आँख मूंद कर भरोसा ना करना | Desi Kahani Net | Sad Hindi Story | Meri Kahaniya

Desi Kahani Net : मेरा नाम आशीष है मेरा इस दुनिया में कोई नहीं था सिर्फ मेरी एक बहन के अलावा हमारे माता-पिता तो हमें इस दुनिया में छोड़कर जा चुके थे मैंने खुद ही अपनी बहन की शादी कर दी थी और वह अपने ससुराल में खुशी-खुशी रह रही थी मैं यहां हैदराबाद में नौकरी करता था और यहीं पर ही रह रहा था यहां पर मैंने किराए पर अपना एक फ्लैट लिया हुआ था 

 

एक आम आदमी के हिसाब से मेरी नौकरी बहुत अच्छी थी मैं अच्छा काम किया करता था मेरी बहन कभी-कभी मेरे घर आ जाती थी और मेरे घर के सारे काम करके अपने ससुराल चली जाती थी लेकिन इन दिनों उसकी प्रेगनेंसी के दिन चल रहे थे इसलिए वह मेरे घर पर नहीं आ सकती थी वैसे तो मैं घर के सारे काम कर लिया करता था लेकिन जब कोई औरत घरेलू काम करती है तो वह अपने हिसाब से करती है 

 

और अपने नर्क बने हुए घर को भी स्वर्ग बना देती है लेकिन जब कोई मर्द घर के काम करने में लग जाता है तो शायद वह स्वर्ग बने हुए घर को भी नर्क बना देता है क्योंकि मर्द घर को औरत के हिसाब से नहीं चला सकता औरत बहुत समझदारी और अपने हिसाब से ही अपने घर को चलाती है फिर शायद मेरे अकेलेपन के लिए भी एक सलूशन निकल गया था मैंने कभी जिंदगी में नहीं सोचा था कि मुझे कभी एक लड़की से बेहद प्यार हो जाएगा वह लड़की मेरा आने वाला भाग्य बन जाएगी

 

 क्योंकि उसे पाने के लिए मैंने हर कोशिश की थी मुझे नहीं पता था कि मैं जिस लड़की को पाने की कोशिश कर रहा हूं उसकी सारी ख्वाहिश पूरी करते-करते मेरे साथ एक दिन कुछ ऐसा हो जाएगा इसके बारे में कभी मैंने सोचा भी नहीं होगा क्योंकि जिस लड़की से मैं प्यार करता था उसने मेरे साथ-साथ मेरी फीलिंग्लेस भी मैंने उसकी खुशी को ही मद्देनजर रखते हुए उसे उसके हाल पर छोड़ दिया था 

 

और अपना दिल पक्का कर लिया था क्योंकि मेरी पत्नी ने मेरे साथ मेरी शादी को 6 महीने हो गए थे और मैं अपनी पत्नी के साथ बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि मैं अपनी जिंदगी का यह स्पेशल टाइम गुजार रहा था वह टाइम मेरे लिए ऐसा था जिसको मैं आज भी याद करके मुस्कुराता हूं मुझे अपनी पत्नी एकता से बहुत ज्यादा प्यार था क्योंकि वह बहुत ज्यादा खूबसूरत थी

 

 वह इतनी ज्यादा खूबसूरत थी कि मैं क्या अगर कोई भी मर्द उसे देखता तो वह सिर्फ देखता ही रह जाता भगवान ने उसे बहुत ही फुर्सत से बनाया था उसकी खूबसूरती ऐसी थी कि मैं हमेशा उसकी खूबसूरती की तारीफ ही करता रहता था उसके चेहरे से मेरी नजर हटती ही नहीं थी एकता को अपनी खूबसूरती पर बहुत ही ज्यादा नाज था वह अपने खूबसूरत होने पर बहुत घमंड किया करती थी और इसी वजह से वह किसी को मुंह तक नहीं लगाती थी लेकिन मुझे उसकी आदत बहुत पसंद आई थी

 

 और मैंने सोच लिया था कि मैं इसी लड़की से शादी करूंगा बस इसी बात ने मुझे बहुत ज्यादा बेइज्जत किया था मैंने उसको पाने के लिए उसके घर के बहुत ही चक्कर लगाए थे और फिर इतनी मेहनत करने के बाद आखिरकार मेरी कोशिश रंग ले ही आई थी और मैं अपने मकसद में कामयाब हो गया था फिर एकता से मेरी शादी भी हो गई थी एकता से शादी हो जाने के बाद मैं खुद को दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान समझने लग गया था

 

 क्योंकि मेरे लिए यह बहुत सौभाग्य की बात थी कि सबसे खूबसूरत लड़की मेरी पत्नी बन गई थी और फिर वह मुझे बेहद पसंद थी मैंने जिसे चाहा था उसे पा भी लिया था अब मैं चाहता था कि जितनी मोहब्बत मैं एकता से करता हूं वह भी मुझसे इतनी ही ज्यादा मोहब्बत करने लगे मैं चाहता था कि मेरी वजह से एकता को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो मैं उसकी हर डिमांड को पूरी करने की कोशिश करता था 

 

ताकि जिंदगी के किसी भी मोड़ पर एकता को उसके माता-पिता का यह फैसला गलत ना लगे क्योंकि उसके माता-पिता ने अपनी मर्जी से मेरी शादी उसके साथ करवाई थी मेरी लव मैरिज अरेंज मैरिज के रूप में बदल गई थी मुझे इस बात की बेहद खुशी थी इसलिए अब मैं शादी के बाद दिन रात मेहनत करने लगा था वैसे तो मेरी पहले से ही अच्छी जॉब थी लेकिन जब से मेरी शादी एकता से हुई थी 

 

मैं उसके हर सपने को पूरा करने की हर तरह से कोशिश कर रहा था इसलिए पैसा कमाना और मेहनत करना बहुत जरूरी था लेकिन लेकिन इतने सैक्रिफाइस करने के बावजूद भी मैं एकता की डिमांड्स को पूरा नहीं कर पा रहा था क्योंकि एकता की डिमांड और उसके सपने बहुत ही ऊंचे होते थे और उसके सपनों को पूरा करने के लिए मुझे बहुत सारे पैसों की जरूरत थी जो कि मेरे पास नहीं थे

 

