बेटियों को दुनिया में आने दें | Motivational Kahani In Hindi | Best Hindi Story

Motivational Kahani In Hindi : मैं 9 साल की थी जब अब्बा ने मुझे सुर्ख रंग का जोड़ा लाकर दिया कहने लगे रानी इसे पहन लो मैं अपने गुड़िया गुड्डे से खेल रही थी आज मैंने उनकी शादी रचानी थी सारी सहेलियों को मैंने बुलाया था मैंने कहा अब्बा यह तू मेरे लिए लेकर आया है इसलिए ना ताकि मैं अपनी गुड़िया की शादी में पहन सकूं मैं उस सुर्ख जोड़े को अपने साथ लगाए सामने रखे श्रृंगार के पास जाकर देखते हुए कहने लगी, मै तो ख़ुश थी जोड़ा देख कर पहली बार  अब्बा मेरे लिए कुछ लाया, लेकिन मेरे होश तो तब उड़े ज़ब अब्बा ने 35 साल आदमी के साथ…..

अब्बा कहने लगा कि तू इतनी बड़ी हो गई है तुम्हारी उम्र नहीं है गुड्डा गुड़िया से खेलने की अब्बा ने मुझे गुस्से से डांटा और बेड पर रखी मेरी गुड़िया और गुड्डे को पकड़ कर कहने लगे चल यह जोड़ा पहनकर तैयार हो जा रात को बहुत से मेहमान आने वाले हैं अब्बा यह कहकर मेरी गुड़िया और गुड्डा बाहर ले गया

उस वक्त तो मैं उस सुर्ख जोड़े को देखने में बहुत मगन थी बहुत खूबसूरत जोड़ा था सोच रही थी आज अब्बा को ना जाने क्या हुआ मुझे तो ईद पर भी अब्बा ने कभी इतना खूबसूरत जोड़ा नहीं लाकर दिया मैं 5 साल की थी जब मेरी अम्मा का इंतकाल हो गया था मैं अपने बाप की सबसे छोटी औलाद थी पैदा उस वक्त हुई जब मेरी बड़ी बहनें अपने घर की हो चुकी थी मेरी मां बीमार रहने लगी

 बहरहाल मुझे याद नहीं है कुछ बस थोड़ा-थोड़ा सा जहन में आता है कि मेरी मां भी हुआ करती थी वरना मैं बस पड़ोसियों के रहमो करम पर ही पली थी मैंने वह जोड़ा पहन लिया अब्बा ने उसके साथ सुर्ख रंग का परांदा भी लाकर दिया था खुस्सा भी बड़ा प्यारा था मैं सब कुछ पहनकर बड़ी प्यारी लग रही थी कि जब पड़ोस की खाला घर पर आ गई मुझे उस जोड़े में खुश बाश देखकर कहने लगी 

रानी की बच्ची क्या तेरी अकल मारी गई है इतनी खुश क्यों है मैंने कहा खाला देख तो अब्बा मेरे लिए कितना खूबसूरत जोड़ा लाए हैं और यह देख इसका दुपट्टा पूरा गोटे से भरा हुआ है वह कहने लगी हां आज तेरी शादी जो है यह सुनकर मैं हंसने लगी मैंने कहा वाकई क्या मेरी शादी है वैसी वाली जैसे मैं अपने गुड्डे गुड़िया की करती हूं वह कहने लगी हां हां वैसे वाली फिर सिंगार में इस के पास मुझे ले जाकर बिठा दिया

 मेरे मुंह पर मेकअप कर दिया मैं और भी प्यारी लगने लगी मैं नौ बरस की थी लेकिन थी बड़ी खूबसूरत बिल्कुल जापानी गुड़िया लगती थी मेरा सुर्ख सफेद रंगत ब्राउन बाल ब्राउन कंचे जैसी आंखें बिना सिंघार के भी मैं अपने हुस्न में अपनी मिसाल आप थी लेकिन आज मुझे खास तौर पर तैयार किया गया था क्योंकि मेरी शादी थी बिल्कुल वैसे ही जैसी मैं अपने गुड्डे और गुड़िया की करती थी

जिस उम्र में मैं थी मुझे बस लव्ज शादी का ही पता था कि शादी होती है लड़की दुल्हन बनती है खूब सारे मेहमान उसे पैसे देते हैं अच्छा-अच्छा खाना खाने को मिलता है और वह रुखसत होकर अपने गुड्डे के साथ चली जाती है बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं पता था जाहिर है 9 साल की बच्ची और क्या जान सकती है मगरिब के बाद मेरी बारात आ चुकी थी लेकिन वह बारात सिर्फ चंद मर्दों पर मुश्त मिल थी 

