अच्छा पिता या अच्छा पति | Short Moral Stories In Hindi | Sad Hindi Story | Meri Kahaniyan

Short Moral Stories In Hindi : यह छोटा सा घर था इस घर में शादी करके आई हुई मुझे ज्यादा समय नहीं हुआ था मैं बहुत खुश थी कि चलो ज्यादा लोग नहीं है छोटा सा परिवार है लेकिन यहां पर मेरे लिए इतने बड़े-बड़े मसले बन जाएंगे यह मैंने कभी नहीं सोचा था मेरा पति मुझे छोड़कर रोज बाहर जाकर सो जाता था जबकि ना हमारी कोई लड़ाई हुई थी और ना ही कोई अनबन चल रही थी फिर वह ऐसा कैसे कर सकता था पहले मुझे लगा कि शायद उसे कमरे में नींद नहीं आती

 पर जब मैंने उसको कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ बाहर सो जाऊं तो वह बुरी तरह से घबरा गया जैसे अगर मैं सो गई तो पता नहीं क्या हो जाएगा फिर मुझे शक होने लगा कि कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है और एक दिन मैंने एक प्लान बनाया और उस रात मुझे पता चला कि अपनी सुंदर बीवी को कमरे में अकेला छोड़कर मेरा पति जो बाहर सोया करता था उसके पीछे राज यह था वह सारी रात अपना ही मेरे पति का नाम सुदेश था शकल सूरत का अच्छा आदमी था 

लेकिन उसकी उम्र मुझसे थोड़ी सी ज्यादा थी वह ट्रक चलाने का काम करता था इसलिए उसके पास पैसे भी थे लेकिन घर देखकर ऐसा लगता था कि कभी उसने घर पर एक पैसा भी नहीं लगाया शादी के वक्त उसकी मां ने कहा था कि जब नई बहू घर आएगी तो हम घर की भी मरम्मत करवा लेंगे आप बस हमें रिश्ता दे दे मेरे मां-बाप ने रिश्ता दे दिया क्योंकि मैं अपनी बहनों में सबसे बड़ी थी 

और मेरे बाद सात बहने और भाई थे हम लोग गरीब थे और गरीबों के घर से रिश्ता भी गरीब घर से ही आता है यह कोई फिल्म या नाटक नहीं होता जिसमें गरीब की बेटी को कोई अमीर पसंद कर ले जाए एक नरक से निकलकर दूसरे नरक में जाने वाली बात होती है क्योंकि मेरे पति के घर में भी कुछ नहीं था दो कमरे थे जिसमें से एक कमरा बहुत छोटा था इतना छोटा कि उसमें एक बेड भी नहीं आ सकता था वह कमरा मेरी सासू मां का था और मेरी सासू मां भी बहुत ज्यादा जवान थी

 पहले तो मुझे लगा कि वह मेरी सासू मां नहीं बल्कि शायद मेरे पति की बड़ी बहन है पर मैं यह जानकर हैरान रह गई कि वह तो उसकी मां भी थी उसने कहा कि मेरी शादी बहुत छोटी उम्र में हुई थी इसलिए मैं ज्यादा बूढ़ी नहीं लगती हूं मैं यह नहीं कहती कि कोई अच्छी बात थी इतनी छोटी उम्र में शादी करना तो अच्छा नहीं होता लेकिन अब सोचती हूं कि अच्छा हुआ बेटा जवान हो गया साल भर में दादी बन जाऊंगी

 लेकिन देखने से दादी नहीं लगूंगा मेरी सांस अच्छी थी बुरी औरत नहीं लग रही थी दूसरा कमरा हमारा था और यह कमरा भी तो इतना बड़ा नहीं था छोटे कमरे से थोड़ा सा ही बड़ा था हम दोनों के लिए यहां पर एक बेड रख दिया गया था और कुछ थोड़ा बहुत सामान था घर छोटा था तो मैंने सोचा कि अच्छी बात है ज्यादा काम नहीं होगा जल्दी-जल्दी साफ हो जाएगा और तीन लोगों का खाना बनाना कौन सा मुश्किल काम है 

इसलिए मुझे रिश्ते से कोई आपत्ति नहीं थी हां यह था कि जो ख्वाब मैंने देखे थे वह मेरे इस घर में भी पूरे होने वाले नहीं थे क्योंकि मेरा पति भी एक गरीब आदमी था तीन लोगों के हिसाब से उसके पास अच्छी कमाई थी पर आगे चलकर क्या होता मुझे भी बच्चे पैदा करने का बहुत शौक था मैं चाहती थी कि साल भर में मेरा एक बच्चा पैदा हो जाए मैं उसके साथ अपनी जिंदगी गुजारने लगूं मुझे मां बनने का बहुत ज्यादा चाव था

 मेरी मां ने कहा था कि तुम फिक्र नहीं करोगी शादी होती तो साल भर में बच्चा हो जाता है और तुम्हारी उम्र भी कम है इसलिए जो तुम चाह रही हो वह हो जाएगा मैं भी खुश थी पर शादी की पहली ही रात मेरे पति ने इतनी अजीब हरकत की मैं हैरान रह गई मेरे कमरे में आया उसने मेरा घूंघट भी उठाया मेरी थोड़ी तारीफ भी की पर फिर मुझसे कहा कि मैं दो मिनट में आता हूं तुम यहीं बैठो

