा था हमारी ही तरफ आ रहा था और आकर सर के पास खड़ा हो गया सर की पत्नी ने उसे अपने पास बैठने के लिए कहा था तो वह बैठ गया था सर ने अपने बेटे की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह नितिन है मेरा इकलौता बेटा मुझे अपने बेटे के लिए नम्रता पसंद आ गई है यह बात सुनते ही मेरे तो होश उड़ गए थे

कहां सर का बेटा और कहां मैं एक मामूली सी लड़की बुआ जी और मेरे भाई बहन भी सर की इस बात को सुनकर घूम गए थे वैसे तो मैं खूबसूरत थी मुझ में कोई कमी नहीं थी मगर सर के हैंडसम और अमीर बेटे को तो बहुत अच्छी लड़की आसानी से मिल सकती थी सर की पत्नी ने बुआ जी से कहा कि हम अपने बेटे की शादी नमृता से करना चाहते हैं उसे अपने घर की बहू बनाना चाहते हैं अगर आपकी इजाजत हो तो उनकी बात सुनकर तो जैसे मेरे भाई बहन और बुआ जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी

वो तो खुशी से पागल ही हो गए थे लेकिन मेरी मर्जी जाने बिना बुआ जी इस रिश्ते के लिए हां नहीं कर सकती थी इसलिए उन्होंने सर से कुछ समय मांग लिया था उन्होंने कहा था कि हमें आज ही जवाब चाहिए इसलिए वह तीनों वहां से चले गए थे ताकि हम लोग आपस में डिस्कस कर सकें बुआ जी ने मुझे समझाया था कि तुम इस घर में ऐश करोगी सारी जिंदगी तुमने परेशानी में गुजारी है इस रिश्ते के लिए हां कर दो नमृता मगर मैं ऐसे कैसे इतनी जल्दी शादी कर सकती थी

मैंने बुआ जी से कहा मैं अपने छोटे भाई बहन को अकेला नहीं छोड़ सकती बुआ जी कहने लगी कि तुम फिक्र मत करो तुम बस हां कर दो इन दोनों के बारे में भी हम बैठकर बात करेंगे तो कोई ना कोई सॉल्यूशन निकल ही आएगा मेरे भाई बहन भी खुश थे और कहने लगे कि दीदी आप यहां पर शादी कर लो यहां से अच्छा रिश्ता आपको कहीं नहीं मिलेगा और आप हमारी फिक्र मत करो आप खुश रहोगी तो हम दोनों भी खुश रहेंगे इस रिश्ते से इंकार करने के लिए मेरे पास अब कोई वजह नहीं थी

सिर्फ एक वजह थी मेरे भाई बहन बुआ जी ने मुझे भरोसा दिलाया था कि वह इस बारे में सर और उनकी पत्नी से बात करेंगी थोड़ी ही देर के बाद सर और उनकी पत्नी और उनका बेटा नितिन कमरे में आ गए थे बुआ जी ने कह दिया था कि नमृता ने रिश्ते के लिए हां कर दी है मगर वो इस टेंशन में है कि उसके बाद उसके भाई-बहन का इस दुनिया में कोई नहीं है इन छोटे बच्चों का कौन ख्याल रखेगा सर ने कहा कि इसमें इतनी बड़ी कोई बात नहीं है

अभी इनकी पढ़ने लिखने की उम्र है मैं तो आपको यही एडवाइस देना चाहता हूं कि आप इन दोनों का एडमिशन हॉस्टल में करवा दें ताकि ये शिक्षा पूरी कर लें और कामयाब हो जाएं मैं खुद उनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी लेता हूं और हर महीने में उनको इनके खर्चे के लिए ₹1 लाख दिया करूंगा यह बात सुनकर तो मेरे होश उड़ गए थे इससे अच्छी और क्या बात हो सकती थी मैंने इस रिश्ते से फौरन हां कर दी और मेरे भाई बहन जो अपनी शिक्षा पूरी करना चाहते थे