 मैं जितने पैसे कमाता था वह सारे ही खर्च हो जाया करते थे मेरे पास कुछ भी सेविंग नहीं थी लेकिन फिर भी मैंने एकता को यकीन दिलाया था और उससे वादा किया था कि मैं कोशिश करूंगा उस की हर डिमांड को पूरा करने की मैं बहुत जल्दी तुम्हारे सपने को पूरा कर दूंगा मेरी बात सुनकर एकता खामोश हो जाती थी और यकीन ना करते हुए मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा देती थी

 

 वह सिर्फ अपने चेहरे पर नॉर्मल सी मुस्कुराहट सजाती थी जिस तरह से मैं उसे खुश देखना चाहता था वह उस तरह से खुश नहीं होती थी उसकी मुस्कुराहट को देखकर मैं एक अजीब सी कंफ्यूजन का शिकार हो जाता था क्योंकि मुझे यह बात समझ नहीं आती थी कि उसकी मुस्कुराहट में कोई राज छुपा हुआ है या फिर उसको मेरी बात पर यकीन नहीं है फिलहाल जो भी था

 

 मैंने अपने दिल में पक्का फैसला कर लिया था कि मैं उसके इस यकीन ना करने वाले अंदाज को एक दिन यकीन करने वाले अंदाज में बदल दूंगा चाहे मुझे इसके लिए कुछ भी क्यों ना करना पड़े इसलिए अब मैं जॉब करने के साथ-साथ मुझे अलग से और भी कोई काम मिलता था तो वह भी करने लग गया था क्योंकि कोई भी काम करते हुए मैंने कभी खुद को किसी से कम महसूस नहीं किया था था इसलिए मैं दिन के टाइम जॉब करता था और रात को मुझे कहीं भी कोई भी काम मिल जाता तो वह मैं खुशी-खुशी कर लिया करता था

 

 क्योंकि एकता की खुशियां मेरे लिए अपनी जान से भी ज्यादा बढ़कर थी यह सब कुछ मैं अपनी प्यारी पत्नी के लिए कर रहा था ताकि एक्स्ट्रा काम करके मुझे कुछ ज्यादा पैसे मिल सके और मैं इन पैसों से एकता को घुमाने फिराने के लिए ले जाया करूंगा यही सोचकर मैंने पूरा एक महीना बड़ी ही मेहनत के साथ काम करके गुजारा था और फिर उससे मिलने वाले पैसों से मैं एकता को बड़े से रेस्टोरेंट में लेकर गया था

 

 जहां पर हमारे शहर में आने वाले सेलिब्रिटी खाना खाया करते थे वहां जाकर वह बहुत खुश हुई थी और एकता को देखकर मैं दिल से बहुत खुश था और बेफिक्र भी हो गया था मैंने दिल ही दिल में भगवान का शुक्रिया अदा किया था और सोचा था कि चलो इतने टाइम में ही सही पर मैंने अपनी पत्नी को खुशी तो दे ही दी अब मैंने अपना हर हफ्ते का रूटीन बना लिया था कि क कि हर हफ्ते एकता को अपने साथ किसी ऐसी जगह पर ले जाता था जहां पर मेरे पैसे तो ज्यादा खर्च होते थे 

 

पर मेरी पत्नी के चेहरे पर मेरी वजह से मुस्कान आ जाती थी और हर दूसरे तीसरे दिन उसे रेस्टोरेंट में लेकर जाता था जहां पर हम लोग गए थे वहां जाने के बाद हम लोग खाना खाते थे मेरे लिए सब काफी महंगा तो पड़ता था लेकिन मेरी पत्नी इससे कहीं ज्यादा महंगी थी यह होटल देखने में बिल्कुल शानदार था यहां खाने के बाद टिप भी दी जाती ती थी हम लोग वहां जाकर खाना खा लेते थे और उसके बाद मैं अपनी पत्नी को आइसक्रीम खिलाने के लिए लेकर जाता था 

 

लेकिन अब मैंने जब अपनी पत्नी की सारी डिमांड पूरी करनी शुरू कर दी थी तो मैंने नोटिस किया था कि अब जब भी मैं एकता को घर से बाहर लेकर आता था तो पहले की तरह ज्यादा खुश नजर नहीं आती थी और यह बात मैंने महसूस कर ली थी इसलिए मैंने एकता से इसकी वजह पूछी थी कि आखिर तुम खुश क्यों नहीं हो क्या कुछ कमी रह गई है तो वह मुझसे कहने लगी कि मैं एक ही जगह पर बार-बार आकर बोर हो गई हूं 

 

तुम मुझे इसी रेस्टोरेंट में लेकर आते रहते हो माना कि यह रेस्टोरेंट बहुत बड़ा है अच्छा है मगर इंसान एक ही काम को बार-बार करके बोर हो जाता है और मैं भी अब बोर हो गई हूं तुम्हें नहीं लगता कि हमें और कहीं भी जाना चाहिए मैंने कहा तो तुम्हें मुझे बता देना चाहिए था कि आखिर तुम कहां जाना चाहती हो उसने मुझसे कहा था कि यह तो तुम्हें सोचना चाहिए था कि आखिर हम लोग हमेशा एक ही जगह पर क्यों आते हैं

 

 इसके अलावा और भी कहीं पर हम क्यों नहीं जाते तो मैं एकता की बात सुनकर बस खामोश हो गया था क्योंकि मैं एकता के सामने अपनी मजबूरियों का रोना नहीं रोना चाहता था और ना ही उसे यह बताना चाहता था कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं उसे इस जगह के अलावा भी और किसी महंगी जगह पर लेकर जा सकूं मेरे लिए तो इस जगह का खर्चा अफर्ड करना ही काफी मुश्किल था

 

 मैं तो बस खामोश होकर बैठकर उसकी तरफ दे देख रहा था क्योंकि मुझे एकता की बातें सुनकर बहुत दुख हुआ था और साथ में मुझे अपने ऊपर भी बहुत गुस्सा आ रहा था कि आखिर मैं अपनी पत्नी को खुश क्यों नहीं रख पा रहा हूं जबकि मैं एकता को खुश रखने की हर मुमकिन कोशिश करता रहा था लेकिन इसके बावजूद भी मैं हर बार नाकाम हो जाता था 

 

वह हर बार मुझे अपनी फ्रेंड के बारे में बताती थी कि मेरी सभी फ्रेंड की किस्मत बहुत अच्छी निकली क्योंकि उन सब की शादी यहां अमीर फैमिलीज में हुई है और वह सभी अपने ने ससुराल में अपने पति के साथ बहुत खुश रह रही हैं मेरी सारी फ्रेंड अपने पतियों के साथ हर जगह घूमने के लिए जाती हैं हर महीने उन लोगों को पिकनिक पर जाना होता है और एक हम लोग हैं जो घर से सिर्फ रेस्टोरेंट या फिर मार्केट में ही घूम लेते हैं 

