माँ की मुहब्बत | Parivarik Hindi Story | Sad And Emotional Hindi Story | Meri Kahaniyan ft16

Parivarik Hindi Story : जब मैं सुबह उठकर नाश्ता करने लगा तो मम्मी ने मुझे कहा राहुल बेटा तुमने बहुत पढ़ना है बहुत आगे जाना है तुम्हारे पापा की यही इच्छा थी कि तुम पढ़ लिखकर एक दिन बड़े आदमी बन जाओ और उनका नाम रोशन करो मगर अफसोस कि वह खुद तो जल्दी यह दुनिया छोड़कर चले गए मगर यह भारी जिम्मेदारी मेरे नाजुक कंधों पर आ गई मम्मी रो रही थी जब वह यह कह रही थी मैंने मम्मी को दिलासा दिया कि आप चिंता मत करें

 जो पापा ने कहा था वैसा ही होगा मैं एक दिन बड़ा आदमी जरूर बनूंगा और मैं आपको किसी बात में निराश नहीं करूंगा मैं ध्यान से पढ़ाई करूंगा मैं उनके साथ बहुत से वादे किए हैं मैं अपने कॉलेज में आ गया था और मैं पढ़ाई का बहुत ही ज्यादा मेहनती था अधिकतर वक्त मैं पढ़ने में ही गुजारता था आज कॉलेज में आया तो मैंने अपने दोस्तों को एक लड़की के बारे में बात करते सुना वह लड़की हमारे कॉलेज में नई थी वह बहुत ही खूबसूरत थी

 उसे देखकर सब लड़के अपना दिल थामकर रुक गए थे मैंने अभी तक उसे नहीं देखा था मैंने सिर्फ उसकी तारीफें सुनी थी और मुझे उन पर गुस्सा आ रहा था कि वह किस तरह से अपना समय और भविष्य एक लड़की के लिए बर्बाद कर रहे थे वह लड़की जो उनको नहीं जानती थी जो उनकी तरफ नहीं देखती थी और यह कैसे उसके लिए दीवाने हो गए थे मैंने किताब खोलकर पढ़ने लगा था तभी एक खूबसूरत सी आवाज सुनाई दी मैंने सर उठाकर देखा तो मेरे सामने एक ऐसी लड़की थी

 जिसे देखकर मैं नजर हटाना भूल गया था बिल्कुल ऐसे सुंदर कन्या मैंने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखी थी वह लड़की मेरे साथ बैठ गई और पूरा दिन मुझे लड़की की वजह से डिस्टर्ब कर रहा था आज मैंने अपनी पढ़ाई भी नहीं की थी फिर तमाम लड़के मुझे कहने लगे तुम तो बहुत खुशकिस्मत हो कि वह लड़की तुम्हारे साथ आकर बैठ गई हमें तो उसे बिल्कुल नहीं करवाई मैं भी हैरान था कि सब कुछ छोड़कर वह मेरे पास क्यों आई थी

 अब मैं उनकी बातों पर मुस्कुरा दिया था घर आने के बाद भी वह लड़की मेरे ख्वाबों पर सवार रही थी और मैं सोच रहा था कि अगर यही सब चलता रहा तो मैं अपनी पढ़ाई कैसे करूंगा आज पूरा दिन मैंने कोई काम नहीं किया था वह लड़की ही मेरे ख्यालों पर चला रही थी और मैं अब यह सोचकर घबरा रहा था कि जो कुछ मेरी मां मुझसे चाहती थी जो कुछ मैंने सपना देख रखे थे उन सबको पूरा करने के लिए मुझे बहुत ज्यादा मेहनत करनी थी मेरी पढ़ाई के लिए ही मेरी मां इतनी मेहनत करती थी

 

Also read – गलतफहमी | Acchi Acchi Kahaniyan | Best Hindi Story

 

 

 वह पूरा दिन एक फैक्ट्री में काम करती थी ताकि मुझे किसी की किस्म की तकलीफ ना हो मेरा ख्याल रखने के लिए वह खुद को इतनी मुश्किल में डाल रही थी और मुझे इस सबसे बहुत शर्मिंदगी होती थी कि अगर मैं किसी काबिल होता तो मां को इतनी मेहनत ना करनी पड़ती अब मैंने सोच लिया था कि जैसे ही मेरे पेपर्स हो जाते हैं मैं पढ़ाई के साथ-साथ कुछ छोटा मोटा काम भी शुरू कर लूंगा 

और मम्मी को बोलूंगा कि अब आप आराम करें मैं अब सारी जिम्मे दारिया खुद निभाऊंगा मेरी मां कब तक यह सब करती रहेंगी वह तो अब बहुत बीमार भी रहती है और पहले से कितनी कमजोर हो गई है वह तो अपना बिल्कुल ख्याल ही नहीं रखती यही सोचते सोचते बिल्कुल मैं सो गया था आधी रात को मेरी आंख खुल गई तो फिर से उसे लड़की का चेहरा मेरी आंखों के सामने आ गया था

