अपनी बेटियों की हिफाजत करिए | Desi Kahani | Sad And Emotional Hindi Story | Meri Kahaniya

Desi Kahani : मेरा नाम काजल है मेरी बहन शादी से पहले बहुत अच्छे बिहेवियर की थी उसके होने से ही घर में रौनक होती थी क्योंकि वह सारा दिन हंसती बोलती रहती थी हम पांच भाई बहन थे मेरे मम्मी पापा के लिए तो हम पांचों भाई बहन बराबर थे लेकिन हमारी दादी हमेशा मेरे मम्मी पापा को यह एहसास दिलाती थी कि बेटियां तो माता-पिता के लिए बोझ होती है असल अहमियत तो बेटों को देनी चाहिए जो पीढ़ी को आगे बढ़ाते हैं 

और पैसे भी ढेर सारे कमा करर लेकर आते हैं मेरी दादी मेरे माता-पिता के दिमाग में बेटे और बेटियों में फर्क करना डालती रहती थी क्योंकि मेरी दादी की भी कोई बेटी नहीं थी उन्होंने चार बेटों को जन्म दिया था और हम चार बहनें थी और हमारा एक ही भाई था मेरी दादी हमारे भाई से बहुत प्यार करती थी और हम बहनों को तो वो मुंह तक नहीं लगाती थी

 मेरी मम्मी को इस बात पर बहुत एहसास होता था कि दादी उनकी बेटियों को कुछ नहीं समझती हमारा भाई भी हम बहनों से उखड़ा उखड़ा रहता था क्योंकि दादी उसे हमारे बारे में उल्टी सीधी बातें बताती थी फिर एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे माता-पिता के दिमाग में भी हम बहनों के लिए गलत बातें आ गई उन्होंने भी हमें बोझ समझ लिया था और वह हमें जल्द से जल्द अपने सर से उतारना चाहते थे व जल्दी ही हमारी शादियां करना चाहते थे

 मेरे मम्मी पापा बस यही सोचते थे कि उनकी चार बेटियां हैं और सबसे छोटा एक ही बेटा है इस वजह से उनके सर पर बहुत बड़ा बोझ है जिन्हें वह हर हाल में ही अपने सर से उतारना चाहते थे अभी मेरी बड़ी दीदी 18 साल की हुई थी जब मेरे मम्मी पापा को उसकी शादी की फिक्र हो गई मेरे पापा का कहना था कि जो भी रिश्ता आएगा वह मेरी दीदी की शादी कर देंगे मम्मी उन्हें रोकती थी 

और कहती थी कि अभी उनकी बड़ी बेटी की उम्र इतनी भी नहीं हुई है कि उसे बोझ समझकर इस तरह से अपने सर से ना टाले मगर पापा मम्मी की बात नहीं सुनते थे पापा का बस यह कहना था कि बेटियों को जितनी जल्दी हो सके उनके घर का कर देना चाहिए फिर मुझे अपने बेटे की परवरिश पर भी तो ध्यान देना है इन बेटियों की वजह से मेरे बेटे की कोई चाहत पूरी नहीं हो पाएगी पापा की यह बात सुनकर हमें बहुत अफसोस हुआ था मगर उन्हें इतनी भी जल्दी करने की कोई जरूरत नहीं थी

 यह बात पापा को समझ नहीं आती थी मेरी दीदी के लिए कहीं से कोई रिश्ता नहीं आ रहा था और यही बात मेरे पापा को खल रही थी मम्मी पापा को समझाती रहती थी कि वह थोड़ा और सब्र करें जब मेरी बहन की किस्मत में लिखा होगा तब उसका रिश्ता हो जाएगा पापा को ना जाने किस बात की जल्दी थी वह जल्द से जल्द हम चारों बहनों को हमारे घर का कर देना चाहते थे मम्मी पापा को ज्यादा रोकती टोक की तो पापा मम्मी को डांट दिया करते थे 

 

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इस बात पर मम्मी खामोश हो जाती थी और उनको कहते थे कि तुम्हें बस अपनी बेटियों की ही फिक्र रहती है कभी बेटे की भी फिक्र करो मेरी दीदी की उम्र अभी 18 साल थी लेकिन मेरे पापा को ऐसा लगता था कि ना जाने दीदी की कितनी उम्र हो गई है मेरे पापा का कहना था कि अगर मेरी दीदी की शादी एक दो साल में नहीं हुई तो उनकी उम्र निकल जाएगी पता नहीं मेरे पापा क्या सोच रखकर बैठे हुए थे 

वह बस चाहते थे कि किसी भी तरह उनकी बेटियों की शादी हो जाए ताकि वह सुकून से अपने बेटे के साथ रह सके दादी तो हर टाइम पापा को भड़का रहती थी और यही कहती थी कि जल्द से जल्द अपनी बेटियों को इस घर से विदा करो और अपने बेटे पर ध्यान दो बड़े होने के बाद यही तुम्हारा नाम रोशन करेगा जिंदगी मौत का कोई भरोसा नहीं है अगर तुम्हें कुछ हो गया तो तुम्हारी बेटियों की सारी जिम्मेदारी तुम्हारे इस छोटे से बेटे पे आ जाएगी और बेटियों का क्या है यह तो दहेज लेकर अपनी ससुराल को चली जाएंगी

 बस यही सोचकर मेरे पापा को हमारी शादी की बहुत जल्दी थी पापा मम्मी से यही कहने लगे थे कि वह हम लोगों के रिश्ते देखने के लिए कुछ लोगों से बात करें हम दो बहनें सबसे बड़ी थी मैं अपनी दीदी से 2 साल छोटी थी मेरे पापा मेरा और मेरी दीदी का रिश्ता करने की बात कर रहे थे क्योंकि वह हम दोनों की शादी एक साथ करना चाहते थे उसके एक साल बाद उनका कहना था कि वह मेरी दोनों छोटी बहनों की भी शादी कर देंगे लेकिन मेरी मम्मी इस बात से बहुत खिलाफ थी 