इस तरह उनका काम भी आसान हो गया था इस तरह खुशी-खुशी मेरा रिश्ता फिक्स हो गया था और कुछ दिनों के बाद ही मेरी शादी नितिन के साथ हो गई थी शादी के बाद मुझे पता चला था कि मेरा पति बहुत घमंडी और बदतमीज लड़का था जितना वह स्मार्ट था उतना ही उसका दिल काला था वह मुझे खुद से नीचा समझता था बात-बात पर मुझे डांटता था और यह जाहिर करता कि मैं गरीब लड़की थी उसके माता-पिता ने मुझ पर एहसान करके उसकी पत्नी बना दिया

और इस घर में उसकी पत्नी के रूप में बहू बना दिया उसे मेरा कोई भी काम पसंद नहीं आता था वह मुझे बिल्कुल नौकरा नियों की तरह ट्रीट करता था मेरी अब समझ आ गया कि उसके माता-पिता ने मेरी शादी उसके साथ क्यों करवाई थी जबकि वह तो एक अच्छी लड़की डिजर्व करता था कभी वह मुझे अपने दोस्तों के सामने बुलाकर जलील करता कि देखो यह रही मेरी पत्नी जो एक गरीब परिवार की है मेरे और मेरे पापा की बदौलत है जो आज इस घर में रह रही है

उसके दोस्त मेरी खूब मजाक उड़ाते थे और कभी तो नौकरों के सामने मेरे इंसल्ट करता कि तुम लोग इससे भी काम करवाया करो यह भी इस घर की नौकरानी ही है तो कभी मेरा बनाया हुआ खाना फेंक देता और कहता कि अच्छा नहीं है मुझे पसंद नहीं आया दोबारा से बना कर लाओ मैं उससे बहुत ज्यादा परेशान थी मैंने कभी उसे पलट कर जवाब नहीं दिया था मेरे सास-ससुर भी यह सब कुछ देखते थे मगर वह अपने बेटे को समझाने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे

उनका बेटा कभी उनकी बात समझता ही नहीं था मैं उसे बहुत ज्यादा तंग आ गई थी क्योंकि अब तो वह मेरे ऊपर भी हाथ उठाने लगा था मुझे कमरे में बंद कर दिया करता था और मैं रोती रहती चिल्लाती रहती थी जबरदस्ती वह मुझे परेशान करता था मुझे परेशान करने का तो वोह कोई बहाना नहीं छोड़ता था एक दिन मैंने फैसला कर लिया था कि मुझे उनकी दौलत नहीं चाहिए और उनका कोई एहसान भी नहीं चाहिए इसलिए मैं इस घर को छोड़कर जा रही हूं

क्योंकि मैं यह सब कुछ बर्दाश्त नहीं कर सकती थी एक पागल और सर फिरे इंसान के साथ में सारी जिंदगी नहीं गुजार सकती थी मैंने अपने सास ससुर से कह दिया था कि आपकी दौलत आपको मुबारक हो मैं इस घर को छोड़कर जा रही हूं और आपको अब मेरे भाई बहन को भी पैसे भेजने की जरूरत नहीं है मैं अपने घर जा रही हूं और अपने भाई बहन को भी वहीं पर बुला लूंगी मेरे सास ससुर मुझे रोकने की कोशिश कर रहे थे उनका कहना था कि उनका बेटा सर फिरा है

उसे दौलत का घमंड है इसलिए वह गरीब को कुछ नहीं समझता और यह बात उनके सारे रिश्तेदार भी जानते हैं तभी तो उनके बेटों को कोई लड़की देने के लिए तैयार नहीं था उन्होंने मेरी शादी अपने बेटे के साथ इसीलिए करवाई थी ताकि उनके बेटे को मैं सुधार दूं क्योंकि मैंने अपने घर की सारी जिम्मेदारियों का बोझ उठा आया हुआ था तो उन्हें यही लगता था कि मैं उनके बिगड़े हुए बेटे का भी बोझ उठा लूंगी मगर उसकी हरकतें कुछ ज्यादा ही खराब थी