 मैं दोनों हाथों में सर थाम के रह गया कि मैं इस लड़की के ख्यालों से खुद की जान कैसे छुड़ाओ वह लड़की तो बहुत ही ज्यादा फैशनेबल थी और बहुत अमीर खानदान की भी लग रही थी वह तो मेरे जैसे इंसान की तरफ क्यों कर मुड़ जो जो हो सकती थी जबकि मुझ में तो ऐसा कुछ खास था भी नहीं ना मेरे पास पैसा था ना ऊंचा कद था और ना ही अच्छी पर्सनालिटी थी मैंने खुद को हकीकत में रखकर सोचने लगा

 और यह सोचते सोचते मेरा दिल बुरी तरह से दुखने लगा मैंने सोचा कि अगर मैं किसी काबिल बन जाऊं तो इस तरह की लड़कियां मुझे खुद ही हासिल हो जाएंगी अब नींद आने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था और खुद को पढ़ाई में मगन करने के लिए मैं किचन में आ गया ताकि कॉफी पीकर मैं अपने दिमाग को फ्रेश कर सकूं और फिर कॉफी बनाते हुए मुझे ख्याल आया कि एक बार मम्मी को जाकर देख लूं 

आज उनकी कैसी तबीयत है उन्हें कल से बुखार था और इस वक्त मेरा किसी से बात करने को दिल भी कर रहा था अगर मम्मी जाग रही होती तो मैं उनके साथ अपने दिल का बोझ हल्का कर सकता था जब मैं मम्मी के कमरे में आया तो यह देखकर मैं हैरान रह गया क्योंकि मम्मी तो यहां पर कहीं भी नजर नहीं आ रही थी मैं अब परेशान हो गया वह इस वक्त कहां जा सकती है और फिर जब मैं बाहर आया तो यह देखकर मेरा हैरत से मुंह खुला रह गया घर का दरवाजा बाहर से बंद था

 इसका मतलब था कि मम्मी घर से बाहर गई थी और बाहर से घर को ताला लगाकर गई थी फिर मैं अपने कमरे में आ गया सोचने लगा कि मम्मी आधी रात को कहां जा सकती है मैं उनके बारे में कुछ गलत नहीं सोचना चाहता था मगर मैं अपनी जगह पर परेशान हो गया कि वह कहीं किसी परेशानी में या किसी मुसीबत में तो नहीं थी काफी देर तक मैं जागता रहा मगर मम्मी घर में नहीं आए और फिर जब मैं सुबह उठा तो मम्मी मेरे लिए नाश्ता बना रही थी मैंने उनसे पूछा कि आप रात को कहां गई थी

 वह एकदम परेशान हो गई और मुझे कहने लगे कि मैं तो घर पर ही थी अपने कमरे में सो रही थी थोड़ी देर के लिए मैं हवा खाने के लिए छत पर गई थी क्योंकि मेरा दिल घबरा रहा था हो सकता है तभी तुमने मुझे देखा हो उनकी बात सुनकर मैं एक पल को खामोश हो गया अगर दरवाजा रात को बाहर से बंद नहीं होता तो मैं भी यही समझता कि वह छत पर गई होंगी मगर वह तो पूरे घर में भी कहीं नजर नहीं आ रही थी अगर वह घर पर थी तो दरवाजा बाहर से किसने और क्यों बंद किया था

 तभी मम्मी ने मेरे हाथ पर ढेर सारे पैसे रखे और कहने लगे तुम कितने कमजोर हो गए हो लगता है तुम अपने कॉलेज में कुछ भी नहीं खाते यह पैसे रख लो तुम्हारे काम आएंगे यह पैसे देखकर मैं हैरान रह गई कि मम्मी के पास तो सिर्फ जरूरत के पैसे होते थे यह इतने पैसे उनके पास कहां से आ गए जब यही बात मैंने उनसे पूछा तो कहने लगे कि मैंने अपनी बचत से यह पैसे बचा कर रखे थे

 तुम्हारे लिए ही तो मैं इतनी मेहनत करती हूं और तुम इतने कमजोर हो गए हो बस तुम अपनी सेहत का ख्याल रखा करो मैं मम्मी के बारे में कुछ गलत नहीं सोचना चाहता था मगर रात को उनकी घर से बाहर रहना और अब मेरे हाथ में इतने पैसे रखना यह बात मुझे खतकगी बात किए बिना वह पैसे रख लिए थे कॉलेज में जब आया तो आज भी वह लड़की मेरे साथ ही आकर बैठ गई थी उसका नाम रूपा था 

और वह अपने नाम की तरह बेहद हसीन थी उसे देखकर मैं मम्मी की बात को भूल गया था आज वह मुझसे बहुत ज्यादा हंसकर बात कर रही थी तब मुझे अनुमान हुआ कि वह लड़की बहुत ही ज्यादा अच्छी थी देखने में वह जितनी मगरूर नजर आती थी वह हरगिज वैसे नहीं थी वह एक अमीर बाप की बेटी थी मगर उसे इस बात पर बिल्कुल भी गुरूर नहीं था आज उसके साथ मैंने ढेर सारा वक्त गुजारा मेरे क्लास के लड़के मुझे हैरत भरी निगाहों से देख रहे थे