मैंने अपनी पड़ोसन वाली खाला से कहा कि खाला मेरा गुड्डा भी साथ आया है खाला कहने लगी चुपचाप बैठ जा अभी कुछ ही देर में मौलवी साहब अंदर आएंगे जहां कहे वहां अंगूठा लगा देना मैंने कहा अच्छा ठीक है लगा दूंगी कुछ ही देर बाद मेरे अब्बा और मौलाना साहब कमरे में आए मेरे सामने कुछ कागज रखे और मेरे अंगूठे पर नीले रंग की स्याही लगा दी 

फिर जहां-जहां वह कहते रहे मैं अंगूठा लगाती रही जब उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हारा निकाह मुश्ताक वल्वर से किया जाता है हक महर 5 लाख के एवज क्या तुम्हें कबूल है तो अब्बा ने मेरा सर पकड़कर इस बात में हिला दिया फिर मौलाना से कहने लगे कि मैं इसका वली हूं इसलिए यह निकाह मेरी मर्जी से हो रहा है इतनी छोटी सी बच्ची को भला क्या पता मौलाना साहब कहने लगे ठीक कह रहे हो मियां

 इतनी छोटी सी बच्ची को क्या पता है असूल तो इतनी छोटी बच्ची का निकाह होता भी नहीं 18 साल तक तो इंतजार करते अब्बा कहने लगे मैं बीमार रहने लगा हूं मेरी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है बहरहाल आपको मुश्ताक ने पैसे तो दिए हैं ना आप अपना काम करें उन्होंने कहा कि ठीक है उन्होंने कागजों पर कुछ लिखा और बाहर चले गए कुछ ही देर में पड़ोसन खाला ने मुझे बिरयानी बलाकर दी जो मैंने खूब सेर होकर खाई जब मैं बाहर निकली तो मर्दों का ही रश था 

और पड़ोस की बस चंद औरतें ही आई थी मुझे हैरत से देखे जा रही थी पड़ोसन खाला ने मुझे एक शख्स के साथ लाकर बिठा दिया जिसकी उम्र तकरीबन 35 साल थी काफी लंबे कद काट का मालिक था सहद भी काबले रश्क थी मैं उसके पास जाकर बैठ गई पूरे सहन में देखने लगी कि मेरी उम्र का कोई गुड्डा तो होगा जिसके साथ मेरी शादी की गई लेकिन जब मुझे कोई नजर नहीं आया 

तो अपने बराबर बैठे शख्स से मैंने कहा अंकल मेरी शादी किससे हुई है मेरा गुड्डा किधर है जिससे मेरी शादी हुई है मेरी बात पर बड़े गुस्से से उसने जवाब दिया कहने लगा चुप करके बैठ अंकल होगा तेरा बाप उसके गु गुस्से से कहने पर मैं तो डर गई चुपचाप बैठ गई कुछ ही देर बाद उसी के साथ मैं अपने बाप की दहलीज पार करके जा चुकी थी बाहर एक टैक्सी खड़ी थी जिसकी पिछली निशत पर उसने मुझे बिठाया

और मेरे बराबर में बैठ गया मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा हालांकि मैं जानती थी कि कल मैं वापस अपने अब्बा के घर आ जाऊंगी मेरी गुड़िया तो ऐसी होती थी कि मैं उसकी शादी करती थी और अगले ही रोज मेरी सहेली मेरी गुड़िया मुझे वापस कर जाती थी कहती थी अगले हफ्ते फिर शादी करेंगे मैं खुशी-खुशी अपनी गुड़िया वापस रख लेती थी उस शख्स ने मेरे साथ बैठते ही मेरा हाथ पकड़ लिया

 उसकी ग्रिफ्ट में ना जाने ऐसा क्या था कि मुझे उलझन सी होने लगी मैंने बरज स्ता उसकी तरफ देखा तो उसकी आंखों में मेरे लिए ना जाने क्या था कि मुझे झुर छुरी सी आने लगी बड़ी अजीबो गरीब सी मुस्कुराहट उसके चेहरे पर फैली हुई थी मैं छोटी सी थी लेकिन वह मुझे बड़ी बेबाक नजरों से देख रहा था जो मेरे वजूद पर मुझे आर-पार होती हुई महसूस हो रही थी 

मैंने अपना हाथ छुड़वाना चाहा तो उसने और जोर से दबाया कि मैं चिल्लाने लगी मैंने कहा मेरा हाथ छोड़ो मुझे दर्द हो रहा है कहने लगा चुप करके बैठी रहे मेरा जो जी चाहेगा वह करूंगा समझी बड़ा गुस्से वाला शख्स था मैं सहम कर बैठी रही कुछ ही देर बाद वह टैक्सी एक घर के सामने रुकी उसने टैक्सी ड्राइवर को पैसे दिए और वह बाहर निकल गया मुझे भी बाहर निकलने के लिए कहने लगा टैक्सी जा चुकी थी