मम्मी नहीं चाहती थी कि इतनी कम उम्र में उनकी बेटियों की शादी हो जाए लेकिन इस घर में तो सिर्फ पापा और दादी की ही चलती थी मम्मी की बात की तो कोई वैल्यू ही नहीं थी हमेशा मेरी मम्मी को गरीब घर के होने की ताने दिए जाते थे क्योंकि मेरे पापा का कारोबार अच्छा था और मेरी मम्मी गरीब परिवार से आई हुई थी तब से लेकर आज तक मेरी मम्मी इस ताने को बर्दाश्त कर रही थी

 हम हम लोगों ने आज तक कभी भी मम्मी को खुश होते हुए नहीं देखा था हमेशा ही दादी और पापा की जबान पर उनके लिए ताने ही होते थे पापा तो अपनी बेटियों से ज्यादा बातचीत नहीं करते थे लेकिन दादी हमें बातें सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी और हमारे भाई को सीने से लगाकर रखती थी मेरी मम्मी दादी का बहुत ख्याल रखने की कोशिश करती थी मगर इस घर में कभी भी मेरी मम्मी को किसी तरह की इज्जत नहीं दी गई और यही हाल हम चारों बहनों का भी था

 इस बात पर हम बहनों का दिल बहुत दुखता था मगर दादी और पापा के सामने किसी की भी बोलने की हिम्मत नहीं होती थी हम सब पापा और दादी से बहुत डरते थे क्योंकि वोह लोग किसी का भी लिहाज नहीं करते थे दादी तो हम बहनों पर हाथ भी उठा लिया करती थी हर टाइम वह हमें कोसती रहती थी कि हम बेटियां क्यों पैदा हो गए दादी को लगता था कि इसमें हमारी और हमारी मम्मी की ही गलती है वह हमेशा यही कहती थी कि अगर चार-चार बेटियां पैदा हुई हैं तो इसमें मेरी मम्मी की ही गलती है 

और बेटा सिर्फ एक ही पैदा की है मेरी मम्मी हमेशा रोती रहती थी कि हम चार बेटियां क्यों पैदा हो गई एक बेटा पैदा करने के बाद भी इस घर में मेरी मम्मी की कोई वैल्यू नहीं थी मगर अब कुछ नहीं हो सकता था भगवान ने नाम चलाने के लिए एक बेटा तो दे ही दिया था लेकिन दादी और पापा इस बात को बिल्कुल नहीं समझते थे मम्मी ने पंडित जी से मेरे और दीदी के रिश्ते ढूंढने की बात की थी 

कुछ समय के बाद पंडित जी हमारे घर पर एक रिश्ता लेकर आए थे यह रिश्ता मेरी मम्मी को ठीक नहीं लगा था इसलिए मेरी मम्मी इस रिश्ते के खिलाफ थी मगर पापा ने मम्मी से मना कर दिया था कि वह इस मामले में कुछ भी ना बोले जो भी फैसला होगा वह पापा और दादी खुद कर लेंगे जो रिश्ता पंडित जी लेकर आए थे मेरे पापा ने पंडित जी से बिना कुछ पूछे रिश्ते वालों को घर बुला लिया था उनका कहना था कि हम जितना छानबीन करेंगे उतना ही हमें रिश्ते तलाश करने में दिक्कत आएगी

 फिर लड़के वाले हमारे घर मेरी बहन को देखने के लिए आ गए थे उस दिन मेरी मम्मी ने बहुत अच्छी तैयारी की थी हालांकि मेरे पापा फिजोल खर्ची के बहुत खिलाफ थे मगर यह रिश्ता हाथ से ना निकल जाए इसलिए उन्होंने उन लोगों के लिए दिल खोलकर इंतजाम किया था क्योंकि कुछ लोग लालची टाइप के होते हैं अगर उनके सामने खाने पीने की ज्यादा वैरायटी रखी जाए तो हीन लोगों को लड़की पसंद आती है 

वरना लड़की में हजार कमियां निकालकर रिश्ते से मना कर देते हैं इसलिए पापा चाहते थे कि वोह लोग पहली बार में ही उनकी बेटी को पसंद कर ले मगर यह सब तो भाग्य के खेल होते हैं पूरे हफ्ते बहुत दिल लगाकर इन लोगों के आने की तैयारी की गई थी पैसा भी पानी की तरह बहाया गया था जबकि हमें किसी भी चीज की जरूरत होती थी तो उसके लिए हमें पापा से पहले कई बार रिक्वेस्ट करनी पड़ती थी

 तब जाकर हमें वह चीज मिलती थी हालांकि हमारे भाई को एक बार के कहने पर ही सब कुछ हासिल हो जाता था क्योंकि वह बेटा था मगर अब जब हमारे रिश्तों की बारी आई थी तो पापा और दादी हमें घर से निकालने के लिए पैसा पानी की तरह बहा रहे थे इन कामों के लिए तो उनका दिल नहीं दुख रहा था मगर उन्हें इस तरह से पैसा खर्च करते हुए देखकर हम लोग बहुत दुखी हो रहे थे हमें यहां जरूरत की चीजों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ता था मगर हमें घर से निकालने के मामले में खूब पैसे खर्च हो रहे थे

 फिर भी लड़के वालों को मेरी दीदी पसंद नहीं आई थी क्योंकि उनकी नजर में उनका बेटा किसी हीरो से कम नहीं था और उन्हें अपने हीरो बेटे के लिए कोई हीरोइन टाइप जैसी ही लड़की चाहिए थी और मेरी बहन उनकी पसंद के मुताबिक नहीं थी इन लोगों को मेरी दीदी के रंग रूप में हजारों कमियां नजर आई थी इन लोगों की नजर में मेरी दीदी का रंग सांवला था और मेरी दीदी की हाइट भी कम लगी थी 