 और दो मिनट से दो घंटे गुजर गए यहां तक कि चार घंटे गुजरते सुबह की रोशनी हो गई मैं भी बीच में सो गई जब आंख खुली तो मेरे पति बाहर भी नहीं थे और रात को कमरे में भी नहीं आया मेरी सास ने जब मुझसे पूछा कि सुदेश कहां है तो मैंने कहा कि जी मुझे तो नहीं पता तो वह कहने लगी कि क्या सारी रात तुम्हारे कमरे में नहीं आया मैंने कहा कि नहीं शायद अपने दोस्तों के साथ था 

मेरी सांस ने कहा कि उसके कौन से दोस्त हैं उसकी किसी से दोस्ती नहीं है चलो मैं पूछती हूं कि वह कहां था तैयार हो जाओ अभी तुम्हें देखने के लिए लोग आने वाले होंगे मुंह दिखाई की रसम होनी है मैं रसम में उलझ गई और दिल दिल में यही सोचने लगी कि शायद शादी का पहला दिन था वह थक गया होगा लेकिन अगले दिन भी वह मेरे कमरे में नहीं आया वह शाम तक कमरे में आ जा रहा था 

कभी अपनी कोई चीज लेने के लिए कभी आराम करने के लिए लेकिन रात को कमरे से गायब हो गया और तीसरे दिन जाकर मुझे पता चला कि मेरा पति क्या कर रहा है हमारे इस छोटे से घर में बिल्कुल एक साइड पर छोटा सा आंगन बना हुआ था पहले मुझे लगा कि यह अलग से हिस्सा बना हुआ है जानवर पालने के लिए लेकिन फिर समझ आ गया कि यह छोटा सा आंगन है जगह बहुत गंदगी थी

 

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 लेकिन अगर इसको साफ किया जाता तो यहां बैठकर हम शाम की चाय पी सकते थे कुछ इस तरह का माहौल था मेरा पति वहां पर एक चारपाई पर अपना बिस्तर बिछाकर सोने की तैयारी कर रहा था मैंने कहा कि आप यहां क्यों सो रहे हैं हमारी शादी हुई है आप कमरे में क्यों नहीं सोते तो उसने मुझे कहा कि बहुत ज्यादा गर्मी है इसलिए मुझे कमरे में बहुत ज्यादा गर्मी लगती है मैं कमरे में नहीं सो सकता मैं कमरे में सोता हूं तो मेरा दम घुटता है तुम जाकर सो जाओ जरा मौसम अच्छा हो जाएगा तो मैं अंदर आ जाऊंगा 

वैसे भी यह सितंबर का महीना चल रहा था मौसम तो अच्छा होने वाला था इतनी भी गर्मी नहीं थी और फिर पति-पत्नी की शादी हो जाए तो उन्हें सिर्फ सोना तो नहीं होता एक साथ बैठकर कोई बात भी करनी होती है कोई बंदा दिल की बात कर लेता है मेरे पति को इन चीजों का कोई शौक नहीं था वह तो ऐसे बैठा था जैसे उसकी पहली शादी नहीं थी उसके अंदर पहली शादी वाला कोई भी लक्षण नजर नहीं आ रहा था

 मेरी तरफ तो देखता ही नहीं था मैं भी अपने कमरे में जाकर सो गई क्योंकि मैं नई नवेली दुल्हन थी मुझे पूछने का हक तो था लेकिन मैंने पूछा नहीं सोचा था कि दो-तीन दिन बाद खुद ही कमरे में आ जाएगा शायद शर्मा रहा है हां भाई अब यह जरूरी तो नहीं कि सिर्फ औरतें ही शर्माए आजकल तो मर्द भी शर्मा जाते हैं या तो अपनी पुरानी करतूतों पर या फिर बिना वजह ही लेकिन थोड़ी बहुत शर्म उनको भी आ जा है गुस्सा तो मुझे आना ही था क्योंकि उसने हमारी शादी की रात को भी बर्बाद कर दिया था 

और अब तीसरे ही दिन बाहर जाकर सो रहा था मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह मेरा मजाक बना रहा है और कह रहा है कि तुम्हारे साथ नहीं सोना क्योंकि तुम तो सोने के काबिल ही नहीं हो क्या हो रहा था जब सितंबर का महीना आता है तो उसके बाद मौसम बदल जाता है इतना तो बदल ही जाता है कि इंसान कमरे के अंदर पंखे में सो सकता है लेकिन मेरा पति अब भी यही बहाना कर रहा था कि मुझे बहुत गर्मी लगती है जबकि वह तो शाकाहारी था दाल सब्जी खाने वाला आदमी था उसे तो इतनी गर्मी नहीं लगनी चाहिए थी