 आज तक मैंने कभी किसी लड़की में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी और यह लड़की जिस पर सबकी नजर थी सब लोग उससे बात करने के बहाने ढूंढ रहे थे अब जब वह सबको छोड़कर मेरे साथ दोस्ती कर चुकी थी तो यह बात उन लोगों से किसी तरह भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी मगर मैं सब कुछ नजरअंदाज किए हुए सिर्फ रूपा के बारे में ही सोचे जा रहा था और आज का दिन भी मेरा यूं ही चला गया था 

आज के दिन भी मैं मैंने कोई पढ़ाई नहीं की थी शाम को जब मैं घर आया तो मैं सोचने लगा कि अगर यही सब चलता रहा तो मैं कभी भी अपने मम्मी पापा के और अपने लिए देखे गए ख्वाबों को पूरा नहीं कर सकूंगा इन्हें ख्वाबों को पूरा करने के लिए मुझे बहुत पढ़ना था मैं जानता था कि बगैर मेहनत किए इंसान कभी भी कुछ पा नहीं सकता बचपन में ही मुझे पापा ने यह बात सिखा दी थी 

आज भी रात को देर तक मैं रूपा के बारे में ही सोचता रहा आधी रात का समय था नींद मेरी आंखों से कोसों दूर थी और तभी मुझे बाहर टकने की आवाज सुनाई दी आवाज सुनकर मैं हैरान रह गया कि हमारे घर के दरवाजे पर इस समय कौन आया था हमारे मोहल्ले में और आसपास के इलाकों में इन दिनों चोरी चकारी के घटनाएं बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी जब यह किसी हादसे के तहत मैं आहिस्ता से चलते हुए कमरे से बाहर आया

 यहां पर कोई भी नजर नहीं आ रहा था जब मैंने पूरे घर में घूमकर देख लिया घर में कोई भी नहीं था और मम्मी को देख के लिए जब मैं उनके कमरे में आया तो वह कहीं भी नहीं थी मैंने वॉशरूम में छत पर हर जगह देख लिया और जब दरवाजा देखा तो आज भी बाहर से बंद था इसका मतलब था मम्मी आज भी रात को बाहर चली गई थी मगर सवाल यह था कि वह रात को कहां जाती थी और क्यों जाती थी क्या मम्मी कोई गलत काम कर रही थी यह सोच ही मुझे गुस्सा दिलाने के लिए काफी थी मैं अपने कमरे में आकर टहलने लगा 

और सोचने लगा कि मम्मी आखिर ऐसा कैसे कर सकती है माना कि पापा ने उनके साथ कभी प्यार नहीं किया कभी उनका ख्याल नहीं रखा और मैंने कभी भी पापा को मम्मी के साथ अच्छे तरीके से बात करते नहीं देखा था मगर मम्मी किस रास्ते पर चल पड़ी थी मैं यह कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकता था गुस्से से मेरा दिमाग फट रहा था काफी देर तक इंतजार करता रहा मगर मम्मी घर में नहीं आई तो मैं फिर सो गया था सुबह जब उठा तो मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आया हुआ था

 मम्मी से जब मैंने उनके बारे में पूछा तो कहने लगे कि वह आज भी घर पर थी वह वॉशरूम में थी वह तो कहीं भी नहीं गई थी यह कहते हुए मम्मी परेशान हो गई थी मगर उस वक्त मैंने अपने चेहरे को छुपा लिया था उन्हें मैं कुछ भी जाहिर नहीं करना चाहता था मैं अपनी आंखों से देखना चाहता था कि मम्मी आखिर कहां जाती है और वह क्या करते हैं दूसरी तरफ मैं कॉलेज में अपने दोस्तों से उन लड़कों से बहुत तंग था 

जो रूपा के दिल में अपनी मोहब्बत पैदा करना चाह रहे थे और जब रूपा उनकी तरफ कोई भाव नहीं दिखा रही थी तो वह इस बात का बदला भी मुझसे ले रहे थे बात-बात पर वह मुझे तंग करते और मेरी झूठी शिकायत लगाते एक दिन एक लड़के ने मुझ पर चोरी का इल्जाम भी लगा दिया था उस वक्त मेरे बैग में मेरी मम्मी के दिए हुए पैसे मौजूद थे जब वह लड़का शोर मचाने लगा कि मैंने उसके पैसे चुराए हैं

 इस सबसे मुझे बहुत ज्यादा शर्मिंदगी हो गई थी वह कहने लगा कि इसके पास तो जरूरत के पैसे भी नहीं होते और इस वक्त इतने सारे पैसे इसके बैग में क्या कर रहे हैं यह पैसे मेरे और यह इसने चुराए हैं यह सब वह मुझे रूपा की नजर में गिराने के लिए कर रहा था जबकि रूपा कहने लगे कि यह बहुत अच्छा लड़का है मेरे बैग में तो हर वक्त इतने सारे पैसे पड़े रहते हैं आज तक तो इसने कभी चोरी करने की कोशिश नहीं की तुम्हें गलतफहमी हुई है तुम बिना वजह इस पर इल्जाम लगा रहे हो 