बस इसी वजह से उन्होंने मेरी दीदी के रंग रूप में हजारों कमियां निकालकर रिश्ते से इंकार कर दिया और जितना भी खाना मेरी मम्मी ने उन लोगों के लिए बनाया था वह सब पूरी तरह से चटक गए थे उन लोगों की इस हरकत ने मेरी दीदी का बहुत दिल दुखा दिया था उन लोगों के जाने के बाद मेरी दीदी बहुत रोई थी क्योंकि लड़के की मां ने मेरी दीदी के मुंह पर ही उनकी कमियां निकाल दी थी

 मेरी दीदी को इस सबका पहली बार सामना करना पड़ा था इसलिए उन्हें बहुत अफसोस हो रहा था अब यह तो नॉर्मल हो गया था हर हफ्ते पंडित जी हमारे यहां पर कोई ना कोई रिश्ता लेकर आ जाते थे और वह लोग हमारे यहां से खूब खा पीकर मेरी बहन के अंदर कमियां निकालकर रिश्ते से इंकार कर जाते थे मेरी दीदी सबसे बहुत तंग आ गई थी मगर मेरे पापा को मेरी दीदी पर बिल्कुल भी ख्याल नहीं आता था 

और पापा ने कई लोगों से मेरी दीदी के रिश्ते के बारे में कहा हुआ था कई सारे लोग ऐसे आते थे जो मेरी दीदी को देखने के लिए आते थे इस वजह से मेरी दीदी की खूब इंसल्ट होती थी क्योंकि लोग उनके मुंह पर ही उन्हें बातें सुनाकर जाने लगे थे यह सब करना तो शायद अब मेरी दादी को भी बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि वह भी अब मेरी दीदी के अंदर कमियां निकालने लगी थी कहती थी कि अगर तुम खूबसूरत होती तो तुम्हारा रिश्ता जल्दी ही लग जाता अब कितनी परेशानी हो रही है 

तुम्हारा रिश्ता होने में मेरी मम्मी उन्हें दिलासा दिया करती थी कि जल्दी ही तुम्हारा ऐसा रिश्ता आएगा जिसे देखकर दुनिया दंग रह जाएगी और हम लोग उस दिन का इंतजार कर रहे थे कि मेरी दीदी के लिए कोई अच्छा रिश्ता आ जाए मेरी मम्मी ने कुछ लोगों से कहा हुआ था कि वह हमारे घर अच्छे ही रिश्ते लेकर आए क्योंकि मम्मी अच्छे से जानती थी अगर कोई गलत रिश्ता हमारे घर आ गया और वह लोग मेरी दीदी से रिश्ता तय करके चले गए तो पापा उनकी शादी में ज्यादा समय नहीं लगाएंगे 

और बिना सोचे समझे ही उनकी शादी कर देंगे यह बात मम्मी को दिन रात सताई जा रही थी क्योंकि मम्मी नहीं चाहती थी कि उनकी बेटी किसी गलत हाथ में जाए ऐसा इसलिए था क्योंकि मेरे पापा उन लोगों में से थे जो बेटियों की शादी करने के बाद उन्हें भूल जाने वाले थे हम जानते थे कि हमारे पापा शादी के बाद कभी हमारा पलटकर हाल तक नहीं पूछेंगे कि उनकी बेटियां किस हाल में है जिंदा भी हैं या मर गई इसी वजह से मेरी मम्मी डरती थी कि अगर उनकी बेटियां गलत हाथों में चली गई तो उनकी सारी जिंदगी नरक बन जाएगी

 इसीलिए मेरी मम्मी चाहती थी कि मेरी दीदी की शादी किसी अच्छे परिवार में हो मेरी दीदी दिन रात इसी बात पर घुटती रहती थी कि हर दूसरे तीसरे दिन उन्हें रिश्ते वाले देखने के लिए आ जाते थे और उन्हें इंकार करके चले जाते थे इन सब हरकतों की वजह से मेरी दीदी दिमागी मरीज बन रही थी उन्हें यकीन हो गया था कि उनके रंग रूप में बहुत सारी कमियां हैं और इसी वजह से उन्हें कोई भी पसंद नहीं करता मुझे अपनी दीदी की यह हालत देखकर बहुत दुख होता था मगर मैं उनके लिए कुछ कर भी तो नहीं सकती थी

 सेवाय खामोशी से सब कुछ देखने के क्योंकि पापा के सामने तो कभी किसी की नहीं चली है इसी तरह कई महीने गुजर चुके थे मगर अभी तक मेरी दीदी का रिश्ता कहीं पर फिक्स नहीं हुआ था अब तो पापा को और ज्यादा परेशानी होने लगी थी अब तो मेरे पापा ने लोगों से यह कहना शुरू कर दिया था कि अगर मेरी बेटी की शादी जहां भी होगी मैं उसे दहेज में बहुत सारा सोना और पैसे भी दूंगा

 यह सुनकर तो लोग हैरान हो गए थे और खुश भी हो गए थे मगर मेरी मम्मी और ज्यादा परेशान हो गई थी फिर एक दिन ऐसा रिश्ता आ ही गया जिन लोगों को मेरी दीदी पसंद आ गई थी और वह लोग जल्द से जल्द शादी करना चाहते थे उन लोगों को मेरी दीदी के रंग रूप से कोई मतलब नहीं था क्योंकि उनको तो अब सोना और पैसे का लालच मिल गया था 

मम्मी इस बात से बिल्कुल खिलाफ थी वह चाहती थी कि पहले इस रिश्ते के बारे में अच्छी तरह से छानबीन की जाए लेकिन पापा तो शादी के लिए राजी हो गए थे और उन्होंने जल्दी शादी करने का फैसला भी कर लिया या था मम्मी ने पापा को बहुत समझाया था कि वह अपनी बेटी का रिश्ता इतनी जल्दी में फिक्स ना करें और अगर रिश्ता फिक्स कर ही दिया है तो शादी करने में इतनी जल्दी ना करें मगर पापा तो पहले से ही मम्मी की नहीं सुनते थे