 

और कहीं जाते ही नहीं हैं हमारी जिंदगी तो बस इतनी सी ही रह गई है कोई शिमला जाता है तो कोई मनाली जाता है कोई कश्मीर जाता है हम तो सिर्फ ऐसी जगह के बारे में सोच ही सकते हैं अपनी पूरी बात करने के बाद वह मुझे अजीब नजरों से देख रही थी फिर उसने कहा कि मेरी सारी फ्रेंड्स में सिर्फ मेरी ही किस्मत ऐसी निकली है कि मैं हर चीज के लिए ही तरस कर रह गई हूं एकता की बातें सुनकर मैं बहुत शर्मिंदा हो गया था

 

 और मैंने उससे अपनी नजरों को चुरा लिया था एकता की शादी होने के बाद आज पहली बार उसकी फ्रेंड हमारे यहां डिनर पर आई थी एकता ने अपनी फ्रेंड को डिनर पर इनवाइट किया था और उसके लिए काफी सारी डिशेस भी तैयार की थी इस सब में भी मेरा काफी खर्चा हो हो गया था क्योंकि हम तो नॉर्मल घर में सिर्फ एक या दो ही डिशेज बनाते थे लेकिन उसने कहा कि मेरी फ्रेंड बहुत अमीर फैमिली में शादी करके गई है इसलिए उसके ससुराल में मेहमानों के लिए काफी सारी डिशेज बनती हैं

 

 यही वजह थी कि उसने भी अपने फ्रेंड के घर आने के लिए काफी अच्छा इंतजाम किया था मुझे इस बात से कोई ऐतराज नहीं था मेहमान तो वैसे भी कभी-कभी आता है लेकिन उसकी फ्रेंड हमारे घर में आने के बाद बड़ी ही अजीब अजीब नजरों से हमारे घर को ट रोल टटोल कर चारों तरफ से देख रही थी और फिर इसके साथ ही उसने एकता को भी तरस भरी नजरों से देखा था और उससे पूछा था कि यह तुम्हारा घर कितना छोटा है

 

 यह तो बिल्कुल एक छोटे से डिब्बे जैसा लग रहा है उसने इसके अलावा घर के बारे में और भी काफी सारी बातें कही थी उसने मेरी पत्नी से यह भी कहा था कि मुझे अच्छे तरीके से याद है कि तुम्हें अमीर लोग कितने पसंद हैं और तुम्हारी कितनी ख्वाहिश थी कि तुम्हारी शादी भी किसी बहुत अच्छी जगह पर हो जाए जहां पर तुम्हारी हर डिमांड को पूरा किया जाए एकता अपनी फ्रेंड की सारी बातें सुनकर खामोश खड़ी रही थी

 

 फिर थोड़ी देर के बाद एकता की फ्रेंड ने जब एकता को खामोश खड़ा हुआ देखा तो उससे पूछा था कि तुम खुश तो हो ना और बताओ तुम्हारी शादी ऐसे घर में कैसे हो गई तुम्हारे पेरेंट्स को तुम्हारे लिए कुछ तो देखना चाहिए था ना जबकि तुम इतनी खूबसूरत और इतनी ज्यादा पढ़ी लिखी हो तुम्हारा रिश्ता तो किसी भी अच्छे घर से आ जाना था जहां पर तुम सारी जिंदगी राज करती आखिर यह सब तुमने अपने साथ क्या किया 

 

यह सब तुम्हारे साथ कैसे हुआ अपनी पत्नी की फ्रेंड की बातें सुनकर मुझे उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था मेरा मन तो कर रहा था कि मैं उसे मुंह तोड़ जवाब दूं लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता था लेकिन मेरी ख्वाहिश थी कि मेरी पत्नी ऐसा करें और उसे कहे कि मैं बहुत खुश हूं और वैसे भी खुश रहने के लिए पैसों की जरूरत नहीं होती बल्कि मोहब्बत की जरूरत होती है और मेरा पति मुझसे बहुत मोहब्बत करता था लेकिन उसने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था इस बात पर मेरा दिल टूट गया था 

 

बल्कि उसने तो और अपनी फ्रेंड का साथ दिया था उसने बुरा सा मुंह बना लिया था और अपनी फ्रेंड से कहा था कि खूबसूरत होने से भला क्या होता है बस इंसान की किस्मत अच्छी होनी चाहिए शायद मेरी किस्मत अच्छी नहीं थी तभी तो मेरी शादी यहां पर हो गई बस इंसान अपनी किस्मत के हाथों मजबूर हो जाता है मैंने बहुत ही खूबसूरत लड़कियों को उनकी किस्मत के हाथों दरबदर की ठोकरें खाते हुए देखा है बस मेरा भाग्य भी उन बदकिस्मत लोगों की तरह ही है जिनको अपनी ख्वाहिशों का गला अपने ही हाथों से घोटना पड़ता है

 

 एकता की बातें सुनकर मुझे ऐसा लगा था जैसे किसी ने मेरे मुंह पर जोरदार थप्पड़ मारा हो मुझे बहुत ही ज्यादा शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि मुझे एकता से ऐसी उम्मीद नहीं थी मुझे अपनी मोहब्बत पर बड़ा ही मान था और मुझे लगता था कि एकता को भी मेरी मोहब्बत के अलावा और कुछ नहीं चाहिए और अगर ऐसा था भी तो शायद दूसरों के सामने ऐसा कुछ जाहिर नहीं करेगी कि उसे मेरे घर में कोई परेशानी हो रही है 

 

लेकिन वह तो अपनी बात खोल चुकी थी एकता की सारी बातें सुनकर मेरा सारा भ्रम चूर-चूर हो गया था और मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई मेरे कदमों तले से जमीन खींच रहा है फिर मैं उन दोनों को आपस में बातें करता हुआ छोड़कर खामोशी से घर से बाहर निकल आया था क्योंकि इसके अलावा मैं और कुछ भी तो नहीं कह सकता था सारा दिन मैंने बाहर ही गुजार दिया था मैं रात को बहुत देर से घर वापस आया था 

 