वह मुझे अपनी पत्नी एक्सेप्ट नहीं कर पाया था तो फिर उन्होंने कैसे सोच लिया कि मैं उसके साथ सारी जिंदगी इस तरह गुजार दूंगी और उसको सुधार दूंगी जो लड़का अपने माता-पिता की बात नहीं सुनता वह मुझ जैसी गरीब लड़की की बात कैसे सुन सकता था जो खुद गरीबों से नफरत करता था अपने सास-ससुर की कहने पर मैं इस घर में रुक गई थी मगर मैंने फैसला कर लिया था कि मैं जल्दी यहां से चली जाऊंगी उनका कहना था कि मैं उनके बेटे को मौका दूं

शायद वो धीरे-धीरे खुद ठीक हो जाएगा इसलिए मैं उनके कहने के मुताबिक घर में ठहर गई थी एक दिन मेरे पति ने मुझे मारने का प्लान बनाया था वो मुझसे किसी तरह छुटकारा पाना चाहता था उसने मुझसे शादी भी अपने माता-पिता के कहने पर ही की थी वो मुझे कोई पसंद नहीं करता था और ना ही उसे मुझ में कोई इंटरेस्ट था उसके माता-पिता ने जिद कर ली थी कि अगर उसने शादी नहीं की तो वह उसे छोड़कर चले जाएंगे

और फिर वह अकेला रह जाएगा बस यही वजह थी कि वह अपनी शादी करने पर मजबूर हो गया था मगर उसने सोच लिया था कि शादी के बाद वह अपनी पत्नी को इतना परेशान करेगा कि वह खुद ही इस घर से चली जाएगी व शादी ही नहीं करना चाहता था मैं तो गरीब लड़की थी अगर कोई अमीर लड़की भी होती तब भी वह उसे तंग करता एक दिन मेरे साथ ससुर ने कहा था कि वह अपने किसी रिश्तेदार के यहां जा रहे हैं इसलिए घर में सिर्फ मैं और मेरे पति ही अकेले थे

मैं अपने पति से ज्यादा बात नहीं करती थी मेरे पति ने सारे नौकरों को भी छुट्टी पर भेज दिया था मुझे लगा शायद मेरे सास ससुर ही नौकरों को छुट्टी पर भेज चुके हैं जिस दिन से मेरी शादी हुई थी मैं घर से बाहर नहीं निकली थी सारा दिन घर में ही रहती थी मगर आज मेरा कहीं जाने का बहुत मन कर रहा था मैंने सोचा क्यों ना मैं अपनी दोस्त राखी से मिलने के लिए चली जाती हूं दरअसल मेरे पति ने घर की गैस ऑन कर दी थी ताकि मैं किचन में किसी काम से जाऊं

और घर में आग लग जाए जिससे मेरी भी मौत हो जाए मेरा पति गैस ऑन करने के बाद घर से बाहर निकल गया था मैं तो उसके जाने से पहले ही अपनी दोस्त राखी से मिलने के लिए चली गई थी इसलिए आज घर में कोई भी मौजूद नहीं था मेरे पति को यह नहीं पता था कि मैं भी घर से जा चुकी हूं क्योंकि मैं उसको बताकर नहीं निकली थी दो घंटे के बाद जब मैं अपने घर वापस आई तो मैंने देखा कि घर में भीषण आग लगी हुई है घर के बाहर बहुत सारे लोग मौजूद हैं

यहां तक कि फायर ब्रिगेड भी आग बुझा रही थी फिर लोगों ने बताया कि अंदर मेरी सांस मौजूद है इस बात को सुनकर मैं हैरान रह गई थी मैं फौरन ही घर के अंदर गई और जैसे-तैसे मैंने अपनी सांस को बचाने की कोशिश की मेरी सास घर के अंदर बेहोश पड़ी हुई थी मैं उनको लेकर घर से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी मेरे ससुर भी नहीं थे सिर्फ बाहर कुछ लोग खड़े हुए थे जिनमें से कोई भी मदद के लिए आगे नहीं बढ़ रहा था