और फिर बाकी लड़कों ने भी जब मेरे हक में गवाही दी तो वह लड़का फिर खामोश हो गया था मगर वह ना जाने क्यों मुझे अपना दुश्मन समझने लगा था उन लोगों की वजह से मेरी पढ़ाई अक्सर मुश्किल होने लगी थी ऊपर से रूपा भी हर वक्त मेरे ख्यालों में रहती थी मम्मी की वजह से भी मैं बहुत परेशान था मगर अब वह दो-तीन दिन घर पर ही थी वह घर से बाहर कहीं भी नहीं गई थी मैं भी यह देखकर खुश हो गया मगर कुछ दिनों के बाद जब फिर से वही सिलसिला शुरू हो गया 

तो मेरा गुस्से से दिमाग फटने लगा था आज की रात मैं जाग रहा था कि जैसे ही आज मम्मी घर से बाहर निकलेंगी तो मैं भी उनके पीछे चल पड़ूंगा काफी रात गुजर गई थी और फिर जब मुझे दरवाजे पर आवाज सुनाई दी तो मैं फौरन से अपने कमरे से बाहर निकला और पिछले दरवाजे से तेज तेज कदमों से चलता हुआ अपनी गली में दाखिल हो गया था मम्मी मुझे गली में जाते हुए नजर आई तो मैं उनका पीछा करने लगा था 

मैं खुद को अंधेरे में छुपाकर उनका पीछा कर रहा था ताकि उनकी नजर मुझ पर ना पड़े मैं आसानी से उन तक पहुंच भी जाऊं लेकिन चलते-चलते वहां से काफी दूर निकल चुका था मैं सोच रहा था कि मुझे अगर कुछ ऐसा देखने को मिले जिससे मुझे अगर अपनी मम्मी से नफरत महसूस होने लगी तब मैं क्या करूंगा क्या मैं मम्मी को छोड़कर चला जाऊंगा या उन्हें समझाऊ कि वह यह काम ना करें अब यह तो वक्त ने तय करना था कि मैंने क्या फैसला करना था मम्मी चलते-चलते एक घर में आ गई थी

 इस घर का काम अभी हो रहा था और मैं हैरान था कि मम्मी इस बिल्डिंग में क्या कर रही थी वही कमरे में आ गए तो मैं भी चुप के वहां पर आ गया और थोड़ी देर के बाद जब मैं उस कमरे में दाखिल हुआ जहां पर मम्मी गई थी तो यह देखकर मेरे पांव के नीचे जमीन निकल गई थी क्योंकि मेरे सामने जब मैंने आंख खोली तो मम्मी पापा को आपस में लड़ते झगड़ते ही देखा था उन दोनों की आपस में बिल्कुल भी नहीं बनती थी मम्मी तो बहुत अच्छी थी पापा का ख्याल भी रखते थे हर बात भी उनकी मानती थी 

मगर ना जाने क्यों पापा उनके साथ ऐसा स्लक करते थे पापा जब भी घर में आते तो घर को चारों तरफ से करते थे वह बेड के नीचे अलमारी के पीछे पर्दों को उठा उठा कर देखते थे कि वहां पर कोई मौजूद तो नहीं है जब मैं बड़ा हो रहा था मुझे पापा की यह हरकतें समझ में नहीं आती थी वह बात-बात पर मम्मी को मारते उनके साथ बदतमीजी करते और जब मैं मम्मी से इसकी वजह पूछता तो वह रो पड़ती और मुझे कहती है कि तुम्हारे पापा शक करते हैं ना 

जाने उन्हें ऐसा क्यों लगता है कि उनकी गैर मौजूदगी में मैं घर में किसी को बुलाती हूं मैं उनको धोखा दे रही हूं उनके साथ बेवफाई कर रही हूं मैं जानता था कि मेरी मम्मी ऐसी नहीं है वह ऐसा कभी कर ही नहीं सकते यकीनन पापा को मम्मी पर गलत शक हो गया और फिर मम्मी को मैंने अक्सर फोन पर रोते हुए देखा था वह किसी के साथ पापा की शिकायत भी लगाते थे और जब मैं उनसे पूछता कि आप किससे बात कर रही हैं तो वह रोते हुए कहती है कि मैं अपने दोस्त के साथ बात करी थी

 मगर मुझे यह बहुत बुरी लगती थी कि वह पापा के बारे में अपने दोस्त को बातें क्यों बताती थी अब तो पापा रोज-रोज उन पर हाथ उठाने लगे थे और यह सब कुछ मेरे लिए बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल था उस दिन जब पापा ने मम्मी को बहुत मारा तो उनके नाक और मुंह से खून निकलने लगा था मैंने पापा को गुस्से से कहा कि आज के बाद आप मेरी मम्मी को हाथ नहीं लगाएंगे