क्योंकि मुझे हर चीज से नफरत हो रही थी और मुझे अपने आप से तो घीन महसूस हो रही थी मैं यही सोच सोच कर परेशान हो रहा था कि भगवान ने मेरी किस्मत कैसी बनाई है कि मैं अपनी पत्नी की डिमांड को पूरा ही नहीं कर सकता अगर मेरे बस में होता तो मैं अपनी पत्नी के लिए चांद तोड़कर ला सकता था देर रात को जब मैं घर वापस गया तो यह देखकर मैं हैरान रह गया कि यह एकता सो नहीं रही थी

 

 बल्कि बैठी हुई मेरा इंतजार कर रही थी वह मुझे देखकर जल्दी से मेरे पास आई थी और मुझसे कहने लगी थी कि आप कहां चले गए थे और जाते हुए मुझे कुछ बताकर भी नहीं गए थे आपको पता है कि मैं आपके लिए कितनी परेशान हो गई थी एकता को अपने लिए इस तरह से परेशान देखकर मुझे थोड़ी सी भी खुशी नहीं हुई थी क्योंकि मेरा सारा भ्रम अब टूट चुका था इसलिए मैंने एकता के सवाल का कोई भी जवाब नहीं दिया था

 

 बल्कि उल्टा उसी से पूछने लगा था कि तुम अभी तक सोई क्यों नहीं हो उसने मेरी बात सुनकर मुझसे कहा था कि मैं आपका इंतजार कर रही थी लेकिन मैंने एकता का जवाब सुनकर उसे कुछ भी नहीं कहा था बल्कि मैं सीधा चलता हुआ खामोशी से अपने कमरे में आ गया था और आकर अपना नाइट सूट निकालने लगा था मेरे पीछे ही एकता भी रूम में आ गई थी मैं अभी अलमारी से अपने कपड़े निकाल रहा था कि वह मुझसे पूछने लगी थी कि क्या आप मुझसे किसी बात पर नाराज हो तो मैंने उसे किसी बात का कोई जवाब नहीं दिया था 

 

और मैं अपने कपड़े निकालने में बजी था और फिर मैंने उससे पूछा क्या तुम मुझसे शादी करने पर खुद को अनलकी समझती हो तो मेरी बात सुनकर अचानक ही एकता के चेहरे का रंग पीला पड़ गया था वह मुझसे फौरन ही गर्दन हिलाते हुए कहने लगी नहीं बिल्कुल भी नहीं आप ऐसा क्यों पूछ रहे हो एकता की बात सुनकर मैंने उसे साफ-साफ कह दिया था कि जब तुम अपनी फ्रेंड से कह रही थी कि तुम्हारी किस्मत खराब है

 

 इसलिए तुम्हारी शादी मुझसे हुई है तब मैंने तुम्हारी सारी बातें सुन ली थी इसलिए तुम्हें अब मुझ से झूठ बोलने की जरूरत नहीं तो मेरी बात सुनकर एकता ने जल्दी से बात को इधर-उधर घुमाने की कोशिश की थी और मुझसे कहा था जरूर आपको कोई गलतफहमी हो रही है क्योंकि मैंने अपनी फ्रेंड से ऐसा कुछ भी नहीं कहा था पत्नी का भाग्य तो पति से जुड़ा हुआ होता है और पत्नी के लिए यही सबसे बड़ी सौभाग्य की बात है कि उसका पति उसे इतना प्यार करता है उसको इतनी इज्जत देता है यही उसके लिए बहुत है

 

 इसलिए अगर मेरे पति की भी किस्मत अच्छी हुई तो उनको सब कुछ मिल जाए लेकिन अगर मैं ही बदकिस्मत हुई तो यह सब में आपका तो कोई कसूर नहीं है एकता की बातें सुनकर मैं फौरन उसकी बातों में आ गया था क्योंकि वह बहुत ही मासूम सा चेहरा बनाकर ऐसी बातें कर रही थी और तो और मैंने उसका यकीन भी कर लिया था क्योंकि मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था

 

 मैं उसकी हर बात पर आंख बंद करके यकीन कर लिया करता था इसलिए मैंने एकता से अपनी सारी नाराजगी खत्म कर दी थी फिर कुछ ही दिनों के बाद मेरी पत्नी की वही वाली फ्रेंड के घर पर फंक्शन था और एकता वहीं जाने की जीद कर रही थी मैं नहीं चाहता था कि एकता अपनी उसी फ्रेंड के घर जाए क्योंकि वो हमारे घर आई थी तो उसकी बातें सुनकर वोह मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी थी इसलिए मैंने एकता को वहां जाने से साफ मना कर दिया था लेकिन एकता कब किसी की बात मानती है

 

 बल्कि वह तो अपनी ही चलाती है इसलिए मैं भी उसकी जिद के आगे मजबूर हो गया था और उसे जाने की परमिशन दे दी थी लेकिन एकता रात को काफी देर के बाद घर वापस आई थी उसे घर आने में काफी रात हो गई थी मुझे उसकी बहुत फिक्र स्ता रही थी इसलिए एकता के आते ही मैंने उससे पूछा था कि इतनी देर क्यों कर दी तुमने घर आने में मेरी बात सुनकर उसने कहा था कि आज इतने टाइम बाद हम कॉलेज के सारे फ्रेंड्स एक साथ मिले हैं

 

 और अपने बीते हुए दिनों को याद किया है तो देर सवेर तो हो ही जाती है और वैसे भी आप फिक्र मत करो मेरी फ्रेंड राधिका मुझे अपनी गाड़ी में छोड़कर यहां गई है और अब मैं बहुत थक गई हूं इसलिए अगर आपकी इंक्वायरी पूरी हो गई हो तो क्या मैं सोने के लिए जा सकती हूं यह कहकर एकता रुकी नहीं थी बल्कि फौरन ही अपने कमरे में चली गई थी और मैं वहीं पर खड़ा हुआ बस उसे जाता हुआ देखकर रह गया था

 

 फिर अगले ही दिन एकता दोबारा से तैयार हो रही थी पता नहीं अब वह कहां जा रही थी उसे तैयार होता हुआ देखकर मैंने उससे पूछा कि कहां जाने की तैयारी है तुम्हारी तो मेरी बात सुनकर एकता ने मुझे बताया कि मैं राधिका के घर जा रही हूं उसकी इस बात को सुनकर मुझे फौरन ही गुस्सा आ गया था मैंने उसे कहा कि तुम कल ही तो वहां पर गई थी फिर अब तुम्हारा वहां पर क्या काम आ गया 

 