 उसने दरवाजे पर दस्तक दी दरवाजा खुला तो सामने एक जवान जहान औरत खड़ी थी 30 साल की होगी बड़ी हैरान हैरान नजरों से मुझे और उस शख्स को देखने लगी वह कहने लगा पीछे हट तूने क्या मेरा रास्ता रोक रखा है यह सुनकर वह पीछे हट गई उसकी रंगत एकदम फीकी पड़ी थी जैसे ही हम अंदर दाखिल हुए तो कहने लगी मुश्ताक तुझे शर्म नहीं आई तूने इतनी छोटी लड़की से शादी कर ली 

इसकी उम्र तो देख वो कहने लगा बस बस बकवास नहीं कर ज्यादा बोली तो मुंह तोड़ दूंगा तेरा चुटिया पकड़कर घसीट कर बाहर निकाल दूंगा मनहूस औरत आते ही टोक मत लगा मुझे और मेरी बीवी को यह सुनना था कि सामने कमरे से एक उधेड़ उम्र औरत निकली सुफैद जोड़ा पहन रखा था सर के बाल भी सुफैद थे मुझे और मुश्ताक को देखकर मुश्ताक पर चिल्लाने लगी कहने लगी अरे ओ कमबखत यह क्या कर दिया

 तूने इतनी सी बच्ची से शादी कर ली तुझे शर्म नहीं आई वह कहने लगा बस कर अम्मा गुनाह नहीं किया है मैंने शादी की है क्योंकि मुझे वारिस चाहिए इस मनहूस औरत ने तो मेरी उम्र को गला देने का सोच रखा था पिछले 10 साल से इसे पाल रहा हूं लेकिन इसने मुझे एक भी वारिस पैदा करके नहीं दिया मुझे भी अपने बुढ़ापे का सहारा चाहिए औरत कहने लगी कमबखत बुढ़ापे के सहारे के लिए तुझे यह कम उम्र बच्ची मिली थी

खुद को देख इस बच्ची को देख व कहने लगा अम्मा इस वक्त मेरा दिमाग ना खराब कर समझी हट पीछे उसने अपने हाथ से अपनी मां को पीछे धकेला वह बेचारी गिरते-गिरते बची उसकी पहली बीवी ने फौरन से उस बूढ़ी औरत को पकड़ के सहारा दिया दोनों औरतें रोए जा रही थी वह शख्स मेरा हाथ पकड़कर मुझे कमरे में ले गया मैं तो कुछ समझ ही नहीं पा रही थी कि यह सब हो क्या रहा है

 कमरे का दरवाजा उसने बंद कर दिया मैं तो बिल्कुल डरी सहमी खड़ी थी कहने लगा जा बेड पर जाकर बैठ एक तो इन दोनों औरतों ने मेरा सारा मूड खराब करके रख दिया मैं बेड पर जाकर बैठ गई लेकिन मुझे अजीब सा खौफ महसूस हो रहा था एक अनजाना सा खौफ था वह मेरे पास आकर कहने लगा देख उन दोनों औरतों ने मेरा भेजा बड़ा गर्म कर रख दिया है इसलिए मुझे ज्यादा नखरे मत दिखाना

जो कुछ मैं करूं मेरा हाथ रोकने की या रोने चिल्लाने की कोशिश मत करना वरना बहुत बजता होगी उन दोनों औरतों का गुस्सा तुझ पर निकाल दूंगा समझी मैं समझी तो कुछ भी नहीं थी लेकिन डर जरूर गई थी मेरे होश उस वक्त उड़े जब वह मेरे पास बैठ गया अपने हाथ से मेरा चेहरा थाम लिया कहने लगा इतनी सी उम्र में क्या हुसन पाया है तूने तुझे देखते ही मेरे तो सारे जज्बात आबो ताब से जाग गए हैं

 कमबखत इतना हुसन कहां से तू लेकर आई उस शख्स की पकड़ बड़ी सख्त थी मेरे चेहरे पर उसने अपनी उंगलियां फेरनी शुरू की मैं पूरी की पूरी कांप गई मुझे झुर जुरी सी आने लगी कहने लगा तेरा हुसन देखकर दिल चाहता है अपनी सारी वहशत और जुनून तुझ पर उतार कर रख दूं उसने अपनी मूछों पर हाथ फेरा था फिर मेरे गाल पर चुटकी काटी तो मैंने फौरन उसके हाथ को पीछे करना चाहा

लेकिन उसकी आंखों में तो खुमारी छाने लगी थी उसने मेरा दुपट्टा उतार कर साइड पर रखा मेरे बालों का परांदा खोलने लगा मेरा दिल यूं था कि आज धड़कना ही छोड़ देगा मैं डरी सहमी पूरी की पूरी कांप रही थी मेरे बालों को उसने परांदे से आजाद किया था मेरे बालों को आगे करके मुझे देखने लगा कहने लगा उफ कितनी हसीन हो तुम तुमने तो मुझे अभी से पागल करना शुरू कर दिया है