 आप उनके साथ ऐसा जानवरों जैसा सलूक क्यों करते हैं तब वह गुस्से से कहने लगे कि इसका गैर मर्दों के साथ संबंध है और यह मैं दूसरों के घर में भी आते जाते हैं ना जाने यह किस-किस के साथ मुंह काला करती है मेरे होते हुए इसे कहीं और जाने की क्या जरूरत है अब मैंने भी दोनों हाथों में सिर थाम लिया था पापा के शक का तो कोई इलाज मुमकिन ही नहीं था यही सब कुछ देखते देखते में बड़ा हो गया था मम्मी ने सारी जिंदगी गुजार दी थी वह कभी भी पापा को छोड़कर कहीं नहीं गई थी 

मैं जब कभी उनसे यह पूछता कि वह आपके साथ इतना बुरा सलूक क्यों करते हैं आप उन्हें छोड़कर क्यों नहीं चली जाती तब वह रोते हुए कहती कि मैं तुम्हारे पापा से मोहब्बत करती हूं मैं उन्हें छोड़कर कैसे जा सकती हूं वह मेरे बगैर अकेले पड़ जाएंगे यह जो कुछ भी वह करते हैं यह जानबूझकर नहीं करते बल्कि यह तो उनकी जहनी बीमारी है उनके दिमाग में बचपन से ही यह बात बैठ चुकी है कि हर औरत बेवफा होती है

 क्योंकि उनकी मां ऐसी ही थी वह उनके बाप के घर से जाने के बाद घर में किसी को बुला लिया करती थी तुम्हारे पापा यही सब देखते हुए बड़े हुए हैं उन्हें लगता है कि दुनिया की सारी औरतें ही ऐसी हैं जबकि मेरी मोहब्बत भी उन्हें बदल नहीं सकी और इस वजह से मैं उन्हें छोड़कर कहीं जा सकती हूं मेरा दुनिया में कोई भी नहीं है तुम जानते हो कि मेरे माता-पिता का इंतकाल हो चुका है 

मैं तो दुनिया में अकेली हूं मैं कहां जाऊंगी मेरा इसके अलावा कोई ठिकाना नहीं है जब तुम बड़े हो जाओगे किसी काबिल बन जाओगे तो मुझे फिर यह सब कुछ सहने की जरूरत नहीं पड़ेगी और फिर मैं बहाने से उन्हें एक सिकाय ट्रस्ट के पास भी लेकर गया था मगर पा को जब यह बात मालूम हो गई कि वह दिमाग का डॉक्टर है तो घर आकर उन्होंने मुझ पर बहुत शोर किया वह मुझे कहने लगे कि मैं उन्हें पागल समझता हूं

 कल को मैं उन्हें पागल खाने भेज दूंगा अब तो वह मुझे भी अपना दुश्मन समझने लगे थे उन्हें लगने लगा था कि मैं और मम्मी उनके खिलाफ साजिशें करते रहते हैं यह चीज मुझे बहुत ज्यादा तकलीफ देती थी पापा एक दिन हम दोनों को छोड़कर इस दुनिया से चले गए थे मुझे इस बात का बहुत दुख था मगर इस बात की भी कहीं ना कहीं खुशी भी थी कि मेरी मम्मी को इस शख्स से छुटकारा मिल गई थी

 उनके इस जुल्म से जान छूट गई थी जो मेरे पापा उनके साथ करते थे मगर अब मम्मी पर घर के साथ-साथ बाहर की जिम्मेदारी अभी आई थी अब वही काम करने लगी थी मैं छोटा था मैं कोई काम अभी नहीं कर सकता था मगर इसके बावजूद भी मैं चाहता था कि मैं खुद मेहनत मजदूरी कर लूं मगर अपनी मां को कमाने के लिए घर से बाहर निकलने दो बेशक मैं अभी छोटा था

 मगर मैं यह बात अच्छे से जानता था कि हमारे मोहल्ले में घर से बाहर निकलने वाली औरत को यह मर्द किस नजर से देखते हैं उसके बारे में क्या सोचते हैं यह जानते हुए मैं अपनी मम्मी को घर से बाहर कैसे निकलने दे सकता था मगर मजबूरी थी वह मुझे कहने लगी कि तुम अभी बहुत छोटे हो कुछ साल गुजरने दो उसके बाद मैं तुम्हें काम करने से मना नहीं करूंगी मगर इसके साथ-साथ तुम अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दोगे और अभी तुमने सिर्फ पढ़ाई करनी है अच्छी पोजीशन लेनी है