 इस घर में तो लहसुन का इस्तेमाल भी नहीं होता था फिर इसको किस चीज से इतनी गर्मी लगती थी कि इससे कमरे में बैठा नहीं जाता था उसने अपना एक मोबाइल भी रखा हुआ था जो बहुत ज्यादा महंगा था वह उस मोबाइल पर बैठकर कोई फिल्म देखता रहता और बाहर चारपाई डालकर उस पर ही सो जाता मैं पूरी तरह से गुस्से में थी मैं उसका इंतजार करती रहती थी कभी तो उसे मेरा ख्याल आएगा 

ना तो शादी करती है ना तो शादी के शुरू में ऐसा होता है लेकिन मेरा तो एक घंटा भी अच्छा नहीं गुजर रहा था इसीलिए मैं परेशान थी यह बात मेरी सांस तक भी पहुंच गई उन्होंने कहा कि क्या बात है लड़ाई हुई है क्या मैंने कहा कि मन जी लड़ाई तो तब होगी ना जब वह मेरे साथ बैठेगा जब वह मेरे साथ ही नहीं बैठेगा तो लड़ाई कैसे होगी वह तो पहले दिन से ही ऐसा कर रहा है मेरी सास भी मेरे सामने थोड़ी सी शर्मिंदा हो गई और उन्होंने कहा कि तुम फिक्र नहीं करो मैं उससे बात करती हूं 

इतना तो मुझे भी पता है कि उसे कमरे में नींद नहीं आती वह तुम्हारे आने से पहले भी बाहर ही सोता था लेकिन अब तो शादी हो गई है तो उसे थोड़ा सा तो ख्याल करना ही चाहिए अगर वह तुम्हारे साथ नहीं रहेगा तो यह रिश्ता आगे कैसे बढ़ेगा मेरी सास ने तो सीधी बात कर दी मुझे भी अच्छा लगा सीधी बात कर देने वाले लोग ही अच्छे होते हैं बस जो बात है उसे बोल दी जाए तो बेहतर है उन्होंने मेरे पति को समझाया

 और वह एक दिन ही मेरे कमरे में सोया लेकिन आज की रात उसकी हरकतें देखकर मैं हैरान हो रही थी वह बहुत ज्यादा बेचैन था बार-बार कहता था सुबह कब होगी सुबह कब होगी और मैं हैरान हो जाती थी कि इसको क्या हो गया है उसको सुबह होने का इतना इंतजार क्यों है वह पूरी रात मुझसे मुंह फेर के सो गया इससे तो अच्छा था कि बाहर ही सो जाता मुझसे उसने कोई बात भी नहीं की मेरी तारीफ भी नहीं की मुझे पग फेरों के लिए भी नहीं लेकर गया 

अपनी मां के घर जाकर भी मुझे झूठ बोलना पड़ा कि वह बहुत ज्यादा बिजी है उन्होंने भी कहा कि ऐसा कौन से काम में बिजी है रात से पहले घर तो आ जाता है और हम लोग कौन सा जल्दी सोते हैं तुम रात को ही दामाद जी को ले आती साथ बैठकर चाय पी लेते पर मुझे पता था कि किस तरह के आदमी से मेरी शादी हुई है मुझे शायद अब बार-बार झूठ ही बोलना पड़ता है यह भी उन लोगों में से था

 जो बीवी के घरवा को कुछ ज्यादा अहमियत नहीं देते और उन्हें ज्यादा अच्छा नहीं समझते बस लड़की तो घर आ गई तो अब उनसे क्या मेल मिलाप रखना दो चार दफा मेरा पति कमरे में भी सोया था लेकिन उसका होना ना होना एक बराबर था जब दो महीने गुजर गए तो मेरी सांसू मां ने कहना शुरू कर दिया कि बहू तुम्हारे यहां कोई खुशखबरी नहीं है मैं उनको क्या बताती कि मेरे यहां खुशखबरी कैसे आएगी

 मैंने कहा कि नहीं मां जी अभी ऐसा कुछ नहीं है तो उन्होंने कहा कि ऐसा हुआ भी तो तुम्हें कैसे पता चला लेगा पहले बच्चे पर तो पता नहीं चलता चलो मैं तुम्हें डॉक्टर के पास ले जाती हूं मैं उनको समझाना चाह रही थी कि ऐसा कुछ नहीं है पर मैं कुछ बोल नहीं पाई और वह मुझे डॉक्टर के पास ले गई डॉक्टर ने भी साफ कह दिया कि अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं है आप इतनी जल्दी में क्यों है

 तो मेरी सांस ने कहा कि पोते पोती की शक्ल देखना चाहती हूं ना इसलिए उन्होंने कहा कि आ जाएगा पोता पोती परेशान होने की क्या जरूरत है जब मैंने अपने पति से इस बारे में बात की तो उसने मेरी बात को गौर से सुनही नहीं अगर मैं उससे बात नहीं करती तो किससे करती जा हीरा है उसका और मेरा मामला था वह मेरा पति था लेकिन उसने कहा कि मां तो ऐसे ही करती हो उसे तो हर काम की जल्दी रहती है