 यह कहकर जो हरकत उसने मेरे साथ शुरू की मैं तो यूं थी कि काटो तो लहू ना निकले मैं चिल्लाने लगी बचाओ बचाओ कहने लगी वह गुस्से से गुर्रा कर कहने लगा चुप कर कमीनी वरना तेरा गला दबा दूंगा उसने अपना हाथ मेरे गले पर रखकर जरा सा दबाया था कि कमरे का दरवाजा धड़ धड़ आने लगा उसने मुझे फौरन से छोड़ दिया कहने लगा एक तो इन दोनों औरतों को चैन नहीं है अभी इन्हें सीधा करके आता हूं

जैसे ही उसने दरवाजा खोला सामने वह बूढ़ी औरत खड़ी थी बहुत गुस्से और जलाल में थी उसने थप्पड़ मुश्ताक के मुंह पर मारा कहने लगी बेगैरत इंसान क्या जानवर है तू मुझे पता होता कि तू बड़ा होकर यह सब करेगा तो पैदा होते ही तेरा गला घोंट देती चल हट पीछे कमीने यह कहकर उसने धक्का देकर मुश्ताक को पीछे किया मैं रोए जा रही थी बुरी तरह से कांप रही थी वह मेरे पास आई मेरा बाजू पकड़ा

 और मुझे कमरे से बाहर ले जाने लगी मुश्ताक सामने खड़ा हो गया कहने लगा अम्मा यह मेरी बीवी है छोड़ दे इसको मैंने इससे निकाह किया है पूरे 5 लाख लिए हैं इसके बाप ने हक मेहर के उस औरत ने कहा कि अगर तू चाहता है ना कि तेरा मुंह ना तोड़ दूं तो मेरा रास्ता ना रोक अभी इसकी इतनी उम्र नहीं है कि यह तुझे झेल सके तेरी बीवी है तेरी ही रहेगी

लेकिन इसकी उम्र जब तक 18 साल की नहीं हो जाती मैं तुझे इतने बड़े जुल्म का इरत काब करने हरगिज नहीं दूंगी वह बहुत गुस्से में थी मुझे बाहर ले गई सामने वह दूसरी औरत भी मौजूद थी जो रोए जा रही थी मैं उस बूढ़ी औरत के साथ उसके कमरे में चली गई उसने दरवा बंद कर दिया और कुंडी लगा दी कहने लगी कमबखत ने इतना बड़ा जुल्म कर दिया मैं तो तुम्हारे सामने शर्मिंदा होकर रह गई इतनी सी हो

 तुम तुम्हारे बाप को शर्म नहीं आई इतना बड़ा जुल्म करते हुए मैं हिचकियां से सिसकियों से रोए जा रही थी मुझे क्या पता था कि शादी क्या होती है मुझे क्या पता था कि यह सब क्या है मैं तो समझ ही नहीं पा रही थी मुझे मुश्ताक के नाम से भी खौफ आने लगा लगा था मैंने कहा अम्मा जी मुझे डर लग रहा है वो अंकल दोबारा तो नहीं मुझे अपने कमरे में लेकर जाएगा 

तो वह कहने लगी नहीं जब तक मैं जिंदा हूं तेरे साथ कोई जुल्म नहीं होने दूंगी उसने मुझे अपने साथ लगाया कहने लगी देख तो कैसे बुरे तरीके से कांप रही है पूरा वजूद बर्फ की तरह ठंडा हो रहा था जब तक मैं जिंदा हूं तुझे फिक्र मंद होने की जरूरत नहीं है चल सो जा मां की आगोश क्या होती है मैंने उस औरत के साथ लगकर महसूस की थी रोते-रोते ना जाने कब मेरी आंख लगी 

सुबह मेरी आंख शोर से खुली मैं एकदम उठकर बैठ गई कमरे के बाहर से मुश्ताक के लड़ने की झगड़ने की आवाजें आ रही थी मेरी सांस भी उस पर चिल्ला रही थी मैं तो डर कर बिल्कुल बेड के कोने से जा लगी कुछ देर बाद वह औरत अंदर आई मुझे यूं खौफ जदा देखकर कहने लगी फिक्र मत कर मैं ने उसे समझा दिया है अब नहीं आएगा तेरे पास यूं ही वक्त गुजरने लगा वह बड़ी बी मेरे साथ बहुत अच्छी थी

और मेरी सौतन भी दोनों ही मेरा बड़ा ख्याल रखती थी मुझे यहां आए चंद दिन ही हुए थे कि मेरी सौतन मुझसे पूछने लगी कि मैं कितना पढ़ी लिखी हूं मैंने कहा कि मैंने तो कभी स्कूल की शक्ल ही नहीं देखी अब्बा ने कभी डाला ही नहीं वह कहने लगी कि मैंने 10 जमात पढ़ी हैं उसी ने मुझे पढ़ाना शुरू किया 6 माह तक उस उसने मुझे इतना सिखा दिया कि मुझे उर्दू इंग्लिश पढ़नी और लिखनी आ गई