 जो अब सुनते पापा ने फौरन ही लड़की वालों को हां कर दी थी और शादी की डेट भी फिक्स कर दी थी मेरी दीदी की शादी की तैयारियां शुरू हो गई थी मगर पता नहीं क्यों मेरी दीदी शादी के नाम पर बिल्कुल ही खामोश हो गई थी एक तो पापा उनकी शादी करने में बहुत जल्दी कर रहे थे ऊपर से उन्होंने लड़के के बारे में कोई इंफॉर्मेशन भी नहीं निकाली थी वह बस अपनी बेटियों का बोझ अपने सर से उतार देना चाहते थे जैसे-जैसे मेरी बहन की शादी के दिन करीब आ रहे थे वह और ज्यादा दुखी रहने लगी थी

 पहले जिसकी हंसी पूरे घर में गूंजती थी अब वो बिल्कुल ही खामोश हो गई थी इसी तरह जैसे वह यह शादी करना ही नहीं चाहती थी मगर पापा जबरदस्ती उसकी शादी करवा रहे थे मेरी दीदी आगे पढ़ना चाहती थी और अपनी जिंदगी में कुछ बनना चाहती थी मगर पापा की जल्दबाजी ने उनके सारे सपने तोड़कर रख दिए थे उन्हें इतना भी टाइम नहीं दिया था कि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सके

 और इसी वजह से वह इस शादी से खुश नहीं थी और पापा तो ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उनकी बेटियों से उनकी मर्जी पूछी जाए इसीलिए पापा ने मेरी दीदी से भी उनकी मर्जी पूछना जरूरी नहीं समझा था और उनकी शादी फिक्स कर दी थी अपनी शादी वाले दिन वह मेरे गले से लगकर फूट-फूट कर रोई थी उनका दर्द मुझे महसूस हो रहा था मगर मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी

 मैंने तो उस समय खुद को बहुत बेबस महसूस किया था मेरी दीदी रोते हुए अपने ससुराल को विदा हो गई थी मेरी दीदी शादी के बाद अपने ससुराल गई तो मुझे उनकी याद दिन रात सताती थी क्योंकि मेरी दोनों छोटी बहनें एक साथ रहती थी और हम दोनों बड़ी बहनें हर काम एक साथ किया करते थे वह मेरी दीदी होने के साथ-साथ मेरी एक अच्छी दोस्त भी थी मेरी दीदी शादी के बाद और भी ज्यादा डरी सहमी रहने लगी थी

 मैं समझ रही थी कि वह शादी के बाद बिल्कुल ठीक हो जाएंगी मगर यह सोच मेरी गलत थी वह तो शादी के बाद और ज्यादा डरी डरी सी रहती थी वह हमारे घर भी बहुत कम आती थी मम्मी उन्हें बुलाबुला करर थक जाती थी कई बार बुलाने के बाद वह हमारे घर पर आती थी और जब भी आती तो एक कोने में खामोशी से जाकर बैठ जाती थी और ना ही हमारी बातों का कोई जवाब दिया करती थी

 वह अपनी तरफ से तो कोई बात करती ही नहीं थी उनकी यह हालत देखकर हम लोग बहुत ज्यादा परेशान थे हम उनसे पूछते भी थे कि अगर आपको कोई परेशानी है तो आप हमें बताओ लेकिन वह हमें कुछ भी नहीं बताती थी बस खामोश बैठी रहती थी कभी-कभी ऐसा लगता था जैसे वह किसी बहुत गहरी सोच में डूबी हुई है मगर मेरी तो कुछ समझ ही नहीं आता था पहले तो वह कभी-कभी हमारे घर आ जाती थी मगर वक्त के साथ-साथ उन्होंने हमारे घर पर आना जाना बहुत कम कर दिया था

 हालांकि उनका पति बहुत अच्छा इंसान था जब भी वह हमारे घर आते थे हम सबके साथ बहुत अच्छा बिहेव करते थे मम्मी पापा की भी बहुत इज्जत करते थे और हम बहन भाई के साथ भी अच्छी तरह से पेश आते थे और जब भी हमारे घर आते थे तो वह हमारे लिए गिफ्ट्स भी लेकर आते थे हम उनसे मना भी करते थे कि वह यह सब ना किया करें लेकिन वह हमारी कोई बात नहीं सुनते थे तो हम लोग उनके प्यार और उनके अच्छे बिहेवियर के आगे मजबूर हो जाते थे मगर मुझे लगता था जैसे मेरी दीदी को यह सब कुछ पसंद नहीं आता 

वह जब भी हमारे घर अपने पति के साथ आई थी उनके चेहरे का रंग बदल जाता था और उनकी तबीयत भी अजीब अजीब से लगती थी हम लोग उनके इस बिहेवियर की वजह पूछ पूछ कर थक चुके थे मगर वह तो हमें कुछ बताती ही नहीं थी ऐसा लगता था जैसे वह हमसे कुछ छुपा रही है और हमें कुछ भी नहीं बताना चाहती मेरी दीदी के इस बिहेवियर ने हम सब लोगों को परेशानी में डाल दिया था हालांकि उनका पति बहुत अच्छा था और उनका बहुत ज्यादा ख्याल रखने की कोशिश करता था

 और यह सब कुछ हमें साफ-साफ नजर भी आता था मगर मेरी दीदी फिर भी अपने पति से दूर-दूर रहती थी मेरी दीदी की शादी को लगभग ढ़ साल होने वाला था मगर इतने समय में हमने कभी भी अपनी दीदी को खुश नहीं देखा था वह जब भी हमारे घर आई थी हमेशा बुझी सी होती थी ऐसा लगता था जैसे कोई बात उन्हें अंदर ही अंदर खाई जा रही है एक दिन मेरी दीदी हमारे घर पर आई

 उस दिन मैंने उनसे बात करने का फैसला कर लिया था मैं जानना चाहती थी कि मेरी दीदी की इस हालत की वजह क्या है मगर उनके मुंह से तो कोई बात भी निकलवाने कोई आसान काम नहीं था मेरी दीदी हमारे घर आई तो हमेशा की की तरह बिल्कुल खामोश बैठी हुई थी मैंने उनसे पूछा कि आप शादी के बाद इतनी खामोश क्यों रहने लगी हो मेरा सवाल सुनकर उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहने लगी ऐसी कोई बात नहीं है