 मैंने कहा कि अच्छा फिर आपकी शादी करवाने की जल्दी क्यों नहीं थी आपने तो मुझसे तभी तो आपकी और मेरी सोच नहीं मिलती मेरे पति ने मुझे मुंह भर के कह दिया कि तुम्हारे मुंह में तो जबान भी है मैंने कहा कि हां बिल्कुल जबान भी है और 12वीं क्लास पढ़कर आई हूं आपका जो रवैया है ना मेरे साथ वह ठीक नहीं है इसको थोड़ा सा ठीक करें अपने कमरे में सोया करें पत्नी हूं मैं आपकी खरीद के नहीं लाए आप मुझे समझ आ गई कि मैं आम लड़की नहीं हूं

 और इतनी तो उसे समझ आनी चाहिए थी दो महीने से तो उसने तमाशा बना रखा था भला ऐसा भी कोई करता है अपनी पत्नी के साथ हमेशा ही यह समाज लड़की के पीछे पड़ा रहता है पहले तो यह एक लड़की क्यों पैदा हुई और फिर पैदा हुई तो गोरी क्यों है काली क्यों है सांवली क्यों है और फिर बड़ी हो गई तो पढ़ क्यों नहीं रही पढ़ रही है तो क्या पढ़ रही है और अगर पढ़ रही है तो अच्छे नंबर क्यों नहीं ला रही

 शादी की उम्र होगी तो उसकी शादी करवा दो शादी हो जाए तो जल्दी-जल्दी बच्चे पैदा हो जाए और अगर बेटी पैदा हो जाए तो बेटा पैदा क्यों नहीं हुआ औरत को कहीं भी सुकून नहीं मिलता मेरी सांस भी मेरे पीछे पड़ चुकी थी वह बहुत जल्दी में थी वह चाहती थी कि बस जल्दी जल्दी बच्चा हो जाए एक तरह से सोचा जाए तो शायद उनके लिए सब कुछ नॉर्मल था क्योंकि अब उनकी जिंदगी में और है क्या गया था उन्होंने अपनी जिंदगी गुजार ली थी अब वह दादी बनना चाहती थी वह कह रही थी

 पैदा तुम कर लो पाल मैं लूंगी और ऐसा नहीं था वह मेरे साथ अच्छी नहीं थी घर के कामों में मेरी मदद भी करती थी पर जब उनका बेटा ही मुझे वक्त नहीं दे रहा था तो संतान कहां से होती लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि जिस तरह वह मुझसे बार-बार पूछती है अपने बेटे से भी पूछती है एक दिन दोनों बाहर बैठकर चाय पी रहे थे और मैं रसोई घर में खड़ी पकौड़े तल रही थी मुझे उनकी आवाजें आ रही थी अगर मैं थोड़ा सा गौर करती तो मैं समझ जाती कि वह क्या बोल रहे हैं 

मेरी सास जी ने मेरे पति से कहा कि बेटा तुम्हारी शादी हमने क्यों करवाई थी तुम्हारी पत्नी तुम्हारी जिंदगी में है उसका हमें क्या फायदा है मैंने उसे घर के कामों के लिए नहीं रखा हुआ इस घर में काम ही कितने हैं मुझे तो तुम्हारे बच्चों की शक्ल देखनी थी तुम क्या कर रहे हो अभी तक क्या उसने अपने साथ कुछ किया है या वह बच्चा पैदा नहीं करना चाहती मुझे लगा कि मेरे पति सीधा यही कहेगा कि ऐसा कुछ नहीं है 

मैंने तो ऐसा कुछ नहीं किया था मुझे तो खुद बच्चों का बहुत शौक था लेकिन मेरे पति ने जो बात कही वह सुनकर तो मुझे ऐसा लगा कि मैं अभी ही बेहोश हो जाऊंगी उसने कहा कि चार महीने हो गए अम्मा शादी को आपको अभी तक समझ नहीं आई आपकी बहू के यहां कोई संतान नहीं होने वाली क्योंकि वह संतान पैदा नहीं कर सकती वह बांझ है जैसे ही मेरे पति ने यह बात बोली मेरी सासू मां भी हैरान रह गई सास ने कहा कि क्या कह रहा है कि इस बात का मतलब समझता है कि मैं कभी भी तेरी संतान की शक्ल नहीं देख पाऊंगी

 तो मेरे पति ने कहा कि हां इसका यही मतलब है डॉक्टर के पास ले जाऊंगा हो सकता है कोई इलाज हो जाए लेकिन मां ऐसा इलाज बहुत महंगा होता है और हम गरीब लोग हैं जितने में इलाज होना है ना उतने में दूसरी पत्नी आ जाएगी इसको आजाद करवा देते हैं मैंने यह बात क्या सुनी मेरा दिल तो किया कि मैं बाहर जाऊं और अपने पति से जाकर पूछूं कि वह यह झूठ क्यों बोल रहा है