 मैं छोटे-छोटे लफ्ज पढ़ लेती थी फिर उसने मुझे करीब स्कूल में दाखिल करवा दिया मैं अपनी क्लास में सबसे बड़ी थी 10 साल की उम्र में मैं दूसरी जमात में पढ़ती थी पूरा दिन मैं अपनी सास और जेठानी के साथ बड़ी खुश रहती थी रात को जैसे ही मुश्ताक के आने का वक्त होता मैं खौफ के मारे अपनी सांस के कमरे में छुपकर बैठ जाती मैं 11 साल की हो चुकी थी

इस दौरान मेरी दोस्ती अपने स्कूल के नवाज से हो चुकी थी उसने मेरी पढ़ने में बड़ी मदद की वह 15 साल का था दसवीं जमात में पढ़ता था और मैं तीसरी जमात में कहने लगा मैं तुम्हारे मोहल्ले में ही रहता हूं तुम मुश्ताक की दूसरी बीवी हो ना मैंने नजरें चुराते हुए तरा किया था काफी अच्छा लड़का था मेरा ख्याल भी बहुत रखता था स्कूल में अगर कोई भी बच्चा मुझसे लड़ता झगड़ होता या मुझे तंग करने की कोशिश करता

 तो नवाज फौरन से मेरे सामने किसी ढाल की तरह खड़ा हो जाता क्योंकि मैं बहुत डरी सहमी और खौफ जदा सी लड़की थी एक बार मैं स्कूल से घर वापस आई तो मेरी जिठानी बहुत रो रही थी मेरी सास उसे चुप करवा रही थी मैंने पूछा आप्पा तुम्हें क्या हुआ है मेरी सास ने कहा कि इसके अब्बा का इंतकाल हो गया है यह सुनकर मुझे भी बड़ा दुख हुआ

मैं उसके आंसू पहुचने लगी उसे पानी पिलाया व रोए जा रही थी अम्मा कहने लगी कि मैं इसके साथ इसके मैके जा रही हूं इसे वहां छोड़ कर आऊंगी और कुछ घंटे मुझे वहां लग जाएंगे खाना पका हुआ है तुम खाना खाकर सो जाना मैंने कहा जी ठीक है मेरी सास और जेठानी घर से जा चुकी थी मैंने दरवाजा बंद किया खाना खाया और सो गई लेकिन कुछ देर बाद ही घर का दरवाजा बुरी तरह से खटका था

 मुझे लगा शायद मेरी सांस वापस आ गई मैंने बिना पूछे ही दरवाजा खोल दिया सामने मुश्ताक को देखकर तो मैं सांस लेना भूल गई मैं खौफ के मारे पीछे हट गई उसने अंदर दाखिल होते ही दरवाजा बंद करके कुंडी लगाई मैं फौरन से कमरे की जानिब भागी थी ताकि अंदर जाकर कुंडी लगाकर दरवाजा बंद कर लूं

लेकिन अगले लम्हे उसने मेरा बाजू पकड़ लिया कहने लगा देखता हूं आज तुझे मुझसे कौन बचाता हुआ अच्छा हुआ उस कमीनी का बाप मर गया और मेरी मां ने भी तेरा पीछा छोड़ा मैंने कहा मुझे छोड़ दो मुझे तुमसे डर लगता है कहने लगा बकवास बंद कर वो मुझे अपने कमरे में ले गया दरवाजे की कुंडी लगाई और मुझे बेड पर जोर से पटका था कहने लगा तू मेरी बीवी है समझी मेरी मां तो बुढ़ापे में सठिया गई है 

मुझे तुझ से दूर करके गुनाह कमा रही है लेकिन आज मैं देखता हूं कि तुझे मुझसे कौन बचाएगा यह कहकर उसने सबसे पहले मेरे मुंह पर पट्टी बांधी थी कहने लगा बहुत चीखना चिल्लाना आता है तुझे मैं उसके सामने बिल्कुल कमजोर सी लड़की थी उसकी हैवानियत का शिकार बन चुकी थी

मुझे लगा कि जैसे मुझ पर मौत वाकया हो जाएगी मेरे आंसू निकलकर तकिए को भिगो  रहे थे अपनी हवश पूरी करके उस शख्स ने मेरे मुंह से पट्टी खोली थी तभी मेरा सांस बहाल हुआ था बेड पर बिछी चादर सुर्ख हो चुकी थी वह देखकर बड़ा खुश था फिर गुसल के लिए वॉशरूम जा चुका था मेरी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो रही थी जब बाहर का दरवाजा खटका वॉशरूम से गुसल करके निकला तो मुझे देखकर हंस रहा था