आज क्यों तुम वहां जा रही हो वैसे भी रोज-रोज किसी के घर जाना अच्छी बात नहीं होती है मेरी इस बात पर एकता ने बड़ी ही बेरुखी से मुझे जवाब दिया था कि मुझे राधिका से कुछ काम है थोड़ी देर में आ जाऊंगी और वैसे भी मैं किसी और के घर नहीं जा रही हूं बल्कि अपनी फ्रेंड के घर जा रही हूं राधिका के घर जिसे आप अच्छी तरह से जा जानते हो वह मेरी कॉलेज फ्रेंड है उसके घर जाने में मुझे कोई बुराई नजर नहीं आती अब तो यह एकता का डेली रूटीन बन गया था

 

 अब वह रोज तैयार होकर राधिका के घर चली जाती थी और काफी देर से घर लौटती थी उसे मेरी भी कोई फिक्र नहीं होती थी कि मुझे घर आकर खाना भी खाना होता है वह मेरे लिए खाना नहीं पकाती थी इसलिए मैं मार्केट से ही लाकर खाना खा लिया करता था और जब वह खुद घर आती तो कहती कि मैं खाना खाकर आई हूं मुझे उसकी यह बात ब बिल्कुल भी पसंद नहीं आई थी इसलिए अब हमारी रोज ही लड़ाई रहने लगी थी

 

 मेरे लाख समझाने पर भी वह मेरी किसी बात को सुनने के लिए तैयार नहीं थी फिर एक दिन हमारी बहुत ही ज्यादा लड़ाई हुई थी इतनी ज्यादा लड़ाई हो गई थी कि हम दोनों एक दूसरे से अलग होने पर तैयार हो गए थे लेकिन इससे भी एकता को कोई फर्क नहीं पड़ा था बल्कि वह तो गुस्से में मुझे इस तरह से छोड़कर राधिका के घर चली गई थी उसको मेरी नाराजगी की भी कोई कद्र नहीं थी 

 

पर मैंने सोच लिया था कि शायद बता को गुस्से से नहीं बल्कि प्यार से समझाने की जरूरत है क्योंकि वह बहुत जिद्दी है इसलिए जब वह घर वापस आई थी तो मैंने उसका वेलकम बहुत अच्छे तरीके से किया था ताकि उसे कुछ स्पेशल लगे और उसका मूड ठीक हो जाए मैंने खुश होकर उसे कहा भी था कि हम लोग कहीं बाहर चलते हैं घूमने फिरने के लिए पहले तो उसने बिल्कुल साफ इंकार कर दिया था कि मेरा मूड नहीं है 

 

लेकिन फिर मेरे ज्यादा कहने पर वह मान गई थी मैंने उसे कहा था कि तुम जल्दी से अच्छी तरह से रेडी हो जाओ फिर हम दोनों कहीं बाहर चलते हैं उसका मूड थोड़ा ठीक हुआ था तो मैंने गहरी सांस भरी थी कि चलो अच्छा है उसके मूड में कुछ चेंजेज आए हम दोनों खुशी-खुशी घर से निकल गए थे हमें घर से निकले हुए अभी थोड़ी ही देर हुई थी कि रास्ते में हम दोनों का एक्सीडेंट हो गया था यह हादसा हमारे लिए बहुत ही खतरनाक साबित हुआ था जिसमें एकता के सर पर बहुत ज्यादा चोट लगी थी 

 

और वह बेचारी बहुत ही तकलीफ में थी वैसे तो मुझे भी बहुत चोट चोट आई थी लेकिन मुझे सबसे ज्यादा अपनी पत्नी की चोट की परवाह थी मुझे तो बस मामूली सी चोट आई थी रोड पर मौजूद लोग जल्दी से हमें उठाकर हस्पताल ले गए थे डॉक्टर ने फौरन ही हम लोगों का इलाज शुरू कर दिया था लेकिन एकता के बारे में पूछने पर डॉक्टर ने मुझसे कहा था कि अभी हम आपको एकता के बारे में कुछ नहीं बता सकते

 

 क्योंकि पेशेंट की हालत बहुत सीरियस है पेशेंट के सर पर बहुत गहरी चोट आई है वह अभी भी बेहोश है जब तक वह होश में नहीं आ जाती हम आपको कुछ नहीं बता सकते होश में आने के बाद ही हम कोई डिसीजन ले सकते हैं इसलिए बेहतर यही है कि उनके होश में आने का इंतजार किया जाए एकता को बेहोश हुए एक घंटा हो गया था लेकिन वह अभी तक होश में नहीं आ रही थी जिसकी वजह से मैं बहुत ज्यादा परेशान हो रहा था और अपने भगवान से बार-बार अपनी पत्नी की सलामती की भीख मांग रहा था

 

 मैं बहुत घबरा गया था और बार-बार उसके होश में आने की प्रार्थना कर रहा था पर थोड़ी देर के बाद एकता को होश आ गया था मैंने भगवान का शुक्रिया अदा किया था लेकिन अगले ही पल मेरे होश उड़ गए थे इस दुनिया में मैं जिंदा नहीं रह पाऊंगा जब डॉक्टर ने मुझे बताया था कि इस हादसे में आपकी पत्नी की दोनों आंखें चली गई वह अब इस रंगीन दुनिया को अपनी आंखों से नहीं देख सकती मुझे डॉक्टर की बातों पर यकीन नहीं आ रहा था इसलिए मैं फौरन ही भागकर एकता के पास चला गया था

 

 और वहां पर जाते ही मैंने एकता से पूछा तुम कैसी हो फिर एकता ने मेरी आवाज सुनकर मुझसे कहा था कि आशीष मेरा सर बहुत भारी हो रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे दर्द से फटने वाला है थोड़ी देर ही गुजरी थी मैं अफसोस में वहां पर खड़ा हुआ था और अपनी पत्नी को बड़ी बेताबी की नजरों से देख रहा था जब उसने कहा कि कमरे में अंधेरा क्यों किया हुआ है आशीष जरा लाइट ऑन करो इस कमरे में बहुत अंधेरा है 

 

और तुम तो जानते ही हो ना कि मुझे अंधेरे से डर लगता है और मेरे दिल पर घबराहट स्वार हो जाती है मैंने डॉक्टर से भी इस बारे में कहा था लेकिन डॉक्टर ने कहा था कि आपको अभी कुछ देर अंधेरे में ही रखा जाएगा मगर मुझे बहुत डर लग रहा है तो एकता की बात सुनकर मैंने कमरे में चारों तरफ अपनी नजर घुमाई थी और मेरी आंखों से आंसू निकल रहे थे क्योंकि कमरे में हर तरफ रोशनी ही रोशनी छाई हुई थी