 मेरी सांसू मां भी रोने लगी उन्होंने कहा कि अब इसमें उसकी भी कोई गलती नहीं है तो ठीक कह रहा है आज कल यह सब कुछ बहुत ज्यादा हो रहा है लेकिन हमारा तो नुकसान हो गया ना हमें क्या पता था कि वह भी ऐसी निकलेगी मैंने वहीं पर बर्तन फेंका और पांव मारती हुई अपने कमरे में चली गई उन दोनों को यह बताना चाहती थी कि मैंने उनकी बातें सुन ली हैं और शायद उनको पता भी चल गया लेकिन इसके बाद मेरी सांस ही तेवर दिखा रही है अभी तक तो वह मेरे साथ खड़ी थी

 लेकिन अब शायद उनको मेरी इस हरकत के बाद गुस्सा आ गया तो उसने कहा कि हां संतान नहीं दे सकती और यह हमें तेवर भी दिखाती फिर रही है मेरा पति कमरे में आया तो मैंने कहा कि यह क्या कह रहे थे आप अपनी मां से कि मेरे यहां बच्चा पैदा नहीं हो सकता आप ऐसी बात कैसे कर सकते हैं जबकि आपको पता है कि क्या हो रहा है और कैसे हो रहा है तो उसने आगे से बहुत ही अजीब तरह की बात कर दी

 उसने कहा कि जाओ मेरे लिए पानी का गिलास लेकर आओ और ऐसी बातें नहीं करो मैंने मां को जो कहा है उसमें हम दोनों का फायदा है मैंने कहा कि कैसे फायदा हम दोनों का आपने मुझे उनके सामने इतना बुरा बना दिया आप तो बाहर चले जाएंगे और वह मुझे बातें सुनाएंगे पूरे खानदान को बताएंगे आप मुझे बदनाम करना चाहते हैं कहीं आपके अंदर तो नहीं है कोई दिक्कत मेरे पति का हाथ हवा में उठ गया

 उसने कहा कि मुझे ऐसी औरतें बिल्कुल नहीं पसंद जो पति के सामने 10 फीट की जबान निकाल के बातें करती रहे चुपचाप बैठ जाओ मैं जो कर रहा हूं हम दोनों के फायदे के लिए कर रहा हूं मुझे उसकी बात समझ नहीं आई लेकिन जिस तरह से वह मुझ पर चलाया था मैं थोड़ा डर जरूर गई थी मैं भी तो एक आम सी लड़की थी मैं कौन सा दुनिया में जंग लड़ती फिरती थी

 पर इस बात पर मुझे बहुत बुरा लगा मेरे पति ने मुझे बदनाम किया झूठ बोला मेरे खिलाफ बातें की मैं सारी रात रोती रही और वह फिर से बाहर ही सो गया और अब उसने अपनी मां को यह भी कह दिया कि मैं इसीलिए बाहर सोता हूं क्योंकि उसके साथ रहकर भी कुछ होने वाला नहीं है तो फिर मैं क्यों गर्मी में सोया करूं लेकिन गर्मी का बहाना भी अब खत्म हो गया था मौसम बदल चुका था 

फिर भी वह बाहर सोता था दोदो कंबल लेकर सोता था लेकिन अंदर नहीं आता था इस बात पर उसकी अपनी मां भी उसे कहती थी कि अंदर जाकर सोया कर नहीं तो बाहर पड़ा सर्दी से बीमार हो जाएगा लेकिन वह मेरे कमरे में नहीं आता अब मेरा दिमाग दूसरी तरफ चल रहा था क्या वजह थी कि वह मेरे पास नहीं आता था मैं सुंदर थी जवान थी इससे ज्यादा कम उम्र थी तो फिर वह क्यों मेरी तरफ नहीं देखता था

 और एक दिन मुझे मेरे सवाल का जवाब तो नहीं मिला लेकिन कुछ बहुत अजीब हुआ हमारे घर में एक बहुत ही सुंदर सी लड़की दाखिल हुई और उसने आकर कहा कि थोड़ी शक्कर मिलेगी मेरी सास ने मुझे आवाज दी और कहा कि यह निर्मला को शक्कर दे दो शायद मेरी सास उसे पहले से जानती थी यह लड़की मुझे अजीब इसलिए लगी क्योंकि इसमें बहुत अजीब से कपड़े पहने रखे थे

 उसको साड़ी पहनने का ढंग बिल्कुल नहीं आता था इसका सारा शरीर नजर आ रहा था और वह बहुत मटक मटक के चल रही थी बिल्कुल ऐसी औरत लग रही थी जो मर्दों को अपने पीछे एक मिनट में लगा ले और पता भी ना चले मैंने अपनी सास से बाद में पूछा कि यह कौन है तो उन्होंने कहा कि यह हमारे प है हमारे घर की दीवारें और उनकी दीवारें एक ही है और वह लोग हमसे भी ज्यादा गरीब है 

इसलिए कुछ ना कुछ मांगते रहते हैं मैंने कहा कि यह लड़की कैसी है तो उन्होंने कहा कि इस लड़की के बारे में तो सारा मोहल्ला बातें करता है लेकिन हमारे साथ बुरे नहीं है जब तू नहीं होती थी और मैं बीमार हो जाती थी तो यही इस घर में आकर घर का काम भी कर जाती थी और खाना वगैरह भी बना कर जाती थी इसीलिए कभी-कभी आ जाती है कुछ चीज मांगती है तो मैं दे देती हूं लड़की बुरी नहीं नहीं है लेकिन इसके बारे में सारा मोहल्ला ही ऐसी बातें करता है