 मैंने नफरत से अपना रुख बदल लिया मुझे उस शख्स से करात और नफरत ही हो सकती थी जो कुछ उसने मेरे साथ किया था कुछ देर बाद ही मुझे बाहर से शोर की आवाजें आने लगी भागते हुए मेरी सांस मेरे कमरे में आई थी मुझे और बेड को देखकर उनकी रंगत हुई थी उन्होंने यह देखकर अपने मुंह पर हाथ रखा मेरे पास आ गई 

मैं रोए जा रही थी वह मुझे अपने साथ लगाए मुश्ताक को गलिया बकने लगी खुद भी फूट फूट कर रोने लगी कहने लगी मुझे नहीं पता था यह कमीना मेरे पीछे से यहां आ जाएगा वरना मैं तुझे भी अपने साथ ले जाती मुझसे माफी मांगने लगी कि मैं तुझे उसके जुल्म से बचा नहीं सकी उसके बाद मेरी सांस मेरा बहुत ख्याल रखती चंद दिन तो मैं स्कूल भी नहीं जा सकी बिस्तर पर पड़ी रहती थी 

मेरी जिठानी जब वापस आई तो वह भी मुश्ताक को बुरा भला कहने लगी कहने लगी इंसान नहीं जानवर है यह शख्स कमीना औरतों का भूखा है कमसन लड़कियों को देखकर पागल हो जाता है वह मुझे दूध और हल्दी डालकर पिलाने लगी कुछ दिन बाद मैं स्कूल तो जाने लगी थी लेकिन चुप चुप रहती थी

मुझसे नवाज बहुत सी बातें करता था उस दिन मेरे लिए गुड़िया लेकर आया कहने लगा तुम्हें बहुत पसंद है ना यह मैंने तुम्हारे लिए खरीदी है अब्बा जो मुझे खर्चा देते हैं उसे जमा करके मैंने तुम्हारे लिए बड़ी प्यारी गुड़िया खरीदी है देखो रानी यह बिल्कुल तुम्हारी तरह बड़ी खूबसूरत है मैंने वह गुड़िया उससे नहीं ली अपने आंसू पूछने लगी वह कहने लगा क्या हुआ मैंने कहा मुझे अब इनकी जरूरत नहीं रही कहने लगा

 क्यों मैंने कहा मैं बड़ी हो गई ना इसलिए वोह कहने लगा कैसे बड़ी हो गई हो वैसी ही तो हो मैं यह तुम्हारे लिए खरीदी है इसे रख लो मैं फूट फूट कर रोने लगी इससे पहले कि वह मुझसे कोई सवाल करता मेरी गर्दन पर नाखूनों की खरचे देखकर नवाज पीछे हटा मेरे रोने की वजह जान चुका था उसे पता था कि मैं मुश्ताक के निकाह में थी

वह 15 साल का था मुझे उससे कुछ भी कहने की जरूरत नहीं पड़ी वह गुड़िया उसके हाथ से छूटकर जमीन पर गिर गई मेरे सर पर हाथ रखकर मुझे चुप करवाने लगा मैंने जब उसकी तरफ देखा तो उसकी आंखों में आंसू झिलमिला रहे थे लेकिन कुछ कह नहीं रहा था 

एक महीने बाद मेरी तबीयत खराब होने लगी मेरी सास जब मुझे डॉक्टर के पास लेकर गई तो जो खबर डॉक्टर ने सुनाई वह सुनकर मेरी सांस अपना सर पीटने को थी क्योंकि मैं 11 साल की उम्र में प्रेग्नेंट हो चुकी थी मुझे किसी बात की कोई समझ ही ना थी कुछ भी मुझे हजम नहीं होता था जो खाती थी उल्टी हो जाती और उल्टी के बाद मुझे ऐसे लगता कि अब मैं मर जाऊंगी मेरी सांस और सौतन मुझे संभालने लगी

मुश्ताक को जब इस बात की खबर हुई तो वह तो खुशी से झूमने लगा कहने लगा अब मेरा बेटा पैदा होगा मेरा वारिस बनेगा मुझे फल लाकर देता बकरे का गोश लाकर देता मेरी सास से कहने लगा इसे गोश्त खिलाओ ताकि मेरा बेटा ताकतवर पैदा हो मेरी तरह मर्द बने मेरा स्कूल छुट के रह गया था 

लेकिन इस दौरान यह हुआ कि नवाज एक घंटे के लिए घर आ जाता था हमारे मोहल्ले में ही रहता था काफी शरीफ लड़का था मेरी सास को उसके आने जाने पर ऐतराज ना था वह एक घंटा मुझे पढ़ाकर चला जाता था कहता था कि तुम्हें एक साल में दो जमात पास करवा दूंगा स्कूल के प्रिंसिपल से मेरे अब्बा के अच्छे ताल्लुकात हैं लेकिन तुम तालीम मत छोड़ो मैंने कहा तुम मुझ पर इतने एहसान क्यों कर रहे हो 