 

 फिर मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला था और एकता से कहा था कि तुम डरो मत मैं हूं ना तुम्हारे साथ इसलिए तुम्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है फिर दो दिन के बाद एकता की तबीयत काफी बेहतर हो गई थी तो डॉक्टर ने उसे सारी सच्चाई बता दी थी जिसे सुनकर मेरी पत्नी बहुत ज्यादा रोई थी और मुझे भी उसकी हालत पर बहुत अफसोस था लेकिन फिर उसने खुद को बहुत ही जल्द संभाल लिया था जिसकी मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी मैंने एकता से वादा किया था कि तुम्हारा इलाज करवा कर ही रहूंगा 

 

और तुम एक दिन जरूर ठीक हो जाओगी और पहले की तरह अपनी आंखों से देख सकोगी क्योंकि डॉक्टर ने भी मुझे पूरी उम्मीद दिलवाई थी कि आपकी पत्नी का इलाज मुमकिन है एकता के इलाज के लिए मैंने एक बार फिर से जीत और मेहनत करनी शुरू कर दी थी और इन पैसों से मैंने अपनी पत्नी का इलाज करवाना शुरू कर दिया था अब इस हादसे को कई महीने गुजर गए थे लेकिन एकता को कोई फर्क नहीं हुआ था जिसकी वजह से एकता ने अपनी हिम्मत हार दी थी और उसकी हालत दिन बदिरा होती जा रही थी 

 

मुझसे एकता की यह हालत देखी नहीं जा रही थी और मैं सारा दिन एकता से छुपकर रोता रहता था ताकि उसे और ज्यादा अफसोस ना हो क्योंकि मैं खुद को एकता की इस हालत का जिम्मेदार समझता था इसलिए मैंने कई बार एकता से माफी भी मांगी थी और उससे कहा था कि प्लीज मुझे माफ कर दो क्योंकि यह सब कुछ मेरी वजह से ही हुआ था तुम उस दिन कहीं पर भी नहीं जाना चाहती थी

 

 लेकिन मैं फिर भी तुम्हें अपने साथ जबरदस्ती लेकर गया था तभी तो यह सब कुछ हुआ था अगर हम लोग उस दिन नहीं जाते तो शायद यह हासा नहीं होता मेरी बात सुनकर एकता मुझसे कह देती कि इन सब में आपका कोई कसूर नहीं है बल्कि इंसान के साथ तो वही होता है जो उसकी किस्मत में लिखा हुआ होता है शायद मेरी किस्मत में यही सब कुछ लिखा हुआ था इसलिए मेरे साथ ऐसा हुआ है आप खुद को दोष मत दो

 

 क्योंकि मैं आपको कसूरवार नहीं समझती मैं एकता की बातें सुनकर और भी ज्यादा शर्मिंदा हो जाता था और मैं उसको इस हालत में नहीं देखना चाहता था इसलिए मैंने उसको शहर के बेस्ट आय क्लीनिक में दिखाया था और उसका महंगे से महंगा इलाज करवाना शुरू कर दिया था जिसके लिए मैं दिन रात मेहनत करता था मैं जब भी रात को घर वापस आता था तो एकता को देखकर मेरा दिल बहुत दुख जाता था

 

 क्योंकि कभी वह जमीन पर गिरी हुई होती थी और कभी बैठकर रो रही होती थी वह मेरे पूछने पर बताती थी कि मुझे बहुत प्यास लगी हुई थी और मुझे पानी नहीं मिल रहा था यह सब कुछ सुनकर मुझे बहुत ज्यादा दुख होता था और मैं सिर्फ पछतावे के दलदल में धंसा चला जा रहा था कभी-कभी मेरा दिल करता था कि मैं सारा दिन अपनी पत्नी के पास ही बैठा रहूं और उसका ख्याल रखूं 

 

लेकिन फिर मैं यह भी सोचता था कि अगर मैं कहीं पर जाकर काम नहीं करूंगा तो मेरे पास पैसे कहां से आएंगे और इस तरह से मैं अपनी पत्नी का इलाज भी नहीं करवा पाऊंगा बस यही सब कुछ सोचकर मैं मजबूर होकर काम पर जाता था फिर मैंने एकता के इलाज के लिए ₹1 लाख का लोन ले लिया था और अब उसका इलाज एक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में शुरू करवा दिया था एकता के इलाज को 3 महीने का टाइम हो गया था लेकिन उसे रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ रहा था मैं इस बात से बहुत ज्यादा परेशान था 

 

क्योंकि मैं किसी तरह से उसके इलाज में कोई भी कमी नहीं कर रहा था फिर भी उसकी आंखों की रोशनी में कोई फर्क नहीं आ रहा था अब मेरे साथ-साथ सारे डॉक्टर भी परेशान हो गए थे कि आखिर एकता क्यों ठीक नहीं हो रही तो हालात और भी ज्यादा गंभीर हो गए थे एकता का इलाज करवाते हुए मैं सड़क पर आ गया था और मेरी कंडीशन भिखारियों जैसी हो गई थी थी कई बार तो मेरी बहन ने भी मुझे एकता के इलाज के लिए पैसे दिए थे 

 

लेकिन मैं उससे भी ज्यादा पैसे नहीं ले सकता था वह मेरी बहन थी उसे मेरा बहुत ख्याल था एक दिन उसने मुझे समझाने के लिए कहा था कि भैया भाभी का इलाज ना करो क्योंकि तुम्हारी कंडीशन बहुत बुरी हो गई है लेकिन मेरा दिल नहीं मानता था क्योंकि मैं एकता से बहुत प्यार करता था और मैं उसे ऐसी हालत में कभी नहीं देख सकता था मैंने उससे वादा किया था कि मैं हमेशा तुम्हारा साथ दूंगा 

 

अब मैं इस वक्त उसका साथ कैसे छोड़ सकता था मेरी सारी कोशिशें नाकाम हो गई थी क्योंकि एकता ठीक नहीं हुई थी और जिन लोगों से मैंने उधार लिया था वह भी मुझसे बार-बार पैसे मांग रहे थे और मैं हर बार लोगों से कुछ वक्त मांग लेता था लेकिन यह लोग इस पर भी राजी नहीं हो रहे थे और होते भी क्यों क्योंकि मैं उन लोगों को कई बार टाल चुका था मुझे झूठ बोलना पसंद नहीं था लेकिन मैं मजबूर था मैं बहुत बुरे हालात से गुजर रहा था इन लोगों ने मुझ पर जोर डालना शुरू कर दिया कि मैंने उनके पैसे वापस नहीं किए 