 मुझे इसके अलावा तुमसे और कुछ नहीं चाहिए यह मेरी ख्वाहिश है जो तुमने पूरी करनी है और फिर से दिन रात में पढ़ाई में जुट गया था पूरा दिन मम्मी फैक्ट्री में काम करती थी और शाम को जब घर आते थे तो वह बहुत ज्यादा थकी होती थी मुझे उन पर तरस भी आता था मैं घर के कामों में उनकी मदद करवाता था मैंने कभी भी अपने निजी काम के लिए उन्हें तकलीफ नहीं दी थी मैं कभी-कभी अपने कपड़े धो लिया करता था 

अपने लिए खाना भी बना लिया करता था और उन्हें भी जो काम कहती करके दे दिया करता था वह इसी पर ही खुश हो जाते थे मुझे उन पर फक्र होता था कि वह कितनी अच्छी थी उन्होंने आजादी का गलत फायदा नहीं उठाया था मगर अब जब मैं उन्हें रात को घर से बाहर निकलते हुए देखने लगा तो मेरे दिल में यह बात खटखटाने लगी थी कि यकीनन वह कोई गलत काम कर रही थी यही सोचते हुए जब मैं उनके पीछे आया तो उसे जगह पर जाकर मेरे पांव के नीचे से जमीन निकल गई थी

 मैं बे यकीनी से सामने का मंजर देख रहा था ऐसा कैसे हो सकता था मम्मी को यह सब करने की क्या जरूरत थी उनका रात को यह सब करना मेरे लिए किसी तरह से भी बर्दाश्त करने के काबिल नहीं था मुझे तो खुद से घिन आ रही थी मैं फौरन से वहां पर गया मम्मी का हाथ पकड़ लिया उन्होंने मुझे जब अपने सामने देखा तो वह भी हैरान परेशान रह गई उन्हें भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं उन्हें रंगे हाथ पकड़ लूंगा उन्हें यह सब करते हुए देख लूंगा 

वह शर्मिंदा हो गई वह मुझे कहने लगे तुम तो घर में सो रहे थे तुम यहां कैसे आ गए वह बुरी तरह से घबरा गए थे मैं उन्हें कहने लगा कि मैं आपकी वजह से ही आया हूं मैं देखना चाहता था कि आप कहां जाती हैं और क्या करती हैं मगर मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि आप यह काम कर रही होंगी मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या कर गुजरू वह मेरे आंसू पोछने लगी 

फिर मुझे कहने लगी मजबूरी में इंसान कुछ भी कर गुजरता है तुम जानते हो कि मैं पढ़ी लिखी नहीं हूं मैंने तो शुक्र किया था कि उस फैक्ट्री में मुझे काम मिल गया है मगर वहां पर मेरी तनख्वा बहुत कम है तुम जानते हो कि कितनी मुश्किल से हमारा गुजारा हो रहा है और जो कुछ मैंने तुम्हारे हवाले से सोच रखा था उसके लिए ज्यादा पैसा भी चाहिए और ज्यादा पैसा कमाने के लिए मुझे कुछ ना कुछ तो करना ही था 

उनके बात सुनकर मैंने उन्हें कहा कि मगर आज के बाद मैं आपको यह सब नहीं करने दूंगा मेरी रत गुवारा नहीं करती मैं उसी वक्त अपनी मम्मी का हाथ पकड़कर घर ले आया और उन्हें कहने लगा कि आज के बाद मैं आपको रात के वक्त कभी घर से बाहर निकलने नहीं दूंगा और यह मेरा आखिरी फैसला है मुझे मम्मी पर गुस्सा भी आ रहा था और उन पर तरस भी आ रहा था जो कुछ मैंने देखा था उसे मैं चाहकर भी अपनी आंखों के सामने से झुठला नहीं पा रहा था

 पूरी रात वह मंजिर मेरी आंखों के सामने आता रहा और मुझे खुद पर गुस्सा आता रहा कि मैं कैसा बेटा हूं मैं जवान मर्द हूं और मुझे तो डूब मरना चाहिए कि मेरी मां यह सब कर रही है और मैं घर में सुकून से चैन की नींद सो रहा हूं अब मैं खुद में एक तब्दीली महसूस कर रहा था अगले दिन जब मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए गया तो आज भी रूपा मेरे पास ही बैठे हुए थे आज भी वह रोज की तरह हसीन लग रही थी 

मगर आज मेरा उसकी तरफ ध्यान नहीं था आज मैं कुर्सी पर बैठा सोच रहा था कि मुझे क्या काम करना चाहिए जिससे हमारे घर में पैसों की बारिश हो सके और फिर छुट्टी के बाद ही मैंने एक एकेडमी में जाकर ट्यूशन पढ़ाने की बात की तो उन्होंने मेरा टेस्ट लेकर मुझे काम पर रखने के लिए रजामंदी का इजहार कर दिया था और मुझे कहने लगे तुम कल से ही यहां आ जाओ जब मैं घर आया तो मैं बहुत ही ज्यादा खुश था