मैं क्या करूंगी पढ़कर जिंदगी तो मेरी मुश्ताक के साथ ही गुजर है उसके बच्चे पैदा करने हैं क्योंकि उसे औलाद चाहिए ऐसी बातें 11 साल की उम्र की लड़कियां शायद नहीं करती होंगी लेकिन 11 साल की उम्र में मैं बहुत बड़ी हो चुकी थी मेरी बातें सुनकर वह कहता कि तालीम तुम अपने लिए हासिल करो तुम्हारे काम आएगी बहरहाल मुझे पढ़ने का शौक भी था 

इसलिए मैंने अपनी तालीम का सिलसिला जारी रखा ौ माह बाद जचगी का दर्द बर्दाश्त करते हुए मुझे लग रहा था मैं मर जाऊंगी गांव के छोटे से अस्पताल के लेबर रूम में मेरी चीखें सबसे ज्यादा बुलंद थी मैंने एक बेटी को जन्म दिया था और लगता था कि बस शायद अब मैं बच नहीं पाऊंगी लेकिन मेरी बदकिस्मती कि मैं जिंदा थी सब खुश थे लेकिन मुश्ताक का मुंह बना हुआ था

कहने लगा बेटी क्यों पैदा की है मुझे बेटा चाहिए था मेरी सास कहने लगी इसका इख्तियार औरत को नहीं है अल्लाह ने तुझे जो दिया है उस पर तू शुक्र अदा कर औलाद वाला हो गया तू कहने लगा बेटी नहीं चाहिए मुझे इसे तू पाल या सकीना को बोल वो इसकी परवरिश करे मैं तो खुद भी इस काबिल ना थी कि छोटी सी बच्ची को संभाल सकती 

मेरी जेठानी ने ही उस बच्ची को पाला था मेरी जिठानी यूं खुश थी कि जैसे उसी की बेटी हो 40 दिन गुजर गए मुश्ताक पर फिर कोई भूत सवार हुआ इस बार तो वह अपनी मां को धक्का देकर मुझे अपने कमरे में ले गया था कहने लगा जब तक बेटा पैदा नहीं होगा मुझे सुकून नहीं मिलेगा और वह मुझे इसी से पैदा हो सकता है मैं रोती रही चिल्लाती रही जिस दोराहे से मैं गुजर कर आई थी मैं दोबारा बच्चा पैदा करना चाहती ही नहीं थी

मैं कम उम्र थी और उस कम उमरी में जो दर्द तकलीफ मैंने सही थी मेरा दिल चाहता था खुदकुशी करके खुद को खत्म कर लूं अब मुझे मुश्ताक के कमरे में रहना पड़ता था चंद माह गुजरे मैं फिर हाम हो गई इस बार मैंने सारा अर्स रोकर गुजारा था डॉक्टर कहने लगी कि इस लड़की में इतनी ताकत नहीं है कि यह हर साल साल बाद बच्चे पैदा कर सके पहली बच्ची पर ही हमने बड़ी मुश्किल से इसकी जान बचाई थी

 लेकिन कुछ इंसान मुश्ताक जैसे होते हैं जो जाहिरी हुहीय के ही इंसान होते हैं लेकिन अंदर से पूरे जानवर और दरिंदे होते हैं उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि लड़की की उम्र कितनी है और उसके साथ शादी और मुबाशरत किस उम्र में करनी चाहिए या उसके साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए बहुत सी लड़कियों की शायद 16,17 साल में शादी होती होगी 

लेकिन शौहर उसके साथ ऐसा सलूक नहीं करते होंगे जैसा मुश्ताक मेरे साथ करता था नरमी का ताव क्या होता है उसे पता ही नहीं था दूसरी बेटी की पैदाइश के बाद मेरी डॉक्टर ने साफ मना कर दिया कि अब यह बच्चे पैदा नहीं कर सकती वरना या तो यह बचेगी या फिर बच्चा मेरी सास ने लेडी डॉक्टर से कहा कि आप इसका ऑपरेशन करके बच्चा दानी बंद कर द इस लड़की की जान को कुछ भी नहीं होना चाहिए

 जैसे मेरी सास की सूरत में अल्लाह ने मुझे मेरी मां दे दी मुश्ताक तो दूसरी बेटी को देखकर भी आग बगोला हो गया कहने लगा मुझे क्या फायदा हुआ इस औरत से शादी करने का इसने मुझे एक बेटा नहीं दिया यह औरत तो मेरे काबिल भी नहीं रही उन्हीं दिनों मुझे मालूम हुआ कि वह एक तीसरी औरत के चक्कर में था उससे निकाह कर चुका था 