 

तो वह लोग मेरा बुरा हाल कर देंगे मैं अपने हालात से लड़ते-लड़ते अब थक चुका था क्योंकि कुछ भी ठीक नहीं हो रहा था और मैं अब बेबस हो चुका था फिर एक दिन जब मैं काम से घर वापस आया तो एकता की हालत कुछ अजीब सी थी उसकी आंखों में आंसू थे और वह पसीने से भीग रही थी उसके हाथ में बहुत से पैसे थे फिर उसने मेरी आवाज सुनते ही सारे पैसे मेरे सामने किए थे और मुझसे से कहने लगी थी कि यह पैसे आपका कोई दोस्त देकर गया है 

 

इन पैसों को मैंने बड़ी हैरानी से देखते हुए सोचा था कि यह पैसे आखिर किसने दिए होंगे क्योंकि मेरे तो काफी सारे दोस्त थे लेकिन कुछ ऐसे दोस्त हैं जो मेरी मदद किया करते थे वो इन दिनों शहर से बाहर गए हुए थे और कुछ दोस्तों से तो पहले ही पैसे उधार ले चुका था वह लगातार अपने पैसे मांग रहे थे अब ऐसा हर रोज ही होने लगा था मैं जब भी घर वापस आता था तो एकता पैसे मेरे सामने रख देती थी

 

 लेकिन उसकी हालत बहुत ही अजीब सी होती थी कभी उसके बाल खुले हुए होते थे और कभी वह बहुत टेंशन में होती थी और कभी तो वह रो रही होती थी और उसके मुंह पर थप्पड़ का निशान भी होता था जिसे देखकर मैं बहुत डर जाता था और सोचता था कि आखिर यह सब कुछ क्या हो रहा है इसलिए एक दिन इस हकीकत को जानने के लिए एकता को जाने के लिए कहकर मैं घर के अंदर छुप गया था कि मैं काम पर जा रहा हूं

 

 और एकता पर नजर रखे हुए था क्योंकि मैं यह जानना चाहता था कि आखिर एकता को पैसे कौन देकर जाता है और उसकी अजीबोगरीब हालत कैसे होती है और इस सब का मतलब क्या है लेकिन थोड़ी ही देर के बाद मेरे सर पर आसमान टूट पड़ा था और मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि मैं जो देख रहा हूं वह सब हकीकत है या नहीं क्योंकि मेरे जाते ही एकता उठ खड़ी हुई थी

 

 और सीधा चलती हुई कमरे में चली गई थी फिर कुछ ही देर में वह अपना मोबाइल लेकर आई थी और किसी अंकित नाम के लड़के से फोन पर बातें कर रही थी और कह रही थी कि हमारे इस नाटक का कोई भी फायदा नहीं हुआ क्योंकि मुझे तो लगा था कि जब मैं अंधेपन का नाटक करूंगी तो आशीष मुझे डिवोर्स दे देगा क्योंकि वह तो लड़कियों की खूबसूरती पर मरने वाला इंसान है

 

 मुझे भी उसने खूबसूरत देखकर ही पसंद किया था और अब तो मेरी खूबसूरती पर ग्रहण लग चुका था लेकिन फिर भी उसने तो मेरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया जब उसने मेरा इलाज करवाना शुरू कर दिया था और वह कह रही थी कि अंकित देखो तुम्हारा दूसरा आईडिया भी हमारे कुछ काम नहीं आया मैं तो हर रोज अजीब अजीब हरकतें करने लग गई थी कि अब तो आशीष मुझ पर शक करेगा 

 

और मुझे फौरन ही छोड़ देगा लेकिन पता नहीं क्यों आशीष तो बहुत ही बेवकूफ इंसान है उसे तो मुझ पर शक ही नहीं हो रहा मेरी तो बस यही ख्वाहिश कि आशीष मुझे जल्द से जल्द डिवोर्स दे दे और मैं इस घर को और उसको छोड़कर चली जाऊं क्योंकि मैं इस घुटन भरे माहौल में और इस गरीबी भरी जिंदगी से आजाद हो जाऊंगी और मैं बस जल्दी से इस कैद से आजाद होना चाहती हूं एकता की बातें सुनकर मुझे ऐसा लगा था जैसे मुझे किसी सांप ने सूंघ लिया हो

 

 क्योंकि मैं अपनी जगह से कोई रिएक्ट नहीं कर पा रहा था और मुझे यकीन नहीं आ रहा था कि एकता मेरे साथ अंधेपन का इतना बड़ा नाटक कर रही थी फिर मुझे अपने आप पर भी बहुत गुस्सा आ रहा था कि आखिर मैंने इसके नाटक को पहचाना क्यों नहीं मैंने क्यों इतने पैसे लगाए और अब मैं इतने कर्ज में डूब गया हूं जिससे निकलना मेरे लिए बहुत मुश्किल नजर आ रहा है मैंने एकता की खुशी के लिए क्या कुछ नहीं किया था

 

 मेरा मन तो कर रहा था कि मैं जाकर अभी एकता के मुंह पर थप्पड़ मार दूं और उससे पूछूं कि आखिर तुमने मेरे साथ इतना बड़ा धोखा क्यों किया उसने मेरी मोहब्बत के बारे में एक बार भी नहीं सोचा था अब मुझे उससे बहुत ज्यादा नफरत महसूस होने लगी थी फिर मैंने खुद को बड़ी मुश्किल से संभाला था और एकता को रंगे हाथों पकड़ लिया था वह मुझे देखकर बहुत डर गई थी 

 

और उसने मुझसे नजरें रा ली थी क्योंकि वह समझ गई थी कि मैं उसकी सारी सच्चाई को जान गया हूं मैंने एकता से सवाल किया था कि आखिर तुमने मेरे साथ यह सब कुछ क्यों किया मेरी बात सुनकर वह खामोश हो गई थी फिर मैं उस पर चिल्लाया था और मैंने उसे कहा था कि खामोश मत रहो मुझे सब कुछ सच-सच बताओ मेरे चिल्लाने पर वह कांप गई और उसकी आंखों में अचानक आंसू आ गए वह कहने लगी थी कि मैं तुमसे तंग आ गई थी