 मुझे खुश देखकर मम्मी कहने लगी क्या बात है आज तुम पहले से बहुत बदले बदले से लग रहे हो तब मैंने मम्मी को यह बात बताई तो वह गहरी सांस लेकर कहने लगे मगर मैं यह सब नहीं चाहती अगर तुम इतनी मेहनत करोगे तो तुम्हें पढ़ाई का वक्त कब मिलेगा अभी तुम्हारी मां जिंदा है तुम्हें यह सब छोड़ना चाहिए मैंने खुद कुछ कर लूंगी मगर मैंने मम्मी को साफ कह दिया कि आपको मैं वह सब नहीं करने दूंगा जो आप करना चाहती हैं

 आप इस बात को भूल जाएं कि आपको रात के वक्त मैं घर से बाहर निकलने दूंगा मेरी बात सुनकर वह रो पड़ी फिर कहने लगे कि यह सब मैंने हमारी मजबूरी के लिए किया है तुम खुद बताओ क्या मेरे पास इसके अलावा कोई रास्ता था क्या मेरा दिल कर रहा था यह सब करने का मेरे पास उनके सवालों के जवाब नहीं थे मुझे अब पढ़ना था काफी सारा समय मेरा एकेडमी में जाया हो गया था और अब मुझे पढ़ लिखकर अपने लिए जिंदगी को आसान बनाना था आधी रात तक मैं किताबें खोले बैठा रहा

 और फिर अगले दिन कॉलेज में चला गया अब मेरी रूटीन ऐसी ही बन गई थी अब चाहे मेरी जिंदगी में रूपा आती हो या उससे भी ज्यादा हसीन लड़की मुझे अब कोई लड़की भी अपनी तरफ नहीं लाना था जो मंजर मैंने देखा था वह मुझे किसी भी तरह से भूला नहीं रहा था मेरी मां ने यह सब आखिर क्यों किया बार-बार मैं यही सोचता जा रहा था और खुद को कोस रहा था मैं अपनी याद दस से उस मंजर को हटाना चाहता था

 मगर मुझे पता था कि ऐसा नामुमकिन है शायद ही अपनी जिंदगी में इस बात को कभी भूल पाऊंगा यह रूटीन बहुत ही ज्यादा थका देने वाली थी मैं थक जाता था मगर आगे बढ़ने का ख्वाब ऐसा था जो मुझे थकावट में भी ताजगी का एहसास दिलाता था और मैं फिर से जी उठता था फिर से मैं मेहनत करने लगता था जानता था कि एक ना एक दिन मेहनत का फल जरूर मिलेगा और फिर कितने ही महीने बीत गए अब मेरे पेपर्स भी होने वाले थे इन दिनों में इधर-उधर से अपना ध्यान हटाकर पढ़ाई करने लगा था 

रूपा पढ़ाई के मामले में कमजोर थी मैं उसकी भी मदद कर दिया करता था अब तो कॉलेज से छुट्टियां थी इसलिए रूपा पढ़ाई में मदद लेने के लिए मेरे घर आने लगी थी मम्मी को वह बहुत पसंद थी मम्मी उसकी आदत की बहुत तारीफ करती थी कि इतनी अमीर लड़की होने के बावजूद भी वह आज कल की लड़कियों से बहुत अलग है और मैं उनकी बातों को मुस्कुरा कर सुन लिया करता था

 साथ मेरा इस बात पर भी ध्यान था कि मम्मी फिर से कहीं रात को घर से बाहर तो नहीं निकलती मैं रात को उठकर उनके कमरे में जाता उन्हें जब सोता हुआ देखता तो फिर अपने कमरे में आ जाता कई बार वह इस तरह से डिस्टर्ब भी हो जाती थी और फिर मुझे अपने सामने देखकर वह फूट फूट कर रो पड़ती और मुझे कहती तुम्हें यकीन क्यों नहीं आता कि मैं कहीं भी नहीं जाती मैं अब अपने घर में ही रहती हूं 

मगर तुम इसके बावजूद भी बार-बार आकर मुझे देखते हो तुम भी अपने बाप की तरह शक करने वाले हो गए हो तुम्हें भी किसी पर विश्वास नहीं होता जब उन्होंने मेरा अपने बाप से कंपेयर किया तो मुझे यह बात पसंद नहीं आई थी क्योंकि मैं अपने पापा की तरह बिल्कुल भी नहीं था मैं उनसे कहने लगा कि मुझे आपकी परवाह है मैं नहीं चाहता कि आपको कोई नुकसान पहुंचे आपके साथ कुछ गलत हो तभी मैं आपका ख्याल रखने की कोशिश करता हूं जिंदगी अब यूं ही बिती जा रही थी कॉलेज में मैंने टॉप किया था 

और फिर मेरे यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू हो गई थी अब तो मैं पार्ट टाइम एक ऑफिस में जॉब करने लगा था और मम्मी को मैंने फैक्ट्री से काम भी छुड़वा दिया था मैं सुबह से लेकर रात तक बिजी रहता था मगर मुझे इस सब से अफसोस नहीं था बल्कि मुझे खुशी थी कि मैं अपने सारे जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा रहा था और फिर कितने ही साल बीतते चले गए रूपा मेरे साथ ही यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी उसके पापा का इरादा था कि वह उसे बाहर पढ़ाई के भेजे मगर ना जाने क्यों रूपा इस बात पर राजी नहीं होती थी