 हम तो किसी की बेटी को बुरा नहीं कहते हम खुद बहू बेटी वाले हैं बाकी भगवान जाने की क्या बात है एक दिन इसकी मां ने कहा था कि तू अपने बेटे की शादी निर्मला से कर दो लेकिन मुझे यह लड़की बिल्कुल भी पसंद नहीं थी इसलिए मैंने तुझे अपने बेटे के लिए पसंद किया था लेकिन तूने भी हमें आकर कौन सी खुशी दिखा दी तू तो कभी मां नहीं बन सकती मेरे पति ने मुझे यह भी कहा था कि अपनी सास को यह कभी ना बताना कि मेरी वजह से यह सब कुछ हो रहा है

 क्योंकि तुम्हें नहीं पता इसके पीछे मेरा बहुत बड़ा प्लान है हम दोनों को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है अभी हमने बच्चे पैदा नहीं करने और जो मैं कर रहा हूं उसके पीछे मेरा बहुत बड़ा प्लान है वरना तो खुद बता तुम तो इतनी सुंदर हो मैं क्यों तुझसे दूर रहूंगा लेकिन अभी मैं तुझे कुछ नहीं बता सकता तुझे मुझ पर थोड़ा सा भरोसा करना होगा मैं अपनी सास के सामने कुछ ना बोली और अपने पति की बातों में आ गई

 मैंने सोचा कि यह बात तो ठीक है सुंदर तो मैं हूं और मैं उसकी पत्नी हूं तो फिर अगर वह मुझसे दूर रह रहा है तो इसका मतलब कि कोई और ही बात है चलो भरोसा करके देख लेती हूं क्योंकि भरोसा ना करूं तो और क्या करूं इसलिए मैंने उनको कुछ नहीं कहा वह मुझे बार-बार कहती थी कि तेरे यहां संतान पैदा नहीं होने वाली और मैं चुप करके सुन लेती थी बुरा लगता था लेकिन आगे से जवाब नहीं देती थी

 मैंने अपने पति से भी पूछा कि कौन सा प्लान है आपका आप लोगों के पास है क्या जिसके लिए आप प्लान बना रहे हैं प्लान तो किसी चीज के लिए बनाए जाते हैं अगर मां पोता पोती की शक्ल नहीं देखेगी तो क्या हो जाएगा और अगर देख लेगी तो तब क्या होगा जो आप मेरे साथ बच्चे पैदा नहीं करना चाहते बल्कि आप तो मेरी तरफ देखते भी नहीं है मुझे बताएं तो मेरा पति बड़ी-बड़ी बातें करके बात को घुमा देता और कहता कि नहीं कुछ ऐसा है 

जो मैं बता नहीं सकता लेकिन है जरूर तुम्हें एक दिन पता चलेगा तो सबसे ज्यादा तुम्हें ही खुशी होगी बहुत अच्छा परिणाम मिलेगा तुम परेशान नहीं हो जो चल रहा है उसे ऐसे ही चलने दो रात होती थी तो मेरी सांस भी अपने कमरे में जाकर अंदर से दरवाजा बंद करके सो जाती थी और मैं भी अपने कमरे में सो जाती थी पर दरवाजा बंद नहीं करती थी कि शायद मेरा पति रात को उठकर आ जाए क्योंकि आजकल सर्दी भी बहुत सी और बाहर बहुत सर्दी होती थी लेकिन एक दिन मैं सोचने लगी कि रात होती है 

तो हम सब तो सो जाते हैं कोई ऐसी बात तो नहीं है कि मेरा पति हम दोनों के सोने के बाद कोई हरकत करता है और मुझे सिर्फ घुमा रहा है कह रहा है कि कुछ मिलेगा लेकिन क्या मिलेगा अगर ऐसी ही कोई इतनी बड़ी बात थी तो उसने मुझे बता देना चाहिए था उसके पास कोई ना कोई जवाब तो होना चाहिए था

 पर उसके पास कोई जवाब नहीं था इसका मतलब कि वह मुझे बेवकूफ बना रहा था और अब मुझे सारे मामले को अपने हाथ में लेने की जरूरत थी मुझे पता लगाना था कि मेरा पति रात को क्या करता है मैं काफी दिनों से प्लान बना रही थी लेकिन मुझे कोई मौका नहीं मिल रहा था एक दिन मेरी सास ने कह दिया कि मैं अपनी बहन के घर जा रही हूं रात वहीं पर रहूंगी और मेरे पति ने फौरन कहा कि हां मां तुम जाओ क्यों नहीं जाती जाया करो