 

 और तुम्हारे साथ इस गरीबी भरी जिंदगी से भी क्योंकि मुझे मोहब्बत करने वाला इंसान नहीं बल्कि सिर्फ पैसे चाहिए थे जो कि तुम्हारे पास नहीं है बल्कि अंकित के पास हैं इसलिए मैंने यह सब कुछ किया था क्योंकि मैं तुमसे प्यार नहीं करती मैं तो सिर्फ उस इंसान से प्यार करती हूं जो मेरी सारी ख्वाहिशों को चुटकियों में पूरा कर सकता है एकता की बातों ने मुझे कुछ भी कहने के काबिल नहीं छोड़ा था

 

 लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत करके उससे पूछा था कि यह सब कुछ कब से चल रहा है फिर अचानक से मुझे याद आया था और मैंने उससे कहा था कि जब तुम तु मुझसे राधिका के घर का कहकर जाती थी तो क्या तुम राधिका के घर पर नहीं बल्कि अंकित से मिलने के लिए जाती थी तो एकता ने फोर रही मुझसे कहा था कि हां ऐसा ही है 

 

और फिर वह कहने लगी थी कि अब अगर तुम्हें सारी सच्चाई का पता चल ही गया है तो मुझे डिवोर्स दे दो क्योंकि मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती एकता की बात सुनकर मैंने उसे डिवोर्स दे दिया था क्योंकि मैं हमेशा उसे खुश देखना चाहता था अपने साथ ना सही तो किसी और के साथ ही सही लेकिन डिवोर्स एक हफ्ते के बाद हुआ था मैं अकेले ही अब एकता की यादों के सहारे अपनी जिंदगी को गुजार रहा था

 

 हम दोनों के डिवोर्स को चार महीने ही गुजरे थे कि एकता फिर से मेरे पास आ गई थी और इस बार वह रोती हुई आई थी उसने आकर मुझे बताया था कि अंकित ने उसे धोखा दिया क्योंकि वह अमीर आदमी नहीं है बल्कि जो घर और गाड़ियां उसने एकता को इंप्रेस करने के लिए दिखाई थी वह तो उसके बॉस की थी जहां पर वह जॉब किया करता था और उसके बॉस ने उसे जॉब से निकाल दिया 

 

और इतना ही नहीं बल्कि अंकित पहले से ही शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं वह सिर्फ एकता के साथ टाइम पास कर रहा था उसको तो अपने बच्चों की ही परवरिश करना भारी पड़ रहा है और उसके पास एकता को देने के लिए कुछ भी नहीं था उसने मुझसे कहा था आशीष तुम मुझे माफ कर दो और एक बार फिर से मुझसे शादी करके मुझे अपने घर में जगह दे दो 

 

मैं तुमसे वादा करती हूं कि इस बार मैं तुम्हारा बहुत ख्याल रखूंगी और तुम्हें बहुत मोहब्बत भी करूंगी क्योंकि मुझे तुमसे प्यार हो गया है मुझे एहसास हो गया है कि मेरी बहुत बड़ी गलती थी मैंने तुम्हारे साथ जो किया मुझे उसकी सजा मिली जबकि तुम तो बहुत अच्छे इंसान हो तुम मुझसे बहुत प्यार करते थे और तुमने मेरी खातिर क्या नहीं किया था और मैं कभी तुम्हारे प्यार को नहीं समझ पाई प्लीज मुझे एक्सेप्ट कर लो 

 

एकता की बात सुनकर मैंने उसे कह दिया था कि मुझे एक ही पत्थर से दोबारा चोट खाने की आदत नहीं है और वैसे भी तुमने मेरे साथ जो कुछ भी किया उसके बाद तुम अपनी रिस्पेक्ट मेरे दिल से खो चुकी हो इसलिए अब मैं दोबारा तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहता तुम मेरे घर से चली जाओ और दोबारा कभी पलटकर मेरे पास वापस मत आना क्योंकि अब मैंने खुद को संभालना सीख लिया है

 

 वह रोते हुए मेरे पास से वापस अपने मायके अपने माता-पिता के पास चली गई थी और अब वह उन्हीं के पास रह रही है उन लोगों ने भी मुझ पर बहुत जोर दिया था कि मैं एकता से दोबारा से शादी कर लूं लेकिन मैंने उनकी भी कोई बात नहीं मानी थी मेरी जिंदगी बहुत परेशानी भरी गुजर रही थी मैं बहुत परेशान था फिर एक दिन एक आदमी मेरे पास आया ₹ लाख का चेक लेकर आया था 

 

उसने मुझसे कहा था कि यह पैसे तुमने मुझे 5 साल पहले उधार दिए थे और तुम यह पैसे मुझे देकर भूल गए थे इसलिए वही पैसे तुम्हें 5 साल बाद देने के लिए वापस आया हूं क्योंकि अब मेरा कारोबार अच्छा चलने लगा है और भगवान का दिया मेरे पास सब कुछ है इसलिए मैं अपने ऊपर तुम्हारा कर्ज नहीं रख सकता मुझे अभ याद आया था कि जब मेरी बहन की शादी नहीं हुई थी तब मेरे पास काफी सारी सेविंग थी 

 

तो इस इंसान ने मुझसे अपना कारोबार करने के लिए कुछ पैसे मांगे थे मैंने उसको ₹ लाख दे दिए थे और इस इंसान ने मुझे मेरी बहन की शादी पर बड़ी मुश्किल से 5 लाख तो दे दिए थे लेकिन ₹ लाख अभी भी बाकी रह गए थे मैं उन पैसों के बारे में बिल्कुल भूल चुका था मैंने अपने पैसों से एक रेडीमेड गारमेंट का बिजनेस शुरू कर दिया था भगवान ने मुझे बहुत ही तरक्की दे दी और कुछ दिनों बाद ही मेरी बहन ने मेरे लिए एक अच्छी सी लड़की देखकर मेरी शादी भी करवा दी थी

 

 जिसके साथ मेरी जिंदगी बहुत अच्छी गुजर रही है और अब 3 साल बाद मैं एक बेटे का पिता भी हूं मैं आप लोगों से रिक्वेस्ट करता हूं मेरी तरह आप लोग भी आंख बंद करके किसी पर इतना भरोसा मत करना जितना कि मैंने किया था तो इस कहानी के बारे में आपकी क्या राय है कमेंट करके जरूर बताइएगा

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