तभी तो मुझे घर के अंदर जाना पड़ गया था मैं जैसे-तैसे अपनी सास को घर से बाहर निकाल कर लाई थी मैं भी काफी झुलस चुकी थी थोड़ी देर के बाद जब मेरे ससुर आए तो उन्होंने हम दोनों को अस्पताल में भर्ती करवाया था भगवान की कृपा से हम दोनों की जान तो बच गई थी मगर हम दोनों काफी बुरी तरह से झुलस गए थे और अपनी सास से ज्यादा मैं झुलसी हुई थी मुझे इस तरह से झुलसा हुआ देखकर मेरा पति अस्पताल में बहुत शर्मिंदा हुआ था

उसने मेरे आगे हाथ जोड़ लिए थे और कहने लगा कि मुझे माफ कर दो नम्रता घर में आग मेरी वजह से ही लगी थी मैंने सोचा मम्मी पापा नहीं है इसलिए आज मौका देखकर मैं तुम्हारी जान ले लेता हूं मैंने घर की गैस ऑन छोड़ दी थी और मैं घर से बाहर निकल आया था मुझे लगा कि तुम घर में ही हो मैं अपने घर के आसपास से ही घर का नजारा देख रहा था मैं तुम्हें अपनी आंखों से मरता हुआ देखना चाहता था और तभी अचानक मम्मी आई और घर के अंदर चली गई

मैं मम्मी को रोकने के लिए उनके पीछे गया तब अभी घर में आग लग गई थी शायद मम्मी किसी काम से घर आई थी मैं इतना डर गया था कि मैं अपनी मम्मी को नहीं बचा सका मगर जब मैंने देखा कि तुम हिम्मत करके मेरी मम्मी को अंदर बचाने के लिए गई हो तो मुझे खुद पर शर्म महसूस होने लगी थी तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया तुमने मेरी मां की जान बचाई मैं तुमसे अपनी सारी गलतियों की माफी मांगता हूं प्लीज मुझे माफ कर दो मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया

भगवान मुझे मेरे किए की सजा जरूर देगा मेरा पति हाथ जोड़कर खड़ा हुआ बहुत शर्मिंदा हो रहा था उस दिन के बाद से मेरे पति के दिल में मेरे लिए मोहब्बत बढ़ गई थी उसने मुझे बताया था कि वह एक लड़की से प्यार करता था वह लड़की गरीब थी और वह उसे बहुत चाहता था मगर उसने उसे धोखा दिया तब से वह गरीब लड़कियों से नफरत करने लगा था और वह मेरी शादी अपने साथ हो जाने के बाद अपनी गर्लफ्रेंड का बदला मुझसे निकालना चाहता था

उसका कहना था कि मुझे तुम्हारे अंदर अपनी गर्लफ्रेंड नजर आती थी इसलिए मैंने तुम्हारे साथ ऐसा किया था मैंने उसे माफ कर दिया क्योंकि इसमें उसकी भी कोई गलती नहीं थी शायद हालात ने उसे ऐसा बना दिया था मेरे साथ सास ससुर ने अपने बेटे पर बहुत गुस्सा किया था उस दिन के बाद से मेरा पति और सास ससुर मुझसे बहुत प्यार करने लगे थे मुझे उस घर में बहुत ज्यादा इज्जत दी गई मेरा पति पूरी तरह से बदल कर रह गया था

उसने मेरे भाई बहन को भी हमारे ही घर में रहने के लिए बुला लिया था और फिर हम सब अब साथ रहते हैं और एक दूसरे के साथ बहुत खुश रहते हैं मेरा पति मुझसे बहुत प्यार करता है और वह मुझे अपनी पत्नी मानने पर गर्व करता है दोस्तों उम्मीद करती हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी

 

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