 पता नहीं उसका इसमें क्या मतलब था लेकिन मैं खुश हो गई कि आज ही मैं अपना प्लान पूरा कर सकती हूं लेकिन जैसे ही मेरी सांस चली हुई तो मेरा पति मुझसे एक अजीब सी जिद्द करने लगा उसने कहा कि तुम भी अपनी मम्मी जी के घर चली जाओ कुछ समय वहां पर गुजार लो कितने दिन से नहीं गई हो अब तो मुझे पक्का यकीन हो गया यह तो कुछ और ही करना चाहता है पहले मां को घर से भेजा और अब मुझे भी निकालना चाहता है मैंने कहा कि नहीं मैं नहीं जाना मेरा मन नहीं कर रहा घर में बहुत काम है

 मुझे कपड़े धोने उसने कहा कि अरे काम तो कभी खत्म नहीं होते चली जाओ ना मैंने कहा फिर आप भी चले मेरे साथ आप तो इतने दिनों से मेरे घर वालों से नहीं मिले आप तो उनको फोन भी नहीं करते आप भी चले रात वहीं पर रहेंगे एक ही कमरे में दोनों को सोना होगा खाना खाएंगे मेरी मम्मी जी बहुत अच्छा खाना बनाती है तो इस बात पर उसका मुंह लटक गया और उसने कहा कि नहीं नहीं मैं नहीं जाता ठीक है तुम भी अपने काम कर लो नहीं जाओ लेकिन थक जाओगी काम खत्म करके जल्दी सो जाना मैं भी आज देर से आऊंगा 

मैंने कहा कि हां बिल्कुल ठीक है है कोई दिक्कत नहीं है उसने कहा कि तुम्हें अकेले डर नहीं लगता मैंने कहा कि नहीं मुझे किसी से डर नहीं लगता मैं बहुत ज्यादा गुस्से में थी मेरा बस चलता तो मैं उसे सारी बातें सुना देती कहती कि तुम जो कह रहे हो ना उनके बारे में मुझे अच्छी तरह पता है लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा क्योंकि आज ही तो मुझे मेरा प्लान पूरा करना था और यह आज ही हो सकता था 

मेरे पति ने कहा था कि रात को देर से आऊंगा मैंने सारे काम वगैरह खत्म कर लिए और अपने कमरे में बिस्तर के ऊपर तकिया रखकर ऊपर चादर डाल दी ऐसा लगे कि मैं तो कब से सो रही हूं और मैं जाकर अपने पति के बिस्तर पर सो गई मैंने पहले से ही उसका बिस्तर बिछा दिया ऊपर दो रजाइया भी रख दी अब मैं उस बिस्तर के अंदर थी लेकिन मैं भी दुबली पतली सी थी इसलिए उसे पता नहीं था 

मैं उसे देख रही थी कि वह क्या कर रहा है घर में आया और पहले मेरे कमरे में गया शायद यह देखने के लिए गया कि मैं सो रही हू हां नहीं क्योंकि कमरे के अंदर नहीं गया था बस बाहर से ही देखकर वापस आ गया था शायद देखना चाहता था कि मैं वहीं हूं या नहीं उसके बाद वह रसोई घर में चला गया और खाना खाने लगा जो मैंने पहले से ही उसके लिए निकाल कर रखा था

 फिर हाथ ढोकर अपना मोबाइल लेकर बिस्तर की तरफ आने से पहले उसने दीवार पर जोर से एक पत्थर मारा जिससे थक ठक की आवाज आई मैं समझी नहीं कि उसने ऐसा क्यों किया और जैसे ही वह बिस्तर में लेटा तो मैं समझी कि हैरान रह जाएगा कि मेरी पत्नी यहां पर क्या कर रही है मैंने यही सोचा था कि आज सांसू मां घर नहीं है तो मैं भी बाहर उसके साथ ही सो जाऊंगी साथ यह भी पता चल जाएगा कि क्या करता है

 और क्या नहीं लेकिन वह बिल्कुल भी हैरान नहीं हुआ आकर लेट गया और कहने लगा कि आज तो तुम पहले से ही यहां पर आ गई हो क्या बात है मेरी जान मेरी याद आ रही थी क्या इसे सुनके मैं तो जैसे बिल्कुल परेशान हो गई कि ऐसे क्यों कह रहा है कि आप आज तुम जल्दी आ गई हो मैं तो उससे पहले कभी बाहर ही नहीं थी और इतने प्यार से तो वह मुझे बुलाता भी नहीं था 

उसने कहा क्या हो गया है क्यों मुंह फेर कर बैठी हो हां मुझे पता है तुमने नई साड़ी मांगी थी देखो मेरे पास पैसे नहीं थे जब से मेरी पत्नी आई है ना इसके भी खर्चे हैं इसलिए पैसे नहीं होते हैं तुम फिक्र ना करो मुझे बहुत बड़ा ऑन आर्डर मिला है तभी तो आज देर से आया हूं बस ऑन आर्डर की डिलीवरी दे दूं तो फिर उसके बाद मैं अपनी जान के लिए वही गुलाबी वाली साड़ी लाऊंगा जो तुम्हें पसंद थी 