 मैं बिल्कुल ठीक हूं यह कहकर उन्होंने मुझसे अपनी नजरें चुरा ली कि कहीं मैं उनकी आंखों से ही उनका झूठ ना पकड़ लूं मैंने उनसे कहा आपको मुझसे झूठ बोलने की कोई जरूरत नहीं है मैं बस आपके मुंह से सच सुनना चाहती हूं मेरी यह बात सुनकर वह बुरी तरह से रोने लगी और ना जाने कितनी देर देर तक वह रोती ही रही मुझे उनका इस तरह से रोना बिल्कुल भी नहीं देखा जा रहा था

 उन्हें इस हाल में देखकर मुझे बहुत दुख हो रहा था जब वह रोकर खामोश हो गई और उनका दिल कुछ हल्का हो गया तो उन्होंने मुझसे कहा कि मेरा पति अच्छा इंसान नहीं है उनके मुंह से यह बात सुनकर मैं कुछ पल के लिए शॉक्ड रह गई थी मुझे समझ नहीं आया कि दीदी क्या कह रही है मगर बस मैं खामोशी से उनकी बात सुन रही थी मैंने अपनी दीदी से पूछा कि आप ऐसा क्यों कह रही हो हालांकि जीजू तो देख ने में बहुत अच्छे लगते हैं और उनका बिहेवियर भी बहुत अच्छा है

 यह सुनकर मेरी दीदी के चेहरे का रंग बदल गया उन्होंने मुझसे कहा वह इंसान तुम लोगों को जैसा दिखता है वैसा बिल्कुल भी नहीं है वह बाहर से कुछ और और अंदर से कुछ और है कोई भी उसे देखकर यकीन नहीं कर सकता कि वह ऐसा इंसान होगा मेरी दीदी यह सब कहते हुए कांप रही थी जैसे उनसे अब कुछ बर्दाश्त ना हो रहा हो हो सकता है कि उनकी बर्दाश्त की हद पार हो गई हो तभी तो आज वह रो-रो कर सब कुछ बता रही थी

 मगर उन्हें इस हालत में देखकर मुझे बहुत तरस आया मैं सोचने लगी कि मेरी दीदी क्या थी और क्या हो गई अभी मैं उनसे कुछ और सवाल पूछती कि इतनी ही देर में मेरी छोटी बहन ने आकर बताया कि मेरी दीदी का पति उन्हें लेने के लिए आ गया है यह सुनकर वह घबराकर खड़ी हो गई थी जैसे उन्हें ये बात बिल्कुल भी पसंद नहीं आई हो वो जल्दी से कमरे से निकल कर चली गई 

आज ही तो वो मुझे इतनी मुश्किल से सब कुछ बताने के लिए तैयार हुई थी मगर आज भी किस्मत ने मेरा साथ नहीं दिया मेरी दी अपने ससुराल चली गई और उन्होंने अपने पति को हमारे घर बैठने भी नहीं दिया और वैसे भी जब से उनकी शादी हुई थी वह अपने पति को हमारे घर आने ही नहीं देती थी मम्मी ने उन्हें कई बार समझाया था कि वह अपने पति को साथ लेकर आया करें मगर व यह बात समझती ही नहीं थी

 उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं था कि उनके पति हमारे घर आया करें उनका यह बिहेवियर भी हमारी समझ नहीं आ रहा था एक दिन मम्मी ने खास तौर पर दीदी और जीजू को इनवाइट किया मगर दीदी ने मम्मी को इन्विटेशन देने से पहले ही साफ इंकार कर दिया कि वह अपने पति को लेकर हमारे घर नहीं आएंगी उनकी यह बात सुनकर मम्मी को बहुत गुस्सा आया था मम्मी ने उन्हें बहुत डांट लगाई थी और बहुत सी बातें भी सुनाई थी कि वह ऐसी हरकतें क्यों करती है मम्मी को लगता था कि मेरी दीदी को अपने पति की इज्जत करनी नहीं आती

 मम्मी उन्हें बहुत समझाती थी कि अपने पति की इज्जत किया करो मगर मम्मी की सारी ही बातें दीदी एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दिया करती थी और अपनी इसी बात पर कायम रहती थी कि कि वो अपने पति को हमारे घर पर नहीं आने देंगी मम्मी उनकी इस हरकत से बहुत तंग आ चुकी थी क्योंकि उनकी शादी को डेढ़ साल गुजर चुका था मगर आज तक वह कभी भी अपने पति को खुशी से हमारे घर नहीं लेकर आई थी

 और अगर कभी उनके पति हमारे घर आ भी जाते तो वह सुकून से अपने पति को एक मिनट के लिए भी बैठने नहीं देती थी और अपने पति को लेकर फौरन ही हमारे घर से चली जाया करती थी मम्मी उन्हें लाख रोकती रह जाती कि कम से कम खाना तो खाकर जाया करो मगर वो मम्मी की कोई बात सुनती ही नहीं थी मम्मी अपनी बेटी की इस हरकत से अपने दामाद के सामने बहुत शर्मिंदा होती थी क्योंकि शादी के बाद बस एक या दो बार ही उनके पति ने हमारे घर पर खाना खाया था 

इसके बाद से कभी भी मेरी दीदी ने अपने पति को हमारे घर में रुकने ही नहीं दिया था हमें उनके इस बिहेवियर की समझ बिल्कुल भी नहीं आती थी उनका यह बिहेवियर हम सबकी समझ से बिल्कुल ही बाहर था हालांकि मेरी दीदी शादी से पहले ऐसी बिल्कुल भी नहीं थी वह बहुत समझदार लड़की थी और हर काम को खुशी-खुशी किया करती थी