 वह अब भी मेरे साथ ही रहती थी अब भी कितने ही लड़के उसकी तरफ बढ़ते थे उससे दोस्ती करना चाहते थे मगर वह किसी को भी पसंद नहीं करते थे हर वक्त वह मेरे ही साथ रहती थी और सब लोग मुझसे जला करते थे कि मेरी वजह से वह रूपा के दिल में अपनी मोहब्बत पैदा करने में नाकाम हो रहे हैं अब जब मेरी यूनिवर्सिटी की डिग्री भी पूरी हो गई तो मुझे एक बहुत अच्छी कंपनी में नौकरी मिल गई थी और फिर फिर एक दिन रूपा ने मुझसे एक ऐसी बात की जिसे सुनकर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था 

रूपा ने मुझसे शादी की बात थी और मुझे कहा कि मैं उसके मम्मी पापा से मिलकर उसके साथ शादी करने की बात करूं यह सुनकर मुझे एक अजनबी से खुशी का एहसास हुआ था मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि रूपा जैसी शानदार लड़की मेरी जिंदगी में शामिल हो सकती है जो मुझसे प्यार कर सकती है जब यह बात मैंने अपनी मां को बताई तो उन्हें भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था वह मुझे कहने लगे कि वह लड़की मुझे पहली ही नजर में पसंद आई थी और मैंने उसे हमेशा तुम्हारे साथ देखा था

 रूपा के मम्मी पापा को भी कोई प्रॉब्लम नहीं था अब जब वह मेरी जिंदगी में हमेशा के लिए शामिल होने वाली थी तो मैं खुद को खुशकिस्मत इंसान समझ रहा था यह सब कुछ मेरी मेहनत की वजह से ही मुमकिन हुआ था और यह मेहनत का जज्बा मेरे दिल में तब जागा था जब मैंने उसे दिन अपनी मां का पीछा किया था और मैं उनके बारे में गलत सोच रहा था शायद वह कोई गलत काम करने के लिए रात को घर से बाहर निकलती है 

जब मैं उनका पीछा करके वहां पहुंचा तो देखकर मेरे पैरों के नीचे से जमीन निकल गई थी क्योंकि वह वहां पर उनके अलावा चार पांच और भी औरतें मौजूद थी और बार में जाकर डांस करती थी और उससे जो पैसे हासिल होते थे वह मेरे लिए बचा के रखती थी ताकि मुझे किसी किस्म की तकलीफ का सामना करना पड़े यह सिर्फ वह मेरी मोहब्बत में कर रही थी और उन्हें यह करता देखकर ही मुझे बहुत दुख हुआ था अगर मुझे कोई पूरा होता तो उन्हें इतनी मेहनत करने की क्या जरूरत थी 

तभी मेरे दिल में यह जज्बा पैदा हुआ था और अब मैं एक कामयाब इंसान के रूप में जिंदगी गुजार रहा था और मेरी मां भी मुझसे बहुत खुशी थी और यकीनन यह मेरी सबसे बड़ी कामयाबी थी मेरी शादी में दो दिन रह गए थे जब मां मुझे कहने लगी कि तुम अपनी बीवी को बहुत प्यार करोगे हमेशा उसे मानोगे उस पर कभी भी शक नहीं करोगे और कभी भी उसके साथ वह सलूक नहीं करोगे जो तुमने अपने बाप को मेरे साथ करते हुए देखा था

 यह सुनकर मैं हैरान रह गया मां से पूछा कि आप ऐसा क्यों कह रही हैं क्या आप मुझे ऐसा समझती हैं तो वह अच्छे अंदाज में हंसते हुए कहने लगे कि बच्चा जो कुछ बचपन में अपने मां-बाप को करते हुए देखता है वह अपने जहां में बिठा लेता है इसलिए मैं नहीं चाहती कि जो कुछ तुमने अपने बाप को करते हुए देखा है तुम वह सब कुछ अपनी जिंदगी के साथ करो मैंने अपनी मां से वादा किया कि मैं ऐसा नहीं करूंगा अगर मुझे पूजा पर गुस्सा भी होता था तो मैं नाराज भी होता था

 मगर कभी मैंने उस पर हाथ नहीं उठाया कभी भी उस पर शक नहीं किया था और यह सब मैं सिर्फ उसकी मोहब्बत में नहीं बल्कि अपनी मां से किए गए वादे को निभाने के लिए कर रहा था | 

 

Read More – 

अच्छा पिता या अच्छा पति | Short Moral Stories In Hindi | Sad Hindi Story | Meri Kahaniyan

धोखेबाज लोगो से दूर रहे | Mastram Ki Hindi Kahaniyan | Sad And Emotional Hindi Story

मालिक ने मेरे साथ गलत किया | Mastram Ki Kahaniyan | Sad And Emotional Hindi Story

Leave a Comment