और जिस जगह बैठकर तुमने पानी पूरी खाई थी ना वहीं पर दोबारा चलेंगे इसका मतलब कि मेरे पति किसी और के साथ मजे कर रहा था उसने उसे खाना खिलाया था उसके साथ वह बाहर आता जाता था लेकिन यह लड़की कौन थी जो हमारे घर के अंदर भी आ जाती थी और फिर उसके मुंह से वह लफ्ज निकल ही गया जो मैं सुनना चाहती थी उसने कहा निर्मला क्या हो गया है तुम्हें जैसे ही उसने कहा निर्मला क्या हो गया है

 तुम्हें मैं समझ गई कि यह साथ वाले घर में रहने वाली लड़की की ही बात कर रहा है इसका मतलब कि मेरा पति के साथ वाले घर में रहने वाली लड़की के साथ चक्कर चल रहा था वह रात को अपने घर की दीवार भांग के यहां आ जाती थी तभी तो उसने दीवार पर पत्थर मारे थे शायद सिग्नल दिया था कि मैं आ गया हूं तुम भी आ जाओ उसके घर वालों को भी पता नहीं था कि उनकी बेटी क्या कर रही है

 उसने कहा मेरी तरफ देखो तो सही और जैसे ही मैंने उसकी तरफ देखा वह बिस्तर से ऐसे उठा कि जैसे उसने मुझे नहीं अपनी जिंदगी के सबसे बुरे सपने को देख लिया है मैंने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया और थोड़ी देर के बाद निर्मला भी वहां पर आ गई क्योंकि उसे भी तो सिग्नल मिल चुका था मैंने उसे भी एक धक्का दिया और अपने पति को भी और कहा कि बताती हूं तुमको मैं कौन हूं

 मैं सीधा अपने घर चली गई और वहां जाकर अपनी सास को भी फोन कर दिया और उनको भी सब कुछ बता दिया अगले दिन मेरा पति अपनी मां मेरे घर वालों और मेरे सामने किसी मुजरिम की तरह बैठा था निर्मला के घर वालों को यह बात नहीं पता थी जब उनको पता चली तो उन्होंने निर्मला को दो चार थप्पड़ भी लगाए और कहा तुझे शर्म नहीं आती है तो शादीशुदा मर्द के साथ चक्कर चलाती है उसके बाद उन्होंने निर्मला को कहीं भेज दिया लेकिन मेरी सास ने फिर जो मेरे पति की क्लास लगाई मेरे पति को थप्पड़ भी लगाए 

और कहा कि तुम तो मेरे सामने मेरी बहू को बुरा बनाक कर बैठा था इतना गिरा हुआ मर्द है तो वह फिर तुझे वही पसंद थी तो पहले बता देता मैं पहले ही तुझे ठीक कर लेती तो कहने लगा कि मुझे पता था कि आप कभी उससे मेरी शादी नहीं करवाओ गी और मैंने सोचा कि अगर मैं इस तरह से अपना रवैया रखूंगा तो मेरी पत्नी जल्दी ही भाग जाएगी लेकिन यह भी अभी तक नहीं भागी

 मैं तो सिर्फ निर्मला से ही प्यार करता हूं उसी के साथ रहना चाहता हूं अब मेरा यहां पर रहना बनता नहीं था इस आदमी ने मेरी जिंदगी के साथ आठ महीने बर्बाद किए और मुझ पर तलाक का कलंक भी लगने वाला था मैंने सोच लिया था कि मैं उसके साथ नहीं रहूंगी और मैंने जाकर केस कर दिया जब कोर्ट में मैंने सच्चाई बताई तो हम लोगों की तलाक जल्दी हो गई और सारा मामला रख दिया गया मेरी सासू मां जो कि अब मेरी सासू मां नहीं है लेकिन अभी भी मैं कभी-कभी उनसे फोन पर बात कर लेती हूं 

उनका हाल पूछ लेती हूं उन्होंने मुंह से माफी मांगी क्योंकि उनके बेटे की गलती थी पर मैंने उन्हें ही कहा कि आप अपने बेटे की शादी निर्मला से ही करवा दें नहीं तो वह फिर इस तरह की कोई हरकत करेगा पर वह कहती है कि जब तक मैं जिंदा हूं ऐसा नहीं होगा मेरे मरने के बाद बेशक करता रहे तू कितनी अच्छी थी तू मेरा कितना ख्याल करती थी 

और उसकी वजह से तू भी मेरी जिंदगी से चली गई भगवान ने मुझे कोई बेटी भी नहीं दी थी मैंने तुझे ही अपनी बेटी समझ लिया था मैं अपनी सास से फोन पर बात तो करती हूं कभी-कभी मिलने भी चली जाती हूं पर इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकती मैं उनके बेटे को माफ नहीं कर सकती थी क्योंकि उसने मुझसे माफी मांगी ही नहीं थी

 और जब कोई माफी ही ना मांगे तो फिर आप उसे कैसे माफ कर पाओगे इसलिए मैंने अपनी जिंदगी का जो फैसला किया मुझे उस पर कोई भी दुख नहीं है मैंने बहुत अच्छा फैसला किया ऐसा मर्द कल को ना तो अच्छा पिता बन सकता है और ना ही अच्छा पति | 

 

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