 मगर शादी के बाद पता नहीं क्यों उनको क्या हो गया था उनकी यह बात हमारी समझ में नहीं आती थी कुछ समय के बाद ही मेरी दीदी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई मम्मी उनसे कहती थी कि वह कुछ दिन हमारे घर आराम करने के लिए आ जाए मगर वह लगातार मम्मी को इंकार कर देती थी मम्मी ने दीदी से भी कहा कि जब तक उनकी तबीयत ठीक नहीं है तब तक वह मुझे उनके घर भेज देंगी ताकि मैं उनका ख्याल रख सकूं लेकिन इस बात पर तो दीदी मम्मी से बहुत ही झगड़ने लगी थी 

और उन्होंने साफ इंकार कर दिया था कि मैं उनके घर नहीं जाऊं उनके मुंह से साफ-साफ इंकार सुनकर मम्मी बहुत हैरान हुई थी क्योंकि उनकी तबीयत इतनी खराब थी कि उनकी आवाज भी ठीक से नहीं निकल रही थी मगर वह लगातार इस बात से इंकार कर रही थी कि वह मुझे अपने घर कभी नहीं बुलाएंगे और इधर मेरी मम्मी को यही फिक्र सता रही थी कि अकेले घर में मेरी दीदी कैसे रहेगी 

क्योंकि मेरी दीदी की सास अपने बड़े बेटे के साथ रहती थी और दीदी अपने पति के साथ अपने घर में अलग रहती थी और इन दिनों उनकी तबीयत खराब चल रही थी फिर भी वह अपने घर में अकेली ही थी और यह बात मम्मी को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही थी क्योंकि उन्हें अपनी बेटी की फिक्र सता रही थी मम्मी यह बात अच्छे से जानती थी कि जब दीदी की तबीयत खराब होती है तो वह बहुत कमजोर हो जाती है 

और उनकी हालत बहुत बिगड़ जाती है मगर दीदी तो मम्मी की कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं थी ना तो वह हमारे घर आ रही थी और ना ही मुझे अपने घर बुला रही थी कई दिन तक उनकी तबीयत खराब रही और वह बिस्तर पर पड़ी रही फिर कुछ दिन बाद मम्मी ने उनसे पूछे बिना मुझे उनके घर भेज दिया ताकि मैं उनकी सेवा कर सकूं और उनका ध्यान रख सकूं इसलिए मम्मी ने उन्हें बताए बिना ही मुझे उनके घर भेज दिया था 

क्योंकि मम्मी जानती थी कि अगर उन्होंने दीदी को इस बारे में बता दिया कि मैं उनके घर जा रही हूं तो वह साफ-साफ मना कर देंगी मम्मी से नाराज हो जाएंगी और कभी मुझे अपने घर नहीं आने देंगी इसलिए मम्मी ने मुझे मुझे उनके घर भेज दिया मैं जब उनके घर गई तो उस समय उनके घर में कोई भी नहीं था मैं उन्हें बिना बताए ही घर में आ गई थी मैं काफी देर तक उनके घर के बाहर ही खड़ी रही 

और बाहर से ही खड़े होकर मैंने अपनी दीदी को कई बार कॉल की थी कि वह दरवाजा खोल दें मगर वह कॉल रिसीव ही नहीं कर रही थी अब मुझे यहां आकर पछतावा होने लगा था कि क्यों मैं उन्हें बिना बताए ही उनके घर आ गई मुझे मम्मी पर भी गुस्सा आ रहा था क उन्होंने दीदी को बताए बिना ही मुझे यहां पर भेज दिया अभी मैं सोची रही थी कि मुझे क्या करना चाहिए तभी अचानक उनके घर का दरवाजा खुला और सामने ही मेरी दीदी के पति खड़े हुए थे

 मैंने सुकून का सांस लिया कि अच्छा हुआ दीदी घर पर ही है मुझे देखकर मेरे जीजू के चेहरे पर खुशी फैल गई उन्होंने बड़ी खुशी-खुशी मेरा स्वागत किया और मुझे घर के अंदर आने का रास्ता दिया मैं जैसे ही घर के अंदर आई तो पूरे घर में सन्नाटा छाया हुआ था ऐसा लग रहा था कि घर में जीजू के सिवा कोई है ही नहीं मैंने हैरानी से पूरे घर में देखा मुझे कहीं पर भी दीदी नजर नहीं आ रही थी और जब जीजू घर पर थे तो फिर दीदी कहां पर गई थी यह बात मुझे समझ नहीं आई 

मैंने अपने जीजू से पूछा कि क्या घर में कोई नहीं है दीदी कहां पर है जीजू कहने लगे कि तुम्हारी दीदी अभी थोड़ी देर में आएंगी मैंने हैरानी से जीजू की तरफ देखा मैंने कहा लेकिन वह कहां गई हैं उनकी तो तबीयत ठीक नहीं है उन्होंने कहा कि मुझे क्या पता तुम्हारी दीदी कहां गई है वोह मेरी बत बात सुनते ही कहां है यह बात सुनकर तो मैंने जीजू की तरफ हैरानी से देखा था मेरी दीदी की तबीयत इतनी खराब है 

और जीजू घर में है उन्हें ध्यान रखना चाहिए था कि वह कहां पर गई हैं मुझे अपने जीजू पर बहुत गुस्सा आ रहा था हम सबको यही लगता था कि वह मेरी दीदी का बहुत ख्याल रखते हैं मगर यहां तो मामला ही पलटा हुआ था क्योंकि दीदी की तबीयत इतनी खराब थी और जीजू को कुछ पता ही नहीं था जीजू अजीब तरह से रिएक्ट कर रहे थे उन्हें देखकर मुझे लग रहा था कि दीदी उस दिन जो मुझे बात बता रही थी वह सब कुछ सच था शायद वह मुझसे अपने पति के बारे में सही कह रही थी 

मैंने जीजू से कहा जब दीदी आ जाएंगी तब मैं आ जाऊंगी मेरी बात सुनकर जीजू के चेहरे का रंग बदल गया था उन्होंने मुझसे कहा कि अरे यहां से जाने की इतनी भी क्या जल्दी है तुम्हारी दीदी आ जाएगी और वैसे भी उसका तो यह रोज का काम है मैंने हैरानी से उनके चेहरे पर देखा था उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कुराहट छाई हुई थी फिर मैंने अपने गुस्से को कंट्रोल किया और पलटक वहां से आने लगी थी 