उसके लिए उसने एक अलग घर लिया था क्योंकि वह औरत काफी तेज रार थी मुश्ताक अब कम ही घर पर आता था मेरी दोनों बेटियां मेरी जिठानी पाल रही थी मैं बहुत पुर सुकून हो चुकी थी कि मेरी मुश्ताक नामी बला से जान छुटी मैंने दोबारा से स्कूल में दाखिला ले लिया मैंने मैट्रिक 18 साल की उम्र में किया था और 22 साल की उम्र तक मैंने 14 जमात पढ़ ली थी पूरे पंजाब में मेरी अव्वल पोजीशन आई थी

 इसलिए मुझे हुकूमत की तरफ से 5 लाख इनाम में मिले थे उस 5 लाख की मैंने सिलाई मशीनें खरीदी और घर में ही एक सिलाई सेंटर बना लिया क्योंकि मेरी जेठानी बहुत अच्छी सिलाई जानती थी कई खवातीन को सिलाई पर लगा दिया मेरी बेटियां एक अच्छे स्कूल में पढ़ने लगी लेकिन वह मुझे आप कहती थी अम्मा तो वह मेरी जिठानी को कहती थी

जो कपड़े हम बनाते थे वह नवाज शहर के एक दुकानदार को देकर आता था जिसकी अच्छी इनकम हमें आने लगी थी एक बार नवाज मुझसे कहने लगा कि तुम मुश्ताक से तलाक ले लो मैंने हैरत से उसे देखा मैंने कहा क्यों कहने लगा इसलिए कि तुम्हें भी जीने का हक है मैंने कहा मुझसे दादी कौन करेगा दो बेटियां हैं मेरी और मुझे आगे औलाद भी नहीं हो सकती अच्छा है जो उसी के नाम पर बैठी रहूं

 कहने लगा मैं करूंगा तुमसे शादी उसकी बात ऐसी थी कि मैंने बरज स्ता उसकी तरफ देखा था मैंने कहा तुम मेरे बारे में सब कुछ जानते हो नवाज तुम अपनी जिंदगी क्यों बर्बाद करना चाहते हो मैं अपनी जिंदगी से खुश हूं मुझे किसी मर्द की जरूरत नहीं है मैं अच्छा कमा रही हूं घर चल रहा है मेरी बेटियां भी अच्छे स्कूल में पढ़ रही हैं वह कहने लगा लेकिन मैं खुश नहीं हूं 

मैंने बचपन से सिर्फ एक ही लड़की से मोहब्बत की है और वह तुम हो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम्हारी पहले से दो बेटियां है मुझे इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता कि आगे तुम मुझे औलाद नहीं दे सकोगी मैं कभी तुम्हें ताना नहीं दूंगा फिर कहने लगा मर्द सिर्फ मुश्ताक जैसे नहीं होते मर्द ऐसे भी होते हैं बस शर्त यह है कि तुम एक बार आजमा कर तो देखो यह बात मैंने अपनी सांस और जिठानी के सामने रख दी

 सास कहने लगी कि मुश्ताक तो अब यहां पर आता ही नहीं है तुम जवान जहान हो क्यों अपनी जिंदगी बर्बाद करना चाहती हो अगर वह लड़का वाकई मुखलिस हो तो मैं मुश्ताक से कहकर तुम्हें तलाक दिलवा दूंगी उसे बेटा चाहिए था जो उसे मिल चुका है अपनी तीसरी बीवी से मेरी सास ने मुश्ताक से मुझे लाक दिलवा दी इद्दत पूरी होने के बाद

मेरा निकाह नवाज से हो गया मैंने चाहा कि अपनी दोनों बेटियों को भी साथ ले जाऊं तो मेरी जिठानी रोने लगी कहने लगी मुझे भी तो जीने का सहारा चाहिए मैंने कभी यह नहीं समझा कि यह दोनों बेटियां तुम्हारी हैं मैंने अपनी बेटियों की तरह समझा है मैंने अपनी जेठानी को अपनी दोनों बेटियां दे दी नवाज बहुत अच्छा इंसान था मुझसे बहुत मोहब्बत करता था मेरा ख्याल भी रखता था 

उसके वालिद ने शुरू में तो मुझसे ठीक तरह से बातचीत नहीं की क्योंकि वह इस शादी से नाखुश थे लेकिन मैंने जी जान से उनकी खिदमत की थी वह भी मुझसे प्यार करने लगे हैरत मुझे उस वक्त हुई जब मैं हाला हुई मैं सोच भी नहीं सकती थी कि यह कैसे हो गया फिर डॉक्टर कहने लगी कि कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि बच्चा दानी बंद होने के बाद भी औरत कंसीव कर जाती है

इस बार मैंने बेटे को जन्म दिया था शायद यह नवाज का सबर था जिसका अल्लाह ने यह इनाम दिया था बहरहाल मेरी तमाम वालदैन से गुजारिश है कि अपनी छोटी और कम उम्र बच्चियों पर जुल्म और ज्यादती ना करें उन्हें कभी भी छोटी सी उम्र में शादी जैसे बंधन में ना बांधे

 

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