तभी जीजू ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे सोफे पर बैठा दिया कहने लगे बैठो तो सही अभी तो हम दोनों को बहुत सारी बातें करनी है उनके इस तरह से हाथ पकड़ने पर मुझे बहुत गुस्सा आया था मुझे उनकी यह हरकत बिल्कुल पसंद नहीं आई थी क्योंकि हम लोग घर में बिल्कुल अकेले थे और वह मुझे टच करने की कोशिश कर रहे थे मगर मैं अपनी जगह पर बैठकर सोचने लगी कि अब क्या करूं दीदी तो घर पर मौजूद नहीं है मैं सोच ही रही थी तभी जीजू ने जबरदस्ती मेरा हाथ पकड़ लिया मैं उनकी इस हरकत पर बरस पड़ी थी

 मैंने उनसे कहा आप बार-बार मुझे छूने की कोशिश क्यों कर रहे हो तभी उन्होंने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और मुझे मजबूती से पकड़ लिया मैं चिल्लाने की कोशिश कर रही थी और कह रही थी कि आप यह क्या कर रहे हो उन्होंने कहा कि मैं कई दिनों से तुम्हारी तलाश में था आज मेरा मकसद पूरा हो गया जीजू ने मुझे बहुत मजबूती से पकड़ा हुआ था मैं खुद को उनसे छुड़ाने की कोशिश कर रही थी 

पर मेरी कोशिश नाकाम रही उन्होंने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और किसी को कॉल करके कहने लगे कि जल्दी से गाड़ी लेकर आ जाओ मैं एक और लड़की को लेकर आ रहा हूं तब तक उन्होंने मेरे हाथ बांध दिए थे मैं अपनी जगह से हिल भी नहीं पा रही थी मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे आज मुझे एहसास हो रहा था कि यह इंसान बहुत घटिया इंसान है मेरी दीदी मुझे इसके बारे में सब कुछ सच ही बता रही थी 10 मिनट बाद एक गाड़ी आई जीजू ने मेरे मुंह पर पट्टी बांध दी 

और मुझे जबरदस्ती गाड़ी में बैठा दिया हम लोग क जा रहे थे मुझे नहीं पता था लेकिन उस जगह पर पहुंचने के बाद तो मेरे पैरों तले से जमीन निकल गई थी यह एक कोठा था और यहां पर बहुत सारी लड़कियों को धंधा करने के लिए लाया जाता था मैं जीजू के आगे हाथ जोड़ रही थी जीजू ने मुझे एक औरत के कदमों में ले जाकर डाल दिया और उस औरत से पैसे लेकर वापस आ गए थे

 और कहा था कि इसको अच्छी तरह से समझाकर घर वापस भेज देना मुझे उनकी यह बात समझ नहीं आई थी वहां की बाई मुझे देखकर कहने लगी कि तू तो बहुत खूब खूबसूरत है तेरी बहन भी हमारा बहुत फायदा करवा चुकी है अब तेरी बारी है मैं उस औरत से कह रही थी कि प्लीज मुझे छोड़ दो लेकिन कोई भी मेरी बात सुनने को तैयार नहीं था लेकिन मेरे होश तो तब उड़े थे जब मैंने इस कोठे पर अपनी दीदी को देखा था 

मैं दीदी के गले से लगकर बहुत रोई थी दीदी ने मुझे कहा कि मैंने कहा था ना कि यह बहुत घटिया इंसान है यह आदमी रोज-रोज मुझे यहां पर भेज देता है यहां पर मेरी इज्जत को नीलाम किया जाता है और फिर उन पैसों से मेरा पति करता है उसकी नजर काफी दिनों से तुम पर और दोनों छोटी बहनों पर भी है इसलिए मैं उसे घर पर नहीं लेकर जाना चाहती थी और मैंने मम्मी से सख्ती से मना किया था कि वह तुम्हें या बाकी किसी भी बहन को मेरे घर पर ना भेजे दीदी की बात सुनकर मैं बहुत रोने लगी थी

 लेकिन भगवान की करनी अच्छी थी कि तभी वहां पर पुलिस की रेट पड़ गई और मैंने पुलिस वालों को रो-रो कर बताया कि मुझे यहां पर कौन लेकर आया था दीदी ने अपने पति के बारे में पुलिस वालों को सब कुछ बता दिया था पुलिस को देखकर कोठे से काफी सारे लोग तो भाग चुके थे लेकिन हम लोग नहीं भागे थे क्योंकि हमारी कोई गलती ही नहीं थी और हम अपनी जान बचाना चाहते थे 

और मैं अपने जीजू को सजा दिलवाना चाहती थी इसलिए हमने पुलिस की मदद लेना ठीक समझा मेरी दीदी ने अपने पति के बारे में पुलिस को सब कुछ बता दिया था मेरे जीजू को आईडिया नहीं था कि आज इस तरह से दिन भी बदल सकता है दीदी पुलिस को लेकर अपने घर चली गई थी दीदी की बात सुनकर पुलिस वालों ने मेरे जीजू को अरेस्ट कर लिया था और न की इतनी पिटाई लगाई थी कि उन्होंने अपनी गलती खुद एक्सेप्ट कर ली थी मेरी दीदी ना जाने कब से इस अत्याचार को बर्दाश्त करती आ रही थी 

क्योंकि वह बहुत घटिया इंसान था अपनी ही पत्नी को धंधा करने के लिए कोठे पर लेकर जाता था और ना जाने किन-किन लड़कियों को कोठे पर ले जाकर बेचता था उसका यही काम था उसकी नजर काफी दिनों से मुझ पर पड़ी हुई थी और वह दीदी से जिद कर रहा था कि अपनी बहन को भी इस काम में शामिल कर लो लेकिन मेरी दीदी उस आदमी से मजबूर थी इस वजह से इस काम को कर रही थी 

क्योंकि वह उनसे जबरदस्ती करता था पर दीदी इस बात से बिल्कुल भी राजी नहीं थी कि जिस तकलीफ से वह गुजर रही है वैसे ही तकलीफ उनकी बहन भी बर्दाश्त करें इसलिए उन्होंने साफ इंकार कर दिया था जिस पर उनका पति उन्हें रोज मारता पीटता था जिसकी वजह से मेरी दीदी बीमार रहने लगी थी हम दोनों बहनें घर आ गए थे हम दोनों की ऐसी उजड़ी हुई हालत जब घर वालों ने देखी तो हमसे सवाल जवाब करने लगे थे 

मैंने रोते हुए पापा दादी और मम्मी को सब कुछ बता दिया था यह सारी बात सुनकर पापा बहुत शर्मिंदा हुए थे क्योंकि यह सब कुछ उनकी ही जल्दबाजी का नतीजा था उनकी एक बेटी की तो इज्जत नीलाम हो चुकी थी लेकिन दूसरी बेटी की इज्जत भी आज खराब होने जा रही थी जो कि किसी कारण बच गई थी मैंने पापा से कहा था कि हमें ऐसे पिता की जरूरत नहीं है जो हमें बोझ समझता हो 

और हमें किसी भी ऐसे इंसान के हवाले कर दे जिसे हमारी इज्जत की क्या हमारी जान की भी कोई परवाह ही ना हो हम चारों बहनों ने फैसला किया था कि हम इस घर में नहीं रहेंगे मेरे पापा बहुत शर्मिंदा हो रहे थे और उन्होंने हम चारों बहनों को रोक लिया था और हमसे माफी मांगी थी कि आइंदा ऐसा कुछ भी नहीं होगा और वह अपनी बेटियों को बेटे समान ही समझेंगे और किसी के साथ भी शादी की जल्दबाजी नहीं की जाएगी 

मेरी दीदी की जिंदगी तो उजड़ चुकी थी लेकिन वह बचकर घर आ गई थी यही बहुत बड़ी बात थी मेरी दीदी अभी भी खामोश रहती है क्योंकि उनकी इज्जत ना जाने कितने लोगों ने हर रात तार-तार की है है पर हमें खुशी इस बात की है कि मेरी दीदी हमारे पास सही सलामत है और उस दरिंदे के घर से वापस आ गई उसको भी सजा हो गई और पुलिस ने उसकी वह हालत की है कि वह कभी किसी औरत को परेशान नहीं करेगा मेरे पापा को अफसोस इस बात का हुआ था कि उन्होंने हमेशा अपनी बेटियों को घर में रखा 

और उनकी इज्जत की सेफ्टी की लेकिन ससुराल जाने के बाद उनकी इज्जत खराब करने वाला इंसान कोई और नहीं बल्कि मेरी दीदी का अपना पति ही था जिसने अपनी पत्नी को पैसे की खातिर धंधा करने पर उतार दिया था और उसके साथ जबरदस्ती करता था उसे मारता था पीटता था और उस पर रोजाना अत्याचार करता था मेरी दीदी अंदर ही अंदर इस गम को बर्दाश्त कर रही थी 

लेकिन उन्होंने अपने पापा से इसकी कोई शिकायत नहीं की थी हालांकि दीदी ने कोई भागकर तो शादी नहीं की थी वह चाहती तो पापा से अपने पति के बारे में सब कुछ कह सकती थी लेकिन उन्होंने हर बात को बर्दाश्त किया मेरी बहन पागल होने की स्टेज तक पहुंच गई थी मगर भगवान की करनी अच्छी थी कि मेरे साथ-साथ मेरी बहन की जिंदगी भी बच गई थी मैं आप लोगों से रिक्वेस्ट करना चाहती हूं कि कभी भी अपनी बेटियों की शादी आंखें बंद करके ना करें 

हमेशा उनके रिश्ते अच्छी तरह से अच्छी जगह तलाश करें और लड़के के फैमिली बैकग्राउंड और लड़के के बारे में सारी पूछताछ करें ऐसा ना हो कि आप अपनी बेटियों को बोझ समझकर अपने घर से विदा कर दें और जहां पर वह शादी करके जा रही है वहां के लोग उन पर अत्याचार करने के साथ-साथ उन्हें इस दुनिया से ही ना भेज दें फिर आप लोग भी मेरे पापा की तरह हाथ मलते रह जाएंगे 

मेरी दीदी का पति इतना घटिया इंसान था कि वह ना जाने कितनी लड़कियों की जिंदगी इस तरह से बर्बाद कर चुका था और उसका यही काम था वह कोई कामकाज नहीं करता था वह हर दिन एक नई लड़की को अपनी बातों में फंसाकर कोठे पर ले जाकर बेच दिया करता था मगर उसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वह अपनी मीठी-मीठी बातों और अच्छे बिहेवियर से लोगों को किस तरह से बेवकूफ बनाता है

 ऐसे लोगों से सावधान रहिए सतर्क रहिए और हमेशा अपनी बेटियों की हिफाजत करिए इस हादसे के बाद मेरे पापा को तो सीख मिल गई है कि बेटियां बेटों से कम नहीं होती अब हमारी जिंदगी बहुत अच्छी गुजर रही है लेकिन मेरी दीदी ने अभी तक दूसरी शादी नहीं की उसे तो शादी के नाम से ही अब डर लगने लगा है

 पर पापा ने हमें अब विश्वास दिलाया है कि वह हम में से किसी भी बहन के साथ अत्याचार ना खुद करेंगे और ना ही अब कभी होने देंगे एक तरफ हमें खुशी होती है कि हमारे पापा सीधे रास्ते पर आ गए और अपनी बेटियों को स्वीकार कर लिया लेकिन दूसरी तरफ हमें अफसोस भी होता है कि मेरी दीदी की जिंदगी बर्बाद करने के बाद उन्होंने अपनी बेटियों को एक्सेप्ट किया है

 

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